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शिक्षा, शादी, करियर, जॉब फ्री जन्मकुंडली से जानें कैसे रहेगा भविष्य
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अमेरिका में रिसर्च छोड़कर वापस आए डॉ संदीप, बच्चों को विज्ञान के प्रति कर रहे जागरूक

डॉ. संदीप सिंह अमेरिका में पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च छोड़कर वापस अपने देश आ गए हैं और ग्रामीण बच्चों को विज्ञान और तकनीक के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

13 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

सात बागी विधायक निलंबित, मायावती बोलीं- सपा को हराने के लिए भाजपा को देंगे वोट

अपने विधायकों की बगावत पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने तीखे तेवर दिखाते हुए न सिर्फ सात विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया बल्कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव के पहले किए गए इस षड्यंत्र का जवाब वे विधान परिषद चुनाव में देंगी। सपा को हराने के लिए भाजपा को भी वोट देने से गुरेज नहीं करेंगी। जो भी सपा के उम्मीदवार को हराएगा, बसपा उसे अपने विधायकों का वोट दिलाएगी।

मायावती ने बृहस्पतिवार को मीडिया कर्मियों से बातचीत में दो टूक कहा, पिछले लोकसभा चुनाव में सपा से गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का केस वापस लेना बड़ी भूल थी। गेस्ट हाउस कांड मेरी हत्या के लिए सपा का रचा गया षड्यंत्र था, जिसमें वह कामयाब नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि गठबंधन के बाद वे जीत के प्रयास में लगी रहीं, लेकिन सपा मुखिया बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र से गेस्ट हाउस कांड केस वापस लेने पर जोर देते रहे। इसके बाद केस वापस ले लिया। चुनाव नतीजे के बाद सपा का रवैया देखकर लगा कि गठबंधन और केस वापस लेना बड़ी गलती थी। यदि गंभीरता से सोचती तो ऐसा न करती।

अखिलेश को नसीहत - तोड़फोड़ की राजनीति टिकाऊ नहीं, पिता से सीखें
‘यदि लंबी राजनीति करनी है तो ऐसा कोई कार्य न करें जिससे राजनीतिक भविष्य खराब हो। तोड़फोड़ की राजनीति कभी टिकाऊ नहीं होती। अपने पिता से सीख ले सकते हैं।’
‘राज्यसभा चुनाव में अखिलेश ने वैसा ही षड्यंत्र किया, जैसा उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2003 में उनके 38 विधायक तोड़कर किया था। उस तोड़फोड़ का नतीजा यह निकला कि बसपा 2007 में पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई। अखिलेश का भी उनके पिता की तरह बुरा हाल होने वाला है। बसपा फिर पूर्ण बहुमत से सत्ता में आएगी।

 भाजपा से सांठगांठ पर बोलीं- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
‘सपा ने राज्यसभा में पर्चे की जांच के समय अपना दलित विरोधी चेहरा फिर दिखा दिया। सफलता न मिलने पर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तरह जबरन भाजपा के साथ सांठगांठ कर चुनाव लड़ने का आरोप लगा रही है। इसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है।’
- मायावती

दलबदल कानून के तहत कार्रवाई...
मायावती ने पार्टी प्रत्याशी रामजी गौतम का प्रस्ताव होने से इनकार करने वाले 4 विधायकों समेत 7 विधायकों पर कार्रवाई करते हुए कहा कि इन्हें अब पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा। इनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ाया जाएगा। इन निलंबित विधायकों के स्थान पर इन्हीं की जाति, धर्म व समाज के लोगों को टिकट दिया जाएगा। मुस्लिम समाज व अन्य को बढ़ावा मिलता रहेगा।

ये सात विधायक निलंबित
- असलम राइनी, भिनगा-श्रावस्ती
- असलम अली चौधरी, ढोलाना-हापुड़
- मुजतबा सिद्दीकी, प्रतापपुर-प्रयागराज
- हाकिम लाल बिंद, हंडिया-प्रयागराज
- हरगोविंद भार्गव, सिधौली-सीतापुर
- सुषमा पटेल, मुंगरा बादशाहपुर-जौनपुर
- वंदना सिंह, सगड़ी-आजमगढ़
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बसपा सुप्रीमो मायावती। बसपा सुप्रीमो मायावती।

वोटरों, प्रधानों व कोटेदारों को धमका रही भाजपा : सपा

सपा ने आरोप लगाया है कि विधानसभा उपचुनाव में मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, भाजपा अपनी हार की आशंका के चलते चुनाव में सत्ता का दुरुपयोग और मतदाताओं को भयभीत करने का हथकंडा अपनाने लगी है। कहीं मतदाताओं और सपा कार्यकर्ताओं को लाल कार्ड जारी हो रहा है, तो कहीं प्रधान व कोटेदारों को पुलिस धमका रही है। ऐसी शिकायतें हैं कि देवरिया सदर में बीएसए प्राथमिक शिक्षकों पर अनैतिक दबाव बना रहे हैं।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि जौनपुर के मल्हनी विधानसभा क्षेत्र में कई ऐसे मतदान केंद्र हैं जहां पिछले चुनावों में हिंसा और बूथ कैप्चरिंग हुई थी। यहां गरीब एवं कमजोर मतदाताओं को धमकियां दी जा रही हैं। भाजपा सरकार के तमाम मंत्री विभिन्न क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं। वे भाजपा के पक्ष में मतदाताओं के समर्थन के लिए हर तरह से आतंकित कर रहे हैं। निर्वाचन आयेाग को इन शिकायतों का संज्ञान लेकर संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात करना चाहिए। चुनाव की आदर्श आचार संहिता का भी उल्लंघन किया जा रहा है। 

अखिलेश ने कभी किसी को धोखा नहीं दिया : राजेंद्र चौधरी
लखनऊ। सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने मायावती के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने कभी किसी को धोखा नहीं दिया। वे उदार नेता है, निष्ठा और ईमानदारी से रिश्ता निभाते हैं।
चौधरी ने कहा कि सपा ने लोकसभा चुनाव में ईमानदारी से गठबंधन को चलाया। चुनाव के बाद मायावती ने खुद गठबंधन तोड़ा है। बसपा विधायक अखिलेश से मिलने अपनी इच्छा से आए थे। वे बसपा में सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। उनका आर्थिक उत्पीड़न होता है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव मौजूदा राजनीति में शुचिता व शालीनता के प्रतीक हैं। वे स्वच्छ राजनीति करते हैं। उनकी छवि विकास पुरुष की है। सपा सरकार में अखिलेश के विकास कार्यों को प्रदेश की जनता आज भी याद करती है।
 
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राज्यसभा में यूपी की 31 में से 22 सीटों पर भाजपा होगी काबिज

राज्यसभा में यूपी के कोटे की 31 में से 22 सीटों पर अब भाजपा का कब्जा होगा। यूपी के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार होगा जब यूपी से कांग्रेस का सिर्फ एक और भाजपा के 22 सदस्य होंगे।
दस सीटों के हो रहे राज्यसभा चुनाव में भाजपा के 8, सपा-बसपा के एक-एक प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन तय है। 2 नवंबर को नाम वापसी के अंतिम दिन इसकी औपचारिक घोषणा हो जाएगी। यूपी से भाजपा के 22 सदस्यों का आंकड़ा केंद्र सरकार को राज्यसभा में सियासी ताकत तो देगा ही, साथ ही यूपी में बड़ी सियासी ताकत के प्रतीक सपा-बसपा की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका भी सीमित करेगा। कारण, इसके बाद राज्यसभा में सपा के सदस्यों की संख्या घटकर सिर्फ 5 रहेगी जबकि बसपा के भी सिर्फ तीन सदस्य बचेंगे। कांग्रेस के सदस्यों की संख्या यूपी से कपिल सिब्बल के रूप में सिर्फ एक रह जाएगी। 

ये होगी दलीय स्थिति
भाजपा
हरदीप पुरी, शिव प्रताप शुक्ला, संजय सेठ, सुरेंद्र सिंह नागर, जय प्रकाश निषाद, सैय्यद जफर इस्लाम, अनिल अग्रवाल, डॉ. अशोक बाजपेयी, डॉ. अनिल जैन, कांता कर्दम, सकलदीप राजभर, जीवीएल नरसिम्हाराव, हरनाथ सिंह यादव, विजयपाल सिंह तोमर, अरुण सिंह, सुधांशु त्रिवेदी, नीरज शेखर, ब्रजलाल, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, बीएल वर्मा और हरद्वार दुबे।
सपा 
रामगोपाल यादव, जया बच्चन, सुखराम सिंह यादव, विशंभर प्रसाद निषाद और कुंवर रेवतीरमण सिंह।
बसपा 
सतीश चंद्र मिश्रा, अशोक सिद्धार्थ और रामजी गौतम।
कांग्रेस
कपिल सिब्बल।
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भाजपा के नजदीक जा रही बसपा, नीतियों से भटकी

बसपा से निलंबित विधायक असलम अली ने पार्टी को नीतियों से भटकने और भाजपा से नजदीक जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि वे निलंबन के बावजूद बसपा में बने रहेंगे। चुनाव आएगा तो देखा जाएगा।

हापुड़ के धौलाना से विधायक असलम ने कहा है कि पार्टी के इर्द-गिर्द ऐसे लोग हैं जो नेतृत्व को नीतियों से भटका रहे हैं। हम लोग भाजपा के खिलाफ लड़कर आए हैं। लेकिन आज पार्टी को भाजपा के नजदीक ले जाया जा रहा है। संख्या बल न होने के बावजूद बिना विधायकों से पूछे राज्यसभा प्रत्याशी उतार दिया गया। उन्होंने कहा कि निलंबन अध्यक्ष का अधिकार है। लेकिन वह इसके बावजूद बसपा में बने रहेंगे। 

राजनीति में किसी से मिलना-जुलना अनुचित नहीं : सुषमा
जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर से विधायक सुषमा पटेल ने स्वीकार किया कि वे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिली थीं। उन्होंने कहा कि राजनीति में मिलना-जुलना लगा रहता है। पहले भी कई बार मुलाकात हुई है। मैं बसपा प्रत्याशी की प्रस्तावक हूं और इससे इनकार नहीं किया है। न तो मैंने व्हिप का उल्लंघन किया और न ही पार्टी लाइन के खिलाफ वोट किया है। ऐसे में निलंबन समझ से परे है। अभी किसी भी दल में जाने का विचार नहीं है। क्षेत्र की जनता से राय मशविरा कर आगे का फैसला करूंगी। 

हम किसी से मिलने नहीं गए : राइनी
श्रावस्ती के भिनगा से विधायक असलम राइनी ने कहा कि वे किसी से मिलने नहीं गए। उन्होंने सवाल किया कि किसी ने सपा नेता से मुलाकात करते देखा हो तो बताए। इसके बावजूद यदि निलंबित किया गया है तो स्वागत करते हैं। 

मैं किसी से नहीं मिली, बसपा में ही : वंदना
आजमगढ़ के सगड़ी से विधायक वंदना सिंह ने कहा बुधवार से वे घर पर ही हैं। उन्हें नहीं पता कि पूरा मामला कहां से शुरू हुआ? कहा, उन्होंने सपा के किसी भी नेता से मुलाकात नहीं की। पूरी स्थिति से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा व उपनेता उमा शंकर सिंह को अवगत करा दिया है। मैं बसपा में ही हूं। कहीं जाने का सवाल ही नहीं उठता।

बसपा टिकट नहीं देगी तो देखा जाएगा : बिंद
हंडिया प्रयागराज के विधायक हाकिम लाल बिंद ने कहा कि वे बसपा के झंडा बैनर तले चुनकर आए हैं और बसपा में ही हैं। किसी अन्य दल में जाने का कोई विचार नहीं है। चुनाव आएगा बसपा टिकट नहीं देगी तो देखा जाएगा। बहन जी नेता हैं, वे निलंबन कर सकती हैं।
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प्रियंका गांधी ने मुख्यमंत्री योगी को बुनकरों की समस्याओं पर लिखा पत्र, सामने रखीं तीन मांगें

बसपा
कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की है।

उन्होंने पत्र में लिखा है कि पिछले कुछ समय से वाराणसी के बुनकर बहुत ही परेशान और हताश हैं। पूरी दुनिया में मशहूर बनारसी साड़ियों के बुनकरों के परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। कोरोना महामारी और सरकारी नीतियों के चलते उनका पूरा कारोबार चौपट हो गया है जबकि उनकी हस्तकला द्वारा सदियों से उत्तर प्रदेश का नाम रौशन हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार को इस कठिन दौर में उनकी पूरी सहायता करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने 2006 में बुनकरों के लिए फ्लैट रेट पर बिजली देने की योजना लागू की थी। मगर आपकी सरकार यह योजना खत्म करके बुनकरों के साथ बहुत नाइंसाफी कर रही है। सिर्फ इतना ही नहीं बुनकरों ने मुझे बताया कि मनमाने बिजली बिल के खिलाफ जब वे हड़ताल पर गए तो सरकार ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया। सरकार के प्रतिनिधि ने उन्हें भरोसा भी दिलाया कि उनकी मांगे मान ली जाएंगी लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।

उन्होंने बुनकरों की तीन मांगें रखी:
1. फ्लैट रेट पर बिजली देने की योजना बहाल की जाए।
2. फर्जी बकाया के नाम पर बुनकरों का उत्पीड़न तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
3. बुनकरों के बिजली कनेक्शन न काटे जाएं। जो बिजली के कनेक्शन कट गए हैं उन्हें तत्काल जोड़ा जाए।

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यूपी उप चुनाव : सात सीटों पर 88 प्रत्याशी मैदान में, 18 पर आपराधिक मामले दर्ज

यूपी की सात विधानसभा सीटों पर तीन नवंबर को होने जा रहे उप चुनाव में कुल 88 प्रत्याशी मैदान में हैं। इसमें से एडीआर इलेक्शन वॉच ने 87 प्रत्याशियों के हलफनामे का विश्लेषण किया है। सबसे अधिक बुलंदशहर सीट पर 18 उम्मीदवार हैं और सबसे कम कानपुर नगर की घाटमपुर सीट पर 6 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 87 प्रत्याशियों में से 18 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसमें 15 ऐसे हैं जिन पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। बुलंदशहर से बसपा उम्मीदवार मोहम्मद युनुस के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप समेत कुल 5 मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट से निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह के खिलाफ कुल 7 मामले दर्ज हैं जिसमें हत्या का भी आरोप धनंजय सिंह पर है। उतर प्रदेश इलेक्शन वॉच के कोआर्डिनेटर संजय सिंह ने बताया कि बसपा के सात में से पांच प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। जबकि सपा के 6 में से 5 प्रत्याशी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। भाजपा के किसी भी उम्मीदवार के खिलाफ कोई भी केस दर्ज नहीं है। 

34 उम्मीदवार करोड़पति
उप चुनाव में किस्मत आजमा रहे 34 उम्मीदवार ऐसे हैं जो करोड़पति हैं। बसपा के सभी सात उम्मीदवार करोड़पति हैं जबकि सपा के 6 में से 5 और भाजपा के 7 में से 4 उम्मीदवार करोड़ पति हैं। सबसे अधिक संपति समाजवादी पार्टी के देवरिया से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार ब्रहमाशंकर त्रिपाठी की है। उनकी कुल संपति 31.49 करोड़ रुपये है। दूसरे नंबर पर निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह हैं जिनकी संपति 23.07 करोड़ रुपये के बराबर की है। धनंजय पर 1.71 करोड़ की देनदारी भी है। 

आधे से अधिक ग्रेजुएट उम्मीदवार
उप चुनाव की खास बात यह है कि इसमें ज्यादातर पढ़े लिखे लोग किस्मत आजमा रहे हैं। 88 में से 47 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी शैक्षिक योग्यता ग्रेजुएट या उससे अधिक है। 26 उम्मीदवार पांचवीं से 12वीं पास के बीच के हैं। 10 प्रत्याशियों ने खुद को साक्षर बताया है और एक प्रत्याशी ने खुद को अशिक्षित बताया है।

 
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बसपा से बागी हुए इन सात विधायकों को मायावती ने पार्टी से किया निलंबित, सपा पर किए वार

अखिलेश ने फोन नहीं उठाया तो मजबूरी में करना पड़ा अलग होने का फैसला  : मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा से लोकसभा चुनाव में गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का मुकदमा वापस लेने को बड़ी गलती बताते हुए कहा कि चुनाव बाद कई बार अखिलेश यादव को फोन किया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद मजबूरी में सपा से अलग चलने का फैसला करना पड़ा। बसपा ने संकीर्ण ताकतों को सत्ता से दूर रखने के लिए गेस्टहाउस कांड जैसी न भुलाने वाली घटना को भी भुलाते हुए सपा से लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया था, लेकिन परिवार की लड़ाई में अखिलेश को इस गठबंधन का ज्यादा फायदा नहीं मिल सका।

मायावती ने कहा कि सतीश चंद्र मिश्र प्रतिष्ठित अधिवक्ता हैं और उन्हें राजनीति का अच्छा तजुर्बा है। ऐसे में अखिलेश का उनसे बात न करना पूरे प्रदेश के ब्राह्मण समाज का अपमान है। यूपी का ब्राह्मण सपा से इस अपमान का बदला आगामी विधानसभा चुनाव में जरूर लेगा। उन्होंने कहा कि सपा राज में आए दिन हत्या होती थी। गुंडों-बदमाशों का राज था। ब्राह्मण व दलितों को कुछ समझा ही नहीं जाता था। ऐसे में कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार को नसीहत देने का सपा को कोई अधिकार नहीं है। बसपा सरकार ने प्रदेश को बेहतर कानून-व्यवस्था का माहौल दिया। ऐसे में प्रदेश की कानून-व्यवस्था न संभाल पाने के लिए भाजपा सरकार को नसीहत देने का अधिकार बसपा को है। उनकी सलाह को लोग मानेंगे।

हम तो डिंपल को राज्यसभा पहुंचाना चाहते थे
मायावती ने कहा कि वह सोचती थी कि अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव में प्रो. राम गोपाल यादव के अलावा दूसरा प्रत्याशी अपनी पत्नी डिंपल यादव को बनाएंगे। वह कन्नौज का चुनाव हार गई थीं। मैंने तय कर लिया था कि यदि डिंपल को प्रत्याशी बनाया जाता है तो बसपा अपना प्रत्याशी न खड़ाकर उन्हें जिताएगी। लेकिन अखिलेश ने फोन ही नहीं उठाया।

रामगोपाल से बात के बाद उतारा बसपा प्रत्याशी
मायावती ने कहा कि राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद बसपा महासचिव सतीश ने अखिलेश को फोन किया। उनका फोन नहीं उठा। बाद में अखिलेश के पीएस को फोन किया। पीएस ने कहा कि बात करा देंगे, पर नहीं कराई। इसके बाद सतीश ने सपा महासचिव रामगोपाल से बात की। उनसे पूछा कि सपा कितने प्रत्याशी उतारेगी? राम गोपाल ने एक ही प्रत्याशी उतारने की बात कही। इस पर सतीश ने उन्हें बताया कि यदि सपा एक ही प्रत्याशी उतार रही है तो एक  प्रत्याशी बसपा उतारेगी। आखिरी सीट के लिए सभी विरोधी पार्टियों के वोट भाजपा से अधिक हैं। लेकिन अखिलेश ने अपने पिता की तरह दलित विरोधी कार्य किया। निर्दलीय का पर्चा भरवाकर बसपा के प्रस्तावक विधायकों की खरीद-फरोख्त कर बसपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज कराने की कोशिश की। लेकिन वे इस षड्यंत्र में नाकाम रहे।
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'...भाजपा को भी देंगे वोट' मायावती के बयान पर प्रियंका ने पूछा- इसके बाद भी कुछ बाकी है

बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए सपा से हाथ मिलाया था। लेकिन उनके परिवारिक अंतरकलह के कारण बसपा के साथ गठबंधन कर भी वो ज्यादा लाभ नहीं उठा पाए। मायावती ने स्पष्ट कहा है कि राज्यसभा चुनावों में हम सपा प्रत्याशियों को बुरी तरह हराएंगे। इसके लिए हम अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे। इसके लिए अगर हमें भाजपा या किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी को अपना वोट देना पड़े तो हम वो भी करेंगे।
 

इसके साथ ही मायावती ने राज्यसभा चुनाव में बगावत करने वाले सात विधायकों के निलंबन का भी एलान किया है। मायावती ने विधायक असलम राइनी ( भिनगा-श्रावस्ती), असलम अली (ढोलाना-हापुड़), मुजतबा सिद्दीकी (प्रतापपुर-इलाहाबाद), हाकिम लाल बिंद (हांडिया- प्रयागराज) , हरगोविंद भार्गव (सिधौली-सीतापुर), सुषमा पटेल( मुंगरा बादशाहपुर) और वंदना सिंह -( सगड़ी-आजमगढ़) को पार्टी से निलंबित कर दिया है।

मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद सपा ने हमसे संपर्क बंद कर दिया और इसीलिए हमने अपने रास्ता बदल लिया है। उन्होंने कहा कि मैं इस बात का भी खुलासा करना चाहती हूं कि जब हमने यूपी में लोकसभा चुनाव के लिए सपा के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया तो हमने इसके लिए बहुत मेहनत की, लेकिन जब से यह गठबंधन हुआ था तब से सपा प्रमुख की मंशा दिखने लगी थी।  ... और पढ़ें
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