द्वापर में कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आकाशवाणी को सुन वासुदेव नवजात को टोकरी में रख गोकुल ले जाने लगे। यमुना की लहरों में घिरे वासुदेव ने नदी का रौद्र रूप देखा तो विचलित हो गए। कोई-ले, कोई ले की पुकार करने लगे। तब यमुना ने श्रीकृष्ण के चरण छूए और लौटने लगीं। कोई-ले, कोई ले की पुकार पर यमुना के घाट का नाम कोईला पड़ा जिसे आज कोयला अलीपुर गांव के नाम से जाना जाता है। यहां आज भी वासुदेव की टोकरी में बालक कान्हा को लिए प्रतिमा मौजूद है। यमुना का बढ़ा जलस्तर वासुदेव को एक बार फिर घेरने लगा है। लग रहा है मानो द्वापर काल की लीला एक बार फिर जीवंत होने जा रही है। एक बार फिर यमुना नदी की लहरें भगवान श्रीकृष्ण के पैर छूने को मचल रही है। इधर गांव के लोग यमुना के रौद्र रूप को देख विचलित है। ग्रामीणों में चर्चा है अब तो यमुना नदी भगवान श्रीकृष्ण को स्पर्श करने के बाद ही लौटेंगी।