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त्रासदी के छह सालः सद्दल के 132 विस्थापितों को नहीं मिला आशियाना, कुछ ऐसे बसर हो रही जिंदगी

त्रासदी के छह वर्ष बाद भी सद्दल गांव के 132 विस्थापित परिवारों को आशियाना नहीं मिला है। अप्रैल 2020 में सरकार ने विस्थापित परिवारों को लीज पर पांच मरल...

6 सितंबर 2020

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Digital Edition

जम्मू-कश्मीर: देवेंद्र सिंह मामले में एनआईए सख्त, बारामूला में अलग-अलग जगहों पर चल रही छापेमारी

जम्मू-कश्मीर पुलिस के निलंबित उपाधीक्षक देवेंद्र सिंह के मामले में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले की जांच को लेकर मंगलवार सुबह से ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर रही है। 
 
मालूम हो कि जम्मू में विशेष अदालत के समक्ष दाखिल एनआईए के आरोपपत्र के मुताबिक सिंह पाकिस्तान उच्चायोग में अपने आका के संपर्क में था, जिसे बाद में इस्लामाबाद भेज दिया गया। सिंह जम्मू कश्मीर पुलिस की ‘एंटी हाइजैकिंग यूनिट’ में तैनात था।

देवेंद्र सिंह के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत 3064 पन्ने का आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इसमें आतंकवादी संगठन के आतंकवादियों को पनाह देने में पुलिस अधिकारी की संलिप्तता का ब्योरा रखा गया था।

आरोपपत्र में कहा गया था कि उसने (देवेंद्र सिंह) पाकिस्तान उच्चायोग में अपने संपर्क का नंबर ‘पाक भाई’ के नाम से सेव करके रखा था। उसका संपर्क उसे बलों में तैनाती और कश्मीर घाटी में ‘अति विशिष्ट लोगों के आगमन’ सहित कई कार्यों की जिम्मेदारी देता था।

हिजबुल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने के बाद सिंह को उसके पाकिस्तानी आका ने विदेश मंत्रालय में संपर्क स्थापित करने को कहा था। एनआईए के अधिकारियों ने कहा था कि हालांकि सिंह को पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों के नापाक मंसूबे को पूरा करने में कामयाबी नहीं मिली। ... और पढ़ें
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जम्मू-कश्मीर: बडगाम में मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी ढेर, तलाशी अभियान जारी

सोमवार शाम को इलाके में कुछ आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलने पर सुरक्षाबलों ने चरार-ए-शरीफ इलाके को घेर लिया था और आतंकियों की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान मुठभेड़ में एक को ढेर किया गया है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कल शाम को अंधेरे के कारण ऑपरेशन को रोक दिया गया था। सुबह होते ही फिर से इसे शुरू किया गया। कल शुरुआती मुठभेड़ में एक जवान भी घायल हो गया था, जिन्हें बाद में 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

बताया गया कि चरार-ए-शरीफ इलाके में पुलिस, सेना और सीआरपीएफ द्वारा संयुक्त तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। जिस जगह पर आतंकियों के छिपे होने की सूचना थी वहां पहुंचते ही आतंकियों ने सेना पर फायरिंग शुरू कर दी। 

जवाबी कार्रवाई करते हुए संयुक्त टीम ने भी फायरिंग की, जिसमें एक आतंकी मारा गया। ... और पढ़ें

लद्दाख में एलएसी पर दो कूबड़ वाले ऊंटों से गश्त करेंगे जवान, जल्द किया जाएगा सेना में शामिल

पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर गश्त करने में सैनिकों की मदद के लिए दो कूबड़ वाले ऊंटों को जल्द भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के शोध में सामने आया है कि दो कूबड़ यानी बैक्ट्रियन ऊंट पूर्वी लद्दाख में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर 170 किलोग्राम वजन उठा सकते हैं।

 डीआरडीओ के वैज्ञानिक प्रभु प्रसाद सारंगी ने बताया, हम इन ऊंटों पर शोध कर रहे हैं। ये स्थानीय जानवर हैं। हमने इनकी सहनशक्ति और भार वहन क्षमता पर शोध किया है। ये ऊंट लद्दाख की दुर्गम जगहों पर 170 किलोग्राम वजन के साथ 12 घंटे तक गश्त कर सकते हैं। 

इन स्थानीय दोहरे कूबड़ वाले ऊंटों की तुलना राजस्थान के एक कूबड़ वाले ऊंटों से की गई थी, जिन्हें उनकी सहनशक्ति परीक्षण के लिए राजस्थान ले जाया गया था। ये ऊंट भोजन और पानी के बिना तीन दिन तक जीवित रह सकते हैं। सारंगी ने आगे कहा, इन ऊंटों का परीक्षण किया जा चुका है और जल्द ही इन्हें सेना में शामिल किया जाएगा।

बढ़ाई जाएगी संख्या...
सारंगी ने कहा, दो कूबड़ वाले ऊंटों की संख्या अभी कम है, लेकिन उचित प्रजनन के बाद इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी और फिर इन्हें सेना में शामिल किया जाएगा। भारतीय सेना पारंपरिक रूप से क्षेत्र के खच्चरों का उपयोग करती है, जो लगभग 40 किलोग्राम भार ले जाने की क्षमता रखते हैं।
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श्रीनगर: सीआरपीएफ पार्टी पर आतंकियों ने किया हमला, पूरे इलाके को किया गया सील

जम्मू-कश्मीर में आतंकी अपनी कायराना हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। सोमवार को सेंट्रल कश्मीर के श्रीनगर जिले के नौगांव इलाके में सीआरपीएफ पार्टी पर संदिग्ध आतंकियों ने हमला कर दिया।

आईजी कश्मीर ने बताया कि संदिग्ध आतंकियों ने 110 बीएन की सीआरपीएफ पार्टी पर कुछ दूरी से फायरिंग शुरू कर दी औैर कुछ देर बाद भाग गए। हालांकि इस हमले में किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है।

फिलहाल पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और सुरक्षाबलों द्वारा हमलावरों की तलाश की जा रही है।

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जम्मू: नदियों के बीच अंडरग्राउंड बंकर देख सेना भी हैरान, कई दिनों तक इनमें छिपकर बैठे रहते हैं आतंकी

सांकेतिक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर: छह महीने बाद स्कूलों में लौटी रौनक, मास्क लगाकर विद्यालय पहुंचे बच्चे

जम्मू-कश्मीरः आईबी पर हथियारों व हेरोइन की तस्करी नाकाम, बीएसएफ ने खदेड़ा

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के अरनिया सेक्टर में नशीले पदार्थ और हथियारों की तस्करी की बड़ी कोशिश को बीएसएफ ने नाकाम कर दिया। बीएसएफ के मुस्तैद जवानों ने शनिवार की रात हथियारों के साथ 62 किलोग्राम हेरोइन बरामद की है।  

आईजी बीएसएफ एनएस जमवाल ने बीएसएफ की बुधवार पोस्ट पर प्रेसवार्ता में बताया कि शनिवार रात करीब दो बजे सीमा पर तैनात जवानों ने पाकिस्तान की तरफ से 3-4 लोगों के एक समूह की हरकत देखी। यह लोग भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे थे। 

इनके हाथ में प्लास्टिक पाइप सहित अन्य सामान था। बुधवार व बुल्लेचक पोस्ट पर तैनात बीएसएफ के जवानों ने आवाज देकर सवाल किया तो पाकिस्तान की तरफ से फायरिंग की शुरू हो गई। 

बीएसएफ की जवाबी फायरिंग पर पाकिस्तान की ओर से आए लोग सामान छोड़कर वापस भाग गए। पूरी रात उस क्षेत्र की घेराबंदी कर सुबह तलाशी में पांच इंच मोटी और करीब 20 फीट लंबी एक प्लास्टिक पाइप मिली। 

इस पाइप के अंदर छोटे-छोटे 62 पैकेट थे। जांच करने पर पैकेट से 62 किलोग्राम वजन की हेरोइन निकली। इसके अलावा चीन निर्मित दो पिस्तौल, तीन मैगजीन व सौ राउंड भी बरामद हुए। आईजी ने कहा कि जवानों की मुस्तैदी ने नशा और हथियार तस्करों के मंसूबे नाकाम किए हैं। पाकिस्तानी रेंजरों के साथ इस घटना को लेकर कड़ा विरोध जताया जाएगा।

पाकिस्तान से जताया कड़ा विरोध
बीएसएफ  के महानिरीक्षक ने बताया कि उनका बल पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज करा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि इस विफ ल तस्करी प्रयास में शामिल लोगों के खिलाफ  कार्रवाई की जाएगी। 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 300 रुपये कीमत: एसएसपी
जब्ती का निरीक्षण करने पहुंचे जम्मू के एसएसपी श्रीधर पाटिल ने कहा कि इस खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 300 करोड़ रूपये है। हम इसे पाकिस्तान के सहयोग से चलने वाले नारको टेररज्मि के रूप में देखते हैं। हम पिछले दो सालों में पाकिस्तान से मादक पदार्थों की तस्करी के कई प्रयासों को विफ ल कर चुके हैं। वे हमारे युवकों की जिंदगी बर्बाद करने के लिए मादक पदार्थ भेज रहे हैं लेकिन हम इस खतरे के प्रति चौकस हैं। 
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जम्मू में आज से खुलेंगे हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल, एसओपी का सख्ती से पालन के निर्देश

कोरोना महामारी के चलते बंद स्कूलों को खोलने की प्रक्रिया आज से शुरू हो जाएगी। केंद्र की गाइडलाइन के तहत 21 सितंबर से हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों को खोला जाएगा। नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी स्वैच्छिक रूप से स्कूल में आ सकेंगे। इसे लेकर सरकारी और निजी स्कूलों ने तैयारियां कर ली हैं। 

शिक्षा निदेशक जम्मू अनुराधा गुप्ता ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों, जोनल शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से स्कूल प्रिंसिपल व हेडमास्टर को पत्र जारी कर जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा है।

स्कूल प्रशासन कोविड संबंधी एसओपी का सख्ती से पालन करेंगे। इसमें कोताही होने पर कार्रवाई भी की जाएगी। एसओपी के तहत केवल रेड जोन से बाहर स्कूल ही खुलेंगे। शिक्षण और गैर शिक्षण स्टाफ की 50 फीसदी हाजिरी होगी। 

स्टाफ सदस्य ऑनलाइन पढ़ाई, टेलि काउंसलिंग व अन्य कार्य ही करेंगे। विद्यार्थी स्वैच्छिक रूप से स्कूल आ सकते हैं लेकिन उनके लिए अभिभावकों की लिखित में सहमति अनिवार्य होगी।
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जम्मू-कश्मीरः पाकिस्तानी ड्रोन की चुनौती से निपटने के लिए सेना करेगी सामूहिक प्रयास

बीते दिनों कई बार पाकिस्तान की ओर से ड्रोन से एलओसी और आईबी पर हथियार फेंकने की वारदात सामने आ चुकी हैं। हाल ही में राजोरी जिले की एलओसी पर पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए हथियार फेंके हैं। यह भारतीय सेना के लिए एक नई सिरदर्दी है। साथ ही एक बड़ी चुनौती भी। 

सेना ने इसे एक बड़ी चुनौती मानकर इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने का निर्णय लिया है। भारतीय सेना एलओसी पर स्थानीय नागरिकों और पुलिस के साथ मिलकर इससे निपटेगी। यूं कहें कि तीनों मिलकर ड्रोन गतिविधियों पर नजर रखेंगे। 

भारतीय सेना में जम्मू संभाग के प्रवक्ता का कहना है कि एलओसी पर कई जगहों पर सिर्फ सुनने वाले उपकरण तो कहीं पर सिर्फ देखने वाले उपकरण हैं। हर जगह पर निगरानी भी संभव नहीं है। जिन स्थानों पर निगरानी के लिए उपकरण नहीं हैं। इसके लिए सेना ने सामूहिक प्रयास का निर्णय लिया है। 

जल्द ही इसके लिए काम शुरू होगा, ताकि पाकिस्तान की हर हरकत पर नजर रखी जाए। कश्मीर में बहुत हद तक स्थानीय लोग सुरक्षाबलों का साथ दे रहे हैं। इसके चलते कम नुकसान के साथ आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। ठीक इसी तरह से सेना एलओसी पर काम करेगी। 
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