डॉ. भीमराव आंबेडकर की गलतियों का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा पहली बार नहीं है। कई बार सैकड़ो छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय की इन गलतियों की वजह से चक्कर लगाते हुए नजर आते हैं। ऐसा ही एक मामला एमए योगा के छात्र आशीष प्रिंस के साथ आया है। आशीष ने 2024 में एमए योगा से किया था। इसके बाद से अब तक विश्वविद्यालय उन्हें तीन बार अंक तालिका दे चुका है और तीनों ही अंक तालिका में उन्हें अलग-अलग अंक दिए गए हैं। आशीष प्रिंस ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए पत्र लिखकर अपनी समस्या की गुहार लगाई थी। उनका कहना है कि राम मंदिर से भी पत्र वापस आ गया। वहां भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया। विश्वविद्यालय की लापरवाही से अब वह असमंजस में हैं कि आखिर तीनों मार्कशीट में से कौन सी सही है।