आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी रोग विभाग में जटिल सर्जरी से मरीज की जान बची है। आवाज भी पहले जैसी हो गई। मरीज के वेंटिलेटर पर रहने से सांस नली का हिस्सा तीन सेमी सिकुड़ गया था। इससे मरीज को सांस लेने में परेशानी और बेचैनी भी हो रही थी। आवाज भी बदल गई थी। ईएनटी रोग विभाग के डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि 25 साल का यह मरीज इमरजेंसी में आया। इनको घरघराहट, बेचैनी होने के साथ सांस उखड़ रही थी। मरीज सो नहीं पा रहा था। सीटी स्कैन कराने पर पता चला कि मरीज की सांस नली का 3 सेमी हिस्सा सिकुड़ गया था। इसकी कुल लंबाई 10-12 सेमी होती है। इसके चलते मरीज की सांस नलिका की चौड़ाई 4 एमएम कम हो गई थी। सांस नलिका की चौड़ाई करीब 20 एमएम होती है। पूछताछ पर मरीज ने बताया कि सात महीने पहले सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल होने पर उसे आईसीयू में करीब महीनेभर तक भर्ती रहना पड़ा। लंबे समय तक वेंटिलेटर की पाइप मुंह में रहने से सांस नली भी प्रभावित होती है। इसका ऑपरेशन गर्दन के रास्ते से किया जाता है। इसमें मरीज की आवाज जाने का खतरा भी रहता है। ऐसे में टीम बनाकर सर्जरी की और करीब ढाई घंटे ऑपरेशन में लगे। इसमें नस के सिकुड़े हुए हिस्से को सर्जरी कर हटाया गया। सात दिन आईसीयू में रखा गया। हालत में सुधार होने के बाद मरीज को जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया। बीते दिन टांके काटे गए हैं। मरीज की आवाज सामान्य होने के साथ सांस लेने में परेशानी भी दूर हो गई है। टीम में डॉ. सौम्या, डॉ. दीपा, डॉ. कीर्ति, डॉ. कौस्तुभ, डॉ. विघ्नेश, डॉ. अभिषेक और डॉ. रितिका शामिल रहे।