यमुना एक्सप्रेसवे पर कदम-कदम पर जान का खतरा है। दोनों तरफ की लेन के किनारे पर निराश्रित पशुओं को आने से रोकने के लिए लगाए गए कंटीले तार टूटे पड़े हैं। रिफ्लेक्टर कहीं लगा हैं और कहीं नहीं। चालक-परिचालकों के रेस्ट रूम पर रेस्तरां के कर्मचारियों का कब्जा है। लेन की सफेद पट्टी मिट गई हैं। फाॅग लाइट का पता नहीं है। कैमरों से निगरानी की सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। ऐसे में कोहरे में वाहनों को रास्ते का पता चलना तो दूर आगे बढ़ने पर हादसे की आशंका बनी रहती है। दिल्ली से आगरा के सफर को आसान करने के लिए वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे की शुरुआत हुई थी। 165.5 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे 6 लेन का है। दोनों तरफ तीन-तीन लेन में वाहन गुजरते हैं। मथुरा में मंगलवार तड़के कोहरे के दौरान हादसा हुआ। दो कारों की टक्कर के बाद चालकों में बहस हुई। तभी पीछे से स्लीपर बस सहित कई वाहन एक-दूसरे से टकराते गए। हादसे में 19 लोगों की जान चली गई थी।