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चंद्र ग्रहण में छोटा सा दान, बनाएगा धनवान : 5 जून 2020
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चंद्र ग्रहण में छोटा सा दान, बनाएगा धनवान : 5 जून 2020

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पहले पत्नी को फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी, अब भर्ती-पदोन्नति नियमों में छेड़छाड़ कर पदनाम बदला

कोरोना महामारी के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा सामने आया है। आरोप है कि उच्च पद पर बैठे एक स्वास्थ्य अधिकारी ने पहले अपनी पत्नी को फर्जी प्रमाणपत्र पर नौकरी दी और अब भर्ती एवं पदोन्नति (आरएंडपी) नियम बदल कर पदनाम भी बदल दिया। उक्त अधिकारी ने पद का फायदा उठाकर पत्नी का पदनाम बदल कर अधिकारी की श्रेणी में ला दिया। कर्मचारियों ने इसकी शिकायत अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान से की है। उन्होंने मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।

इस कारनामे को लेकर स्वास्थ्य विभाग में खूब हलचल मची है। पहले भी यह अधिकारी पत्नी को फर्जी नौकरी देने के आरोप में सुर्खियों में रहा है। उस समय विजिलेंस में भी इसकी शिकायत हुई है। अब अधिकारी पर पत्नी को फायदा पहुंचाने के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियम बदलने का आरोप लगा है।

स्वास्थ्य विभाग के इस कारनामे से कई कर्मचारी पीछे हो गए हैं। इस मामले में कई और कर्मचारी और अधिकारी लपेटे में आएंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने कहा है कि अधिकारी पर आरोप लगे हैं। इसकी जांच की जा रही है। अगर आरोप सही पाए गए तो मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

कोरोना संकट के बीच हिमाचल में घरेलू बिजली महंगी होने के आसार कम

 कोरोना संकट के बीच हिमाचल में इस साल घरेलू बिजली महंगी होने के आसार कम हैं। आर्थिक संकट से जूझ रही जनता पर और अधिक बोझ नहीं डालने का इस सप्ताह फैसला हो सकता है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने नई बिजली दरों को लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है। संभावित है कि इस सप्ताह अंत तक दरें घोषित हो जाएंगी। बोर्ड ने साढ़े आठ फीसदी की दर से बिजली महंगी करने का प्रस्ताव भेजा है।

जनता ने सुझाव और आपत्तियों में दरें न बढ़ाने की मांग की है। उधर, सरकार यूनिट स्लैब पर कोविड सेस लगाकर बिजली बोर्ड का घाटा पूरा कर सकती है। इससे संभावित है कि इस साल घरेलू बिजली दरें न बढ़ें। सरकार बिजली के प्रति यूनिट स्लैब पर कोविड सेस लगाने का विचार कर रही है। बीते दिनों कैबिनेट बैठक में इस पर चर्चा हुई है। बिजली बोर्ड से रिपोर्ट मांगी गई है। प्रति स्लैब पर ही कोविड सेस लगाकर राजस्व जुटाने का प्रयास किया जाएगा।

बिजली की दरों को इस साल नहीं बढ़ाया जाए। बता दें कि बिजली बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग से बिजली दरों में 8.73 फीसदी की बढ़ोतरी मांगी है। 487 करोड़ के राजस्व घाटे का हवाला देते हुए वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 6000 करोड़ के वार्षिक राजस्व की जरूरत बताई है। बीते साल के मुकाबले इस बार बोर्ड ने 882 करोड़ की अधिक मांग की है। बोर्ड ने आयोग को भेजी पिटीशन में हिमाचल के करीब 20 लाख घरेलू उपभोक्ताओं और 30 हजार औद्योगिक घरानों को दी जाने वाली बिजली सप्लाई को 8.73 फीसदी की दर से बढ़ाने की मांग की है।

साल 2019 में आयोग ने बोर्ड के 5117.95 करोड़ के वार्षिक राजस्व जरूरत को पूरा करने के लिए घरेलू बिजली प्रति यूनिट पांच पैसे और उद्योगों को दी जाने वाली बिजली को दस पैसे प्रति यूनिट की दर से बढ़ाया था। इसके बावजूद बोर्ड को 2019-20 में 487.88 करोड़ का घाटा हुआ है। ऐसे में बोर्ड ने 2020-21 के लिए 6000.52 करोड़ के वार्षिक राजस्व जरूरत का प्रस्ताव आयोग को भेजा है। साल 2017-18 और 2018-19 में घरेलू बिजली की दरें नहीं बढ़ाई थीं। साल 2016 में घरेलू बिजली साढ़े तीन फीसदी महंगी हुई थी।
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कोरोना: गर्भवती पत्नी के साथ होम क्वारंटीन व्यक्ति को पैसे खर्च कर मंगवाना पड़ा पानी का टैंकर

हिमाचल के कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी उपमंडल के सक्रियालु गांव में गर्भवती पत्नी के साथ होम क्वारंटीन व्यक्ति को पैसे खर्च कर पानी का टैंकर मंगवाना पड़ा। उनका कहना है कि पांच दिन तक जब पानी की सप्लाई नहीं आई तो उन्होंने ट्वीट कर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह और डीसी और एसपी कांगड़ा से शिकायत की, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। पांच दिन बाद भी पेयजल की आपूर्ति न होने पर व्यक्ति को मजबूरी में पैसे खर्च कर पानी का टैंकर मंगवाना पड़ा। 

उधर, जल शक्ति विभाग ज्वालामुखी में संपर्क किया तो एसडीओ ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। न ही पानी की सप्लाई पांच दिन से बाधित है। विभाग ने माना कि एक दिन पानी की सप्लाई बाधित हुई थी। ज्वालामुखी के कथोग के साथ लगते सक्रियालू गांव के व्यक्ति जगतार सिंह ने बताया कि वह चार मई को दिल्ली से पत्नी के साथ वापस आए थे। पत्नी गर्भवती है और दोनों होम क्वारंटीन हैं। दो बार ज्वालामुखी प्रशासन की टीम भी उनके घर आई थी। पांच दिन से पानी की सप्लाई न आने के कारण वह परेशान थे।

उन्होंने ट्वीट कर मुख्यमंत्री और जल शक्ति मंत्री सहित कांगड़ा जिला प्रशासन को पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग की, लेकिन किसी का रिप्लाई नहीं आया। उसके बाद चौथे दिन उन्हें पैसे से पानी का टैंकर मंगवाना पड़ा। बुधवार को उन्होंने विधायक रमेश ध्वाला से शिकायत की तो विधायक ने जल शक्ति विभाग के कनिष्ठ अभियंता को मामले की जांच कर पानी की आपूर्ति बहाल करने की हिदायत दी है। उधर, जल शक्ति विभाग ज्वालामुखी के एसडीओ प्यारे लाल ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। जल्द पानी की आपूर्ति बहाल की जाएगी।
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बीआरओ ने रोका ग्रांफू-समदो सड़क से बर्फ हटाने का काम

 केंद्र सरकार ने ग्रांफू-समदो सड़क को पीडब्ल्यूडी के हवाले करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इससे बीआरओ के 94 और 108 आरसीसी ने मशीनरी को समेटना शुरू कर दिया है। इससे अब कुंजम दर्रा के बहाल होने में और वक्त लग सकता है। स्पीति के जनप्रतिनिधियों ने बीआरओ के पक्ष में प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केंद्र ने समदो से ग्रांफू 205 किलोमीटर लंबी सड़क को लोनिवि के हवाले करने की अधिसूचना जारी कर दी है। 

लोगों का मानना है कि लोनिवि के पास जाने से सड़क दुरुस्त होने में वर्षों लग सकते हैं। गांफू-समदो मार्ग बहाल होने के लिए अभी करीब 20 किलोमीटर के दायरे से बर्फ हटाने का काम बचा है। यह पिछले कई दिन से बंद है। बीआरओ की मानें तो 94 आरसीसी का लक्ष्य था कि इस वर्ष सभी नालों पर कलवर्ट बनाकर सफर को आसान बनाया जाए। बीआरओ 94 आरसीसी के ओसी मेजर हरीश बाबू ने बताया कि ग्रांफू से छोटादड़ा तक बर्फ हटाने की जिम्मदारी बीआरओ 94 के पास थी। अभी 12 किलोमीटर से बर्फ हटाना बाकी है।

बीआरओ के 108 आरसीसी के ओसी चेतराम मीणा ने बताया कि बीआरओ टीम कुंजम दर्रा लांघकर बातल से चार किलोमीटर आगे छोटादड़ा से मात्र आठ किलोमीटर मीटर दूर पीछे पहुंच चुकी थी, लेकिन फिलहाल बर्फ हटाने का काम रोक दिया है। लाहौल-स्पीति के पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने कहा कि सड़क को पीडब्ल्यूडी के हवाले करने से स्पीति का पर्यटन व्यवसाय चौपट होगा। मार्ग के रखरखाव और डबललेन बनाने में कई साल लग जाएंगे। स्थानीय निवासी रिगजिन, पूर्व बीडीसी सदस्य अनिल सहगल तथा एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव सचिन मिरुपा इस सड़क को बीआरओ के पास ही रहने की पैरवी की है।
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हिमाचल: बिना ई-पास सीमा पर पहुंचे 74 वाहन वापस भेजे

फाइल फोटो
हिमाचल प्रदेश के अंतरराज्यीय सीमा बैरियरों पर बिना ई-पास के ही बाहरी राज्यों से लोग पहुंच रहे हैं लेकिन कोरोना वायरस के चलते हिमाचल सीमा पर अलर्ट पुलिस टीम ऐसे वाहनों को प्रवेश नहीं करने दे रही है। बुधवार को उत्तराखंड-यूपी, पंजाब और हरियाणा की तरफ से पहुंचे 74 वाहनों को लौटाया गया।  
हिमाचल में बाहरी राज्यों से आने वालों के लिए ई-पास जरूरी है लेकिन कुछ राज्यों में इसकी छूट मिलने से असमंजस की स्थिति बन गई है। इस वजह से हिमाचल के बैरियरों से रोजाना भारी संख्या में लोग वापस भेजे जा रहे हैं।

बुधवार को पांवटा के दो राज्य सीमा बैरियरों से शाम 4.45 बजे तक ही करीब 74 वाहनों को वापस भेजा गया। उत्तराखंड राज्य की सीमा पर गोविंदघाट बैरियर पर बुधवार को दर्जनों ऐसे वाहन पहुंचे जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से हिमाचल में प्रवेश करना चाहते थे। इनके चालक परिचालकों का कहना था कि एक जून से कुछ राज्यों में बिना ई पास के प्रवेश हो रहा है। इसलिए, हिमाचल में भी बिना ई पास के प्रवेश करने पहुंच गए लेकिन बैरियर पर तैनात पुलिस और होमगार्ड जवानों ने लौटा दिया।

गोविंदघाट बैरियर प्रभारी मुख्य आरक्षी अरुण शर्मा ने कहा कि बुधवार को करीब 52 ऐसे छोटे-बड़े और दोपहिया वाहन सवारों को वापस भेज दिया गया है। वहीं, हरियाणा राज्य सीमा के बहराल बैरियर प्रभारी मुख्य आरक्षी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि लोगों को काफी गलतफहमी हो रही है। जून माह शुरू होने पर दर्जनों वाहन बिना ई पास के बैरियर पर प्रदेश में प्रवेश को पहुंच रहे हैं। बुधवार को बहराल बैरियर से ऐसे करीब 22 वाहनों को बिना अनुमति पास के पहुंचने पर वापस भेजा।

बैरियरों पर स्वास्थ्य विभाग टीमें कर रहीं मेडिकल जांच  
 हिमाचल के प्रवेश द्वार पर बहराल और गोविंदघाट बैरियर पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरी तरह से अलर्ट हैं। मेडिकल जांच के बाद ही प्रदेश में प्रवेश दिया जा रहा है। बुधवार को हरियाणा सीमा पर पहुंचे एक व्यक्ति ने पंचायत पत्र दिखाया। उसने एक पत्र जेब से निकाला। बोला पंचायत ने पास जारी किया है। इसके बाद उसे ई पास के नियम बता कर पुलिस ने वापस भेज दिया।
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स्कूल खोलने के लिए आज अभिभावकों और प्रिंसिपलों की राय जानेंगे शिक्षा निदेशक

 हिमाचल में स्कूल खोलने को लेकर वीरवार को अभिभावकों, प्रिंसिपलों और जिला उपनिदेशकों की राय जानी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से इस बाबत वीरवार सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक हर जिला के साथ पंद्रह-पंद्रह का वेबनियार किया जाएगा। इस दौरान उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा सभी से चर्चा करेंगे।

प्रदेश में अभी 15 जून तक स्कूलों में छुट्टियां घोषित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने जुलाई में स्कूलों को खोलने की घोषणा की है। ऐसे में 15 जून के बाद दोबारा स्कूलों को बंद करना तय है। मार्च से बंद चल रहे स्कूलों को खोलने के लिए सरकार ने कई विकल्प तैयार किए हैं। हालांकि शिक्षा मंत्री के मुताबिक स्कूलों को खोलने में कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी। कोरोना संक्रमण का प्रकोप कम होने पर ही यह फैसला लिया जाएगा।

इसी कड़ी में वीरवार को उच्च शिक्षा निदेशालय प्रदेश के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों, जिला उपनिदेशकों और अभिभावकों से साथ चर्चा करने जा रहा है। इसके बाद निजी स्कूलों के साथ भी बैठक कर उनकी राय भी जानी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक ने बताया कि अभी प्रारंभिक चरण में वह स्वयं अभिभावकों के साथ बातचीत करेंगे। इसके बाद शिक्षा मंत्री के साथ भी संवाद करवाया जाएगा।
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हिमाचल में कोरोना के 14 पॉजिटिव मामले, 359 पहुंचा आंकड़ा

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