लखनऊ-वाराणसी हाईवे और रायबरेली-अयोध्या हाईवे को जोड़ने के लिए तैयार किया गया करीब तीन किलोमीटर लंबा बाईपास लंबी दूरी के यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है। शहर और बाजारों की भीड़ से बचते हुए वाहन अब सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। हालांकि बाईपास के किनारे बसे गांवों के लोगों के लिए यह सुविधा परेशानी का कारण बन गई है। सर्विस सड़क न होने से ग्रामीणों को गांवों के बीच आवागमन के लिए तीन से पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। बाईपास शुरू होने के बाद रायबरेली, अयोध्या, लखनऊ और सुल्तानपुर की ओर जाने वाले वाहनों का दबाव कस्बाई क्षेत्रों से कम हुआ है। श्रीरामगंज चौराहे से होकर गुजरने वाले वाहन अब सीधियांवा कट के रास्ते सीधे अयोध्या हाईवे पहुंच रहे हैं। इससे यात्रियों का समय बच रहा है और यातायात भी सुगम हुआ है। दूसरी ओर सीधियांवा और आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि परियोजना निर्माण के दौरान स्थानीय जरूरतों की अनदेखी की गई। बाईपास के दोनों ओर सर्विस सड़क नहीं बनाई गई। ऐसे में खेतों, बाजारों और पड़ोसी गांवों तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे समय के साथ ईंधन की खपत भी बढ़ रही है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सीधियांवा गांव के सामने बनाया गया सीधा कट जोखिम बढ़ा रहा है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पार करना और वाहन मोड़ना चुनौती बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यहां किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और प्रशासन से सर्विस सड़क, सुरक्षित यू-टर्न और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की सुविधा और सुरक्षा को भी समान महत्व मिलना चाहिए।