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राजस्थान के चार शहरों में पारा माइनस से नीचे, मध्यप्रदेश में शीतलहर

मध्यप्रदेश : बालाघाट में स्कूटी को बचाने में पलटा ट्रक, चार की मौत, आठ की हालत गंभीर

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर गांगुलपारा के समीप उटघाटी में शुक्रवार शाम को स्कूटी चालक को बचाने के चक्कर में तेज रफ्तार से चल रहा एक ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। इस हादसे में ट्रक में सवार तीन महिलाओं एवं स्कूटी चालक की मौत हो गई और आठ अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

बालाघाट के पुलिस अधीक्षक (नगर)कर्णिक श्रीवास्तव ने बताया कि मृतकों की पहचान 35 वर्षीय सविता मरठे, 40 वर्षीय सुनीता पांचे, 42 वर्षीय यशोदा पांचे एवं 22 वर्षीय अरुण परिहार के रूप में की गई है। अरूण स्कूटी चालक था, जबकि बाकी तीनों ट्रक में सवार थीं।

उन्होंने कहा कि इस हादसे में ट्रक में सवार आठ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है।

श्रीवास्तव ने बताया कि हादसे के बाद ट्रक चालक एवं खलासी वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए। उन्होंने कहा कि ट्रक हादसे के वक्त उकवा से बालाघाट की ओर आ रहा था और ट्रक में सवार जो 11 लोग हताहत हुए हैं, उन सभी ने हादसे के कुछ समय पहले ही इस ट्रक चालक से लिफ्ट मांगी थी और अपने गांव पायली जा रहे थे।

 
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शहडोल में छुट्टी पर गए सात डॉक्टर, दो और बच्चों की मौत

मध्यप्रदेश के शहडोल में पिछले 27 दिन के दौरान 30 बच्चों की जान जा चुकी है। इनमें 24 मासूमों ने अकेले जिला अस्पताल में दम तोड़ा। इसके बावजूद चिकित्सकों की लापरवाही कम नहीं हो रही है। बताया जा रहा है कि दंत चिकित्सक को सिविल सर्जन बनाने के खिलाफ दो बार सामूहिक इस्तीफे की पेशकश करने वाले 21 चिकित्सकों में से 7 डॉक्टर छुट्टी पर चले गए हैं। विरोधियों का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डीके सिंह (महिला रोग विशेषज्ञ) 12 दिसंबर से ही छुट्टी पर हैं। जिला चिकित्सालय में करीब 10 दिन से जारी अवरोध के बीच गुरुवार तड़के दो और नवजातों की मौत हो गई है। जिले में 27 नवंबर से अब तक यह 30वीं मौत है। इनमें से 24 बच्चों की मौत जिला चिकित्सालय में हुई है। वहीं, सिविल सर्जन डॉ. जीएस परिहार भी सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर को प्रभार सौंपकर एक सप्ताह के अवकाश पर चले गए हैं।

पांच का पहला और एक दिन का था दूसरा बच्चा
जिला चिकित्सालय में गुरुवार तड़के 3 बजे जिस बच्चे की मौत हुई, वह महज पांच दिन का था। देवरी गांव की लीलावती की पांच दिन पहले जिला चिकित्सालय में डिलीवरी हुई थी। नवजात को एसएनसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया था। इसी तरह गुरुवार देर शाम एसएनसीयू में भर्ती एक दिन उम्र के शिशु की मौत हो गई। निगवानी निवासी शिल्पी ने इस बच्चे को जन्म दिया था।

इस्तीफे पर अड़े 21 चिकित्सक
जिला चिकित्सालय में लगातार हो रही बच्चों की मौत के कारण सिविल सर्जन के पद से हटाए गए डॉ. वीके बारिया ने 23 से 29 दिसंबर तक सीएल का आवेदन दिया है। इसी तरह डॉ. मनोज जायसवाल ने 23 से 25 दिसंबर तक, डॉ. बीआर प्रजापति ने 23 से 26 दिसंबर तक, डॉ. सुनील स्थापक ने 23 से 27 दिसंबर तक सीएल का आवेदन दिया है। डॉ. मुकुंद चतुर्वेदी, डॉ. आरती ताम्रकार और डॉ. रेखा कारखुर ने भी सात दिन के मेडिकल अवकाश का आवेदन दिया है। ये सभी आवेदन बुधवार को दिए गए, जिन्हें सिविल सर्जन ने निरस्त कर दिया। इसके बावजूद ये सभी चिकित्सक गुरुवार को अस्पताल में ड्यूटी पर नहीं पहुंचे।
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जबलपुर में एसएएफ का सिपाही मृत पाया गया, आखिरी बार एक महिला को किया था कॉल

मध्यप्रदेश विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) का 30 वर्षीय सिपाही जबलपुर के रांझी इलाके में स्थित एसएएफ की छठी बटालियन परिसर में मृत मिला। उसने मौत से पहले होशंगाबाद की एक महिला को कॉल किया था। 

रांझी थाने के प्रभारी आर के मालवीय ने रविवार को बताया कि शनिवार की रात एसएएफ की छठी बटालियन परिसर की पुरानी फायरिंग रेंज में सचिन कनकुरे (30) मृत मिला। वह एसएएफ की छठी बटालियन में सिपाही था और परिसर में ही रहता था। उन्होंने कहा कि जहां पर उसका शव पाया गया, वह स्थान पहाड़ी पर है और सुनसान इलाका है। उन्होंने बताया कि उसके शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं पाया गया।

मालवीय ने कहा कि एसएएफ अधिकारियों को पुलिसकर्मियों की नियमित गिनती के दौरान शुक्रवार शाम को उनकी गुमशुदगी के बारे में पता चला था। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच के अनुसार, उसने आखिरी बार प्रदेश के होशंगाबाद जिले की एक महिला से अपने मोबाइल फोन से बात की थी।

होशंगाबाद का रहने वाला था
मालवीय ने कहा कि कनकुरे होशंगाबाद जिले का रहने वाला था और उसकी मौत का कारण अब तक पता नहीं चल पाया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

जबलपुर: सेना की मध्य कमान ने बहादुर सैनिकों को किया सम्मानित, विशिष्ट सेवा पुरस्कार से नवाजे गए जवान

देश की सुरक्षा में किए गए गौरवपूर्ण कार्यों के लिए बहादुर सैनिकों को पुरस्कृत किया गया। दरअसल, शनिवार सेना की मध्य कमान का अलंकरण समारोह आज जबलपुर छावनी के ग्रेनेडियर्स रेजिमेंटल सेंटर के कर्नल होशियार सिंह, पीवीसी परेड ग्राउंड में आयोजित हुआ। यहां भारतीय सेना की मध्य कमान ने अपने जाबांज सैनिकों को सम्मानित किया।

मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल आई एस घूमन ने अधिकारियों और अन्य रैंक के सैनिकों को वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया। जानकारी के अनुसार समारोह में 20 सेना पदक (वीरता), दो सेना पदक (उत्कृष्ट), आठ विशिष्ठ सेवा पदक और एक युद्ध सेवा पदक प्रदान किए गए।

इसके साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल ने सराहनीय और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 15 इकाइयों को ‘मध्य कमान इकाई प्रशस्ति पत्र’ भी प्रदान किया। लेफ्टिनेंट जनरल घूमन ने कहा कि सभी रैंकों के सैनिक पुरस्कार पाने वालों का अनुकरण करें और हमेशा सभी क्षेत्रों में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।

बता दें, परेड की सलामी के साथ अलंकरण समारोह की शुरुआत हुई। इस मौके पर पुरस्कार पाने वालों जवानों के अलावा सेना के वरिष्ठ अधिकारी, जिले के पूर्व सैनिक उपस्थित थे।

इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल आईएस घुमन ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व का दिन है। यह समय है जब हम अपने वीर जवानों को सम्मानित करते हैं। आज हर चीज में मुझे जज़्बा, सच्चाई और लगन दिखी।हमारी सरकार और फोज के जरिये जल्द नए प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार हमारे जवानों के बच्चों और परिवारों का पूरा सहयोग करेगी। 

उन्होंने आगे कहा कि हमारा चीन के साथ क्लेश हुआ। इसके साथ हमें एक बड़ी उपलब्धि भी मिली। हम हर चुनौती के लिए तैयार हो गए।देश की सुरक्षा और सम्मान में हम किसी भी तरह की कुर्बानी के लिए तैयार हैं। आज चीन हमें आंख नहीं दिखा सकता। चीन की सेना भी वापस जा रही है।

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सीधी बस हादसा: परीक्षा देने जा रहे छात्रों के कहने पर ड्राइवर ने बदला था रूट

मध्यप्रदेश के सीधी में मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। सतना जा रही बस मंगलवार सुबह करीब 7.30 बजे मध्यप्रदेश के सीधी जिले में 22 फीट गहरी बाणसागर नहर में गिर गई। हादसे में अब तक 51 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि सात लोगों की जान बच गई है। वहीं चार लोग अभी भी लापता हैं। जानकारी के अनुसार, नहर में बहाव तेज होने के कारण कुछ शव बह गए हैं। 51 शवों के पोस्टमॉर्टम के लिए रामपुर नैकिन में डॉक्टर कम पड़ गए। जिले भर से डॉक्टरों को बुलाया गया और सभी शवों का पोस्टमार्टम किया गया।

बताया जा रहा है कि इस बस को चुरहट, रामपुर नाइकिन, बादरबार और गोविंदगढ़ से सीधी होते हुए सतना पहुंचना था। बस चुरहट पहुंची, लेकिन उसके बाद रामपुर नैकिन से छात्रों के कहने पर ड्राइवर ने रूट बदल दिया। हादसे में बची एक छात्रा विभा प्रजापति का कहना है कि अगर उनका परीक्षा केंद्र सतना की जगह सीधी में होता तो शायद उनकी जान बच जाती।

छात्रा ने कहा सीधी में होता सेंटर तो बच जाती जान
हादसे में नर्सिंग की एक छात्रा विभा प्रजापति को स्थानीय लोगों ने बचा लिया। उसका कहना है कि परीक्षा केंद्र पर जल्दी पहुंचने के लिए बस तेज रफ्तार से चल रही थी। स्टूडेंट के अलावा बस में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे, जब बस अचानक से नहर में गिरी तो ड्राइवर ने कहा कि अपनी जान बचा सकते हो तो बचा लो। छात्रा ने कहा देखते ही देखते लोग नहर में बहने लगे। बह खुद भी पानी में डूबने लगी, लेकिन तभी मौके पर पहुंचे लोगों ने उसे बचा लिया।

सीधी: बस नहर में गिरते देख बच्ची ने लगा दी छलांग, बचाईं दो जान, सीएम शिवराज बोले- शिवरानी पर गर्व

जाम और खराब सड़क से बचने के लिए बस मार्ग बदल दिया

दरअसल, सीधी से सतना जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 39 चुहिया घाटी से होकर गुजरता है। घटिया और अधूरी सड़कों के कारण चुहिया घाटी पिछले कुछ दिनों से जाम है। चुहिया घाटी से पहले कई ट्रेनें बागवार गांव से गुजर रही हैं। बस के ड्राइवर ने भी जाम से बचने के लिए रूट बदल दिया।

एनटीपीसी और रेलवे का था एग्जाम
16 फरवरी को रेलवे, एनटीपीसी और नर्सिंग का एग्जाम था। जिसके लिए सतना और रीवा में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इसके अलावा नर्सिंग की छात्राओं का भी एग्जाम सतना में था। ऐसे में बस में अधिकतर छात्र शामिल थे। बताया जा रहा है कि परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने के लिए छात्रों के कहने पर ड्राइवर ने बस का रूट बदल लिया, ताकि छात्र समय से परीक्षा में शामिल हो सके। लेकिन रूट बदलना ही इस हादसे की वजह बना।

बांध के पानी को हटाने के बाद शुरू हुआ बचाव अभियान
हादसे के दौरान नहर में पानी का बहाव अधिक था। जब बचाव दल मौके पर पहुंचा, तो बस 22 फुट गहरी नहर में डूबी हुई थी। 40 किमी दूर बांध जलाशय से पानी रोकने के बाद, इसे सिहावल नहर की ओर मोड़ दिया। उसके बाद, नहर में पानी कम हो गया और गोताखोर नहर में उतर गए और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) का बचाव अभियान शुरू किया गया।

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सीधी बस हादसा : सुनहरे सपनों का भविष्य बनाने निकले थे, अब कभी नहीं लौटेंगे...

आज सुबह जिस वक्त लोग नींद से जागे भी नहीं थे, उस वक्त करीब 55 लोग एक बस में सवार होकर मध्यप्रदेश के सीधी जिले से सतना शहर के लिए निकले थे। सभी के कुछ सपने थे, जो इस सफर के जरिये पूरे होने थे।

किसी को नौकरी की तलाश थी, तो किसी को अपने परिजनों से मिलना था। लेकिन लगभग 40 लोगों का सपना अब कभी पूरा नहीं होगा। ये 40 यात्री काल के गाल में समा गए हैं। इनमें 12 ऐसे युवा भी थे जो रेलवे में नौकरी के लिए परीक्षा देने जा रहे थे। उनके मन में मुट्ठी भर ख्वाब थे, दिल में उम्मीद और आंखों में चमक थी। लेकिन उस एक पल में सब ओझल हो गया, जब बस रामपुर नैकिन के पास सोन नदी के लिए बनी बाणसागर नहर में जा गिरी। आपस में कुशलक्षेम पूछने वाली आवाजें अचानक बचाओ-बचाओ के चीत्कार में बदल गईं। कुछ आवाजें हमेशा के लिए खामोश हो गईं, तो कुछ ने जिंदगी का किनारा कर पकड़े रखा।

आखिरी मुलाकात
जब से होश संभाला, तब से सुनहरे भविष्य के सपने देखने शुरू कर दिए। सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया, परीक्षा पास करने के लिए जमकर मेहनत की। परीक्षा का दिन आया, तो सुबह-सुबह घर से कोई दही-शक्कर, तो मीठा खाकर और अपने बड़े-बुजुर्गों से सफल होने का आशीर्वाद लेकर निकल पड़े। तब न उन छात्रों ने सोचा था और ना ही उनके सिर पर हाथ रखने वाले अपनों ने कि अब जिस सफर पर वो जा रहे हैं, उससे कभी वापस नहीं लौटेंगे। बस यहीं तक का था साथ और यही हो जाएगी आखिरी मुलाकात।
 


मध्यप्रदेश के सीधी जिले में 54 यात्रियों को लेकर एक बस सतना जा रही थी। सीधी मार्ग पर छुहिया घाटी से होकर बस को सतना जाना था, लेकिन यहां जाम ज्यादा था, जिसके चलते चालक ने रूट बदल लिया। वह नहर के किनारे से बस ले जा रहा था। यह रास्ता काफी संकरा था और इसी दौरान ड्राइवर ने संतुलन खो दिया, जिसके चलते बस खाई में गिर गई। बता दें कि झांसी से रांची के जाने वाला हाईवे सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली होते हुए जाता है। यहां जगह-जगह सड़क खराब और अधूरी है। इस वजह से यहां आए दिन जाम की स्थिति रहती है।
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मध्यप्रदेश में दर्दनाक हादसा : यात्रियों से भरी बस नहर में गिरी, 20 महिलाओं और एक बच्चे समेत 51 की मौत

सीधी बस हादसा
मध्यप्रदेश के सीधी में मंगलवार को बड़ा सड़क हादसा हो गया। सीधी के रामपुर नैकिन थाना इलाके में 54 यात्रियों से भरी बस नहर में गिर गई। नहर से 51 शव निकाले जा चुके थे। इस दर्दनाक हादसे के बाद सात लोगों को बचाया गया, जबकि ड्राइवर तैरकर बच निकला। उसे हिरासत में लिया है।

मरने वालों में दो साल का बच्चा भी शामिल है। इसमें 10 छात्र भी शामिल हैं जो परीक्षा देने जा रहे थे। दो युवतियों ने साहस दिखाते हुए सात यात्रियों की जान बचाई। ड्राइवर ने तैरकर अपनी जान बचाई। हादसे में प्रभावित सभी यात्री सीधी व आसपास के गांव के हैं।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बस हादसे को लेकर सीधी के कलेक्टर से बात की। दर्दनाक हादसे को देखते हुए शिवराज सिंह ने गृह प्रवेश कार्यक्रम को स्थगित कर दिया। मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गई। इनमें 10-10 हजार रुपये तत्काल प्रभाव से पीड़ित परिजनों को दिए जाएंगे।

जानकारी के मुताबिक, जिस समय यह हादसा हुआ, बस सीधी से सतना जा रही थी। साइड लेने के दौरान वह पुलिया से सीधे नहर में जा गिरी। घटना की खबर मिलते ही आसपास के ग्रामीण व अन्य लोग बस में फंसे लोगों की मदद में जुट गए। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठे हो गए। एसडीआरएफ और गोताखोरों ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया। घटना की जानकारी लगते ही बस में सवार लोगों के स्वजन भी मौके पर पहुंच रहे हैं मौके पर कोहराम मचा हुआ है। नहर की गहराई 20 से 22 फीट बताई जा रही है। हादसे के चार घंटे बाद 11:45 बजे क्रेन की मदद से बस को बाहर निकाला गया।

चालक की जल्दबाजी ने लील लीं जिंदगियां 
पुलिस के मुताबिक, बस की क्षमता 32 सवारियों की थी, लेकिन इसमें 54 यात्री भर लिए गए थे। बस को अपने तय समय पर सुबह पांच बजे रवाना होना था, लेकिन ये सुबह तीन बजे रवाना हो गई। सीधी मार्ग पर छुहिया घाटी से होकर बस को सतना जाना था, लेकिन यहां जाम की वजह से ड्राइवर ने रूट बदल दिया। वह नहर के किनारे से बस ले जा रहा था। यह रास्ता काफी संकरा था और इसी दौरान ड्राइवर ने संतुलन खो दिया, जिसके चलते बस खाई में गिर गई। बस के नहर में गिरते ही ड्राइवर बालेंद विश्वकर्मा ने तैरकर अपनी जान बचा ली। वह रीवा जिले के हरदुया सेमरिया गांव का रहने वाला है। बता दें कि झांसी से रांची के जाने वाला हाईवे सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली होते हुए जाता है। यहां जगह-जगह सड़क खराब और अधूरी है। इस वजह से यहां आए दिन जाम की स्थिति रहती है।

इस बस को सीधी से चुरहट, रामपुर नैकिन, बधबार और गोविंदगढ़ होते हुए सतना पहुंचना था। चुरहट तक बस आई, लेकिन उसके बाद रामपुर नैकिन से छात्रों के कहने पर ड्राइवर ने रूट बदल लिया। इन छात्र की परीक्षा थी। इसलिए उन्हें वक्त पर सतना पहुंचना था।

क्या थे हादसे के कारण 
-बस की क्षमता 34 सवारियों की थी लेकिन इसमें 62 लोग बैठे थे। 
-सीधी से सतना जाने वाला नेशनल हाईवे-39 छुहिया घाटी से गुजरता है। जगह-जगह सड़क खराब और अधूरी होने से पिछले कुछ दिनों से छुहिया घाटी में जाम लग रहा है।
-कई गाड़ियां छुहिया घाटी से पहले बगवार गांव से होते हुए जा रही थीं। बस के ड्राइवर ने भी जाम से बचने के लिए रूट बदला था।
-सीधी पुलिस ने लगातार लग रहे जाम को लेकर कोई उपाय नहीं किए थे। लोक निर्माण विभाग और नेशनल हाईवे के अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है जिन्होंने सड़क को ठीक करने पर ध्यान नहीं दिया। 
 



पीएम ने अनुग्रह राशि की घोषणा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधी बस हादसे पर दुख जताया। साथ ही मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की मुआवजा देने और गंभीर रूप से घायल लोगों को 50 हजार रुयये दिए जाने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसकी जानकारी दी। 

गृह मंत्री शाह ने शिवराज से की बात
गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात की है। उन्होंने ट्वीट किया, 'मध्य प्रदेश के सीधी जिले में हुआ बस हादसा बहुत दुःखद है, मैंने मुख्यमंत्री शिवराज जी से बात की है। स्थानीय प्रशासन राहत व बचाव के लिए हर संभव मदद पहुंचा रहा है। मैं मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं व घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।

बस का परमिट रद्द
वहीं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बस का परमिट रद्द कर दिया है। साथ ही ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को इस हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। ये बस जबलानाथ परिहार ट्रेवल्स की थी। बस के मालिक कमलेश्वर सिंह हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि जांच में जो भी दोषी होगा छोड़ा नहीं जाएगा।
 

बचाव टीम के संपर्क में हैं शिवराज
शिवराज सिंह चौहान ने हादसे पर तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने कहा, ''नहर काफी गहरी है। हमने तत्काल बांध से पानी बंद करवाया और राहत और बचाव दलों को रवाना किया। कलेक्टर, एसपी और एसडीआरएफ की टीम वहां है। बस निकालने के प्रयास हो रहे हैं। मैं राहत और बचाव कार्य करने वाली टीम के संपर्क में हूं। सात साथी बचाए जा चुके हैं।''
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जबलपुर: कठौंदा गांव में छोड़े शहर भर के कुत्ते, डेढ़ साल की मासूम को नोंचकर मार डाला

मध्य प्रदेश के जबलपुर के कठौंदा गांव में पूरे शहर के आवारा कुत्ते छोड़े जा रहे हैं। इन श्वानों के कारण गांव के बच्चों की जान आफत में है। हद तो तब हो गई जब शुक्रवार को कुत्तों के एक झुंड ने डेढ़ साल की एक मासूम बच्ची की जान ले ली। 

घर के बाहर खेल रही थी मासूम
जबलपुर के मढोताल थाना क्षेत्र के कठौंदा गांव निवासी सुशील श्रीवास्तव की बेटी दीपाली के साथ यह घटना हुई। सुशील शुक्रवार को काम पर चले गए थे। पत्नी वर्षा श्रीवास्तव घर का काम कर रही थी और तीन साल का बेटा विवेक व बेटी दीपाली घर के बाहर खेल रहे थे। तभी कुत्तों का एक झुंड घूमता हुआ आया। बेटे ने उन्हें भगाने की कोशिश की तो कुत्ते उन पर लपक पड़े। विवेक तो भाग गया, लेकिन मासूम दीपाली उनके बीच फंस गई। कुत्तों ने उस पर हमला बोल दिया। उसे बुरी तरह काटा। 

दो दिन इलाज के बाद तोड़ा दम
बेटी की चीख सुनकर मां बाहर आई, लेकिन तब तक वह लहूलुहान हो चुकी थी। पड़ोसियों की मदद से उसे मां अस्पताल लेकर गई। दो दिन तक उसका इलाज चला। शनिवार को ऑपरेशन भी हुआ, खून भी चढ़ाया गया, लेकिन दीपाली को नहीं बचाया जा सका। 

इस वजह से हिंसक हो गए कुत्ते
बेटी की मौत से दुखी सुशील श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि जबलपुर नगर निगम पूरे शहर के कुत्तों को लाकर कठौंदा में छोड़ रहा है। यहां मरे हुए पशुओं का चमड़ा उतारा जाता है। मृत जानवरों का मांस खाने के कारण यहां के कुत्ते ज्यादा हिंसक हो गए हैं। 
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11 महीने बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आज से शुरू होगी कोर्ट रूम में सुनवाई

मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट और इसकी इंदौर एवं ग्वालियर खंडपीठों में करीब 11 महीने के बाद सोमवार से मामलों की सुनवाई पारंपरिक तरीके से अदालत कक्ष में आमने-सामने उपस्थित होकर शुरू होने जा रही है। हालांकि, हाईकोर्ट ने वकीलों और पक्षकारों को ऑनलाइन सुनवाई में पेश होने का विकल्प भी दिया है।

महामारी के बाद पिछले साल मार्च महीने के आखिर से जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट एवं इसकी इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मामलों की सुनवाई चल रही थी।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अब अदालत कक्ष में आमने-सामने उपस्थित होकर और डिजिटल माध्यम से पेश होने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तय की है। इन दोनों तरीकों से अदालत में सुनवाई के लिए पेश होने का मुख्य उद्देश्य वकीलों और पक्षकारों को सहूलियत देना है।

इसमें कहा गया है कि जबलपुर हाईकोर्ट और दोनों खंडपीठों पर आठ फरवरी से पारंपरिक तरीके से मुकदमा दाखिल करने का काम शुरू हो गया है और 15 फरवरी से पारंपरिक तरीके से अदालत कक्ष में सुनवाई होगी।

हालांकि, अधिवक्ता सुनवाई के डिजिटल माध्यम का विकल्प चुन सकते हैं। इसके लिए उन्हें हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को पहले से सूचित करना होगा। मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार हाईकोर्ट के समक्ष उपस्थित अधिवक्ताओं द्वारा गाउन पहनना वैकल्पिक होगा, लेकिन उनके लिए काला कोट और बैंड पहनना अनिवार्य होगा।
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पुलवामा हमले की दूसरी बरसी पर शहीद के पिता ने सरकार पर लगाया आरोप, कहा- 'वादे पूरे नहीं कर सकती तो नहीं करने चाहिए'

14 फरवरी 2019 को पुलावामा आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे, उनमें मध्यप्रदेश के सीआरपीएफ के जवान अश्विनी कच्छी भी शामिल थे। उस समय मध्यप्रदेश सरकार ने कुछ वादे किए थे जो अभी तक पूरे नहीं हुए हैं।

हमले की दूसरी बरसी पर रविवार को शहीद अश्विनी के पिता ने सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो वादे उनसे किए वो पूरे नहीं हुए हैं। अश्विनी के पिता सुकरू जबलपुर के खुडवाल में रहते हैं। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने एक करोड़ रुपये, एक परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी और एक घर का वादा किया था। उस समय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ थे।

आगे उन्होंने आगे कहा कि सीएम ने शहीद अश्विन के नाम पर एक खेल का मैदान बनाने का भी वादा किया था। राज्यपाल ने एक स्कूल खोलने का वादा किया था, लेकिन एक करोड़ रुपये को छोड़कर कुछ नहीं मिला। 

पुलवामा आतंकी हमले की दूसरी बरसी पर बोलते हुए अश्विनी के पिता ने कहा कि सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर सकती तो उसे वादे करने भी नहीं चाहिए। यह अन्याय है। 

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मध्यप्रदेश: घोड़ी पर सवार होकर निकली दुल्हन, परिवार ने कहा- बेटियां किसी पर नहीं होती बोझ 

आपने अबतक दूल्हे को घोड़ी पर चढ़कर दुल्हन के घर बारात लाते तो जरूर देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी किसी दुल्हन को घोड़ी पर चढ़कर दूल्हे के घर बारात ले जाते हुए देखा है। आपका जवाब होगा नहीं। तो हम आपको बताते हैं ऐसे वाकये के बारे में जो मध्यप्रदेश के सतना में देखने को मिली है। यह घटना अब सुर्खियों में छाई हुई है। 

मध्यप्रदेश के सतना जिले के वलेचा परिवार की इकलौती बेटी घोड़ी पर चढ़कर रवाना हुई। बड़ी धूमधाम से बारात सतना से कोटा के लिए दूल्हे के घर के लिए रवाना हुई। परिवार ने बेटी की घोड़ी पर चढ़ने की ख्वाहिश न केवल पूरी की बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि बेटियां किसी पर बोझ नहीं है। 

परिवार ने कहा कि बेटा और बेटी में कोई अंतर भी नहीं है। समाज में जितना अधिकार बेटों को है उतना ही अधिकार बेटियों को भी दिया जाए। वहीं दुल्हन वलेचा ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी घोड़ी पर बैठूंगी। जब मैंने देखा कि इन लोगों ने इतना कुछ प्लान किया है तो मुझे बहुत अच्छा लगा कि मेरा परिवार मेरे बारे में इतना सोचता है।

दीपा ने कहा कि मैं यह संदेश देना चाहती हूं कि लड़कियां अपने परिवार के लिए कभी बोझ नहीं होती हैं। सभी को सोचना चाहिए कि लड़कियां भी लड़कों के बराबर होती हैं। इसलिए उन्हें उतना ही प्यार मिलना चाहिए जितना लड़कों को दिया जाता है। परिवार की मानें तो उनके यहां सालों बाद एक बेटी हुई है। वे अपनी बेटी को बेटे से भी ज्यादा प्यार करते हैं। 

दीपा के परिवार ने कहा कि समाज में अक्सर बेटों को प्राथमिकता दी जाती है। इसी कारण हम अपनी बेटी की बारात निकालकर समाज को यह संदेश देना चाहते हैं की बेटियों का सम्मान करें क्योंकि बेटी है तो कल है। दुल्हन की मां नेहा वलेचा ने कहा कि जैसे हम बेटों की बारात निकालते हैं वैसे ही हमारा सपना था कि बेटी की बारात निकालें। 25 साल बाद हमारे परिवार में किसी बेटी की शादी हो रही है तो सभी काफी खुश थे। आज भी हमारे समाज में कुछ कुरीतियां मौजूद हैं, जो बेटियों को बोझ समझती हैं। दीपा की शादी उनके लिए संदेश है।
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