अमेठी में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप सिंघल की अगुवाई में कांग्रेस नेताओं ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती तथा उनके शिष्यों के साथ हो रही कथित प्रताड़ना के विरोध में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार असहमति की आवाज दबाने की नीति पर आगे बढ़ रही है। उनका कहना था कि जो व्यक्ति अथवा संस्था सरकारी नीतियों पर सवाल उठाती है, उसे दमन और उत्पीड़न झेलना पड़ता है। इसी क्रम में सनातन परंपरा के प्रतिष्ठित आध्यात्मिक पद पर आसीन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। नेताओं ने कहा कि कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या जैसे पवित्र अवसर पर शंकराचार्य और उनके शिष्यों को स्नान से रोकना, बटुकों की चोटी खींचकर अपमानित करना तथा थाने ले जाकर उत्पीड़न करना निंदनीय है। बाद में शंकराचार्य, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित अन्य संतों पर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाकर प्राथमिकी दर्ज होना पूरे घटनाक्रम पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। प्रदीप सिंघल ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 और 26 धार्मिक स्वतंत्रता तथा धार्मिक संस्थाओं के स्वशासन का अधिकार सुनिश्चित करता है। शंकराचार्य पद की गरिमा को ठेस पहुंचाना संविधान और सनातन संस्कृति दोनों का अपमान है। ज्ञापन में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई। साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई। इस अवसर पर विजय पासी, रामदत्त यादव, प्रवक्ता अनिल सिंह, मतीन, वीरेंद्र मिश्र, अर्जुन पासी, शत्रुघ्न सिंह, सवीना, युवा अध्यक्ष शुभम सिंह, महिला अध्यक्ष ममता पांडेय, किरण देवी, सर्वेश सिंह, रामलखन शुक्ल, ब्लॉक प्रमुख सदाशिव यादव, श्रद्धा सिंह, अशोक शुक्ल, राम प्रसाद गुप्ता, सुनील सिंह और अरविंद चतुर्वेदी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।