Hindi News
›
Video
›
Madhya Pradesh
›
Know the amazing Gaj tradition of this monastery of Sagar. This elephant here follows the rules like a saint.
{"_id":"67850f7e2a69c8d3ef0029f9","slug":"know-the-amazing-gaj-tradition-of-this-monastery-of-sagar-this-elephant-here-follows-the-rules-like-a-saint-sagar-news-c-1-1-noi1338-2516291-2025-01-13","type":"video","status":"publish","title_hn":"Sagar News: जानें सागर के इस मठ की अद्भुत गज परंपरा, यहां किसी संत की तरह नियमों का पालन करती है ये हथनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sagar News: जानें सागर के इस मठ की अद्भुत गज परंपरा, यहां किसी संत की तरह नियमों का पालन करती है ये हथनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jan 2025 07:37 PM IST
Link Copied
बुंदेलखंड के सागर शहर में स्थित ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील के किनारे स्थित वृंदावन बाग मठ अपनी विशिष्ट परंपराओं और आस्था के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां गज परंपरा का पालन किया जाता है। वर्तमान में इस परंपरा की 5वीं सदस्य हथिनी लक्ष्मी हैं, जिन्हें यहां देवतुल्य मानते हुए विशेष सम्मान दिया जाता है।
गज परंपरा और हथिनी लक्ष्मी
महंत नरहरिदास के अनुसार, वृंदावन बाग मंदिर का निर्माण मराठा सत्ता के दौरान किया गया था, और यह राज दरबारी मठ के रूप में जाना जाता है। प्राचीन समय से ही मठ में घोड़ा-हाथी रखने की परंपरा रही है, जो आज भी जारी है। वर्तमान में यहां की हथिनी लक्ष्मी इस परंपरा की निर्वाहक हैं। वर्ष 2007 में मठ में लाई गई लक्ष्मी की दिनचर्या भी किसी संत की तरह नियमबद्ध है।
रोज सुबह साढ़े 4 बजे जागने वाली लक्ष्मी मठ की आरती में शामिल होती हैं। उनका भोजन, आवास और विश्राम भी निर्धारित समय पर होता है। रात्रि साढ़े 10 बजे उनका सोने का समय है।
गज परंपरा की शुरुआत
मठ में गज परंपरा की शुरुआत एक रोचक किवंदती से हुई। बताया जाता है कि सागर के दुबे लंबरदार के पास एक हाथी था, जिसे सागर झील में स्नान की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने वह हाथी मंदिर को दान कर दिया। तब से यह हाथी मठ का हिस्सा बन गया और गज परंपरा की नींव पड़ी। समय के साथ, पुराने हाथियों का स्थान नए हाथियों ने लिया। वर्तमान में हथिनी लक्ष्मी मठ की प्रधान सदस्य हैं।
सागर शहर की पहचान
स्थानीय लोग इस मठ को 'हाथी वाला मंदिर' कहकर संबोधित करते हैं। यह मठ न केवल गज परंपरा का निर्वहन करता है, बल्कि स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। हथिनी लक्ष्मी की उपस्थिति से यह स्थान और भी विशेष बन जाता है, और इसे प्रथम पूज्य गणेश जी के स्वरूप में देखा जाता है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।