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अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा में प्रवाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन

Bhupendra Singh Updated Fri, 13 Mar 2026 06:21 PM IST

अयोध्या में पूरा बाजार क्षेत्र के ऐमीआलापुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए प्रवाचक आचार्य ज्ञानचंद्र द्विवेदी ने कहा कि श्रीमद्भागवत में केवल भगवान ही प्रतिपाद्य हैं। उन्होंने बताया कि ‘भग’ के छह स्वरूप—ज्ञान, वैराग्य, धर्म, ऐश्वर्य, यश और श्री—जिसमें निवास करते हैं, वही भगवान कहलाते हैं और उन्हीं का प्रतिपादन होने के कारण इस पुराण का नाम भागवत पड़ा है। कथा के पांचवें दिन आचार्य द्विवेदी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब नंद बाबा को पुत्र जन्म का समाचार मिला तो उनका हृदय करुणा और उदारता से भर गया। उन्होंने स्नान कर सुंदर वस्त्र व आभूषण धारण किए और वैदिक विद्वानों को बुलाकर स्वस्तिवाचन के साथ 16 संस्कारों में से जातकर्म संस्कार संपन्न कराया। इसके बाद उन्होंने हजारों गायों का दान भी किया। आचार्य द्विवेदी ने कहा कि काल से भूमि, स्नान से शरीर, प्रक्षालन से वस्त्र, संस्कार से गर्भ, तपस्या से इंद्रियां, यज्ञ से ब्राह्मण, दान से धन, संतोष से मन और आत्मज्ञान से आत्मा की शुद्धि होती है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में सबसे पहले पूतना का उद्धार होता है, जबकि भगवान राम ने सबसे पहले ताड़का का उद्धार किया था। अंतर यह है कि भगवान कृष्ण ने आंखें बंद करके पूतना का उद्धार किया क्योंकि वे योगेश्वर हैं, जबकि भगवान राम ने आंखें खोलकर ताड़का का उद्धार किया क्योंकि वे मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।

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