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नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा
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किसी परिचय के मोहताज नहीं लोक गायक जगदीश

हिमाचली लोक कलाकारों में जगदीश शर्मा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। बंजार के छोटे से गांव के जगदीश युवाओं के बीच खास जगह बना चुके हैं।

16 मार्च 2020

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शिमला

रविवार, 29 मार्च 2020

दूसरे राज्यों में फंसे हिमाचल के लोगों से सरकार ने की ये अपील

हिमाचल के हजारों लोग दूसरे राज्यों में फंसे हैं। हिमाचल सरकार की इन लोगों को प्रदेश में लाने के लिए कोई नीति नहीं है। प्रदेश के कई नेताओं ने भी इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची से बात की, लेकिन सरकार की ओर से दो टूक कहा है कि जो जहां हैं, वहीं रहें। अगर किसी को राशन या अन्य दिक्कत है तो वे इस बारे में संबंधित प्रशासन से बात करेंगे।

ऐसे तमाम लोग या परिवार नियंत्रण कक्ष में भी बात कर सकते हैं और वहीं से उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई समेत उत्तर भारत के इलाकों और दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी कई लोग फंस गए हैं। वे कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन और कर्फ्यू के बीच हिमाचल नहीं आ पा रहे हैं। 

मुख्यमंत्री को दिया आईएचबीटी में तैयार किया हैंड सैनिटाइजर
 राजस्व एवं आपदा प्रबंधन समिति और मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डीसी राणा ने शनिवार को सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो रिसोर्स टेक्नोलॉजी (आईएचबीटी) पालमपुर के निदेशक संजय कुमार की ओर से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को संस्थान की ओर से तैयार किया गया अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर भेंट किया। इस सैनिटाइजर में अल्कोहल की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मापदंडों के अनुरूप
है।
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टांडा में पुरुष मरीज की कोरोना वायरस रिपोर्ट फिर निगेटिव: एसीएस

हिमाचल सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान ने शनिवार को बताया कि टांडा में भर्ती कोविड-19 पॉजिटिव पुरुष की दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आई है। उसकी बीते दिन भी रिपोर्ट निगेटिव थी। ठीक होने के उपरांत अस्पताल से छुट्टी कर दी जाएगी। उधर, टांडा अस्पताल के एमएस सुरेंद्र भारद्वाज ने बताया कि दोनों मरीजों को दाखिल करते समय ली गई कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थीं।

उसके सात दिन बाद 26 मार्च को फिर दोनों मरीजों के सैंपल लिए गए। 27 मार्च को पुरुष मरीज की रिपोर्ट निगेटिव और महिला की पॉजिटिव आई। शनिवार को किसी मरीज की कोई सैंपल रिपोर्ट नहीं आई है। न कोई पुणे रिपोर्ट भेजी है। अभी किसी को छुट्टी नहीं दी है। अब सात दिन बाद फिर से दोनों मरीजों के सैंपल लिए जाएंगे। उसके बाद तय होगा कि क्या करना है।
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राजधानी में विदेश से लौटे सौ से अधिक लोग क्वारंटीइन पर

क्वारंटाइन पर रखे लोगों के घरों से अलग उठ रहा कूड़ा, एमसी कर रहा है निगरानी
शिमला। शहर में सौ से अधिक लोगों को क्वारंटीइन के तौर पर रखा गया है। यह सभी एक महीने के दौरान विदेश यात्रा करके लौटे हैं। एहतियात के तौर पर इन्हें अलग रखा गया है। प्रशासन इन पर निगरानी भी रख रहा है।
पुलिस के अलावा स्थानीय वार्ड पार्षदों को भी इन पर निगरानी रखने के लिए कहा है। इसके अलावा जो लोग क्वारंटाइन के बावजूद खुले घूम रहे हैं, उनकी शिकायतें भी प्रशासन तक पहुंची हैं। इन सभी की सूची जिला प्रशासन ने नगर निगम को सौंप दी है। नगर निगम ने इन सभी लोगों को घरों पर कूड़ा रखने के लिए पीले रंग का अलग बैग दिया है। इसके अलावा इन्हें मास्क और ग्लब्ज भी दिए जा रहे हैं ताकि यह बैग और कचरे को सैनिटाइज करने के बाद ही सैहब कर्मी को सौंपें।
निगम ने इन लोगों के घर से कचरा उठाने के लिए सैहब कर्मचारियों की एक अलग टास्क फोर्स बना रखी है। इन्हें कचरा उठाने के लिए प्रशिक्षित किया है। इसके अलावा यूनिफार्म आवश्यक तौर पर पहनने के निर्देश दिए हैं। निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेखा चोपड़ा ने कहा कि प्रशासन ने क्वारंटाइन लोगों की सूची सौंपी है। इनके घरों से कचरा उठाने में पूरी एहतियात बरती जा रही है।
लंबी हो सकती है क्वारंटाइन की लिस्ट
शहर में कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने जिला प्रशासन या पुलिस को यह सूचना नहीं दी है कि वह हाल ही में विदेश से लौटे हैं। इनमें से कुछ लोग नगर निगम से संपर्क कर रहे हैं। राजधानी समेत जिला शिमला में अभी कोरोना का एक भी मामला पाजिटिव नहीं आया है। क्वारंटाइन लोगों में भी अभी किसी में कोरोना के लक्षण नजर नहीं आए हैं।
चार दिन से परिवार से अलग व्यापार मंडल अध्यक्ष
शिमला व्यापार मंडल के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह खुद पिछले चार दिन से अपने परिवार से अलग रह रहे हैं। अध्यक्ष का कहना है कि वह काफी दिनों से शहर में ही हैं लेकिन रोजाना बाजार में कई लोगों से उनका मिलना जुलना होता है। ऐसे में एहतियात के तौर पर परिवार से खुद को अलग रखने का फैसला लिया है। घर पर बुजुर्ग पिता समेत बच्चे भी हैं जो अलग रह रहे हैं। वह खुद अपने मकान के ग्राउंड फ्लोर में रह रहे हैं।
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Coronavirus in HP : लॉकडाउन और कर्फ्यू के चलते फंसे चार लाख प्रवासी कामगार

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन और कर्फ्यू के चलते हिमाचल में चार लाख प्रवासी कामगार फंस गए हैं। सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में करीब दो लाख कामगार अपने घरों को नहीं लौट पा रहे हैं। सिरमौर, ऊना जिले में लगभग 50-50 हजार, बिलासपुर में 10800 प्रवासी मजदूर फंसे हैं। यही हाल मंडी, कांगड़ा और अन्य जिलों का भी है।

उद्योग बंद होने से काम-धंधा ठप हो गया है। श्रमिक किराये के कमरों में कैद होने को मजबूर हैं। मकान मालिक की गारंटी पर दुकानों से उधार पर राशन लेकर गुजारा कर रहे हैं। हालांकि अब विधायक, मंत्री, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन और कई संस्थाएं इनकी मदद को आगे आई हैं। इन्हें आश्रय और खाना दिया जा रहा है। कई लोग आर्थिक मदद कर रहे हैं। ठेकेदारों को भी कामगारों को घर बैठे भोजन खिलाने के आदेश हैं।

हालांकि, उद्योगों में काम करने वाले हिमाचली पैदल ही घरों को रवाना हो गए हैं। प्रवासी कामगारों-फेरी लगाने वालों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के लोग शामिल हैं। करीब 20 फीसदी कामगार पहले ही होली के कारण घर निकल चुके हैं, जो वापस नहीं आए।  प्रदेश में नेपाल मूल के बड़ी संख्या में मजदूर कार्यरत हैं। हालांकि नेपाली श्रमिकों को तो फिर भी बागवानी क्षेत्र में काम मिल रहा है।

इसके अलावा दूसरे राज्यों से आए गैर बागवानी क्षेत्रों को काम नहीं मिल पा रहा। इनमें औद्योगिक क्षेत्रों के श्रमिक बहुत ज्यादा हैं। इन्होंने जो कमाई की थी, वह इनके खुद के खाने-पीने और रहने में लग रही है। कई श्रमिकों ने ऑनलाइन अपने परिवारों को पैसा भेजा है। चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के लोग भी पैदल घरों को लौट रहे हैं। अनुमान के अनुसार करीब 20 हजार लोग यहां से जा चुके हैं। 
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पांवटा में कामगार पांवटा में कामगार

चंडीगढ़ में रह रहे सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए खुले हिमाचल भवन के द्वार

हिमाचल सरकार ने चंडीगढ़ के पीजी में रहने वाले विभिन्न कोर्स की पढ़ाई कर रहे प्रदेश के सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए बड़ा एलान किया है। कई छात्रों के अभिभावकों से मिली सूचना के बाद हिमाचल सरकार ने फैसला किया है कि चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवन को खोलकर वहां उन विद्यार्थियों के लिए रहने और खाने की सुविधा मुहैया कराएगी, जिनके पीजी संचालकों ने उन्हें पीजी खाली करने के लिए कह दिया है।



इस संबंध में शनिवार रात सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। सरकार के इस आदेश के बाद सैकड़ों विद्यार्थियों और उनकी चिंता में परेशान परिजनों को राहत मिलेगी। बता दें, हिमाचल में कर्फ्यू की घोषणा के बाद पुलिस ने सीमाएं सील कर दी थी। सीमाएं सील होने के बाद पुलिस ने चंडीगढ़ से लोगों को हिमाचल में प्रवेश देना बंद कर दिया है।

इसके बाद से वहां मौजूद पीजी में रह रहे सैकड़ों युवा फंस गए है। पुलिस के हेल्पलाइन नंबर जारी करने के बाद हिमाचल सरकार को जानकारी मिली कि कई पीजी अपने यहां रह रहे विद्यार्थियों को खाली करने के लिए कह रहे हैं। इसके बाद से सरकार उन्हें वापस लाने के लिए मंथन कर रही थी। रास्ता न निकलने पर अब हिमाचल भवन चंडीगढ़ का संचालन शुरू कर उन बच्चों के रहने खाने की व्यवस्था कर दी है।
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कोरोना वायरस: अब पुणे की लैब में जांच को नहीं भेजे जाएंगे सैंपल

अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा की लैब में जांच करने के बाद क्रॉस चेक के लिए पुणे सैंपल नहीं भेजे जाएंगे। केंद्र सरकार ने पीजीआई चंडीगढ़ सहित टांडा अस्पताल की लैब की रिपोर्ट को ही स्वीकृत मानने की मंजूरी दी है। अभी तक टांडा लैब में जांच करने के बाद कोरोना वायरस के संभावित मरीजों के सैंपल क्रॉस चेक के लिए पुणे की लैब में भेजे जा रहे थे।

अभी तक टांडा और पुणे लैब में जांचे गए सभी सैंपलों की रिपोर्ट एक सामान आई है, जिसके चलते केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने टांडा अस्पताल की लैब के परिणाम को सही माना है। उल्लेखनीय है कि टांडा लैब में कांगड़ा जिला के अलावा ऊना, हमीरपुर, मंडी, चंबा, कुल्लू जिला से कोरोना वायरस के संभावित मरीजों के सैंपलों की जांच हो रही है। लाहौल-स्पीति जिला से अभी तक कोरोना वायरस के किसी संभावित मरीज का सैंपल जांच के लिए टांडा नहीं आया है।
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अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों के घर दस्तक देगी हिमाचल पुलिस

अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों को हिमाचल पुलिस अपने स्तर पर मदद मुहैया कराएगी। कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत पुलिस मुख्यालय में मौजूद कंट्रोल रूम से प्रदेश के ऐसे वरिष्ठ नागरिकों को फोन कर संपर्क साधा जाएगा, जो अकेले रहते हैं। उनसे बातचीत कर कुशल क्षेम पूछा जाएगा। अगर उन्हें राशन और दवा जैसी रोजमर्रा जरूरत की चीजों की जरूरत होगी तो संबंधित जिले की उस बीट के सिपाहियों की मदद से सामान घर पर ही मुहैया कराया जाएगा।

डीजीपी सीताराम मरडी ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं कि अगर जिले में भी पुलिस कंट्रोल रूम या थाने पर कोई वरिष्ठ नागरिक या दिव्यांग व्यक्ति फोन कर इस तरह की मदद मांगे तो पुलिस कर्मी ऐसे लोगों की मदद जरूर करें। लोगों को इसके लिए पुलिस कर्मियों को सामान देते समय उस सामान की राशि देनी होगी। डीजीपी ने बताया कि दरअसल वरिष्ठ नागरिकों को आने-जाने में वैसे भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

चूंकि, कर्फ्यू में ढील कुछ मियाद के लिए ही दी जाती है, ऐसे में दुकानों पर भी भीड़ होना स्वाभाविक है और उसकी वजह से वहां भी वरिष्ठ नागरिकों को दिक्कत पेश आ सकती है। कई जगह दुकानों की दूरी भी ज्यादा होती है और परिवहन सेवाएं भी पूरी तरह बंद हैं। ऐसे में कोशिश यह है कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को असुविधा का सामना न करना पड़े।
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लॉकडाउन और कर्फ्यू के बीच राहत लेकर आए रामायण और महाभारत धारावाहिक

केंद्र सरकार इस प्रयास में है कि लोग घरों में रहें और कोरोना वायरस से जनित महामारी से अपना बचाव कर सकें। लोगों को घरों में ही रोकने के लिए सरकार ने दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक सीरियल शुरू किए हैं। बड़े-बुजुर्ग रामायण के बारे में तो यहां तक कहते हैं कि जब इसका प्रसारण टीवी पर होता था तो कर्फ्यू जैसी स्थिति उस समय हो जाया करती थी।

मौजूदा परिवेश में कोरोना वायरस से बचाव में जुटे नागरिकों को दूरदर्शन के चैनल पर एक बार फिर 90 के दशक में प्रसारित किए गए रामायण व महाभारत जैसे टीवी धारावाहिक फिर से शुरू किया है ताकि लोग अधिक से अधिक अपने घरों में रहें तथा मनोरंजन के साथ नई पीढ़ी को इतिहास की जानकारी भी मिले। 

इस सीरियल के शुरू होने से लोगों ने सरकार का आभार जताया है। घर में बैठ कर सरकार के बताए नियमों का पालन कर रहे नागरिकों के लिए समय बिताने के साधन के साथ पुराने समय की याद एक बार फिर ताजा हो रही है। शनिवार सुबह 9 बजे रामायण व 12 बजे महाभारत धारावाहिक देख दूरदर्शन के चैनलों को भी लोग सर्च कर सेट कर रहे हैं।

क्षेत्र के लोगों में रमेश लौ, ईश्वर चंद्र, विकास, संजय शर्मा, अतुल कालिया, इंदरजीत, बीडी पराशर, संजीव, तनुजा शर्मा, अंजू, इंदु शर्मा आदि के अनुसार इन धारावाहिकों के शुरू होने से न केवल समय अच्छा बीतेगा बल्कि युवाओं को भी भारत की पुरानी संस्कृति जानने का अवसर मिलेगा ।

घरों में बैठ टीवी स्क्रीन पर लोगों ने देखी रामायण
कर्फ्यू के दौरान घरों में बैठे लोगों ने टीवी स्क्रीन पर रामायण धारावाहिक देखा। शनिवार सुबह से लोग अपने घरों में रामायण धारावाहिक देखने के लिए काफी उत्सुक दिखाई दिए। करीब तीन दशक बाद रामायण धारावाहिक को दोबारा शुरू किया गया है।

केंद्र सरकार ने कर्फ्यू और नवरात्रों के दौरान रामायण धारावाहिक को दोबारा शुरू करवाया है। शनिवार सुबह और रात को 9 बजे इसका प्रसारण शुरू हो गया है। शनिवार की सुबह अधिकतर लोगों ने घरों में बैठकर रामायण के पहले एपिसोड को देखने का लुत्फ उठाया। नेशनल चैनल पर शनिवार से इसका प्रसारण शुरू हो गया है।

कर्फ्यू के चलते नवरात्र में कन्या पूजन भी रुका
कोरोना वायरस के चलते नवरात्रों के दौरान घर-घर होने वाला कन्या पूजन नहीं हो रहा है। कर्फ्यू का लोग पालन कर रहे हैं। इस बार लोग अपने घर में ही परिवार सहित पूजा कर रहे हैं। नवरात्रों के दौरान सार्वजनिक स्थलों पर भंडारों और पूजा सहित जागरण का आयोजन भी होता है।

लेकिन लोग इस बार इन सब से दूर हैं। गृहिणियों रीना देवी, मीरा देवी, तारो देवी, कश्मीरा देवी, सुनीता एवं सुरेंद्र कुमार, विशंभर दास, अरविंद कुमार का कहना है कि इस बार कोरोना वायरस की वजह से कन्या पूजन सहित भंडारे और जागरण नहीं करवाए जा रहे हैं।

सरकार व स्वास्थ्य विभाग के आदेशों व एडवाइजरी की पालना की जा रही है। अगर हालात सामान्य होते हैं तो आगामी नवरात्रों में ये कार्यक्रम हो जाएंगे। बहरहाल, घर में ही परिवार सहित पूजा अर्चना कर रहे हैं।
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कोरोना ने बढ़ाईं गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों की दिक्कतें

गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को उपचार के लिए बाहरी राज्य में जाने में मुश्किल हो रही है। कई मरीजों को पीजीआई समेत अन्य निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में कीमोथैरेपी या किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचना मुश्किल हो गया है। चिकित्सा परामर्श या दवाई न मिलने पर मृत्यु का भय उन्हें सता रहा है।

क्षेत्र के रमेश चंद का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। इन्हें नियमित दवाई का सेवन करना पड़ता है। दवाई खत्म हो चुकी है। कर्फ्यू के दौरान वह चंडीगढ़ से अपने दवाई कैसे लाएं? गाड़ी की सुविधा भी नहीं है। एचआरटीसी बसों में इन्हें निशुल्क बस पास की सुविधा है। उनके साथ एक अटेंडेंट भी जा सकता है। अब समस्या यह है कि वह कैसे दवाई लाएं व इलाज करवाएं। 

सूरम चंद डेराबस्सी में एक निजी अस्पताल के आईसीयू में हैं। इनकी देखभाल के लिए रिश्तेदार को वहां जाना है, लेकिन कोई सुविधा नहीं मिल रही है। कोटला गांव में पत्नी के साथ रह रहे हरवंश दत्त ने बताया कि उनकी पत्नी का पंचकूला के एक अस्पताल में ऑपरेशन हुआ है। विशेष इंजेक्शन लगाने के लिए पंचकूला ले जाना है। बिझड़ी की कांता को हमीरपुर रेफर किया गया है।

इन्होंने कहा कि यदि उन्हें अपने जीवन रक्षक दवाई ही नहीं मिलेगी तो वह कोरोना से कैसे लड़ पाएंगे। प्रशासन से इन लोगों ने आग्रह किया कि बाहरी राज्यों के लिए ऐसी दवाई लाने या जाने की सुविधा दी जाए। संकट की घड़ी में ऐसे लोगों को मदद की दरकार है। उधर, एसडीएम प्रदीप कुमार ने बताया कि अगर इन लोगों को कर्फ्यू पास की जरूरत है तो इनके पास बना दिए जाएंगे।
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हमीरपुरः जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों के कान पकड़वाए, उठक-बैठक भी करवाई

उपमंडल सुजानपुर के उहल कक्कड़ में क्षतिग्रस्त मुख्य पेयजल पाइप को जोड़ने जा रहे हिमाचल प्रदेश जलशक्ति विभाग के आधा दर्जन कर्मचारियों के पुलिस ने कान पकड़वाए और उठक बैठक भी करवाई। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई से भड़के जल शक्ति विभाग के इन कर्मचारियों ने रविवार से पेयजल आपूर्ति ठप करने की चेतावनी दी है। 

पीड़ित कर्मचारियों ने इस मामले की जानकारी अपने विभाग के उच्चाधिकारियों को भी दे दी है। जल शक्ति विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले को जिलाधीश हमीरपुर और एसपी हमीरपुर के ध्यान में भी ले आए हैं। वहीं जलशक्ति और पुलिस विभाग के आमने सामने आने से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। क्योंकि इस घटना के बाद जलशक्ति विभाग के कर्मचारियों ने शनिवार शाम तक क्षतिग्रस्त पेयजल पाइप को दुरुस्त नहीं किया। 

यह मामला शनिवार दोपहर 12:30 बजे का है। जल शक्ति विभाग को शिकायत मिली थी कि उहल कक्कड़ में पेयजल की मुख्य पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। सूचना मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर ने वेल्डिंग का काम करने वाले और फिटर व पलंबरों को संबंधित पेयजल लाइन ठीक करने के लिए भेजा। लेकिन इसी दौरान कोरोना वायरस के चलते लागू कर्फ्यू का जायजा लेने जा रही सुजानपुर पुलिस टीम ने पूछताछ के लिए इन कर्मचारियों को गाड़ी से उतरने के लिए कहा। 

जलशक्ति विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने बार-बार पुलिस विभाग को बताया कि वह जलशक्ति विभाग के कर्मचारी हैं और क्षतिग्रस्त पेयजल पाइप को जोड़ने के लिए जा रहे हैं। लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी और कान पकड़ वाकर उठक बैठक करवाई। उधर शिकायत मिलने के बाद उपायुक्त हमीरपुर हरिकेश मीणा ने पुलिस अधीक्षक को इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने के लिए कहा है।

जलशक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज भोगल ने बताया कि उनके विभाग के कर्मचारी उहल कक्कड़ में क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन को जोड़ने के लिए शनिवार को दोपहर 12:00 बजे गए थे। लेकिन कर्मचारियों ने बताया कि पुलिस ने उन्हें काम पर जाने से रोका और कान पकड़ा कर उठे बैठक करवाई है। इस मामले से उपायुक्त हमीरपुर और पुलिस अधीक्षक को अवगत करवा दिया है।

पुलिस अधीक्षक हमीरपुर अर्जित सेन ठाकुर ने बताया कि जलशक्ति विभाग की तरफ से शिकायत मिली है। इस मामले की जांच की जा रही है।
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सभी जिलों के डीसी व एसपी करेंगे रिहा होने वाले कैदियों को घर पहुंचाने की व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हिमाचल में गठित उच्च स्तरीय कमेटी के निर्देश के बाद सूबे की सभी जेलों में सजा काट रहे कैदियों और विचाराधीन कैदियों को छोड़ने को लेकर चयन प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए छोड़ने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी जिलों के डीसी व एसपी को निर्देश जारी किए हैं कि कैदियों के छूटने के बाद उन्हें घर पहुंचाने की व्यवस्था जिला प्रशासन करेगा।

सभी डीसी यह सुनिश्चित करेंगे कि घर जाने वाले हर कैदी को परिवहन पास उपलब्ध हो और उनके जेल से घर जाने की भी व्यवस्था करें। जेल अधीक्षकों को निर्देश दिए कि छोड़े जाने से पहले हर कैदी का मेडिकल अफसर से मेडिकल कराया जाएगा। सभी जेलों के अधीक्षक छूटने योग्य सजायाफ्ता व विचाराधीन कैदियों की सूची बनाकर डीजी जेल कार्यालय और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उपलब्ध कराएंगे, ताकि दोनों संस्थाएं इन पर निर्णय कर आदेश जारी कर सकें। 

बता दें, हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस टीएस चौहान की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई थी, जिसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार और महानिदेशक जेल सोमेश गोयल को सदस्य बनाया गया था। कमेटी की शुक्रवार को हुई बैठक में निर्णय हुआ था कि सात साल से कम सजा वाले अपराध के आरोप में जेल में बंद ऐसे विचाराधीन व सजायाफ्ता कैदियों को छोड़ा जाएगा जो पहली बार जेल गए हैं।

इसके लिए यह शर्त रखी गई कि ऐसे कैदी को कम से कम तीन महीने से ज्यादा समय से जेल में बंद होना जरूरी होगा। सजायाफ्ता कैदियों के लिए पैरोल या सजा माफी जैसी प्रक्रिया डीजी जेल और प्रदेश सरकार के स्तर पर चलाई जानी है। जबकि विचाराधीन कैदियों को छोड़ने के लिए उनका हिमाचल प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य किया गया है।
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कोरोना वायरस: चंडीगढ़ में फंसे 17 लोग, जंजैहली से पठानकोट पैदल निकले

कोरोना महामारी ने हिमाचल में परिवार के सदस्यों को बांट दिया है। बेटा दिल्ली में है। पत्नी ऊना और खुद पिता शिमला में कर्फ्यू खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। हिमाचल में परिवहन सेवाएं बंद हैं। कर्फ्यू के चलते टैक्सी भी नहीं चल रही हैं। चंडीगढ़ में हिमाचल के करीब 17 लोगों के फंसने की सूचना है। यातायात सेवाएं बंद होने से ये लोग शिमला नहीं आ पा रहे हैं। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज आईजीएमसी में अनुबंध पर तैनात एक नर्स अपने गांव ऊना गई थीं।

22 मार्च से वह शिमला नहीं आ पाई हैं। अस्पताल से नर्सें फोन कर ड्यूटी के किए बुला रही हैं। सचिवालय और परिवहन निगम में प्रतिदिन इस तरह की शिकायतें आ रही हैं। लोगों ने प्रदेश सरकार और परिवहन निगम से कर्फ्यू में एक दिन की छूट देकर बसें चलाने की मांग की है। उधर परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर का कहना है कि अगर किसी को राशन व अन्य सुविधा की जरूरत है। तो वह फोन कर सकता है।
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अब एक बार में नहीं मिलेगा दो महीने का सस्ता राशन, सरकार ने बदली व्यवस्था

हिमाचल सरकार ने डिपुओं में सस्ते राशन आवंटन की प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब उपभोक्ताओं को एक साथ राशन का डबल कोटा नहीं मिलेगा। अप्रैल में एक से दस तारीख तक सिंगल और इसी महीने की 20 तारीख से महीने के अंत तक दूसरे कोटे का राशन दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि दो महीने का कोटा उपभोक्ता एक साथ नहीं उठा सकेंगे। ऐसे में डबल कोटे का राशन अलग-अलग तारीखों को दिया जाएगा।

कोरोना महामारी के चलते प्रदेश सरकार ने उपभोक्ताओं को डबल राशन कोटा देने का फैसला लिया है। कोरोना को लेकर प्रदेश में कर्फ्यू लगा है। खाद्य आपूर्ति विभाग का मानना है कि दो महीने राशन का कोटा एक साथ उठाने के लिए कम से कम दो लोगों की आवश्यकता पड़ेगी। इससे डिपो में राशन लेने वालों की भीड़ उमड़ सकती है। इसके चलते व्यवस्था को बदला है। खाद्य आपूर्ति सचिव अमिताभ अवस्थी ने बताया कि उपभोक्ताओं को दो महीने का राशन कोटा मिलेगा। लेकिन राशन मिलने की तारीख अलग-अलग होगी। 
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