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सावन शिवरात्रि पर 11 ब्राह्मणों द्वारा 11 विशेष वस्तुओं से कराएं महाकाल का सामूहिक महारुद्राभिषेक एवं रुद्री पाठ - 19 जुलाई 2020
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सावन शिवरात्रि पर 11 ब्राह्मणों द्वारा 11 विशेष वस्तुओं से कराएं महाकाल का सामूहिक महारुद्राभिषेक एवं रुद्री पाठ - 19 जुलाई 2020

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CBSE 10th Result: पंजाब, हरियाणा और ट्राइसिटी के विद्यार्थी ऐसे चेक कर सकते हैं नतीजे

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) ने बुधवार को दसवीं कक्षा के नतीजे भी जारी कर दिए। विद्यार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbseresults.nic.in, cbse.nic.in व results.nic.in है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट करके इसकी घोषणा की।

ऐसे चेक करें रिजल्ट
  • CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  • वेबसाइट cbseresults.nic.in है।
  • होम पेज पर आपको दसवीं के रिजल्ट का लिंक मिलेगा।
  • लिंक पर क्लिक करते ही नया पेज खुलेगा।
  • अपना विवरण डालने के बाद स्क्रीन पर रिजल्ट प्राप्त हो जाएगा।
  • रिजल्ट को डाउनलोड कर सकते हैं और प्रिंट आउट ले सकते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

अनोखी तकनीकः हवा में फैले कोरोना का सफाया करेगा मच्छर मार रैकेट, नाम मिला 'एबीसीडी' का

कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। अब यह हवा में घुलकर अब अपना दायरा बढ़ा रहा है। संकट की इस घड़ी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च मोहाली के साइंटिस्ट डॉ. सम्राट घोष आगे आए हैं। उनके मुताबिक, घरों में मच्छर मारने के लिए प्रयोग किए जाने वाले रैकेट से कोरोना का हवा में एनकाउंटर किया जा सकता है।

उन्होंने इसे पोर्टेबल मोबाइल कोरोना डिस्चार्ज बताया है और इसे एबीसीडी यानी एयर बोर्न कोरोना डिस्ट्रायर नाम दिया है। उन्होंने इस संबंध में भारत सरकार को पत्र भी भेजा है। डॉ. सम्राट के मुताबिक, मास्क लगाकर हम कोरोना से बच सकते हैं। लेकिन जब अपने घर या दफ्तर में हों तो हवा में तैर रहे कोरोना से कैसे बचें। इसे लेकर उन्होंने काफी रिसर्च की। इसका हल फिजिक्स की कोरोना डिस्चार्ज थ्योरी में दिखा।

इसके बाद उनके दिमाग में घरों में मच्छर आदि मारने के लिए प्रयोग होने वाले रैकेट का ख्याल आया। उन्होंने बताया कि रैकेट में सबसे पहले कोरोना डिस्चार्ज (साढ़े तीन हजार वोल्टेज) तैयार किया जाता है। जब हवा में मौजूद ऑक्सीजन इस कोरोना डिस्चार्ज के संपर्क में आती है तो यही ऑक्सीजन ओजोन में परिवर्तित हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओजोन सीधे कोरोना का एनकाउंटर करने में सक्षम है।
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कोरोना: देशों के सफल अनुभवों से स्वास्थ्य सेवाएं निखारेगी भारतीय सेना, ताकि सुरक्षित रहें जवान

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर भारतीय सेना और ज्यादा गंभीर हो गई है। सैन्य जवान और अफसर इस संक्रमण से महफूज रहें। इसके लिए अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को भारतीय सेना और मजबूत करने में जुटी हुई है। इसी कड़ी में सेना अब उन देशों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों से उनकी प्रैक्टिस व प्रयासों के नतीजे जान रही है।

जिन्होंने अभी तक इस महामारी को अपने देश में खास रणनीति के तहत नियंत्रित किया हुआ है। इन देशों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों से इस महामारी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करते हुए आर्म्ड फोर्स मेडिकल सर्विस के विशेषज्ञ विस्तृत जानकारी व उनके अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।

इसका मकसद है की विभिन्न देशों की इस संदर्भ में बेस्ट प्रैक्टिस और प्रयासों के नतीजों को ध्यान में रखते हुए सैन्य अस्पतालों व इस महामारी के लिए बनाए गए कोविड-19 अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जाए। जिससे सैन्यकर्मियों को इस महामारी की चपेट से बचाया जा सके।
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बदलावः यूपीएससी की तर्ज पर होगी एचसीएस परीक्षा, पैटर्न और अंकों के लिए भी नया नियम

हरियाणा में अब एचसीएस की परीक्षा 200 अंकों की होगी। सरकार इस परीक्षा को यूपीएससी की तर्ज पर आयोजित करवाएगी। इसके प्रश्न पत्र भी इसी तर्ज पर तैयार किए जाएंगे। जिसके अंतर्गत आवेदकों का अब जरनल स्टडी के साथ-साथ एप्टिट्यूड टेस्ट भी होगा।

एचसीएस (एग्जीक्यूटिव ब्रांच) की परीक्षा किस तरह होगी और किस आधार पर इनके प्रश्नपत्र तैयार किए जाएंगे। इस संदर्भ में हरियाणा सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। बताते चलें कि 6 जुलाई को इस बाबत कैबिनेट की मीटिंग में सरकार ने प्रस्ताव पर भी मुहर लगा दी थी।

इसके प्रिलिमनरी एग्जामिनेशन के तहत 100 अंक की परीक्षा जरनल स्टडी बेस होगी। जबकि अन्य 100 अंक की परीक्षा सिविल सर्विस एप्टिट्यूड टेस्ट पर आधारित होगी। एप्टिट्यूड टेस्ट में आवेदक की इंटरपर्सनल स्किल्स, कम्युनिकेशन स्किल्स, विश्लेषण करने की योग्यता, निर्णय लेने की योग्यता, समस्या के समाधान करने की योग्यता, मानसिक योग्यता इत्यादि के साथ-साथ कई पहलुओं को परखा जाएगा। एग्जाम का पैटर्न पूरी तरह यूपीएससी की तरह रहेगा।

बताते चलें कि मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) और अन्य समवर्गी सेवाओं के पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा के सिविल सेवाएं योग्यता परीक्षा(सीएसएटी पेपर) को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तर्ज पर क्वालिफाइंग पेपर बनाने की स्वीकृति प्रदान की थी। जिसकी अधिसूचना अब जारी कर दी गई है।
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हाईकोर्ट की टिप्पणी- इंसान फोटोग्राफिक मेमोरी मशीन नहीं, जो हर बात को सटीक याद रख सके

प्रतीकात्मक तस्वीर
 यौन शोषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि इंसान इंसान होता है, उससे फोटोग्राफिक मेमोरी मशीन जैसी उम्मीद नहीं की जा सकती । जस्टिस अनिल खेत्रपाल ने अपनी ही बेटी का यौन उत्पीडऩ कराने के आरोप में दोषी ठहराई गई महिला सहित दो दोषियों द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए ये टिप्पणी की है।

इस मामले में अपने पति से अलग रह रही महिला का बहन के पति के साथ अवैध संबंध था। महिला के बहनोई ने उसकी बेटी का यौन शोषण करने की भी कोशिश की थी। महिला ने बेटी का साथ देने के बजाय अपने बहनोई का पक्ष लिया। जब-जब उसकी बेटी से छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई तब-तब महिला ने इसे नजरअंदाज किया और अपनी ही बेटी की पिटाई कर दी।

लड़की ने नवंबर 2014 में चंडीगढ़ पुलिस की ओपन विंडो में शिकायत की थी, जिसके बाद लड़की की मां और मौसा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस शिकायत के बाद महिला और उसके बहनोई दोनों को जिला अदालत चंडीगढ़ द्वारा दोषी ठहराया गया था। इस सजा के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर सजा को चुनौती दी।

उनके अनुसार शिकायताकर्ता बार बार समय व तारीख बदल रही है । हाईकोर्ट ने यह भी साफ कहा कि जब किसी मामले में कोई एफआईआर दर्ज होती है तो बाद में शिकायतकर्ता को कोई बात याद आती है तो वह इसे शामिल करवा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता या गवाह से फोटोग्राफिक मेमोरी की उम्मीद नहीं की जा सकती।
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वाहन पर कलात्मक कृति रजिस्ट्रेशन से इनकार का आधार नहीं, छेड़छाड़ की श्रेणी नहीं: हाईकोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वाहन पर कलात्मक पेंट करना उसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की श्रेणी में नहीं आता है। हाईकोर्ट ने दिल्ली से खरीदी गई एंबेसडर कार का 2 सप्ताह के भीतर रजिस्ट्रेशन करने का यूटी प्रशासन को आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता रणजीत मल्होत्रा ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने दिल्ली से एंबेसडर कार यूरोपियन यूनियन के काउंसलर से खरीदी थी। इस कार को खरीदने का कारण इस कार पर मैक्सिकन आर्टिस्ट सैनकोई द्वारा किया गया आर्ट वर्क था।

जुलाई 2019 में खरीदी गई कार के रजिस्ट्रेशन के लिए यूटी प्रशासन को आवेदन किया गया लेकिन इंस्पेक्टर ने यह कह कर कार के रजिस्ट्रेशन की अनुमति देने से इंकार कर दिया कि कार का असल रंग सफेद था जिस पर अब पेंट कर दिया गया है और यह कार के वास्तविक स्वरूप में परिवर्तन की श्रेणी में आता है।

बचाव करते हुए यूटी प्रशासन के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल पंकज जैन ने कहा कि अभी तक रजिस्ट्रेशन के आवेदन पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, ऐसे में यह याचिका प्रीमेच्योर है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार कार के असल रंग में परिवर्तन करना उसके मूल रूप से छेड़छाड़ करने की श्रेणी में आता है।

अक्सर ट्रकों पर विभिन्न स्लोगन व डिजाइन जैसे ‘हम दो हमारे दो’, ‘ओके टाटा’, ‘हॉर्न प्लीज’ आदि बने होते हैं। कारों के पीछे विभिन्न तरह के डिजाइन बने होते हैं। इनको वाहन के मूल स्वरूप में छेड़छाड़ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे कैनवास पर रंगों के माध्यम से विभिन्न तरह की पेंटिंग बनाई जाती हैं जिससे कैनवास का मूल स्वरूप प्रभावित नहीं होता है।

वैसे ही इस समय कार का मूल रंग सफेद है जिस पर पेंट किया गया है। ऐसे में इसे वाहन के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। हाईकोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए यूटी प्रशासन को 2 सप्ताह में वाहन का रजिस्ट्रेशन करने के आदेश जारी किए हैं।
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मालेरकोटलाः मंदिर और मस्जिद की सांझी दीवार, 73 साल बाद मिली मेडिकल कॉलेज की सौगात

पंजाब की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी वाले शहर मालेरकोटला में मेडिकल कॉलेज खुल जाने से इलाके का कायाकल्प हो सकता है। यह इलाका निरक्षरता का शिकार है और करीब 31 फीसदी आबादी अशिक्षित है। ऐसे में मालेरकोटला में मेडिकल कॉलेज का खुलना खास महत्व रखता है, क्योंकि मालेरकोटला के लोगों ने बंटवारे के वक्त भारत में ही बसने की ठानी थी। यह उन लोगों के लिए आजादी के 73 साल बाद एक सौगात होगी, जिन्होंने भारत पाक बंटवारे के बाद मुस्लिम होने के बावजूद पाकिस्तान जाने से मना कर दिया था।

मालवा की चांदी, दोआबा पिछड़ा...
मालवा में छह मेडिकल कॉलेज के अलावा बाबा फरीद मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी है और मालेरकोटला में कॉलेज खुलने से सातवां मेडिकल कॉलेज मालवा में तैयार हो जाएगा। जबकि दोआबा में सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज जालंधर में पिम्स है। होशियारपुर में केंद्रीय राज्यमंत्री सोमप्रकाश ने एम्स को पास करवा लिया है, इसके बाद दोआबा में दो मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे।

हिंदू मुस्लिम के प्यार का प्रतीक है मालेरकोटला
1947 में बंटवारे के वक्त जब सरहद के दोनों ओर का पंजाब हिंसा की आग में जल रहा था और कत्ल-ए-आम का मंजर था, उस दौरान एक इलाका ऐसा था, जो हिंसा के साए से दूर था। क्योंकि यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय में काफी प्यार है। इसलिए आजादी के दौरान हुए कत्लेआम का मालेरकोटला पर कोई असर नहीं पड़ा। हिंदू खुद मुस्लिम समुदाय के लोगों के आगे दीवार बनकर खड़े हो गए थे।

आज भी मालेरकोटला में मंदिर और मस्जिद की एक दीवार सांझी है, जो भाईचारे की प्रतीक है। भाईचारे की एक मिसाल यह भी है कि भगवान हनुमान के मंदिर के बाहर एक मुस्लिम प्रसाद बेचता है। यहां हिंदू इफ्तार के लिए शरबत तैयार करते हैं और मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदुओं के त्योहारों में पूरे उत्साह से शरीक होते हैं।
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प्रसार भारती ने उठाई सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी, रोजाना लग रही हैं कक्षाएं

पंजाब में लॉकडाउन और कर्फ्यू का सबसे अधिक असर सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों पर हुआ है। इन छात्रों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी अब प्रसार भारती ने ले ली है। प्रसार भारती ने रोजाना जालंधर दूरदर्शन पर सुबह 9 से शाम चार बजे तक कक्षाएं शुरू कर दी हैं। इसका फायदा पंजाब के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 45 लाख बच्चों को होने लगा है।

दरअसल, पहले पंजाब सरकार की ओर से निजी स्कूलों की तर्ज पर जूम एप पर क्लास लगाने का सिलसिला शुरू किया गया था। जमीनी स्तर पर काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। कई गांवों में इंटरनेट की स्पीड की समस्या आ रही थी तो कई परिवारों में गरीबी इस कदर थी कि वह एंड्रायड फोन या इंटरनेट पैक भी नहीं ले पा रहे थे।

जूम एप के लिए हाई स्पीड इंटरनेट की जरूरत होती है। शिक्षा को घर-घर तक पहुंचाने के लिए पंजाब शिक्षा विभाग के सचिव कृष्ण कुमार ने पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया और प्रसार भारती से इस बारे में बात की।
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अग्रिम जमानत का उद्देश्य निर्दोष को उत्पीड़न से बचाना है, इसे देने का ट्रेंड सही नहीं: हाईकोर्ट

एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अग्रिम जमानत का उद्देश्य निर्दोष व्यक्तियों को उत्पीड़न से बचाना है और यह केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जानी चाहिए। लेकिन आजकल अग्रिम जमानत नियमित रूप से देना ट्रेंड बन गया है। इससे दोषी को कानून से बचने की ढाल मिल रही है, जो नहीं होना चाहिए।

हाईकोर्ट के जस्टिस एचएस मदान ने फरीदाबाद निवासी गगन इंदर सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। याची के खिलाफ एनआईटी फरीदाबाद में एक प्रसिद्ध सैलून की मालकिन को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है, जिसके तहत उस पर मुकदमा दर्ज किया गया। सैलून मालकिन ने 15 जून को फरीदाबाद में बीपीटीपी पुल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।

बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप बहुत गंभीर हैं जिसने युवा महिला को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। पूर्ण और प्रभावी जांच के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना जांच एजेंसी को सही जांच से वंचित करना है, जो जांच पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इस मामले में फरीदाबाद पुलिस द्वारा सेक्टर आठ की एक 63 वर्षीय महिला की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।
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