महराजगंज। सीमावर्ती इलाकों में सख्ती से पशु तस्करों ने रूट बदल दिया है। नेपाल के बजाय अब बिहार में गोवंश पहुंचाए जा रहे हैं। इसमें जोखिम भी कम है। बीते दिनों पशु क्रूरता के केस भी दर्ज हुए हैं। पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, सीमा पर घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए पुलिस सतर्क है। यही कारण है कि 7 मार्च 2023 के बाद से अब तक पशु तस्करी का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। 7 मार्च 2023 को निचलौल थाना क्षेत्र के भारत नेपाल सीमा के करीब मिश्रवलिया गांव के पास पुलिस ने तस्करी के छह पशुओं को बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। सीमा पर सख्ती को देखते हुए पशु तस्करों ने रास्ता भी बदल लिया।
सूत्रों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्ती से पशु तस्करों ने बिहार के रक्सौल और बगहा क्षेत्र में ठिकाना बना लिया है। तस्कर जिले से पशुओं को खरीदकर ठिकाने तक ले जाते हैं। कुछ तस्कर तो छुट्टा पशुओं को भी उठा ले जाते हैं। सुरक्षित ठिकानों पर पशुओं को रखते हैं। अड्डे पर पहुंचने के बाद गिरोह के गुर्गे दुधारू पशुओं को कुछ दिन रखते हैं, शेष को मांस आदि के लिए खाड़ी देश भेजने वाले तस्करों के हवाले कर देते हैं।
सूत्रों का कहना है कि बाॅर्डर पर निगरानी बढ़ने के कारण पशु तस्कर गोवंश को सोहगीबरवा के रास्ते बगहा पहुंचा देते हैं। इस क्षेत्र में अगर कोई पूछता है तो स्वयं का मवेशी बताकर तस्कर किनारा कर लेते हैं। बोलचाल सामान्य होने पर सुरक्षा कर्मियों को चकमा देना आसान रहता है। यही वजह है कि नेपाल से पशु तस्करी रुकी तो बिहार पहुंचाने लगे।
तस्करों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस टीम केवल संदिग्ध पिकअप की जांच करती है। तेज गति से गुजरने वाले पिकअप पर विशेष नजर होती है। सूत्र बताते हैं कि मोडिफाई पिकअप में मोटे लोहे के बंपर, पीछे धूल उड़ाने के लिए दोनों पहियों पर नीचे तक रबर, गोवंश चढ़ाने के लिए सीढ़ीनुमा बड़ा ढाला लगाया जाता है।
तस्कर भैंस और पड़वा की खरीदारी करने के साथ ही छुट्टा गोवंश को दिन में ही पकड़कर जगह-जगह बांध देते हैं। फिर तस्कर इन मवेशियों को वाहन से चिह्नित स्थान पर लाते हैं। वहां से रात में इन्हें बिहार पहुंचा दिया जा रहा है। ी
शामली कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते बसपा कार्यकर्ता । संवाद