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Kurukshetra: Primary teachers protest against the mandatory TET requirement; memorandum submitted to the DC.
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कुरुक्षेत्र। टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में प्राइमरी शिक्षकों का प्रदर्शन, डीसी को सौंपा ज्ञापन
कुरुक्षेत्र।
टीईटी की अनिवार्यता समाप्त कराने की मांग को लेकर हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन की जिला कार्यकारिणी ने जिला प्रधान राजपाल कालड़ा के नेतृत्व में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम दिए ज्ञापन में शिक्षा विभाग के 14 सितंबर के आदेश पर आपत्ति जताई। शिक्षकों का कहना है कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की शर्त लागू नहीं थी, लेकिन अब विभाग ने नौकरी में बने रहने के लिए भी टीईटी पास करने की अनिवार्यता कर दी है।
जिला अध्यक्ष राजपाल कालड़ा ने बताया कि शिक्षा विभाग ने न्यायालय का हवाला देते हुए कहा है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करना होगा। उनके अनुसार एनसीटीई की गाइडलाइन के तहत 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया गया था। यह शर्त 2011 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों पर लागू नहीं थी।
कालड़ा ने कहा कि अब विभाग के आदेश में सभी संबंधित शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया गया है। टीईटी पास नहीं करने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की स्थिति बन सकती है। केवल पांच वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षकों को इससे छूट दी गई है। पदोन्नति के लिए भी टीईटी पास करना जरूरी किया गया है।
जिला महासचिव राजेश सैन, वरिष्ठ उपप्रधान डॉ. विजेंद्र सोलंकी, प्रदीप गुप्ता, प्रेस प्रवक्ता जयकुमार, सलाहकार राजेश मंगल और राज्य सचिव अशोक बोडला ने कहा कि एसोसिएशन विभाग के इस फैसले का विरोध करती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को राहत दिलाने के लिए उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा गया है।
एसोसिएशन ने 23 अगस्त 2010 के अधिसूचना के पैरा चार व पांच तथा 12 नवंबर 2014 के अधिसूचना के पैरा 4-बी को शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 की धारा 23(2) में 23 अगस्त 2010 से प्रतिस्थापित करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और न्यायिक स्पष्टता सुनिश्चित होगी।
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