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पर्सनलाइज्ड रिपोर्ट से जानें क्या वर्ष 2021 में आपको मिलेगा मनचाहा साथी ?
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अमेरिका में रिसर्च छोड़कर वापस आए डॉ संदीप, बच्चों को विज्ञान के प्रति कर रहे जागरूक

डॉ. संदीप सिंह अमेरिका में पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च छोड़कर वापस अपने देश आ गए हैं और ग्रामीण बच्चों को विज्ञान और तकनीक के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

13 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

सात बागी विधायक निलंबित, मायावती बोलीं- सपा को हराने के लिए भाजपा को देंगे वोट

अपने विधायकों की बगावत पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने तीखे तेवर दिखाते हुए न सिर्फ सात विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया बल्कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव के पहले किए गए इस षड्यंत्र का जवाब वे विधान परिषद चुनाव में देंगी। सपा को हराने के लिए भाजपा को भी वोट देने से गुरेज नहीं करेंगी। जो भी सपा के उम्मीदवार को हराएगा, बसपा उसे अपने विधायकों का वोट दिलाएगी।

मायावती ने बृहस्पतिवार को मीडिया कर्मियों से बातचीत में दो टूक कहा, पिछले लोकसभा चुनाव में सपा से गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का केस वापस लेना बड़ी भूल थी। गेस्ट हाउस कांड मेरी हत्या के लिए सपा का रचा गया षड्यंत्र था, जिसमें वह कामयाब नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि गठबंधन के बाद वे जीत के प्रयास में लगी रहीं, लेकिन सपा मुखिया बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र से गेस्ट हाउस कांड केस वापस लेने पर जोर देते रहे। इसके बाद केस वापस ले लिया। चुनाव नतीजे के बाद सपा का रवैया देखकर लगा कि गठबंधन और केस वापस लेना बड़ी गलती थी। यदि गंभीरता से सोचती तो ऐसा न करती।

अखिलेश को नसीहत - तोड़फोड़ की राजनीति टिकाऊ नहीं, पिता से सीखें
‘यदि लंबी राजनीति करनी है तो ऐसा कोई कार्य न करें जिससे राजनीतिक भविष्य खराब हो। तोड़फोड़ की राजनीति कभी टिकाऊ नहीं होती। अपने पिता से सीख ले सकते हैं।’
‘राज्यसभा चुनाव में अखिलेश ने वैसा ही षड्यंत्र किया, जैसा उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2003 में उनके 38 विधायक तोड़कर किया था। उस तोड़फोड़ का नतीजा यह निकला कि बसपा 2007 में पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई। अखिलेश का भी उनके पिता की तरह बुरा हाल होने वाला है। बसपा फिर पूर्ण बहुमत से सत्ता में आएगी।

 भाजपा से सांठगांठ पर बोलीं- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
‘सपा ने राज्यसभा में पर्चे की जांच के समय अपना दलित विरोधी चेहरा फिर दिखा दिया। सफलता न मिलने पर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तरह जबरन भाजपा के साथ सांठगांठ कर चुनाव लड़ने का आरोप लगा रही है। इसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है।’
- मायावती

दलबदल कानून के तहत कार्रवाई...
मायावती ने पार्टी प्रत्याशी रामजी गौतम का प्रस्ताव होने से इनकार करने वाले 4 विधायकों समेत 7 विधायकों पर कार्रवाई करते हुए कहा कि इन्हें अब पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा। इनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ाया जाएगा। इन निलंबित विधायकों के स्थान पर इन्हीं की जाति, धर्म व समाज के लोगों को टिकट दिया जाएगा। मुस्लिम समाज व अन्य को बढ़ावा मिलता रहेगा।

ये सात विधायक निलंबित
- असलम राइनी, भिनगा-श्रावस्ती
- असलम अली चौधरी, ढोलाना-हापुड़
- मुजतबा सिद्दीकी, प्रतापपुर-प्रयागराज
- हाकिम लाल बिंद, हंडिया-प्रयागराज
- हरगोविंद भार्गव, सिधौली-सीतापुर
- सुषमा पटेल, मुंगरा बादशाहपुर-जौनपुर
- वंदना सिंह, सगड़ी-आजमगढ़
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बसपा सुप्रीमो मायावती। बसपा सुप्रीमो मायावती।

सजती दिख रही यूपी की भावी सियासत की तस्वीर, कांग्रेस की मुसीबत, भाजपा और सपा...

राज्यसभा चुनाव के घटनाक्रम ने प्रदेश में जिस तरह नए सियासी समीकरणों को जन्म दिया है, उससे प्रदेश की भावी सियासत की तस्वीर सजती दिखाई देने लगी है। वैसे तो राजनीति में कोई घटनाक्रम स्थायी नहीं होता है, लेकिन जिस तरह बसपा सुप्रीमो मायावती सपा पर आक्रामक हुई हैं और सपा की तरफ से बसपा में बगावत को हवा दी गई है उसको देखते हुए प्रदेश में 2022 का मुख्य सियासी मुकाबला भाजपा बनाम सपा के बीच होने के आसार बनने लगे हैं।

जिसमें ध्रुवीकरण की सुगबुगाहट भी सुनाई देने लगी है। यह सुगबुगाहट कांग्रेस, रालोद और अन्य भाजपा विरोधी दलों के लिए कड़ी तथा बड़ी चुनौती लेकर आई है। खासतौर से कांग्रेस के लिए जो बीते तीन-साढ़े तीन महीने से प्रदेश सरकार पर हमला बोलने की होड़ में आगे दिख रही थी।

ताजा घटनाक्रम से बदली परिस्थितियां किसी न किसी रूप में कांग्रेस को सपा के पाले में खड़े होने के लिए सियासी तौर पर मजबूर करती दिख रही हैं। ऐसा न करने पर उसे नए समीकरणों में अस्तित्व के लिए भी जूझना पड़ सकता है। साथ ही भाजपा विरोधी वोटों में बिखराव का आरोप सुनना पड़ सकता है। वैसे भी आज की स्थिति में तमाम दावों के बावजूद वह उत्तर प्रदेश में अभी अकेले अपने दम पर कोई  सियासी चमत्कार करने की स्थिति में नहीं दिखती।
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36 रुपये आलू, 55 रुपये किलो प्याज बेचेगी सरकार- मोबाइल वैन से आज से शुरू होगी बिक्री

राज्य सरकार मोबाइल वैन के जरियें सस्ती दरों पर प्याज व आलू उपलब्ध कराने जा रही है। शुक्रवार से लखनऊ में इसकी शुरुआत होगी। वैन से आलू 36 व प्याज 55 रुपये प्रति किलो बेचा जाएगा। 
आलू व प्याज की आसमान छूती कीमतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि व विपणन कार्य से जुड़ी संस्थाओं व विभागों को समस्या के समाधान करने के निर्देश पहले ही दिए हैं।

इसी क्रम में मोबाइल वैन से आलू व प्याज की बिक्री की योजना बनाई गई है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ के प्रबंध निदेशक डॉ. आरके तोमर ने बताया कि वैन से आलू-प्याज के साथ दाल भी बेचने की योजना है। शासन से मंडी परिषद के द्वारा इस योजना के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराए जाने का आग्रह किया गया है। लखनऊ के बाद इस योजना को अन्य जिलों में भी संचालित किया जाएगा। 

उधर राज्य मंडी परिषद के प्रबंध निदेशक जेपी सिंह ने कहा कि प्रयागराज, झांसी, आगरा, गोरखपुर व मथुरा के व्यापारी संघों व आढ़तियों के सहयोग से सस्ते दामों पर आलू व प्याज बेचने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा पीसीएफ व पीसीयू के जरिये दलहन की बिक्री शुरू की जा रही है। दोनों संस्थाओं को इस कार्य के लिए 12.5-12.5 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए गए हैं।
 
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सभी बोर्डों ने परीक्षा की तैयारी के लिए दिया अतिरिक्त समय, पाठ्यक्रम भी किया गया कम

इस बार सभी बोर्डों के छात्रों को हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए कम से कम एक महीना अतिरिक्त समय मिलेगा। यूपी बोर्ड ने तो बहुत पहले ही फरवरी के बजाय मार्च में बोर्ड परीक्षा कराने का निर्णय ले लिया था। वहीं, सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड की परीक्षा भी इस बार फरवरी के बजाय मार्च में होने की संभावना है।

सीबीएसई ने इसके लिए सभी स्कूलों से सुझाव भी मांगे हैं। कोरोना के चलते स्कूली शिक्षा बुरी तरह से प्रभावित है। अब सरकार कक्षा 10 व 12 के छात्रों की स्कूली शिक्षा को पटरी पर लाने की कवायद कर रही है। पाठ्यक्रम भी 30 प्रतिशत तक कम किया गया है। सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षा के पेपर पैटर्न में भी बदलाव किया है।

अब बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को तैयारी के लिए कम से कम एक माह का अतिरिक्त समय देने का प्रयास किया जा रहा है। यूपी बोर्ड के बाद सीबीएसई ने भी फरवरी के बजाय मार्च में बोर्ड परीक्षा के लिए स्कूलों के प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे हैं। स्कूलों के प्रतिनिधियों की वर्चुअल बैठक में बोर्ड के सिलेबस, परीक्षा की तैयारी को लेकर चर्चा की गई थी। 
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सहकारिता विभाग में घोटालों की जांच अब तक शुरू नहीं, ये है पूरा मामला

प्रतीकात्मक तस्वीर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बावजूद अधिकारी सहकारिता विभाग में घोटालों के आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। ताजा मामला सहकारी ग्राम्य विकास बैंक के सेवानिवृत्त प्रबंध निदेशक केपी सिंह से जुड़ा है। इनके खिलाफ शिकायतों पर तत्कालीन आयुक्त के जांच कराने की संस्तुति के 11 महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक जांच शुरू नहीं हो पाई है।

पिछले वर्ष सहकारी ग्राम्य विकास बैंक कर्मचारी संयुक्त परिषद सहित कुछ अन्य लोगों ने बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक के खिलाफ  पद के  दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी करके करोड़ों रुपये खर्च करने का आरोप लगाया था। इस पर 14 नवंबर 2019 को तत्कालीन आयुक्त व निबंधक सहकारिता एसवीएस रंगाराव ने प्रबंध निदेशक के खिलाफ शिकायतों की जांच कराने की संस्तुति की थी।

आयुक्त ने विभाग में तैनात अधिकारियों को केपी सिंह के समकक्ष बताते हुए शासन में नियुक्त किसी उच्च अधिकारी से जांच कराने का आग्रह किया था। पर, यह जांच अभी तक शुरू नहीं हो पाई। शिकायतकर्ता कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री मो. आसिफ  जमाल का आरोप है कि केपी सिंह ने नियमों की अनदेखी कर मनमाने स्थानांतरण करके लाखों रुपये कमाए।

इतना ही नहीं, नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये भी खर्च किए। जांच का आदेश हुए एक साल होने को आ गए, लेकिन अब तक जांच नहीं शुरू की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग से लेकर शासन स्तर तक बैठे कुछ लोग भ्रष्टाचार के आरोपियों की जांच लटकाते रहते हैं। 
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दर्दनाक हादसा: अनियंत्रित डंपर ने युवक को रौंदा, मौके पर ही मौत

आनंदीबेन पटेल ने अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के ‘लोगो’ व ‘सूक्ति’का किया लोकार्पण

राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में नवनिर्मित अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के ‘लोगो’ व ‘सूक्ति’ का लोकार्पण किया। लोगो व सूक्ति ‘आरोग्यमेव अटल अमृतम’ (आरोग्य ही अटल अमृत है) के चयन के लिए चिकित्सा विवि ने राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन प्रतियोगिता कराई थी।

इसमें कुल 252 लोगो व 138 सूक्तियां प्राप्त हुई थीं। लोगो व सूक्ति को तीन विशेषज्ञों की टीम ने चुना है। सर्वश्रेष्ठ ‘लोगो’ व ‘सूक्ति’ के लिए बीस हजार रुपये प्रथम विजेता के लिए निर्धारित था। विवि के कुलपति प्रोफेसर एके सिंह ने बताया कि सूक्ति में डॉ अमिता जैन और लोगो में रचित सिंह को विजेता चुना गया। डॉ अमिता अहमदाबाद की रहने वाली हैं और इन दिनों लखनऊ में रह रही हैं। वे आयुर्वेद फिजीशियन हैं। वहीं रचित सिंह दिल्ली के हैं और पेशे से आर्किटेक्ट व ग्राफिक डिजाइनर हैं।
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सपा से गठबंधन व गेस्ट हाउस कांड का मुकदमा वापस लेना बड़ी गलती: मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्वीकार किया है कि सपा से लोकसभा चुनाव में गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का मुकदमा वापस लेना बहुत बड़ी गलती थी।

मायावती ने बयान में कहा कि गेस्ट हाउस कांड उनकी हत्या के लिए एक षडयंत्र था, जिसमें सपा कामयाब नहीं हो पाई थी। पर, बीएसपी ने संकीर्ण ताकतों को सत्ता से दूर रखने के लिए इस न भुलाने वाली घटना को भुलाते हुए सपा से लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया। लेकिन, परिवार की लड़ाई में अखिलेश को इस गठबंधन का ज्यादा फायदा नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि चुनाव बाद कई बार अखिलेश यादव को फोन किया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद मजबूरी में सपा से अलग चलने का फैसला करना पड़ा।

मायावती ने कहा कि वह गठबंधन के बाद जीत के प्रयास में लगी रहीं। लेकिन सपा मुखिया बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र से गेस्टहाउस कांड का केस वापस लेने पर जोर देते रहे। इसके बाद केस वापस ले लिया। चुनाव नतीजे के बाद सपा का रवैया देखकर लगा कि सपा से गठबंधन और केस वापस लेना बड़ी गलती थी। ऐसा नहीं करना चाहिए था। यदि गंभीरता से सोचती तो ऐसा न करती।

रामगोपाल से बात करने के बाद उतारा बसपा प्रत्याशी
मायावती ने कहा कि राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद बसपा महासचिव सतीश ने अखिलेश को फोन किया। उनका फोन नहीं उठा। बाद में अखिलेश के पीएस को फोन किया। पीएस ने कहा कि बात करा देंगे, पर नहीं कराई। इसके बाद मिश्रा ने सपा महासचिव रामगोपाल से बात की।

उनसे पूछा कि सपा कितने प्रत्याशी उतारेगी? राम गोपाल ने एक ही प्रत्याशी उतारने की बात कही। इस पर मिश्रा ने उन्हें बताया कि यदि सपा एक ही प्रत्याशी उतार रही है तो एक प्रत्याशी बसपा उतारेगी। आखिरी सीट के लिए सभी विरोधी पार्टियों के वोट भाजपा से अधिक हैं। लेकिन अखिलेश ने अपने पिता की तरह दलित विरोधी कार्य किया। निर्दलीय का पर्चा भरवाकर बसपा के प्रस्तावक विधायकों की खरीद-फरोख्त कर बसपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज कराने की कोशिश की। इस षडयंत्र में वह नाकाम हुए।

उन्होंने अखिलेश को नसीहत दी कि यदि लंबी राजनीति करनी है तो ऐसा कोई कार्य न करें जिससे राजनीतिक भविष्य खराब हो। तोड़फोड़ की राजनीति कभी टिकाऊ नहीं होती। अपने पिता से सीख ले सकते हैं।

खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तरह भाजपा से सांठगांठ का आरोप
उन्होंने कहा कि सपा ने राज्यसभा में पर्चे की जांच के समय अपना दलित विरोधी चेहरा फिर दिखा दिया। सफलता न मिलने पर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तरह जबरन भाजपा के साथ सांठगांठ कर चुनाव लड़ने का आरोप लगा रही है। इसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है।

अखिलेश ने सतीश का फोन नहीं उठाया...ब्राह्मण समाज लेगा बदला
मायावती ने कहा कि सतीश चंद्र मिश्र प्रतिष्ठित अधिवक्ता हैं और राजनीति का लंबा तजुर्बा है। ऐसे में अखिलेश यादव का उनसे बात न करना पूरे प्रदेश के ब्राह्मण समाज का अपमान है। यूपी का ब्राह्मण सपा से इस अपमान का बदला आगामी विधानसभा चुनाव में जरूर लेगा।

कानून-व्यवस्था पर भाजपा को नसीहत का सपा को कोई अधिकार नहीं
मायावती ने कहा कि सपा राज में आए दिन हत्या होती थी। गुंडों-बदमाशों व माफियाओं का राज था। ब्राह्मण व दलितों को कुछ समझा ही नहीं जाता था। ऐसे में कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार को नसीहत देने का सपा को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा के उलट बसपा सरकार ने प्रदेश को बेहतर कानून-व्यवस्था व माहौल दिया। ऐसे में प्रदेश की कानून-व्यवस्था न संभाल पाने के लिए भाजपा सरकार को नसीहत देने का अधिकार बसपा को है। उनकी सलाह को लोग मानेंगे। 
 
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