रजिस्ट्री दफ्तर में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शुरू की गई आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था लोगों के लिए जी का जंजाल बन गई है। बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए फिंगर प्रिंट से मिलान नहीं हो रहा। ऐसे में मिनटों का काम घंटों में हो रहा है। बुजुर्ग और महिलाओं का सत्यापन नहीं हो पाने से उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। रजिस्ट्री प्रक्रिया महज 15 से 20 मिनट में पूरी होती थी। उसके लिए अब क्रेता और विक्रेताओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा मार उन बुजुर्गों पर पड़ रही है, जिनकी उम्र के साथ अंगुलियों की रेखाएं धुंधली पड़ चुकी हैं। सबसे बड़ी चुनौती ऐसे बुजुर्गों के बायोमेट्रिक सत्यापन को लेकर आ रही है। उम्रदराज खरीदारों और विक्रेताओं के फिंगरप्रिंट मशीन द्वारा स्वीकार न किए जाने के कारण प्रक्रिया बार-बार बाधित हो रही है। कई मामलों में तो 10 से 15 बार कोशिश करने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही। समस्या उन रजिस्ट्री में और अधिक विकराल हो जाती है, जहां क्रेता और विक्रेताओं की संख्या सात से आठ है। यदि एक भी व्यक्ति का अंगूठा मैच नहीं करता, तो पूरी फाइल रुक जाती है।