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डॉक्टर की सलाह: कोरोना संक्रमित पाए जाने पर बनाए रखें संयम, घर में रहकर करें ये काम

कोविड टेस्ट में अक्सर कोरोना संक्रमित पाए जाने पर लोग तनाव में चले जाते हैं। इससे इम्यूनिटी भी कमजोर होती है। कोरेेना को हराने के लिए कोरोना संक्रमित पाए जाने पर संयम बनाए रखते हुए होम आइसोलेशन में चले जाना चाहिए। अस्पताल के बजाए होम आइसोलेशन में रहने से मरीज का आत्म विश्वास बढ़ता है। 

डॉक्टर(आयुर्वेदिक) अशोक शर्मा, जम्मू का कहना है कि अगर संक्रमित मरीजों में लक्षण हल्के हैं तो वह नियमित तौर पर व्यायाम के अलावा योग के विभिन्न आसन कर सकते हैं। इससे उन्हें रिकवर होने में मदद मिलेगी। ताजे फलों के साथ-साथ संतुलित आहार लेना भी बहुत जरूरी है। हालांकि, होम आइसोलेशन में परिवार के अन्य सदस्यों के संपर्क में नहीं आना चाहिए और कोविड प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना चाहिए। होम आइसोलेशन में सेहत बिगड़ने खासतौर से सांस की तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। 
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस

यहां सन्नाटे के सिवा कुछ भी नहीं: हसीं वादियों में छाई खामोशी, तस्वीरों में देखें हाल-ए-कश्मीर

डल झील के पानी पर तैरते खूबसूरत शिकारे, गुलमर्ग की हंसी वादियां और कबूतरों की गुटरगूं से गुलजार रहने वाली घाटी में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। चिनार वैसा ही खूबसूरत है, डल झील भी उतनी ही सुंदर, कबूतर आज भी झुंड में गुटरगूं करते सुनाई देते हैं, बजाय इन सबके सन्नाटा पसरा हुआ है।

अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध डल झील सूनी पड़ी है। अब यहां कोई पर्यटक नहीं दिखाई देता। शिकारे तो वैसे ही हैं पर उनके अंदर खामोशी बसी हुई है। गुलमर्ग भी सन्नाटे से पसरा हुआ है। कश्मीर का सबसे बड़ा शहर और राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर, जोकि अपनी विशिष्टताओं और खूबसूरती के लिए पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है, वह भी इन दिनों सूना पड़ा है। दरिया झेलम के दोनों किनारों पर खामोशी छाई है। इन सबकी वजह है कोरोना वायरस।
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सजग होना जरूरी: जम्मू-कश्मीर में शहरों से सटे गांवों में तेजी से फैल रहा कोरोना संक्रमण

कोरोना संक्रमण की दूूसरी लहर गांवों में तेजी से लोगों को संक्रमित कर रही है। जम्मू संभाग में शहरों के साथ सटे ग्रामीण इलाके कोरोना संक्रमण की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। प्रतिदिन जम्मू संभाग में मिल रहे कुल मरीजों में से करीब 35 मरीज फीसदी उप नगरीय क्षेत्रों से आ रहे हैं। वहीं वो गांव जो शहरों से कुछ ज्यादा दूरी पर हैं, वहां से भी पांच फीसदी मरीज मिलने शुरू हो चुके हैं। हालांकि, मरीजों का 60 फीसदी हिस्सा अभी भी शहरी इलाकों से ही है। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जम्मू संभाग से प्रतिदिन 1500 से 1700 के बीच मामले आ रहे हैं। इनमें औसतन एक हजार से ज्यादा मामले शहरी क्षेत्रों से ही हैं। वहीं 400 के करीब मामले शहरों से सटे गांवों से आ रहे हैं। करीब 90 से 100 तक मामले दूर दराज के गांवों से भी आना शुरू हो चुके हैं। पुंछ के दूरदराज के क्षेत्र मेंढर से लेकर डोडा व किश्तवाड़ के गांवों से भी संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। आशंका है कि शहरों में कामकाज करने वाले लोगों के माध्यम से ही कोरोना गांवों में प्रवेश कर रहा है। 

स्वास्थ्य सेवा निदेशालय जम्मू की निदेशक डॉ. रेणु शर्मा का कहना हैै कि कोरोना संक्रमण की पहली लहर में शहरी क्षेत्रों में ही ज्यादा संक्रमण फैला था। गिने चुने मामले ही ग्रामीण क्षेत्रों से आए। दूसरी लहर में शहरों से सटे गांवों से बड़ी संख्या में संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। शहरों से सटे क्षेत्रों के अस्पतालों में भी कोविड प्रबंधन के लिए व्यवस्था की हुई है। शहरों से संक्रमित लोग कई बार गांवों में अपने घरों में चले जाते हैं और यह सही है कि गांवों में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। 

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कोरोना : जम्मू-कश्मीर में चौबीस घंटे में तीन डॉक्टरों समेत 55 लोगों की मौत, 4356 नए मामले

जम्मू संभाग के प्रमुख कोविड अस्पताल जीएमसी जम्मू में भर्ती 410 कोरोना संक्रमित मरीजों में से 250 की हालत गंभीर है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर मरीजों को अस्पताल न पहुंचाए जाने के कारण अधिकतर मरीजों के फेफड़े में संक्रमण भी बहुत ज्यादा है और सांस लेने की तकलीफ भी बढ़ चुकी है। इस बीच जम्मू-कश्मीर में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण से तीन डॉक्टरों समेत 55 मरीजों की मौत हो गई है। 4356 नए मामलों की पुष्टि हुई है। 

नए मामलों में जम्मू संभाग से 1771 व 2585 कश्मीर संभाग से आए हैं। वहीं जीएमसी जम्मू में 16 मरीजों के दम तोड़ने सहित जम्मू संभाग में 35 मौतें हुई हैं। कश्मीर में 20 मरीजों की जान गई है। हालांकि, 2995 मरीज प्रदेश में स्वस्थ भी हुए हैं। 

मृत डॉक्टरों में रिटायर्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी पुंछ सहित दो सेवारत डॉक्टर शामिल थे और राजोरी जिले से संबंधित थे। कुल मिलाकर जम्मू संभाग में हुई 35 मरीजों की मौत में 16 मौतें जीएमसी जम्मू, दो जीएमसी कठुआ व पांच मरीजों की मौत जीएमसी राजोरी में हुई है।

सैन्य अस्पताल सतवारी में एक, जिला अस्पताल सांबा में एक, पुंछ अस्पताल में एक, सीएचसी सुंदरबनी में एक, सीएचसी उधमपुर में दो की मौत हुई है। मल्टी स्पेशेलिटी अस्पताल चंडीगढ़ में एक, पठानकोट एमएच में एक, चंडीगढ़ के सुशाना अस्पताल में एक, अमृतसर अस्पताल में एक व तीन मरीजों की मौत अपने घरों पर ही हुई है। 

सक्रिय मरीजों की संख्या 53 हजार पहुंची
 नए मामलों में जम्मू संभाग के जम्मू जिले में 624, उधमपुर में 282, राजोरी में 227, डोडा में 82, कठुआ में 157, सांबा में 107, किश्तवाड़ में 80, पुंछ में 94, रामबन में 43, रियासी में 75 नए मामले आए हैं। कश्मीर के श्रीनगर जिले में 872, बारामुला में 228, बडगाम में 288, पुलवामा में 262, कुपवाड़ा में 186, अनंतनाग में 304, बांदीपोरा में 118, गांदरबल में 92, कुलगाम में 165, शोपियां में 70 नए मामले आए हैं। कुल संक्रमित मामलों का आंकड़ा बढ़कर 233763 पर पहुंच गया है और एक्टिव मामलों की संख्या 52848 हो गई है। मृतकों की संख्या 2967 पर पहुंच गई है।
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जम्मू-कश्मीर: दो हजार पुलिसकर्मियों ने घर में ही दी कोरोना को मात, 97 हजार जवानों को लगा टीका

जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस
कोरोना का सुरक्षा कवच इसका टीका ही है। इस बात का सबूत इससे ही मिलता है कि प्रदेश के सवा लाख पुलिस कर्मियों में से 97 हजार पुलिस कर्मियों ने कोरोना टीके के लिए पंजीकरण करा लिया है। 97 हजार पुलिस कर्मियों को पहली डोज लग चुकी है, जबकि 67 हजार को दूसरी डोज भी लग चुकी है। 

आईपीएस महिला अधिकारी एवं शहर की एसपी नार्थ मोहिता शर्मा कोरोना को मात देकर फिर से ड्यूटी पर लग गई हैं। गुरुवार को मोहिता ने अपना पद संभाल लिया। आते ही उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों और स्टाफ से बात की और कोरोना प्रोटोकाल को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। 

वैक्सीनेशन बहुत जरूरी
पिछले वर्ष कोरोना पॉजिटिव हो गया था। लेकिन कुछ दिन बाद ठीक हो गया। अस्पताल नहीं जाना पड़ा। इस बार वैक्सीन लगवा ली है। अब तक सब ठीक है। हमारे सभी कर्मियों ने भी वैक्सीन ली है। सबसे ज्यादा सड़कों पर लोगों से बात हमारी ही होती है। लेकिन वैक्सीन ने बहुत बचाया है। -मोहन कैथ, एसएपी ट्रैफिक रूरल

पुलिस को गांव, बाजार, सड़क, चौक-चौराहे आदि पर रहना पड़ता है। बेशक दो हजार पुलिस कर्मी संक्रमित हुए, लेकिन वैक्सीन के कारण इन पर अधिक असर नहीं पड़ा। कुछ अफसर भी पॉजिटिव हुए, लेकिन कोरोना को हराकर फिर से ड्यूटी पर लौट आए हैं। -रमेश अंगराल, एआईजी पर्सनल, पुलिस मुख्यालय

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घाटी का मौसम : जम्मू समेत कई इलाकों में भारी बारिश, ओले भी गिरे, पारा नीचे

प्रदेश के कई इलाकों में पिछले 24 घंटों में भारी बारिश रिकॉर्ड हुई है। इसमें सबसे ज्यादा जम्मू जिले में 31.8 और कश्मीर के गुलमर्ग में 34 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। बारिश से प्रदेश के तापमान में भारी गिरावट हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार मौसम में उतार चढ़ाव का सिलसिला आगामी दिनों में भी जारी रहेगा। अगले 24 घंटों में कई क्षेत्रों में गरज चमक के साथ बारिश हो सकती है। राजोरी में बारिश के साथ ओलाबारी की भी खबर है। 

जम्मू में रात भर रुक-रुक कर गरज चमक के साथ शुरू हुआ बारिश का सिलसिला वीरवार सुबह चलता रहा। दोपहर को मौसम साफ हुआ। इस वजह से कई क्षेत्रों में जल भराव की स्थिति रही। वहीं बारिश से कई इलाकों में रातभर बिजली भी गुल रही। इनमें संजय नगर के सेक्टर दो व नानक नगर के कुछ सेक्टर शामिल रहे। रात को गुल हुई बिजली सुबह बहाल हुई। 

मौसम के करवट बदलने से जम्मू जिले में अधिकतम तापमान सामान्य से छह डिग्री नीचे दर्ज हुआ। यहां पर अधिकतम तापमान 30.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ है। कटड़ा में 27.3 डिग्री और श्रीनगर में 21.3 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं कटड़ा में 4.2 एमएम और भद्रवाह में 10.4 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई है। श्रीनगर जिले में 10 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई।
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जम्मू: विभाग की भी नहीं सुनते निजी स्कूल संचालक, शिक्षकों को जबरन बुलाया जा रहा

शिकारा एंबुलेंस : लहरों पर सवार अनोखा मददगार, डल झील में जारी है कोरोना के खिलाफ जंग

श्रीनगर के बीचोंबीच दबरवन पहाड़ियों के दामन में स्थित डल झील अपने दिलकश नजारों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। वर्ष 2020 के दिसंबर में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी अनोखी शिकारा एंबुलेंस अब डल के पानी पर तैरती नजर आ रही है। एम्बुलेंस के मालिक तारिक पतलू डल झील में रहने वाले लोगों को कोरोना से संबंधित जानकारी देते हैं और जागरुक करते हैं। उनके अनुसार एसओएस कॉल आने पर वह मदद करने भी पहुंचते हैं। 

डल झील के रहने वाले तारिक अहमद पतलू ने उनके साथ घटी एक घटना के बाद इस शिकारा एम्बुलेंस को बनाने की ठानी और इसे दिसंबर में एक बाहर के ट्रस्ट की मदद से बनाया। तारिक ने बताया कि वह पहली लहर में कोरोना से संक्रमित हुए थे और कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत वह पहले अपने हाउसबोट में आइसोलेशन में चले गए, लेकिन हालत बिगड़ी तो अस्पताल का रुख करना पड़ा था। अस्पताल से लौटने के बाद डल झील के किनारे शिकारे वालों ने उन्हें उनकी हाउसबोट तक ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने इस शिकारा एम्बुलेंस को बनाने की ठान ली। 

अब यह एम्बुलेंस एक स्ट्रेचर, व्हील चेयर और कोविड सम्बंधित कुछ सामान लेकर रोजाना डल झील के अंदरूनी इलाकों का दौरा करती है। तारिक ने बताया कि रमजान के इस पाक महीने में वह रोजाना 2-3 घंटे डल झील में लोगों को जागरूक करने के लिए जाते हैं। 

उन्होंने बताया कि इस दौरान अगर किसी को कोविड संबंधित कोई चीज जैसे पीपीई किट, मास्क, आदि की जरूरत पड़ती है वह देने के लिए भी जाते हैं। इसके अलावा एसओएस कॉल आने मर मरीजों को डल के अंदरूनी इलाकों से लाने और ले जाने का काम भी करते हैं। करीब दो महीने की मेहनत और 12 लाख रुपये की लागत के बाद वह इस शिकारा एंबुलेंस के ढांचे को दिसंबर 2020 में पूरा कर पाए थे।
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