कन्नौज। सुरस एवं सुगंध विकास केंद्र (एफएफडीसी) में अब छात्र-छात्राएं इत्र पर शोध कर पीएचडी की डिग्री हासिल कर सकेंगे। इसके लिए आगामी सत्र में कई पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। एफएफडीसी को अरोमा टेक्नो इंडस्ट्रियल यूनिवर्सिटी बनाने की पहल पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने की थी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ज्ञापन भी दिया था। इस पर अब कवायद तेज हो गई है। इस संबंध में पूर्व सांसद ने मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और इत्र उद्योग को तकनीकी रूप से विकसित करने के बारे में विस्तार से चर्चा की।
कन्नौज की पहचान पूरी दुनिया में इत्र से है। इसीलिए पूर्व सांसद शीला दीक्षित के प्रयासों से यहां सुरस एवं सुगंध विकास केंद्र (एफएफडीसी) की स्थापना की गई थी। यहां इत्र बनाने की पुरातन विधियों से अलग नवीन तकनीकों और अनुसंधानों को विकसित किया गया। देश-विदेश के हजारों छात्र-छात्राएं परफ्यूमरी का प्रशिक्षण ले चुके हैं। 2019 में तत्कालीन सांसद सुब्रत पाठक ने एफएफडीसी को देश का पहला इत्र विश्वविद्यालय बनाने की पहल की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक प्रस्ताव भी बनाकर दिया था। इसके बाद एफएफडीसी को रिसर्च सेंटर बना दिया गया, जहां हर साल सैकड़ों छात्र इत्र, अतर, खाद्य तेल, मसालों, कास्मेटिक, सुगंधित पौधे, खाद्य प्रसंस्करण, जैव प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण सलाहकार सहित कई विषयों पर शोध कर रहे हैं। पूर्व सांसद ने बताया कि अब एफएफडीसी में शोधरत छात्र-छात्राओं को पीएचडी की डिग्री भी मिल सकेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री से बात करने का आश्वासन दिया है। पूर्व सांसद ने बताया कि फ्रांस के ग्रासे के बाद कन्नौज अब इत्र उद्योग में तकनीकी रूप से समृद्ध होगा। (संवाद)
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--फोटो :11: डॉ. शक्ति विनय शुक्ला। संवाद
बारहवीं के बाद पाठ्यक्रम में ले सकते प्रवेश एफएफडीसी के प्रधान निदेशक डॉ. शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि अरोमा टेक्नोलॉजी व शोध कार्य में छात्र बारहवीं के बाद प्रवेश ले सकते हैं। पहला पाठ्यक्रम टेक्नीयिशन अरोमा प्राेसेस है, जिसमें 12वीं के बाद प्रवेश ले सकते हैं और इसके लिए 20 सीटें व 1.5 लाख रुपये शुल्क निर्धारित है। दूसरा पाठ्यक्रम टेक्नोलॉजी प्रोग्राम इन अरोमा एंड इट्स मैनेजमेंट है, जिसमें ग्रेजुएशन के बाद प्रवेश मिलेगा। इसमें दो लाख रुपये फीस निर्धारित की गई है। दोनों पाठ्यक्रमों में 20-20 सीटें हैं।
सीमावर्ती गांव बंदरभोज क्षेत्र में नेपाल के रास्ते पर जाते बाइक सवार। संवाद- फोटो : आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त करतीं छात्राएं।
सीमावर्ती गांव बंदरभोज क्षेत्र में नेपाल के रास्ते पर जाते बाइक सवार। संवाद- फोटो : आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त करतीं छात्राएं।