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हरियाणा

शनिवार, 19 अक्टूबर 2019

तेज हवा और बरसात के बाद गिरे ओले, ठंड भी बढ़ी, जानें आगे कैसा रहेगा मौसम का हाल

पश्चिमी हलचलों के चलते मौसम ने शुक्रवार को दोपहर बाद हरियाणा में अचानक करवट बदली। पश्चिम से आई तेज हवा के साथ रोहतक में सबसे अधिक 32 एमएम बारिश हुई। इसके अलावा फतेहाबाद, हिसार, करनाल, पानीपत, सिरसा, जींद समेत कई जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश हुई। इन इलाकों में ओले भी गिरे, जिससे धान और कपास की फसलों को नुकसान पहुंचा। मौसम विभाग ने प्रदेश में शनिवार को भी कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना जताई है।   

दोपहर तक मौसम एकदम साफ था। इस कारण प्रदेश में सबसे अधिक हिसार में अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उसके बाद हवाओं का रुख बदला और पश्चिमी हवा चलने से शाम चार बजे के बाद आसमान काले बादलों से घिर गया और करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। 

इस दौरान कई जिलों में बारिश के साथ आधे घंटे तक ओलावृष्टि भी हुई। बारिश के चलते फतेहाबाद, चरखी दादरी समेत कई जिलों की अनाज मंडियों में खुले में पड़ा धान भीग गया। भिवानी में एक घंटे तक चली आंधी और बारिश की वजह से बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं और कई खंभे भी टूटकर गिर गए। बारिश और पश्चिमी हवाओं के चलते प्रदेश में सबसे कम सिरसा में अधिकतम तापमान 28.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया तो न्यूनतम तापमान अंबाला में 18.7 डिग्री रहा। 
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इनेलो को झटका, कांग्रेस से मिला प्रत्याशी तो जिलाध्यक्ष बोले- 50 लाख में बिका, चश्मे पर डालेंगे वोट

चुनाव के बीच राई विधानसभा सीट पर शुक्रवार को बड़ी राजनीतिक हलचल रही। जहां इनेलो प्रत्याशी इंद्रजीत दहिया 10 साल की लड़ाई के बाद कांग्रेस प्रत्याशी जयतीर्थ दहिया से मिल गए। जिससे इनेलो को तगड़ा झटका लगा तो जिलाध्यक्ष सुरेंद्र छिक्कारा ने अपने प्रत्याशी इंद्रजीत दहिया पर 50 लाख रुपये में बिकने का आरोप लगाते हुए जल्द ही पार्टी से निकालने की बात कह दी। 

इसके साथ ही इनेलो जिलाध्यक्ष ने कहा कि सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता ईवीएम मशीन में चश्मे का बटन दबाने के लिए प्रचार करेंगे। जिससे साफ हो जाएगा कि इंद्रजीत दहिया का कोई जनाधार नहीं है और इनेलो को वोट डाले जाएंगे।

राई विधानसभा सीट पर कांग्रेस के जयतीर्थ दहिया व इनेलो के इंद्रजीत दहिया वर्ष 2009 में आमने-सामने चुनाव लड़े थे। जिसमें जयतीर्थ ने इंद्रजीत को हरा दिया था। 

उसके बाद वर्ष 2014 के चुनाव में दोनों फिर से चुनावी जंग में उतरे और जयतीर्थ दहिया ने इंद्रजीत दहिया को तीन वोटों से हरा दिया। लेकिन इंद्रजीत दहिया ने मृतकों की वोट डलवाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में केस दायर दिया जो पांच साल तक केस चला। जिसमें एक माह पहले ही हाईकोर्ट ने जयतीर्थ दहिया का चुनाव निरस्त कर दिया, लेकिन जयतीर्थ ने इंद्रजीत पर बूथ कैप्चरिंग का आरोप लगाते हुए कोर्ट में नई याचिका डाल दी। जिससे इंद्रजीत दहिया को विधायक घोषित करने का फैसला नहीं हो सका।

अब चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस से जयतीर्थ दहिया, इनेलो से इंद्रजीत दहिया, भाजपा से मोहन लाल बड़ौली, जजपा से अजीत आंतिल, लोसुपा से राजकुमार शर्मा मैदान में उतरे हुए थे। लेकिन मतदान से तीन दिन पहले इनेलो प्रत्याशी इंद्रजीत दहिया व कांग्रेस के जयतीर्थ दहिया एक साथ आ गए। दोनों ने कहा कि वह भाई-भाई हैं और उनके सभी आपसी विवाद खत्म हो गए हैं। 
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पीएम मोदी ने दिए संकेत, अब पाक पर होगी ये 'स्ट्राइक', पढ़ें- हिसार रैली की 10 बड़ी बातें

सिरसा: पीएम मोदी बोले- कांग्रेस के पेट में दर्द हो रहा, 370 जो हट गई और पर्ची-खर्ची भी खत्म हो गई

हरियाणा विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पीएम मोदी आज सिरसा के ऐलनाबाद हल्के के गांव मलेकां में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे। मंच पर पहुंचते ही पगड़ी पहनाकर पीएम मोदी का स्वागत किया गया। उसके बाद जब पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करना शुरू किया तो सबसे पहले भारत माता का जयकारा लगाया।

फिर पीएम ने पंजाबी भाषा में जी आया नूं कहकर, राम राम और नमस्कार कहकर सभी का अभिवादन किया और कहा कि जहां पहली पातशाही गुरु नानक देव जी के चरण पड़े थे, उस सिरसा को मैं वंदन करता हूं। आज कई पुराने साथियों के दर्शन करने का सौभाग्य मिला, वो भी तब जब पूरी दुनिया 550वें प्रकाश पर्व की तैयारी में जुटी है।

पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार इस ऐतिहासिक क्षण से पूरी दुनिया को परिचित कराने का भरसक प्रयास कर रही है। यही कारण है कि पूरे विश्व में भारत सरकार इस पर्व को मनाने वाली है। कपूरथला में जो नया नेशनल हाईवे बना है, उसे अब गुरु नानक देव मार्ग से जाना जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार को एक और सौभाग्य प्राप्त हुआ है। करतारपुर साहिब और हमारे बीच जो रुकावट थी, दूरी थी वो अब समाप्त होने वाली है। 70 सालों तक दूरबीन से गुरु घर के दर्शन की मजबूरी अब खत्म हो रही है। करतारपुर कॉरिडोर करीब-करीब तैयारी हो चुका है।
 
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पीएम मोदी पीएम मोदी

विस चुनावः रेवाड़ी में पीएम मोदी बोले- कल जो हमें डराते थे, आज वो खुद डरे नजर आते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को रेवाड़ी के हुडा मैदान में रैली को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि हरियाणा का फैसला जिसे देखना हो, आज रेवाड़ी का जनसागर देख ले। भाजपा की जो ये लहर है, ये इस बात की सबूत है कि जब ईमानदारी से जनता की सेवा की जाती है, तो जनता सम्मान भी देती है और फिर एक बार काम करने का मौका भी देती है।

पीएम ने कहा कि बीते पांच वर्षों में मां भारती के गौरव के लिए, 130 करोड़ भारतीयों के लिए अगर कुछ योगदान दे पाया हूं तो इसमें रेवाड़ी की मिट्टी के आशीर्वाद का अहम स्थान है। मैं 6 वर्ष पहले के वो संकल्प, हरियाणा और देश को याद दिलाना चाहता हूं। तब मैंने कहा था कि दिल्ली में सक्षम और समर्थ सरकार ही देश को सुरक्षा दे सकती है।

पीएम ने कहा कि पांच साल में भारत का सक्षम और समर्थ सरकार देने का मैंने वादा किया था और वो वादा मैंने निभाया। तब मैंने कहा था कि भारत में ऐसी सरकार होनी चाहिए, जो दुनिया से आंख से आंख मिलाकर बात करे। आज हिंदुस्तान आंख झुकाकर नहीं, आंख मिलाकर बात करता है।

 
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हरियाणा विस चुनावः स्टार वार में भाजपा को टक्कर नहीं दे पा रही कांग्रेस, न सोनिया आईं न प्रियंका

हरियाणा में सरकार बनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस में स्टार वार छिड़ा हुआ है। दोनों ही दलों ने स्टार प्रचारकों की सूचियां प्रचार के जोर पकड़ने से पहले जारी कर दी थीं। भाजपा ने तो अपने सभी बड़े दिग्गजों को मैदान में उतार दिया है, मगर कांग्रेस अभी पिछड़ी हुई है। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की चुनिंदा रैलियां ही हो रही हैं।

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने नूंह में ही एक रैली की है। जबकि, कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी शुक्रवार को महेंद्रगढ़ में रैली करेंगी। प्रियंका वाड्रा अभी तक चुनाव प्रचार में नहीं उतरी हैं। उनका नाम भी स्टार प्रचारकों में शामिल था। शनिवार शाम को चुनाव प्रचार थम जाएगा, ऐसे में प्रियंका के आने की संभावना न के बराबर ही है।

पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह भी प्रचार से दूर ही हैं। उधर, भाजपा पीएम नरेंद्र मोदी की तीन रैलियां बल्लभगढ़, चरखी दादरी और कुरुक्षेत्र में करा चुकी है। उनकी तीन रैलियां और बढ़ाई गई हैं। उन्हें कुल चार ही रैलियां करनी थी, मगर पार्टी हाईकमान ने गोहाना, सिरसा और रेवाड़ी में भी मोदी की रैली कराने का फैसला लिया है।

शुक्रवार को पहले उनकी हिसार में ही एक रैली होनी थी, मगर अब वह गोहाना में भी रैली करेंगे। प्रचार के अंतिम दिन सिरसा और रेवाड़ी में रैली कर मोदी हवा का रुख भाजपा की ओर मोड़ने का प्रयास करेंगे। सीएम मनोहर लाल मोदी के बाद प्रदेश में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा हैं। सीएम भी रोजाना दस से पंद्रह जगह जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं।
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हरियाणा विस चुनावः आखिरी दौर में रोमांचक हुआ मुकाबला, टीम मनोहर के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

आखिरी दौर में हरियाणा का विधानसभा चुनाव खासे रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ भाजपा का आक्रामक चुनाव प्रचार और ‘75 पार’ का लक्ष्य हैं, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी  समेत विरोधियों की चुनावी रणनीति है। इनेलो भी खुद को कमत्तर नहीं आंक रही है। ऐसे में कुछ सीटों पर मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है, तो वहीं कई सीटें ऐसी भी हैं, जहां मुकाबला त्रिकोणीय (भाजपा- कांग्रेस-जजपा) बन चुका है। करीब दो दर्जन सीटें तो ऐसी हैं, जहां कांटे की टक्कर है। इन सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प बना हुआ है।

अब ऐसे में सत्तारूढ़ भाजपा और टीम मनोहर के लिए उनका चुनावी लक्ष्य ‘75 पार’ बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। लेकिन इस बावजूद भाजपाई पूरे उत्साह के साथ अपने इस लक्ष्य को पाने का दावा कर रहे हैं। दरअसल, मई 2019 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की शानदार परफोरमेंस को देखते हुए भाजपा ने हरियाणा में भावी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह लक्ष्य सेट किया था। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हरियाणा में दस की दस सीटें फतेह की थी। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व उनके तीन बार के लगातार सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा तक सीट नहीं बचा पाए थे।

लोकसभा चुनाव परिणाम की जब समीक्षा की गई तो प्रदेश की कुल 90 विधानसभा सीटों में से भाजपा को 79 सीटों पर बढ़त मिली थी। इसी परफोरमेंस से गदगद हरियाणा भाजपा ने अक्टूबर 2019 में प्रस्तावित  विधानसभा चुनाव की प्रारंभिक तैयारियां शुरू करते हुए इस बार चुनाव में अपना लक्ष्य ‘75 पार’ तय किया। इसे एक मिशन का नाम देते हुए कहा गया था कि इस बार भाजपा विधानसभा चुनाव में रिकार्ड 75 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी। मगर देखा जाए, तो लोकसभा चुनाव का माहौल और था, मुद्दे और थे और सियासी फिजां भी और थी।

मगर अब विधानसभा चुनाव की मौजूदा सियासी परिस्थितियों में माहौल, मुद्दे और फिजां लोकसभा चुनाव से कुछ परे है। इन परिस्थितियों में बाजी जीतते हुए अपने इस मिशन को पूरा करना टीम मनोहर के लिए वाकई बड़ी चुनौती है।
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हरियाणा विस चुनावः बदलते वक्त के साथ चुनावी जंग में सोशल मीडिया हावी...प्रत्याशी भी कूदे

भाजपा-बसपा-कांग्रेस
हरियाणा में भी बदलते वक्त के साथ-साथ चुनाव प्रचार के तरीके भी हाईटेक हो गए हैं, ऐसा ही कुछ इस बार के विधानसभा चुनाव में भी हो रहा है। रिक्शा, थ्री-व्हीलर व अन्य वाहनों पर भोंपू लगाकर शहर व गांवों तक घूम-घूमकर प्रचार करने के तरीकों के अलावा प्रत्याशी अब मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसके लिए प्रत्याशी ट्वीटर, व्हॉटसएप, इंस्टॉग्राम, फेसबुक इत्यादि को इन दिनों अपने प्रचार के लिए बड़ा प्लेटफार्म बना रहे हैं। चुनाव के दौर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल प्रचार के साथ-साथ प्रत्याशी खुद को अपडेट रखने के  लिए भी कर रहे हैं। प्रदेश में आलम यह हैं कि इस समय प्रत्याशियों ने अपनी सोशल मीडिया पर सक्रियता को बढ़ा दिया है।

प्रत्याशियों की अलग टीमें बकायदा उनके सोशल मीडिया के प्रचार को संभाल रही हैं। प्रचार के साथ-साथ सोशल मीडिया पर इन दिनों विभिन्न सियासी विषयों पर बहस के मंच भी प्रदान किया जा रहे हैं। जिसमें खुद प्रत्याशी व उनके समर्थक पूरी सक्रियता दिखाकर अपने विचार रख रहे हैं।

इसके अलावा चुनाव से जुडे़ और भी कई तरह के अभियान सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे हैं, जिसके जरिए प्रत्याशी व उनके समर्थक अपनी नीतियों व बातों को मतदाताओं तक पहुंचा रहे हैं। सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार से संबंधित ‘रियल टाइम अपडेट’ भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

 
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हरियाणा विस चुनावः कांग्रेस के 'मिशन 46' की राह में अपने ही बने रोड़ा, पर हुड्डा ने झोंकी ताकत

हरियाणा की सियासत का दंगल अंतिम घड़ियों में पहुंच चुका है। सत्ता पाने के लिए भाजपा, कांग्रेस, जजपा और इनेलो के साथ ही सभी छोटे दल भी जोर आजमाइश कर रहे हैं। सरकार बनाने का दावा तो सब कर रहे हैं, मगर अंतिम फैसला जनता-जनार्दन को करना है। मतदाता सबको अपने तराजू में तोल रहा है, जिसकी नीतियां और चेहरा उसे भा गया, उसकी बल्ले-बल्ले तय है। भाजपा जहां दोबारा सरकार बनाने का भरोसा जता रही है, वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि जनता इस बार उसका साथ देगी।

सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय मुद्दों को उछालने के साथ ही अपने पांच साल के कामों को गिना रहा है तो कांग्रेस का जोर स्थानीय मुद्दे उठाने के साथ ही भाजपा की कमियां निकालने पर है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती मिशन-46 को पूरा करने के लिए अंदरखाने चल रहे शह और मात के खेल से निपटना भी है। अनेक सीटों पर कांग्रेसी एक-दूसरे को ही निपटाने में लगे हुए हैं। मुख्य विपक्षी दल के लिए सबसे बड़ा खतरा भाजपा से ज्यादा भितरघात बना हुआ है। इस स्थिति में कांग्रेस को जीत दिलाना पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

हुड्डा नाराज नेताओं की मान-मनौव्वल करने के साथ ही अधिक से अधिक उम्मीदवार जिताने के लिए भी पसीना बहा रहे हैं। उन्होंने उत्तर, दक्षिण के साथ मध्य हरियाणा पर विशेष फोकस किया हुआ है। हुड्डा का पूरा ध्यान भाजपा के 75 पार के नारे को फिफ्टी-फिफ्टी करने पर है। साथ ही वह भाजपा के नए गढ़ों उत्तर व दक्षिण हरियाणा में सेंधमारी में लगे हैं। इन दोनों एरिया में भाजपा ने पिछली बार 56 में से 37 सीटें जीती थी, जिससे उसके लिए सत्ता का मार्ग प्रशस्त हुआ। हुड्डा की रणनीति इस बार भाजपा को दोनों गढ़ों में मात देने की है।

21 अक्टूबर को मतदान और 24 अक्टूबर को मतगणना के बाद साफ हो जाएगा कि जनता ने अगले पांच साल के लिए किस पर भरोसा जताया है।
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इन नेताओं ने अपनी पत्नियों को दौलत में बनाया हिस्सेदार, तो जम कर बरसीं 'लक्ष्मी'

नेताओं ने महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए उन्हें 33 फीसदी आरक्षण दिलाने का गंभीर प्रयास भले ही न किया हो, लेकिन उन्होंने अपनी पत्नियों को दौलत में साझेदार जरूर बनाया है। यह भी खास बात रही कि जिन नेताओं ने अपनी बीवियों के नाम धन-दौलत कर रखी है या उन्हें कारोबार में हिस्सेदार बनाया है, तो वे उन पर 'लक्ष्मी' बनकर बरस रही हैं। किसी की संपत्ति पचास गुना तो कोई 300 गुना संपत्ति का मालिक बन बैठा। वहीं कई नेता ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी पत्नी को कारोबार से दूर रखा, तो उनकी संपत्ति कम हो गई।

हरियाणा विधानसभा चुनावों में विभिन्न पार्टियों या निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल वक्त जो शपथ पत्र दिया, उसमें ये सब जानकारियां शामिल हैं। एडीआर रिपोर्ट में भी इसका जिक्र किया गया है। बता दें कि रिपोर्ट में जो भी उम्मीदवार शामिल किए गए हैं, वे दो या उससे ज्यादा बार विधानसभा में पहुंच चुके हैं।

2014 के मुकाबले महिलाओं को कम टिकट

पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2014 में आईएनएलडी ने कुल 90 विधानसभा सीटों में से 16 सीटों पर महिलाओं को राजनीति में पैर जमाने का मौका दिया था। इस बार यह पार्टी एक पायदान पीछे रह गई। मौजूदा विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 15 महिलाओं को टिकट दिया है। दो पार्टियों में विभाजित होने के बावजूद इनेलो ने महिलाओं पर भरोसा जताया है। इसके बाद नंबर आता है भाजपा का। 2014 में भाजपा ने 15 महिलाओं को टिकट दिया था, लेकिन इस बार 12 महिलाएं चुनावी मैदान में हैं।

इस मामले में कांग्रेस पार्टी का ग्राफ कुछ अच्छा नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 10 सीटों पर महिला उम्मीदवारों को उतारा था, लेकिन इस बार 9 महिलाओं को अवसर दिया गया है। इनेलो से अलग होकर नई पार्टी बनी जजपा ने केवल सात महिलाओं को टिकट दिया है।

इन टॉप 5 नेताओं पर बरसी 'लक्ष्मी'

हरियाणा सरकार में मंत्री रहे कैप्टन अभिमन्यु ने अपने कारोबार में पत्नी को साझेदार बना रखा है। ट्रांसपोर्ट, कृषि, ब्याज पर पैसा और दूसरे व्यवसायों में उनकी पत्नी साझेदार है। नतीजा, 2014 के शपथपत्र में अभिमन्यु ने 77 करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक होने का जिक्र किया था। लेकिन इस बार के चुनाव में उन्होंने जो शपथ पत्र दिया है, उसमें उनकी संपत्ति 120 फीसदी बढ़कर 170 करोड़ हो गई है। अजय चौटाला के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी नैना सिंह ने कारोबार संभाला। 2014 में नैना सिंह की संपत्ति 60 करोड़ थी, तो अब वह 91 करोड़ से ज्यादा हो गई है यानी 52 फीसदी का इजाफा हुआ है।

कुलदीप बिश्नोई ने अपनी पत्नी को खेती के बिजनेस में साझेदार बनाया है। पिछले पांच साल में उनकी आय 32 फीसदी बढ़ कर 80 करोड़ से 105 करोड़ पर पहुंच गई। अभय चौटाला की पत्नी के नाम भी प्रॉपर्टी, बैंक ब्याज और खेती है। इनकी संपत्ति 54 बढ़ गई है। जो 2014 में 43 करोड़ थी, अब वह 66 करोड़ हो गई है। रणदीप सुरजेवाला के कारोबार में उनकी पत्नी का भी हिस्सा है। नतीजा, पांच साल में उनकी आय 173 फीसदी बढ़ गई। उनकी आय का ग्राफ चार से 12 करोड़ पर पहुंच गया।

इन नेताओं पर भी रही 'लक्ष्मी' की कृपा

पूर्व हुड्डा सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे कुलदीप शर्मा ने अपनी पत्नी को संपत्ति में हिस्सेदार बना रखा है। पांच वर्ष के दौरान उनकी संपत्ति में 189 फीसदी का इजाफा हो गया। संपत्ति चार से 11 करोड़ पर पहुंच गई। कई बार के विधायक रहे श्रीकृष्ण हुड्डा ने अपनी पत्नी को किराये, खेती और डेयरी के धंधे में साझीदार बना रखा है। उनकी आय भी 42 फीसदी बढ़ चुकी है। दस साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पत्नी आशा हुड्डा प्रॉपर्टी, किराये अन्य बिजनेस और खेतीबाड़ी में हिस्सेदार हैं। इनकी संपत्ति 2014 में आठ करोड़ थी, जो अब 15 करोड़ हो गई है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और मौजूदा राज्यसभा सांसद बीरेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी प्रेमलता को कारोबार में साझेदार बना रखा है। वे विधायक का चुनाव भी लड़ रही हैं। इनकी संपत्ति भी 45 फीसदी तक बढ़ गई है। पूर्व विधायक और मौजूदा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी परमिंद्र ढुल की संपत्ति में 53 फीसदी का इजाफा हुआ है। उनकी पत्नी खेती में हिस्सेदार है।

इसी तरह रघुबीर कादियान, महिपाल ढांढा, असीम गोयल, रईस खान, कृष्णलाल पंवार, सुखविंद्र की संपत्ति भी अच्छी खासी बढ़ चुकी है। बलकौर सिंह, जो कि शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर विधायक बने थे, पांच साल में उनकी संपत्ति 369 प्रतिशत बढ़ चुकी है। यानी 2014 में उनकी संपत्ति 28 लाख थी, इस बार वह एक करोड़ के पार चली गई है।

इन नेताओं की संपत्ति में आई गिरावट

एडीआर रिपोर्ट की मानें तो डॉ. पवन सिंह के कारोबार में उनकी पत्नी का जिक्र नहीं है। उनकी संपत्ति में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। बलवंत सिंह की संपत्ति 21 फीसदी ही बढ़ सकी। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला की संपत्ति में उनकी पत्नी के हिस्सेदार होने का जिक्र नहीं है। नतीजा, उनकी संपत्ति केवल नौ फीसदी ही बढ़ सकी। पांच साल में उन्हें केवल 42 लाख रुपये का फायदा हुआ है। अब उनकी आय चार करोड़ से ज्यादा है।

इसी तरह रामचंद्र कंबोज की संपत्ति एक फीसदी घट गई है। रणबीर गंगवा की आय 16 फीसदी कम हो चुकी है। पांच साल पहले उनकी आय 10 करोड़ थी, जो अब 9 करोड़ रह गई है। इसी तरह ललित नागर की संपत्ति भी 15 फीसदी कम हो गई है। पहले उनके पास 11 करोड़ रुपये की संपत्ति थी, जो कि अब घटकर 9 करोड़ रह गई है।
 
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विस चुनावः हरियाणा में ‘ताज’ जीतने के लिए तेज हुआ आखिरी दौर का ‘आक्रमण’, स्टार वॉर भी बढ़ी

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हरियाणा के रण में ‘ताज’ के लिए आखिरी दौर का ‘आक्रमण’ और तेज हो गया है। चुनावी समर में उतरे विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने अपने प्रतिद्वंदियों पर जुबानी हमले तेज कर दिए हैं। सत्ता के लिए विरोधियों को शिकस्त देने में जुटे यह प्रत्याशी पूरा दम लगा रहे हैं। इतना ही नहीं आखिरी दौर में पार्टियों की स्टार वॉर भी बढ़ गई है।

इसके जरिए सभी राजनीतिक दल चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी जोर आजमाइश में लगे हुए हैं। मंचों से लेकर सोशल मीडिया तक प्रत्याशी विरोधियों की नाकामियों का खुलकर बखान कर रहे हैं। पिछले दो दशक के  सियासी सफर को देखें तो वर्ष 2014 से लेकर अब तक हरियाणा में सत्ता भाजपा के हाथ रही।

मुख्यमंत्री का ताज मनोहर लाल के सिर सजा। वर्ष 2005 से 2014 तक सत्ता पर कांग्रेस काबिज रही और ताज भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सिर सजा। सन 1999 से 2005 तक सत्ता इंडियन नेशनल लोकदल के पास थी और ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री रहे। अब वर्ष 2019 के चुनावी दंगल में सत्ता और ताज के लिए भाजपा, कांग्रेस, जजपा और इनेलो चारों राजनीतिक दल मुख्य रूप से मुकाबले में बने हुए हैं।

जबकि  अन्य सियासी दल भी चुनाव रण में उतरकर विरोधियों को टक्कर देने की कोशिश में जुटे हैं। अब देखना यह है कि इस सियासी समर में कौन सा दल जंग फतेह कर सत्ता पर अपना कब्जा करता है और किसके सिर मुख्यमंत्री का ताज सजता है।
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खुली जीप में निकले गौतम गंभीर तो दीदार को उमड़ी भीड़, लगे भारत माता जय के नारे

हॉकी के मैदान से राजनीति की पारी खेलने आए अर्जुन अवॉर्डी संदीप सिंह सूरमा को क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी गौतम गंभीर का साथ मिला है। शुक्रवार को भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने संदीप सिंह के पक्ष में रोड शो निकाल कर चुनाव प्रचार किया। गौतम गंभीर को देखने के लिए काफी संख्या में लोग जुटे।

राजनीतिक पारी शुरु करने के बाद गौतम गंभीर पहली बार पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर पहुंचे तो हजारों लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाकर उनका अभिवादन किया। दोनों खिलाड़ियों ने सरस्वती मन्दिर में पूजा अर्चना कर जीत का आशीर्वाद मांगा। तीर्थ पुरोहित दीपक पचौली ने गौतम गंभीर व संदीप सिंह को केसर से तिलक लगाकर उन्हें नारियल, चुनरी व चांदी का सिक्का भेंट स्वरुप में प्रदान किया। 
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कांग्रेस के दिग्गजों ने झोंकी ताकत, मनीष तिवारी, अशोक गहलोत और राजीव शुक्ला ने भी संभाला मोर्चा

पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके मंत्री कांग्रेस को कोसते रहते हैं। भाजपा के कारण देश की बर्बाद हो रही अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए उनके पास कोई उपाय नहीं हैं। भारत की अर्थव्यवस्था उस तरह गोते खा रही है जैसे कोई जहाज डूबने को होता है। तिवारी चंडीगढ़ में कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि भारत की डूबती अर्थव्यवस्था को देखते हुए असुरक्षित निवेशकों ने साल के पहले चार महीनों में ही अरबों डॉलर की पूंजी भारत से निकाल कर विदशों में लगा दी है। देश के लोगों का बैंकिंग प्रणाली से विश्वास उठ चुका है और मुंबई में पंजाब-महाराष्ट्र बैंक के 16 लाख खातेदारों को अपनी पूंजी के लाले पड़े हुए हैं, तीन लोग इस आघात के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि देश में जब तक सांप्रदायिक अस्थिरता रहेगी तब तक अर्थव्यवस्था की स्थिति गंभीर बनी रहेगी। आर्थिक जर्जरता किसी प्राकृतिक कारण से नहीं, बल्कि सरकार के कारण पैदा हुई है। नोटबंदी का गलत निर्णय और बेतरतीब ढंग से लाई गई जीएसटी दो सबसे बड़े कारण हैं, जिनकी वजह से अर्थव्यवस्था आज आईसीयू में पहुंच चुकी है। 
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