अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन की हृदय स्थली रहे कारसेवकपुरम में दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला व सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों के साथ नेपाल के भी कार्यकर्ता शामिल हैं। कार्यशाला में रामायण कालीन संस्कृति, विज्ञान और तीर्थ स्थलों के संरक्षण व संवर्धन पर विमर्श किया जा रहा है। यह आयोजन श्रीराम संस्कृत शोध संस्थान न्यास की ओर से किया गया है। आयोजन में पश्चिम बंगाल के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। भगवान राम के तीर्थ स्थल पर शोध करने वाले डॉ. रामावतार के नेतृत्व में प्रमुख तीर्थ स्थलों पर ही अपने-अपने क्षेत्र में महारत हासिल करने वाले 100 से ज्यादा विशेषज्ञ शामिल हैं। डॉ. रामावतार ने बताया कि हमने जहां-जहां श्रीराम पर शोध किया है, वहां से कार्यकर्ताओं को बुलाया है। हमारा उद्देश्य है कि हमारा संदेश लेकर कार्यकर्ता जन-जन तक जाएं और राम की संस्कृति, विज्ञान, उनसे जुड़े स्थलों के संरक्षण और संवर्धन के कार्य को विस्तार दें। कार्यक्रम में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी शामिल हुए। डॉ. रामावतार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि रामायण कालीन संस्कृति और स्थल लुप्त हो गए तो यह हम लोगों के लिए बड़ी हानि होगी। इस दौरान पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार, ब्रिगेडियर राज बहादुर शर्मा, प्रो. रविंद्र कुमार सिंह, भारतीय वायु सेना के इंजीनियर रहे विजय शास्त्री, नदियों पर काम करने वाले पवन सिंह और राजेश भी मौजूद रहे। पश्चिम बंगाल के हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. रामावतार ने कहा कि वहां पर राज्य की ओर से आयोजित हिंसा चल रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिस तरह के हालात वहां हैं, पुलिस कुछ नहीं कर रही है। बंगाल में शासन नाम की कोई चीज नहीं है। हिंदुओं को पश्चिम बंगाल में जान बूझकर प्रताड़ित और भयभीत करने का काम किया जा रहा है। बंगाल की परिस्थिति बेहद चिंताजनक है।