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कुंडली में स्थित मंगल और शनि का सम्बन्ध किस प्रकार करेगा आपको प्रभावित !
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अमेरिका में रिसर्च छोड़कर वापस आए डॉ संदीप, बच्चों को विज्ञान के प्रति कर रहे जागरूक

डॉ. संदीप सिंह अमेरिका में पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च छोड़कर वापस अपने देश आ गए हैं और ग्रामीण बच्चों को विज्ञान और तकनीक के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

13 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

सात बागी विधायक निलंबित, मायावती बोलीं- सपा को हराने के लिए भाजपा को देंगे वोट

अपने विधायकों की बगावत पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने तीखे तेवर दिखाते हुए न सिर्फ सात विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया बल्कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव के पहले किए गए इस षड्यंत्र का जवाब वे विधान परिषद चुनाव में देंगी। सपा को हराने के लिए भाजपा को भी वोट देने से गुरेज नहीं करेंगी। जो भी सपा के उम्मीदवार को हराएगा, बसपा उसे अपने विधायकों का वोट दिलाएगी।

मायावती ने बृहस्पतिवार को मीडिया कर्मियों से बातचीत में दो टूक कहा, पिछले लोकसभा चुनाव में सपा से गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का केस वापस लेना बड़ी भूल थी। गेस्ट हाउस कांड मेरी हत्या के लिए सपा का रचा गया षड्यंत्र था, जिसमें वह कामयाब नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि गठबंधन के बाद वे जीत के प्रयास में लगी रहीं, लेकिन सपा मुखिया बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र से गेस्ट हाउस कांड केस वापस लेने पर जोर देते रहे। इसके बाद केस वापस ले लिया। चुनाव नतीजे के बाद सपा का रवैया देखकर लगा कि गठबंधन और केस वापस लेना बड़ी गलती थी। यदि गंभीरता से सोचती तो ऐसा न करती।

अखिलेश को नसीहत - तोड़फोड़ की राजनीति टिकाऊ नहीं, पिता से सीखें
‘यदि लंबी राजनीति करनी है तो ऐसा कोई कार्य न करें जिससे राजनीतिक भविष्य खराब हो। तोड़फोड़ की राजनीति कभी टिकाऊ नहीं होती। अपने पिता से सीख ले सकते हैं।’
‘राज्यसभा चुनाव में अखिलेश ने वैसा ही षड्यंत्र किया, जैसा उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2003 में उनके 38 विधायक तोड़कर किया था। उस तोड़फोड़ का नतीजा यह निकला कि बसपा 2007 में पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई। अखिलेश का भी उनके पिता की तरह बुरा हाल होने वाला है। बसपा फिर पूर्ण बहुमत से सत्ता में आएगी।

 भाजपा से सांठगांठ पर बोलीं- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
‘सपा ने राज्यसभा में पर्चे की जांच के समय अपना दलित विरोधी चेहरा फिर दिखा दिया। सफलता न मिलने पर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तरह जबरन भाजपा के साथ सांठगांठ कर चुनाव लड़ने का आरोप लगा रही है। इसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है।’
- मायावती

दलबदल कानून के तहत कार्रवाई...
मायावती ने पार्टी प्रत्याशी रामजी गौतम का प्रस्ताव होने से इनकार करने वाले 4 विधायकों समेत 7 विधायकों पर कार्रवाई करते हुए कहा कि इन्हें अब पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा। इनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ाया जाएगा। इन निलंबित विधायकों के स्थान पर इन्हीं की जाति, धर्म व समाज के लोगों को टिकट दिया जाएगा। मुस्लिम समाज व अन्य को बढ़ावा मिलता रहेगा।

ये सात विधायक निलंबित
- असलम राइनी, भिनगा-श्रावस्ती
- असलम अली चौधरी, ढोलाना-हापुड़
- मुजतबा सिद्दीकी, प्रतापपुर-प्रयागराज
- हाकिम लाल बिंद, हंडिया-प्रयागराज
- हरगोविंद भार्गव, सिधौली-सीतापुर
- सुषमा पटेल, मुंगरा बादशाहपुर-जौनपुर
- वंदना सिंह, सगड़ी-आजमगढ़
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बसपा सुप्रीमो मायावती। बसपा सुप्रीमो मायावती।

36 रुपये आलू, 55 रुपये किलो प्याज बेचेगी सरकार- मोबाइल वैन से आज से शुरू होगी बिक्री

राज्य सरकार मोबाइल वैन के जरियें सस्ती दरों पर प्याज व आलू उपलब्ध कराने जा रही है। शुक्रवार से लखनऊ में इसकी शुरुआत होगी। वैन से आलू 36 व प्याज 55 रुपये प्रति किलो बेचा जाएगा। 
आलू व प्याज की आसमान छूती कीमतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि व विपणन कार्य से जुड़ी संस्थाओं व विभागों को समस्या के समाधान करने के निर्देश पहले ही दिए हैं।

इसी क्रम में मोबाइल वैन से आलू व प्याज की बिक्री की योजना बनाई गई है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ के प्रबंध निदेशक डॉ. आरके तोमर ने बताया कि वैन से आलू-प्याज के साथ दाल भी बेचने की योजना है। शासन से मंडी परिषद के द्वारा इस योजना के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराए जाने का आग्रह किया गया है। लखनऊ के बाद इस योजना को अन्य जिलों में भी संचालित किया जाएगा। 

उधर राज्य मंडी परिषद के प्रबंध निदेशक जेपी सिंह ने कहा कि प्रयागराज, झांसी, आगरा, गोरखपुर व मथुरा के व्यापारी संघों व आढ़तियों के सहयोग से सस्ते दामों पर आलू व प्याज बेचने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा पीसीएफ व पीसीयू के जरिये दलहन की बिक्री शुरू की जा रही है। दोनों संस्थाओं को इस कार्य के लिए 12.5-12.5 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए गए हैं।
 
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आनंदीबेन पटेल ने अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के ‘लोगो’ व ‘सूक्ति’का किया लोकार्पण

राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में नवनिर्मित अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के ‘लोगो’ व ‘सूक्ति’ का लोकार्पण किया। लोगो व सूक्ति ‘आरोग्यमेव अटल अमृतम’ (आरोग्य ही अटल अमृत है) के चयन के लिए चिकित्सा विवि ने राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन प्रतियोगिता कराई थी।

इसमें कुल 252 लोगो व 138 सूक्तियां प्राप्त हुई थीं। लोगो व सूक्ति को तीन विशेषज्ञों की टीम ने चुना है। सर्वश्रेष्ठ ‘लोगो’ व ‘सूक्ति’ के लिए बीस हजार रुपये प्रथम विजेता के लिए निर्धारित था। विवि के कुलपति प्रोफेसर एके सिंह ने बताया कि सूक्ति में डॉ अमिता जैन और लोगो में रचित सिंह को विजेता चुना गया। डॉ अमिता अहमदाबाद की रहने वाली हैं और इन दिनों लखनऊ में रह रही हैं। वे आयुर्वेद फिजीशियन हैं। वहीं रचित सिंह दिल्ली के हैं और पेशे से आर्किटेक्ट व ग्राफिक डिजाइनर हैं।
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सपा से गठबंधन व गेस्ट हाउस कांड का मुकदमा वापस लेना बड़ी गलती: मायावती

राज्यपाल ने किया ‘लोगो’ व ‘सूक्ति’ का लोकार्पण
बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्वीकार किया है कि सपा से लोकसभा चुनाव में गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का मुकदमा वापस लेना बहुत बड़ी गलती थी।

मायावती ने बयान में कहा कि गेस्ट हाउस कांड उनकी हत्या के लिए एक षडयंत्र था, जिसमें सपा कामयाब नहीं हो पाई थी। पर, बीएसपी ने संकीर्ण ताकतों को सत्ता से दूर रखने के लिए इस न भुलाने वाली घटना को भुलाते हुए सपा से लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया। लेकिन, परिवार की लड़ाई में अखिलेश को इस गठबंधन का ज्यादा फायदा नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि चुनाव बाद कई बार अखिलेश यादव को फोन किया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद मजबूरी में सपा से अलग चलने का फैसला करना पड़ा।

मायावती ने कहा कि वह गठबंधन के बाद जीत के प्रयास में लगी रहीं। लेकिन सपा मुखिया बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र से गेस्टहाउस कांड का केस वापस लेने पर जोर देते रहे। इसके बाद केस वापस ले लिया। चुनाव नतीजे के बाद सपा का रवैया देखकर लगा कि सपा से गठबंधन और केस वापस लेना बड़ी गलती थी। ऐसा नहीं करना चाहिए था। यदि गंभीरता से सोचती तो ऐसा न करती।

रामगोपाल से बात करने के बाद उतारा बसपा प्रत्याशी
मायावती ने कहा कि राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद बसपा महासचिव सतीश ने अखिलेश को फोन किया। उनका फोन नहीं उठा। बाद में अखिलेश के पीएस को फोन किया। पीएस ने कहा कि बात करा देंगे, पर नहीं कराई। इसके बाद मिश्रा ने सपा महासचिव रामगोपाल से बात की।

उनसे पूछा कि सपा कितने प्रत्याशी उतारेगी? राम गोपाल ने एक ही प्रत्याशी उतारने की बात कही। इस पर मिश्रा ने उन्हें बताया कि यदि सपा एक ही प्रत्याशी उतार रही है तो एक प्रत्याशी बसपा उतारेगी। आखिरी सीट के लिए सभी विरोधी पार्टियों के वोट भाजपा से अधिक हैं। लेकिन अखिलेश ने अपने पिता की तरह दलित विरोधी कार्य किया। निर्दलीय का पर्चा भरवाकर बसपा के प्रस्तावक विधायकों की खरीद-फरोख्त कर बसपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज कराने की कोशिश की। इस षडयंत्र में वह नाकाम हुए।

उन्होंने अखिलेश को नसीहत दी कि यदि लंबी राजनीति करनी है तो ऐसा कोई कार्य न करें जिससे राजनीतिक भविष्य खराब हो। तोड़फोड़ की राजनीति कभी टिकाऊ नहीं होती। अपने पिता से सीख ले सकते हैं।

खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तरह भाजपा से सांठगांठ का आरोप
उन्होंने कहा कि सपा ने राज्यसभा में पर्चे की जांच के समय अपना दलित विरोधी चेहरा फिर दिखा दिया। सफलता न मिलने पर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तरह जबरन भाजपा के साथ सांठगांठ कर चुनाव लड़ने का आरोप लगा रही है। इसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है।

अखिलेश ने सतीश का फोन नहीं उठाया...ब्राह्मण समाज लेगा बदला
मायावती ने कहा कि सतीश चंद्र मिश्र प्रतिष्ठित अधिवक्ता हैं और राजनीति का लंबा तजुर्बा है। ऐसे में अखिलेश यादव का उनसे बात न करना पूरे प्रदेश के ब्राह्मण समाज का अपमान है। यूपी का ब्राह्मण सपा से इस अपमान का बदला आगामी विधानसभा चुनाव में जरूर लेगा।

कानून-व्यवस्था पर भाजपा को नसीहत का सपा को कोई अधिकार नहीं
मायावती ने कहा कि सपा राज में आए दिन हत्या होती थी। गुंडों-बदमाशों व माफियाओं का राज था। ब्राह्मण व दलितों को कुछ समझा ही नहीं जाता था। ऐसे में कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार को नसीहत देने का सपा को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा के उलट बसपा सरकार ने प्रदेश को बेहतर कानून-व्यवस्था व माहौल दिया। ऐसे में प्रदेश की कानून-व्यवस्था न संभाल पाने के लिए भाजपा सरकार को नसीहत देने का अधिकार बसपा को है। उनकी सलाह को लोग मानेंगे। 
 
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यूपी उप चुनाव : सात सीटों पर 88 प्रत्याशी मैदान में, 18 पर आपराधिक मामले दर्ज

यूपी की सात विधानसभा सीटों पर तीन नवंबर को होने जा रहे उप चुनाव में कुल 88 प्रत्याशी मैदान में हैं। इसमें से एडीआर इलेक्शन वॉच ने 87 प्रत्याशियों के हलफनामे का विश्लेषण किया है। सबसे अधिक बुलंदशहर सीट पर 18 उम्मीदवार हैं और सबसे कम कानपुर नगर की घाटमपुर सीट पर 6 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 87 प्रत्याशियों में से 18 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसमें 15 ऐसे हैं जिन पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। बुलंदशहर से बसपा उम्मीदवार मोहम्मद युनुस के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप समेत कुल 5 मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट से निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह के खिलाफ कुल 7 मामले दर्ज हैं जिसमें हत्या का भी आरोप धनंजय सिंह पर है। उतर प्रदेश इलेक्शन वॉच के कोआर्डिनेटर संजय सिंह ने बताया कि बसपा के सात में से पांच प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। जबकि सपा के 6 में से 5 प्रत्याशी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। भाजपा के किसी भी उम्मीदवार के खिलाफ कोई भी केस दर्ज नहीं है। 

34 उम्मीदवार करोड़पति
उप चुनाव में किस्मत आजमा रहे 34 उम्मीदवार ऐसे हैं जो करोड़पति हैं। बसपा के सभी सात उम्मीदवार करोड़पति हैं जबकि सपा के 6 में से 5 और भाजपा के 7 में से 4 उम्मीदवार करोड़ पति हैं। सबसे अधिक संपति समाजवादी पार्टी के देवरिया से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार ब्रहमाशंकर त्रिपाठी की है। उनकी कुल संपति 31.49 करोड़ रुपये है। दूसरे नंबर पर निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह हैं जिनकी संपति 23.07 करोड़ रुपये के बराबर की है। धनंजय पर 1.71 करोड़ की देनदारी भी है। 

आधे से अधिक ग्रेजुएट उम्मीदवार
उप चुनाव की खास बात यह है कि इसमें ज्यादातर पढ़े लिखे लोग किस्मत आजमा रहे हैं। 88 में से 47 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी शैक्षिक योग्यता ग्रेजुएट या उससे अधिक है। 26 उम्मीदवार पांचवीं से 12वीं पास के बीच के हैं। 10 प्रत्याशियों ने खुद को साक्षर बताया है और एक प्रत्याशी ने खुद को अशिक्षित बताया है।

 
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आईपीएस अफसरों को तलाशने में नाकाम साबित हो रही यूपी पुलिस

भ्रष्टाचार व आत्महत्या के लिए उकसाने के दो अलग अलग मामलों में वांछित दो आईपीएस अफसरों को तलाशने में प्रदेश पुलिस नाकाम साबित हो रही है। इसमें एसटीएफ भी हाथ पैर मार रही है लेकिन सफलता उसे भी अब तक नहीं मिली है। 

जानकारी के अनुसार पिछले जून माह में पशुपालन विभाग के नाम पर ठगी का मामला उजागर हुआ था। इसमें कई लोग गिरफ्तार हुए थे। आरोप डीआईजी अरविंद सेन पर भी लगा। अरविंद सेन पर आरोप था कि उन्होंने सीबीसीआईडी में बतौर एसपी रहते हुए पीड़ित को डराया, धमकाया और सादे पेपर पर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बदले ठगों ने उन्हें मोटी रकम अदा की। मामले की जांच हुई तो आरोप सही पाए गए जिसके बाद डीआईजी अरविंद सेन को निलंबित कर दिया गया। बाद में उन्हें कोर्ट से कुछ दिनों की राहत मिली लेकिन आखिर में कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से मना कर दिया। अब पुलिस उन्हें तलाश रही है।

इसी तरह महोबा में इंद्रकांत त्रिपाठी ने एसपी मणिलाल पाटीदार पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए। आरोप लगाने के दो दिन बाद इंद्रकांत को संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लग गई। गोली लगने के पांच दिनों बाद इंद्रकांत की मौत हो गई। मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने जांच में पाया कि एसपी बार-बार पैसों की मांग कर रहे थे, जिसके कारण इंद्रकांत त्रिपाठी काफी तनाव में थे और उन्होंने अपनी ही रिवाल्वर से खुद को गोली मार ली थी। इस मामले में पाटीदार आरोपी बनाए गए हैं। पाटीदार को पुलिस तलाश रही है। उनके खिलाफ न्यायालय से पुलिस ने गैर जमानती वारंट भी ले लिया है। लेकिन पुलिस उन्हें अब तक तलाश करने में नाकाम साबित हुई है।
 
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अयोध्या समेत 15 मंडलों के उप श्रमायुक्तों को चेतावनी

श्रमिक कल्याण की योजनाओं में लापरवाही पर 15 मंडलों के उप श्रमायुक्तों को चेतावनी दी गई है। इन सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। प्रदेश श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुनील भराला ने बताया कि जिन मंडलों ने लापरवाही की है उनमें झांसी, नोएडा, वाराणसी, मुरादाबाद, अलीगढ़, आजमगढ़, प्रयागराज, गाजियाबाद, चित्रकूटधाम, देवीपाटन, अयोध्या, बस्ती, मिर्जापुर, मेरठ व सहारनपुर मंडल शामिल हैं। इस संबंध में अपर श्रम कल्याण आयुक्त फैसल आफताब ने पत्र जारी किया है। 

दरअसल, कई स्थानों पर परिषद की योजनाओं को लेकर 50 से भी कम आवेदन आए। इस पर परिषद ने चेताया है कि संबंधित अफसरों का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। भराला ने कहा कि अब तक योजनाओं की प्रगति की मुख्यालय पर समीक्षा की जाती थी, लेकिन लापरवाही को देखते हुए अब मंडलवार समीक्षा होगी। पहली बैठक वाराणसी में फिर गोरखपुर, अयोध्या, मेरठ आदि मंडलों में क्रमवार होगी। नवंबर के शुरुआत में वाराणसी में होने वाली बैठक में लापरवाही बरतने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कहा, श्रमिकों के कल्याण की योजनाओं में किसी तरह की निष्क्रियता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 
 
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आसान किस्त योजना में भुगतान न कर पाने वाले किसानों को मिलेगी छूट

किसान आसान किस्त योजना के तहत भुगतान न कर पाने वाले पंजीकृत बिजली उपभोक्ताओं को बिल संशोधित करके छूट दी जाएगी। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश पर पावर कॉर्पोरेशन की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।

पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एम. देवराज की ओर से सभी बिजली कंपनियों व केस्को के प्रबंध निदेशक को दिशा निर्देश भेज दिए हैं। इसमें कहा गया है कि किसान आसान किस्त योजना में ऐसे पंजीकृत विद्युत उपभोक्ता जो किस्त जमा न कर पाने के कारण डिफाल्टर हो गए गए हैं, फिर भी किस्त की अवधि (6 माह) में 31 जनवरी 2020 के मूल बकाये एवं इसके बाद के महीनों के सभी मासिक बिल का सरचार्ज सहित पूर्ण भुगतान कर देते हैं तो उन्हें 31 जनवरी 2020 तक के बकाये पर लगने वाले सरचार्ज की छूट प्रदान की जाएगी।
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