मथुरा के कोसीकलां में प्रहलाद और होलिका दहन की पौराणिक गाथा को जीवंतता देती परंपरा एक बार फिर साकार होने को उत्सुक है। होलिका में दहकते अंगारों के बीच गुजरने के लिए आस्था की अग्नि परीक्षा देने को संजू पंडा बुधवार को गांव कीर्तन के साथ एक माह के कठोर तप पर बैठ गया, तो पूरा गांव भक्त प्रह्लाद के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। इस बार पहली बार संजू पंडा बुधवार को पूर्णिमा के दिन सुबह गांव की परिक्रमा लगाकर प्रह्लाद मंदिर में तप पर बैठ गया। तप पर बैठने से पूर्व पंडा ने ग्रामीण, महिलाओं के साथ गांव की परिक्रमा की। होलिका की लग्न निर्धारित होने के बाद आसपास के सात गांव ने मिलकर प्रहलाद मंदिर के पास होलिका रखी।