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एक गोली से दो मौतें: 'बेटा श्रवण कुमार जैसी सेवा कर रहा था, अब बोझ नहीं बन सकता'

शाहबाद में बर्तन व्यापारी सुनील रस्तोगी ने आत्महत्या से पहले 15 पेज की डायरी लिखी थी। डायरी में उन्होंने अपने अवसाद, पारिवारिक जिम्मेदारियों और पत्नी की बीमारी का जिक्र करते हुए आत्महत्या का इशारा दिया है। उन्होंने लिखा कि लंबे समय से मानसिक तनाव में अपने परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहता। डायरी में भतीजे गौरव को संबोधित करते हुए सुनील ने लिखा, “प्रिय गौरव राम-राम जुलाई 2024 में अनु की शादी के छह दिन बाद अचानक मेरे कूल्हे में दर्द उठा। इलाज कराने के बाद भी आराम नहीं मिला। परिवार कैसे चलेगा, इसी चिंता में मैं डिप्रेशन में चला गया।”उन्होंने आगे लिखा कि नवंबर 2024 में उनकी पत्नी की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद वह अपने दुखों को नजरअंदाज कर पत्नी के इलाज और काम में लगे रहे। 16 अगस्त 2025 को पत्नी और बेटे के साथ हादसा हो गया, जिसके बाद पत्नी मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगीं। डायरी में उन्होंने लिखा कि बेटा पीयूष पिछले 18 महीने से “श्रवण कुमार” की तरह माता-पिता की सेवा कर रहा था। उन्होंने लिखा, “अब मैं बोझ नहीं बन सकता, इसलिए अपनी पत्नी को भी साथ ले जा रहा हूं। मुझे माफ कर देना पत्नी का हत्यारा और अपने बच्चों का बदनसीब पिता कहलाने का अधिकारी नहीं हूं।”

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