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क्या नौकरी में आ रही परेशानियां वर्ष 2021 में हो जाएंगी समाप्त ? जानिए अनुभवी एस्ट्रोलॉजर्स से
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क्लैट 2019 : सोशल मीडिया से दूरी बनाकर की तैयारी, पाई 26वीं रैंक, दिए कारगर टिप्स

क्लैट में ऑल इंडिया 26वीं रैंक हासिल करने वाली अदिति सेठ ने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर तैयारी की।

16 जून 2019

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Digital Edition

Prayagraj News: गुजरात से विशेष ट्रेन में आए 3674 श्रमिक, सभी को कराया गया होम क्वारंटीन

गुजरात से तीन विशेष ट्रेनों की मदद से बृहस्पतिवार को भी 3674 श्रमिक तथा अन्य लोग आए। सूरत से आई तीसरी ट्रेन में छात्र-छात्रा तथा अन्य लोग भी शामिल रहे। चिकित्सीय परीक्षण और भोजन बाद इन्हें करीब 114 बसाें से गृह जनपद भेजा गया। प्रयागराज के श्रमिकों को भी बसों से उनके गांव भेजा गया। सभी को होम क्वारंटीन कराया गया है। इस तरह से दो दिनों में गुजरात और पंजाब से यहां सात ट्रेनों में 8164 श्रमिक तथा अन्य लोग आ चुके हैं। इनमें प्रयागराज के श्रमिकों की संख्य करीब एक हजार हैं।

गुजरात के भुज से चलने वाली विशेष ट्रेन सुबह 7.22 बजे ही जंक्शन पर पहुंच गई। इनमें कुल 1217 श्रमिक रहे। प्लेटफार्म पर ही चिकित्सीय परीक्षण किया गया। फिर उन्हें स्टेशन परिसर में बने आश्रय स्थल में ठहराया गया। वहां भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने के बाद 36 बसों से गृह जनपद भेजा गया। सूरत से दूसरी ट्रेन भी दिन में करीब डेढ़ बजे आई। इनमें 1230 श्रमिक आए।

आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन्हें 39 बसों से भेजा गया। तीसरी ट्रेन भी सूरत से करीब सात बजे यहां आई। इसमें 1227 लोग आए। इसमें श्रमिकों के अलावा छात्र-छात्राओं तथा अन्य लोगाें की भी बड़ी संख्या रही। इन्हें 39 बसों की मदद से गृह जनपद भेजा गया। इससे पहले बुधवार को गुजरात से तीन तथा पंजाब से एक ट्रेन में 4490 श्रमिक आए थे। 
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Pratapgarh: गुजरात से आए मजदूरों को नहीं देना पड़ा बस का किराया 

गुजरात के साबरमती से आने वाले मजदूरों को बस का किराया नहीं देना पड़ा। प्रदेश सरकार बसों को किराये के रूप में 45,000-45,000 रुपये का भुगतान करेगी। ट्रेन का किराया चुकता करने वाले मजदूरों को जब यह जानकारी हुई कि उन्हें बस का किराया नहीं देना है तो उन्होंने राहत की सांस ली। 

गुजरात से आने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में हमीरपुर, चित्रकूट, बलरामपुर, गोरखपुर, मऊ, गाजीपुर, बलिया, कुशीनगर, सिध्दार्थनगर, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, अयोध्या, वाराणसी, सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, ज्ञानपुर, आगरा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, मथुरा, अलीगढ़, हाथरथ, बुलंदशहर, कानपुर, इटावा, मैनपुरी, उन्नाव, कन्नौज, फेतहपुर, कौशांबी, सीतापुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, झांसी आदि जिलों के 1172 मजदूर सवार थे।

इन लोगों को घरों तक छोड़ने के लिए परिवहन निगम की 40 बसें लगाई गई थीं। ट्रेन से उतरने वाले मजदूरों को सीधे बसों में बैठाया गया। मजदूरों को जब यह जानकारी हुई कि बस का किराया नहीं देना है तो वह बेहद खुश हुए। एआरएम एमआर भारती ने बताया कि शासन ने प्रति बस के लिए 45,000-45,000 रुपये का भुगतान करने को कहा है।
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Pratapgarh: सफर के दौरान मिली एक प्लेट खिचड़ी और आम की चटनी

गुजरात के साबरमती से 22 घंटे में स्पेशल ट्रेन से प्रतापगढ़ पहुंचे प्रवासी मजदूरों को रेलवे की तरफ से रास्ते में एक बार मुफ्त खाना और पानी दिया गया। श्रमिकों ने बताया कि कटनी में ट्रेन रुकने के बाद किसी को बाहर नहीं निकलने दिया गया। यहां ट्रेन में सवार लोगों को खाने के लिए खिचड़ी और आम की चटनी दी गई। 

ट्रेन मंगलवार शाम 6.55 बजे साबरमती स्टेशन से छूटी। अहमदाबाद, सूरत के साथ गुजरात के अन्य इलाकों में रहने वाले यूपी के 50 जिलों के 1172 लोगों को लेकर ट्रेन प्रतापगढ़ के लिए रवाना हुई। ट्रेन में सवार मिर्जापुर जनपद के लालगंज हलिया मतवार निवासी रविशंकर, बुधिराम, दाऊ ने बताया कि वे दिहाड़ी मजदूर हैं। सूरत में रहते थे।

लॉकडाउन के चलते फंस गए थे। उनकी जेब में किराया तक नहीं था। मकान मालिक ने किराया देकर सभी को घर जाने की अनुमति दे दी। रविशंकर ने बताया कि उसके साथ चार साल का बेटा उजाला, छह साल का शनि और सात साल का शिवम के साथ पत्नी थी। मंगलवार शाम छह बजे उन्हें स्टेशन पर बुलाया गया।

थर्मल स्क्रीनिंग के बाद बारी-बारी सभी को ट्रेन में बैठाया गया। ट्रेन में बैठते समय एक-एक बोतल पानी दिया गया था। सुबह ट्रेन कटनी पहुंची। यहां दो मिनट के लिए रोका गया। गेट को बाहर से लॉक कर दिया गया था। एक-एक बोतल पानी के साथ खिचड़ी और आम की चटनी खाने के लिए दी गई। ट्रेन के प्रतापगढ़ पहुंचने के बाद ढंग का खाना नसीब होने पर मजदूरों के चेहरे खिल गए। 

 
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गुजरात: बिनौला के खेतों में 1.30 लाख बच्चों को अवैध तरीके से मजदूरी पर लगाया गया

गुजरात में कपास की खेती के जरिये बिनौला उत्पादन के लिए करीब 1.30 लाख बच्चों को अवैध तरीके से खेतों में मजदूरी पर लगाया गया है। मजदूरी करने वाले इन बच्चों में बड़ी संख्या आदिवासी बच्चों की है।

एक दिन के लिए मिलती है 150 रुपये मजदूरी
शहर स्थित एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने यह दावा किया है। इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य श्रम विभाग के एक अधिकारी ने कहा है कि वह एनजीओ द्वारा चिह्नित संबंधित क्षेत्रों में टीमों को भेजेंगे और यदि कोई भी गड़बड़ी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी। एक गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन के सुधीर कटियार ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि बीज कंपनियों से किसानों को कम कीमत मिलना इसकी बड़ी वजह है और इसी के चलते खेती के लिए व्यस्कों के बजाय बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें कम पैसे देने पड़ते हैं। कटियार ने दावा किया कि आदिवासी बच्चों को एक दिन की मजदूरी सिर्फ 150 रुपये दी जाती है।

उन्होंने बताया कि 10 साल पहले उत्तरी गुजरात में इस तरह के खेतों में बच्चों से काम कराने को लेकर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के बाद अब यह उद्योग बनासकांठा, साबरकांठा, अरवल्ली, महीसागर और छोटा उदयपुर जिलों में स्थानांतरित हो गया। कटियार ने कहा, हालांकि स्थानांतरण की वजह से पलायन और बाल तस्करी दक्षिणी राजस्थान क्षेत्र में उल्लेखनीय रूप से कम हुई लेकिन बिनौला उद्योग में बाल मजदूरी जारी है क्योंकि स्थानीय आदिवासी बच्चे इन खेतों में काम कर रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

गुजरात में भाजपा कांग्रेस विधायकों को पैसे देकर दिलवा रही इस्तीफा:  अभिषेक मनु सिंघवी 

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भाजपा पर गुजरात में कांग्रेस विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया। सिंघवी ने रविवार को कहा, गुजरात में विधायिका भाजपा का मोहरा बन गई है। भाजपा के लिए यह एक व्यावसायिक खेल है, जिसमें तीन ‘टी’ शामिल हैं। ये तीन टी हैं, विधायकों के साथ ट्रेडिंग, ट्रैफिकिंग और ट्रांसेक्शनिंग। 

सिंघवी ने दो ऑडियो टेप जारी करते हुए कहा, इन टैप में एक विधायक अक्षय पटेल हैं, जो 2020 के शुरुआत में हमारे साथ थे। उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए एक पार्टी की ओर से 50 से 52 करोड़ रुपये की पेशकश की गई। यह आप सबके सामने है। यह अस्वीकार्य है और मुझे यह कहना होगा कि अभी तक किसी ने भी इसका खंडन नहीं किया है। दूसरा टैप कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले एक और विधायक कांकरिया का है। उन्होंने भी यह स्वीकार किया है कि इस्तीफा देने के बदने उन्हें भाजपा की ओर से टिकट मिलेगा या पैसा।
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गुजरात के तट पर अरब सागर में डूब रहे कार्गो जहाज से 12 क्रू को कोस्ट गार्ड ने बचाया

कोस्ट गार्ड ने गुजरात के तट पर स्थित ओखा से करीब 18 किलोमीटर दूर अरब सागर में डूब रहे कार्गो जहाज एमएसवी कृष्ण सुदामा से 12 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। यह जानकारी अधिकारियों ने रविवार को दी। 

एमएसवी कृष्ण सुदामा में 905 टन चावल और चीनी थी
भारतीय कोस्ट गार्ड (आईसीजी) ने बताया कि 26 सितंबर को करीब नौ बजे रात में ओखा स्थित कोस्ट गार्ड को कार्गो जहाज में पानी भरने की सूचना मिली। यह जहाज 26 सितंबर की सुबह गुजरात में मुंद्रा से जिबूती के लिए रवाना हुआ था और इसमें 905 टन चावल और चीनी थी। सूचना मिलते ही तत्काल तलाशी और बचाव टीम को रवाना किया गया। कोस्ट गार्ड शिप सी-411 को ओखा से, सी-161 को मुंद्रा से घटनास्थल की ओर भेजा गया।

साथ ही मदद के लिए एमवी साउदर्न रॉबिन को भी रवाना किया गया। साउदर्न रॉबिन से सटीक जगह की जानकारी के बाद कोस्ट गार्ड शिप सी-411 ने तलाशी अभियान चलाया और डूब रहे जहाज से 12 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। रात होने की वजह से तलाशी अभियान काफी मुश्किल भरा था। साथ ही समुद्र में मलबा बिखरा होने और मौसम के अनुकूल नहीं होने से भी दिक्कत आई। कोर्ट गार्ड शिप सी-161 ने इलाके में अभियान चलाकर यह पता लगाया कि कहीं डूबते हुए जहाज से तेल रिसाव तो नहीं हुआ।
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युद्धपोत आईएनएस विराट गुजरात के अलंग तट पहुंचा, किया जाएगा नष्ट

नौसेना में सबसे लंबे समय तक सेवा देना वाला युद्धपोत आईएनएस विराट मंगलवार का गुजरात के अलंग तट पर पहुंचा, जहां इसे नष्ट (डिसमेंटल) किया जाएगा। तीन साल पहले नौसेना ने आईएनएस विराट को सेवानिवृत्त कर दिया था। आईएनएस विराट ने शनिवार को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड से आखिरी यात्रा शुरू की थी और सोमवार शाम यह भावनगर के अलंग पहुंच गया था। अलंग के शिप ब्रेकिंग यार्ड में इसे नष्ट किया जाएगा और स्क्रैप के तौर पर इसकी बिक्री की जाएगी।

38.54 करोड़ रुपये में गुजरात की कंपनी ने खरीद था
नौसेना में 1987 में शामिल किए गए आईएनएस विराट को श्रीराम ग्रुप ने इस साल हुई नीलामी में 38.54 करोड़ रुपये में खरीदा था। ग्रुप के चेयरमैन मुकेश पटेल ने बताया, सरकारी अधिकारी शिप ब्रेक्रिंग कोड के तहत जहाज को नष्ट करने की औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 28 सितंबर से इसे नष्ट करने का काम शुरू होगा।
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गुजरात में गोरधन झड़फिया पर दाउद के हमले की साजिश से तेज होगी ध्रुवीकरण की सियासत, पुलिस ने उन्हें क्यों बताया हिंदू नेता!

आईएनएस विराट
गुजरात में पूर्व गृह राज्य मंत्री गोरधन झड़फिया की हत्या की साजिश को क्या हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का राजनीतिक रंग देना शुरू कर दिया गया है और इसकी शुरुआत खुद गुजरात पुलिस ने अपने पहले ट्वीट से की है। बुधवार को गुजरात पुलिस ने अहमदाबाद के एक होटल से दाउद इब्राहिम के दाहिने हाथ छोटा शकील के शार्प शूटर इरफान को गिरफ्तार करके जो खुलासा किया वह डराने वाला है।

पुलिस के मुताबिक इरफान और उसका एक साथी राज्य के पूर्व गृह राज्य मंत्री और भाजपा नेता गोरधन झड़फिया की हत्या करने वाले थे, लेकिन पुलिस को यह जानकारी मिल गई और इस साजिश को विफल कर दिया गया। लेकिन इस मामले की जानकारी देने के लिए पुलिस ने जो पहला ट्वीट किया उसमें झड़फिया का परिचय राज्य के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा नेता के रूप में न देकर हिंदू नेता के रूप में दिया है।
इस मामले का एक सियासी पहलू भी है। गोरधन झड़फिया पटेलों के बेहद लोकप्रिय नेता हैं। अगर उन पर किसी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठन या दाउद और छोटा शकील जैसे अपराधी गिरोह हमला करते हैं, तो इससे गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ पटेलों में जबर्दस्त गुस्सा पैदा होगा। साथ ही क्योंकि झड़फिया 2002 में गृह राज्य मंत्री थे, जब गोधरा कांड के बाद हिंदुत्व का ज्वार फूटा था। उनकी विश्व हिंदू परिषद और प्रवीण तोगड़िया से नजदीकी भी जगजाहिर रही है। इसलिए उनकी एक हिंदू नेता की पुरानी छवि को फिर से पेश करके हिंदुत्व का ज्वार भी फिर पैदा हो सकता है। क्या इसीलिए गुजरात पुलिस ने अपने पहले ट्वीट में उन्हें हिंदू नेता बताया। जबकि उनकी पहचान हिंदू नेता से ज्यादा पूर्व गृह राज्य मंत्री और पाटीदार नेता की ज्यादा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक गोरधन झड़फिया को मारने आए छोटा शकील के शूटर की गिरफ्तारी से भाजपा को एक बड़ा राजनीतिक हथियार हाथ लग गया है। पार्टी इसे जितना मुद्दा बनाएगी उसका नुकसान सीधे कांग्रेस को होगा, जो हार्दिक पटेल के जरिए पटेलों को अपनी ओर लाने की पुरजोर कोशिश में है। राज्य में कई विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव और मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनावों में भी झड़फिया का मुद्दा हिंदू ध्रुवीकरण में मदद कर सकता है।

गुजरात पुलिस जब इस साजिश की जानकारी मीडिया को दे रही थी, उस समय गोरधन झड़फिया प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल के साथ सौराष्ट्र के दौरे पर थे। उन्होंने फोन पर अमर उजाला को बताया कि यह मामला उन्हें भी चौंकाता है, क्योंकि इसके पहले उन्हें कभी कोई धमकी नहीं मिली। लेकिन अगर पुलिस ने किसी को गिरफ्तार किया है, तो जरूर उसका आधार होगा। सवाल है कि झड़फिया आखिर दाउद गिरोह के निशाने पर क्यों हैं। कहा जा रहा है कि वह तब राज्य के गृह मंत्री थे, उसी समय गोधरा कांड हुआ और उसके बाद मुसलमानों के खिलाफ राज्यव्यापी हिंसा हुई।

लेकिन इतने लंबे अंतराल के बाद झड़फिया की हत्या की साजिश थोड़ा इसलिए भी चौंकाती है कि 2002 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही गोरधन झड़फिया राज्य भाजपा में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के प्रतीक बन गए थे। उन्होंने न सिर्फ राजभवन में मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण में अपना नाम पुकारे जाने पर वहीं खड़े होकर शपथ लेने से इंकार कर दिया, बल्कि उसके बाद भाजपा के भीतर मोदी विरोधियों को गोलबंद करने में जुट गए। 2002 से लेकर दिसंबर 2007 के विधानसभा चुनावों तक गोरधन झड़फिया ने भाजपा के मुख्य जनाधार राज्य के ताकतवर पाटीदार समुदाय (पटेल) को पूरे गुजरात में घूम-घूम कर मोदी के खिलाफ गोलबंद किया। करीब तीन दर्जन भाजपा के विधायकों और पूर्व सांसदों के साथ उन्होंने भाजपा छोड़ी और अपने तमाम साथियों को कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़वाया।

2007 का विधानसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के लिए सबसे मुश्किल चुनाव था, जिसमें घर में बैठकर केशूभाई पटेल और भाजपा के कांशीराम राणा, सुरेश मेहता, वल्लभ भाई कथीरिया, सिद्धार्थ पटेल, बाबू भाई उंघाड़ जैसे तमाम दिग्गज नेता खुलकर मोदी और भाजपा के खिलाफ झड़फिया और कांग्रेस के समर्थन में थे।

सिर्फ भाजपा ही नहीं गुजरात में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेक पदाधिकारी भी खुलेआम भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव प्रचार में सक्रिय थे। विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया और भाजपा से अलग होकर अपनी पार्टी बना चुकी उमा भारती भी मोदी और भाजपा के खिलाफ सक्रिय थे।

इस पूरे मोदी विरोध की कमान और केंद्र बिंदु गोरधन झड़फिया ही थे। दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से उनका सीधा संवाद था। लेकिन 2007 की इस कठिन चुनौती से मुकाबला करते हुए नरेंद्र मोदी ने अपने करिश्मे और मेहनत से चुनाव में जीत दर्ज की। इसके बाद मोदी विरोध मंद पड़ गया। लेकिन गोरधन झड़फिया ने अपनी मुहिम जारी रखी और 2012 के विधानसभा चुनावों में झड़फिया ने केशूभाई पटेल के नेतृत्व में अलग पार्टी बनाकर कांग्रेस के साथ एक रणनीतिक समझदारी के तहत हर विधानसभा सीट पर उम्मीदवार उतारे।

इस बार केशूभाई पटेल खुलकर मैदान में थे। लेकिन तब तक साबरमती और नर्मदा में काफी पानी बह गया था और नरेंद्र मोदी हर गुजराती की इस आकांक्षा का प्रतीक बन चुके थे कि गुजरात का बेटा देश का पंत प्रधान (प्रधानमंत्री) बने। यह विधानसभा चुनाव मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने इसी गुजराती आकांक्षा को मुद्दा बनाकर जीता और केशूभाई पटेल व गोरधन झड़फिया की पार्टी को महज चार सीटें मिलीं।

इसके बाद केशूभाई पटेल घर बैठ गए और करीब डेढ़ साल सियासी बियाबान में बिताने के बाद गोरधन झड़फिया ने 2013 के आखिर में संघ के कुछ शीर्ष नेताओं की मदद से भाजपा में वापसी कर ली। उन्होंने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को अपना नेता मान लिया।हालांकि कभी अमित शाह झड़फिया से राजनीतिक रूप से कनिष्ठ थे। लेकिन 2013 में शाह को मोदी के प्रभाव से भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया था और उनकी राष्ट्रीय विकास यात्रा शुरू हो चुकी थी।

उसके बाद से झड़फिया पूरी तरह भाजपा और मोदी के प्रति समर्पित और निष्ठावान हैं। 2017 के गुजरात विधानसभा चुनावों में भाजपा ने पाटीदारों में उनकी लोकप्रियता का इस्तेमाल हार्दिक पटेल की चुनौती से निबटने में किया और झड़फिया काफी हद तक पटेलों को वापस भाजपा की तरफ लाने में कामयाब भी रहे।

2019 के लोकसभा चुनावों झड़फिया को भाजपा ने उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया और वहां भी उन्होंने अपनी संगठन क्षमता का अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्हें भाजपा किसान मोर्चे का उपाध्यक्ष भी बनाया गया। फिलहाल गोरधन झड़फिया गुजरात में भाजपा को मजबूत बनाए रखने में जुटे हुए हैं। लेकिन भाजपा की समस्या है कि मोदी और शाह के दिल्ली आ जाने के बाद राज्य भाजपा के नेताओं की गुटबाजी काबू में नहीं आ रही है।

मुख्यमंत्री पद से आनंदी बेन पटेल की छुट्टी और उसके बाद पटेलों के कद्दावर नेता नितिन पटेल को दरकिनार करके विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री बनाए जाने से पाटीदार समाज चुनाव से पहले से ही असहज रहा है। हाल ही में जीतू वाघाणी की जगह महाराष्ट्र से आकर सूरत में बसे सीआर पाटिल को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने से पटेलों की नाराजगी और बढ़ गई है।

उधर कांग्रेस ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन के युवा नेता हार्दिक पटेल को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पटेलों को अपने साथ जोड़ने का दांव चल दिया है। जबकि विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता का पद भी सौराष्ट्र के मजबूत पाटीदार विधायक परेश धनानी के पास है। हार्दिक ने पूरे गुजरात में अपने दौरे तेज करके पटेलों को कांग्रेस के साथ जोड़ने की मुहिम तेज कर दी है।

ऐसे में भाजपा के लिए गोरधन झड़फिया की उपयोगिता और महत्व बेहद बढ़ गया है। अपनी जिम्मेदारी समझ कर गोरधन झड़फिया प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल के साथ पटेल बहुल सौराष्ट्र इलाके में लगातार दौरे कर रहे हैं। ऐसे समय में अचानक छोटा शकील के शूटर का अहमदाबाद में झड़फिया की हत्या के लिए आना चिंता पैदा करता है। गनीमत यह है कि पुलिस सतर्क थी और साजिश का भंडाफोड़ हो गया। लेकिन इरफान का दूसरा साथी फरार हो गया है, जो झड़फिया और गुजरात सरकार के लिए चिंता का सबब है।

इस पूरे मामले में कुछ सवाल भी उठते हैं। पहला सवाल है कि 2002 के तुरंत बाद जब झड़फिया मोदी के खिलाफ मैदान में उतर गए और भाजपा से भी बाहर हो गए तब उनकी सुरक्षा न के बराबर थी। कितनी बार वह दिल्ली के गुजरात भवन में पत्रकारों से घंटों बात करते थे। गुजरात और उसके बाहर भी वह बिना किसी सुरक्षा तामझाम के घूमते थे। लेकिन तब उन पर हमले की कोई कोशिश नहीं हुई।

इसका जवाब यह दिया जा सकता है कि तब क्योंकि वह मोदी और भाजपा के खिलाफ थे, इसलिए वह आतंकवादियों और दाउद जैसे माफिया के निशाने से हट गए। लेकिन बाद में जब वह भाजपा में शामिल होकर मोदी और शाह के वफादार सिपहसालार हो गए हैं, तो 2002 की हिंसा को लेकर उन पर खतरा बढ़ गया है। गोरधन झड़फिया को बेहद सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। गुजरात सरकार को झड़फिया जैसे लोकप्रिय और विचारवान नेता की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे।
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कांग्रेस ने गुजरात के चर्चित वेंटिलेटर पर उठाए सवाल, कहा- बिना ट्रायल के राज्य सरकार ने अपनाया

कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सनसनीखेज मामला उठाया है। उन्होंने गुजरात सरकार पर एक ऐसी कंपनी को प्रमोट करने का आरोप लगाया है, जिसकी एक बड़ी हिस्सेदारी रमेश भाई विरानी के पास है।

कांग्रेस का कहना है क़ि रमेश भाई विरानी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सूट तोहफे में दिया था। दिलचस्प बात यह है कि इस कंपनी के प्रोडक्ट धमन-1 को मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शानदार वेंटिलेटर कहा, जबकि यह एक आर्टिफिशियल मैनुअल ब्रीदिंग यूनिट (बैग) है। बताते हैं इस प्रोडक्ट के नतीजे सही नहीं पाए गए।

इतना ही नहीं बिना सही ट्रायल और परिणाम और अनुमोदन प्रक्रिया के पूरा हुए गुजरात सरकार ने इसे अपना भी लिया।

मुख्यमंत्री बोले, दस दिन में बनाया वेंटिलेटर

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के मुताबिक यह भी घटना एक घोटाले की तरफ इशारा कर रही है। खेड़ा के अनुसार चार अप्रैल को गुजरात के मुख्यमंत्री धमन-1 मशीन के उद्घाटन और सिविल अस्पताल को इसकी 1000 यूनिट देने के लिए गांधीनगर से अहमदाबाद आए।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री इस वेंटिलेटर को दस दिन से कम समय में तैयार करने के लिए अपने करीबी मित्र पराक्रम सिंह जडेजा और ज्योति सीएनसी नामक कंपनी की जमकर तारीफ करते हैं। खेड़ा का कहना है कि जबकि यह वैंटिलेटर है ही नहीं।

गुजरात के प्रचार से प्रभावित हुई कई राज्य सरकारें

खेड़ा के मुताबिक अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ने अपने एनेस्थेसिया विभाग की रिपोर्ट पर उसे अनुपयोगी बताकर वेंटिलेटर देने की मांग की है। लेकिन गुजरात सरकार ने इसे वेंटिलेटर के तौर पर प्रचारित करने के कारण कई राज्यों की सरकार ने इसमें रुचि दिखाई।

इतना ही नहीं भारत सरकार की कंपनी एचएलएल लाइफ केयर ने भी ज्योति सीएनसी को 5000 धमन-1 मशीन देने का ऑर्डर कर दिया है। यह सभी ऑर्डर कोविड-19 के संक्रमण को लेकर हुए और मशीन कोविड-19 संक्रमितों के इलाज में बिल्कुल कारगर नहीं है।

जब यह सच्चाई सामने आनी शुरू हुई तो राज्य सरकारों ने आर्डर कैंसिल करना आरंभ कर दिया। अब राज्य की प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) जयंती रवि को इसके बचाव में प्रेसवार्ता करनी पड़ रही है।

चौंकाने वाली बात

ज्योति सीएनसी के सीएमडी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के मित्र पराक्रम सिंह जडेजा हैं। इस कंपनी का 74,02,750 शेयर एकनाथ इंफ्राकॉन एलएलपी के पास है। जबकि 60 लाख आठ हजार (46.76 फीसदी) शेयर रमेश भाई विरानी के पास है।

धमन-1 को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी नहीं मिली है। इतना ही नहीं अब यह भी खुलासा हो रहा है कि इसे केवल मरीज पर परीक्षण करके ही मुख्यमंत्री के स्तर से मान्यता दे दी गई।
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यूपी में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की बने सूची, 15 दिन कराया जाए क्वारंटीन: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए राज्य की सीमाओं पर कड़ी निगरानी करने का निर्देश दिया है। कहा है कि यूपी में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की सूची बनाई जाए और उनकी कड़ी निगरानी की जाए। बाहर से आने वाले हर व्यक्ति को 15 दिन के लए अनिवार्य रूप से क्वारंटीन किया जाए तथा उनके स्वास्थ्य की निगरानी के लिए हर चार सौ व्यक्ति पर एक अधिकारी की नियुक्ति की जाए। कोर्ट ने इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और कार्यवाही रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। 

प्रयागराज में कोरोना से इंजीनियर की मृत्यु और क्वारंटीन सेंटरों की दुर्दशा की शिकायत को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। इससे पूर्व अदालत ने प्रदेश सरकार से जिले के 11 सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं का ब्योरा तलब किया था।
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