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National Bravery Award 2020: मौत को सामने देख बनी भाई की ढाल, अब राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान

उत्तराखंड में पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लॉक के देवकुंडई गांव की राखी को उसके अदम्य साहस की वजह से राष्ट्रीय सम्मान मिला है।

25 जनवरी 2020

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देहरादून

सोमवार, 27 जनवरी 2020

नए ट्रैफिक प्लान के ट्रायल: देहरादून के लोग होने लगे जागरूक, झिक-झिक न के बराबर 

गांधी पार्क वन-वे पर जागरूकता के चलते शनिवार को झिक-झिक न के बराबर रही। खुद चालक बिना किसी से प्लान पूछकर सरपट गोल-गोल चलते रहे। सुबह हालात पूरी तरह सामान्य रहे, लेकिन दोपहर में यातायात का दबाव बढ़ा तो लैंसडौन चौक पर वाहनों की कतारें लग गई। पुलिस ने तेजी से वाहनों का संचालन कर स्थिति पर काबू पाया। इस दौरान सर्वे चौक, तहसील चौक, ईसी रोड और दून चौक पर वाहनों का दबाव रहने से लोगों को जाम से जूझना पड़ा।

नए ट्रैफिक प्लान के ट्रायल का शनिवार को दूसरा दिन था। सुबह नौ बजे से पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर पहुंच गए थे। प्लान में थोड़ा चेंज करते हुए सुबह घंटाघर से घूमकर राजपुर रोड जाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई। शुक्रवार के मुकाबले वन-वे पर चालक बिना किसी से पूछे सरपट दौड़ते गए।

जिसके कारण पुलिस को यातायात प्लान बताने में ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ी। सुबह ऑफिस खुलने के समय वन-वे पर वाहन आसानी से गोल-गोल घूमते गए। डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने वन-वे का दो बार पैदल निरीक्षण किया। एसपी सिटी श्वेता चौबे, एसपी ट्रैफिक प्रकाश चंद आर्य, सीओ राकेश देवली, सीओ अनुज कुमार, सीओ विवेक कुमार आदि खुद चौराहों की कमान संभाले रहे। 

वन-वे पर दोपहर में अचानक दबाव बढ़ा तो लैंसडौन चौक पर वाहनों की कतारें लग गई। सीओ सिटी शेखर सुयाल के नेतृत्व में पुलिस ने यातायात की स्पीड बढ़ाई। करीब 10 मिनट बाद यातायात सामान्य हो गया। ग्लोब चौक पर चालकाें को थोड़ी जरूर दिक्कत हुई। यहां मोड़ पर वाहन घुमाने में लोगों को थोड़ा समय लग रहा था। इसी तरह सचिवालय के कट पर वाहन रेंगते रहे। यह स्थिति चालकों के गलत दिशा में चलने के कारण पैदा हुई।

स्कूलाें की छुट्टी के समय सर्वे चौक, ईसी रोड, तहसील चौक, दून अस्पताल और एमकेपी चौक पर यातायात दबाव बढ़ने के कारण लोगों को रोजमर्रा की तरह दिक्कत झेलनी पड़ी। यहां रुक-रुक कर दिनभर जाम लगता रहा। कुछ लोगाें का कहना है गांधी पार्क के वन-वे के चलते दूसरे मार्गों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। हालांकि पुलिस इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

निदेशक की कार भी फंसी

ट्रैफिक निदेशक केवल खुराना की कार भी स्कूल की छुट्टी के समय परेड ग्राउंड के पीछे कान्वेंट स्कूल के पास जाम में फंसी। हालांकि कुछ देर में सीपीयू ने यातायात सामान्य किया। इसके बारे में निदेशक खुराना का कहना था कि जाम में वाहन फंसने की बात सही नहीं है। स्कूलों की छुट्टी के समय यातायात का दबाव बढ़ना स्वभाविक है। 

शनिवार को और बेहतर चला वन-वे 

पुलिस उप महानिरीक्षक अरुण मोहन जोशी ने दावा किया कि शनिवार को वन-वे शुक्रवार के मुकाबले बेहतर चला। चालकों को ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं पड़ी। चालक खुद अपनी दिशा में चलते रहे। उन्होंने दावा किया कि वन-वे पूरी तरह जाम मुक्त रहा। यातायात दबाव बढ़ने पर वाहनाें की गति कम जरूर हुई, लेकिन पहिए जाम नहीं हुए। वह समझते हैं कि नई व्यवस्था से लोगों को दिक्कत होती है, लेकिन पुलिस के पास ज्यादा विकल्प नहीं है। पुलिस का मकसद किसी को परेशान करना नहीं है, लेकिन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के चलते वन-वे चलाना जरूरी है, अन्यथा पूरे शहर का ट्रैफिक प्रभावित हो जाएगा।
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कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया का रिजल्ट जारी, देहरादून के सूरज ने किया उत्तराखंड टॉप

द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया(आईसीएसआई) ने सीएस फाउंडेशन के नतीजे जारी कर दिए। इसमें देहरादून के सूरज ने उत्तराखंड टॉप किया है। आईसीएसआई देहरादून सेंटर के तहत परीक्षा देने वाले 60 प्रतिशत से ऊपर छात्र पास हो गए हैं।

सीएस फाउंडेशन कोर्स में टर्नर रोड निवासी सूरज ने 304 अंकों के साथ टॉप किया। प्रदेश में दूसरे स्थान पर 290 अंकों के साथ संस्कृति मेहता रही।

तीसरे स्थान पर 280 अंकों के साथ वंशज रेखी रहे। आईसीएसआई देहरादून की चेयरमैन उपासना अग्रवाल ने बताया कि कुल 70 छात्रों ने सीएस फाउंडेशन की परीक्षा दी थी। इनमें से 40 छात्रों ने सफलता हासिल की। यह परीक्षा 28 व 29 दिसंबर 2019 को हुई थी।
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उत्तराखंडः अब पैरा मिलिट्री अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड पर होगा कैशलेस इलाज

अटल आयुष्मान योजना के गोल्डन कार्ड पर अब पैरा मिलिट्री फोर्स के अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। राज्य स्वास्थ्य अभिकरण ने प्रदेश में स्थापित एसएसबी, आईटीबीपी और सेंट्रल आर्म्स पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के अस्पतालों को योजना में सूचीबद्ध कर लिया है। 

केंद्र और राज्य की अटल आयुष्मान योजना में पैरा मिलिट्री फोर्स के अस्पताल सूचीबद्ध होने से सबसे ज्यादा लाभ प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को मिलेगा। पैरा मिलिट्री फोर्स के अधिकतर अस्पताल पर्वतीय जिलों में चल रहे हैं।

चमोली जिले के अंतर्गत एसएसबी हास्पिटल ग्वालदम, आठवीं बटालियन आईटीबीपी हास्पिटल गौचर, चंपावत में पांचवीं बटालियन एसएसबी, 36 बटालियन आईटीबीपी फोर्स चंपावत, देहरादून में आईटीबीपी हॉस्पिटल सीमाद्धार, नैनीताल में यूनिट हॉस्पिटल आईटीबीपी, उत्तरकाशी में 35 बटालियन आईटीबीपी हॉस्पिटल महिडांडा, 12 बटालियन आईटीबीपी मातली के अलावा चमोली के औली में माउंटेरिंग एंड स्किल इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल में गोल्डन कार्ड धारक को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।

पैरा मिलिट्री फोर्स के अस्पतालों में सैनिकों व उनके आश्रितों को ही इलाज मिलती है, लेकिन आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध होने से अब गोल्डन कार्ड धारक भी इन अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं। राज्य स्वास्थ्य अभिकरण ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं।

पैरा मिलिट्री फोर्स के अस्पतालों को योजना में सूचीबद्ध करने से आयुष्मान कार्ड धारकों को सीधे उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके लिए उन्हें रेफर करने की आवश्यकता नहीं होगी। एसएसबी और आईटीबीपी के अधिकतर अस्पताल पर्वतीय क्षेत्रों में है। जिससे वहां के कार्ड धारकों को इससे ज्यादा फायदा मिलेगा। - डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक (प्रशासन), राज्य स्वास्थ्य अभिकरण
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Republic day 2020: देवभूमि में देशभक्ति, कहीं बर्फ के बीच फहराया तिरंगा तो कहीं मदरसों ने निकाली रैली

हल्द्वानीः नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अब बुद्ध पार्क से हुंकार

सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में बनभूलपुरा में 60 घंटे तक लगातार चले धरने के बाद अब बुद्ध पार्क में 72 घंटे का सत्याग्रह चल रहा है। संविधान बचाओ मंच के बैनर तले शुरू हुए धरने में माले, कांग्रेस, किसान महासभा, डॉ. अंबेडकर मिशन, समाजवादी पार्टी समेत कई संगठनों से जुड़े लेगा शामिल हुए।

नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए शनिवार सुबह 11 बजे बुद्ध पार्क में धरने की शुरुआत संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक पाठ से की गई।

माले के राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा कि देश में सीएए और एनआरसी के विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार को तत्काल फैसला वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र बचाने की है। जनकवि बल्ली सिंह चीमा ने कहा कि इस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जिस तरह से अंकुश लगाने की कोशिशें की जा रही हैं, वह आपातकाल की याद दिलाती है।
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दहशतगर्तों ने कश्मीरी पंडितों पर की जुल्म की इंतिहा, पढ़ें रौंगटे खड़े कर देने वाले किस्से

कश्मीरी पंडितों पर जुल्म की कई कहानियां आए दिन हमारे सामने आती रही हैं। लेकिन अमर उजाला संवाद में उन्होंने जो अनुभव साझा किए, उससे सबके रौंगटे खड़े हो गए।

उन्होंने बताया कि दहशतगर्तों ने कश्मीरी पंडितों पर जुल्म की इंतिहा कर दी। जान बचाने के लिए रातों-रात हजारों लोग कश्मीर छोड़ने को मजबूर हो गए। बसा-बसाया घर, हंसता खेलता परिवार, कारोबार, संपत्ति सब कुछ छोड़कर जा रहे लोग सोचते रहे कि बस किसी तरह जिंदा बच जाएं...

बाप-बेटे की आंखें निकालकर मार दिया

बीके कौल ने बताया कि दहशतगर्त हिन्दुओं को डराने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। इसके लिए वह किसी की जान लेने से भी नहीं घबराते। एक बार एक बाप-बेटे ने उनका विरोध किया तो दोनों को सड़क पर गोली मार दी गई। उससे पहले उनकी आंखें निकालकर घोर यातनाएं दी गई। उस घटना के बाद हिन्दुओं में खौफ बढ़ गया। 

बेटियों के साथ जो हुआ कह नहीं सकते

संजय रैना ने बताया कि बेटियों के साथ इतनी बर्बरता हुई, जिसे सोचकर उनकी रूह कांप उठती है। हिंदुओं की बेटियां सुरक्षित नहीं थी। लोग अपनी बेटियों को घर से बाहर तक नहीं निकलने देते। बड़ी संख्या में लोग अपनी बेटियों की हिफाजत के लिए घर-बार छोड़कर दूसरी जगह चले गए। 
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Padma Awards 2020 : मैती आंदोलन को पीएम मोदी ने भी सराहा था, अब मिला इसके प्रणेता को पद्मश्री

आतंकी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
पर्यावरण से जुड़े मैती आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1994 में चमोली जिले के राइंका ग्वालदम में जीव विज्ञान के प्रवक्ता रहे कल्याण सिंह रावत ने की थी। उन्हें मैती आंदोलन के लिए 26 जनवरी को दिल्ली में पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जा रहा है।

मूल रूप से चमोली जिले के बैनोली गांव निवासी कल्याण सिंह रावत वर्तमान में देहरादून में रहते हैं। इनके दो बेटे हैं जो राजकीय सेवा में हैं। मैती के तहत जब किसी बेटी की शादी होती है, तो वह विदाई से पहले एक पौधा रोपती है।

इसके जरिए वह पर्यावरण संरक्षण के साथ ही अपने मायके में गुजारी यादों के साथ-साथ विदाई लेती है। इस भावनात्मक आंदोलन के साथ शुरू हुआ पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान आज उत्तराखंड के साथ ही पूरे भारत में चल रहा है।
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Padma Awards 2020 : इन मुद्दों को आगे ले जाने पर डाॅ. अनिल जोशी को मिला यह सम्मान

गणतंत्र दिवस 2020: देहरादून में परेड के चलते आज अलग होगा ट्रैफिक प्लान, यहां देखें

परेड ग्राउंड में आज होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान नए ट्रैफिक प्लान का ट्रायल नहीं होगा। सुरक्षा की दृष्टि से परेड ग्राउंड जीरो जोन होने के कारण ट्रैफिक व्यवस्था बदलेगी मिलेगी। ट्रैफिक पुलिस ने शनिवार को नया प्लान जारी कर दिया। डीआईजी अरुण मोहन जोशी का कहना है कि समारोह के संपन्न होने के बाद दो दिन से चल रहे ट्रायल को लागू कर दिया जाएगा।
 
परेड स्थल आने का यह रहेगा रूट 

. वीआईपी ईसी रोड, सर्वे चौक, पैसेफि क, रोजगार तिराहा और कांवेंट तिराहे के दाहिने तरफ  से वीवीआईपी द्वार से प्रवेश करेंगे।
. पैसेफि क होटल तिराहे से आने वाले अधिकारी और पास धारकाें के वाहन डोंगा हाउस के सामने से प्रवेश करेेंगे। गणतंत्र दिवस परेड के समस्त प्रतिभागी, आर्मी, पैरामीलिट्री, पुलिस, होमगार्ड, प्रेस, आम नागरिक अपने वाहन पवेलियन ग्राउंड में पार्क करेंगे। ये लोग पैदल परेड ग्राउंड के दोनो सामान्य प्रवेश द्वार से प्रवेश करेंगे।

यह रहेगी पार्किंग व्यवस्था

. वीआईपी वाहनों की पार्किंग मंच के पीछे होगी।
. धर्मपुर, दर्शनलाल चौक और दून चौक से आने वाहन रेंजर्स ग्राउंड में खडे़ होंगे। 
. सर्वे चौक से आने वाले वाहन मंगला देवी इंटर कॉलेज ग्राउंड में पार्क होंगे।
. पास धारक मीडिया कर्मियों के वाहन डोंगा हाउस के सामने स्थित पार्किंग में खड़े होंगे। 

विक्रमों की रूट व्यवस्था

.रायपुर रूट के विक्रम सहस्त्रधारा क्रासिंग से वापस भेजे जाएंगे। 
.धर्मपुर रूट के विक्रम चंदन नगर कट से दून चौक होते एमकेपी चौक भेजे जाएंगे।
.आईएसबीटी रूट और कांवली रोड के विक्रम रेलवे गेट से वापस होंगे। 
. प्रेमनगर रूट के विक्रम प्रभात सिनेमा कट से वापस होंगे। 
.राजपुर रूट के विक्रम ग्लोब चौक से पैसिफिक तिराहे से होकर बैनी बाजार से वापस जाएंगे।  

सिटी बसों का यह रहेगा रूट

.राजपुर रोड जाने वाली सिटी बसें दर्शन लाल चौक से घंटाघर होते हुए जाएंगी।
.आईएसबीटी से आने वाली सिटी बसें तहसील चौक से वापस होंगी। 
.रायपुर रोड से आने वाली सिटी बसें सहस्त्रधारा क्रॉसिंग से वापस होंगी।
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Padma Awards 2020 : हजारों की फ्री प्लास्टिक सर्जरी कर चुके हैं डॉ. एरन, अभी भी 10 हजार वेटिंग में

वयोवृद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. योगी एरन ने ‘डॉक्टर धरती के भगवान होते हैं’ पंक्ति को वास्तव में साकार किया है। जले कटे हजारों मरीजों की निशुल्क प्लास्टिक सर्जरी कर चुके 83 वर्षीय डॉ. एरन का जज्बा इस उम्र में भी कायम है। वे कहते हैं कि पद्मश्री मिलने से अब उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

उत्तराखंड के डॉ. योगी एरन को चिकित्सा एवं विज्ञान-इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। उत्तराखंड की तीन विभूतियों को पद्म सम्मान दिया जाएगा। जिसमें मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह और पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल प्रकाश जोशी का नाम शामिल है।

डॉ. योगी एरन ने बताया कि वर्ष 1973 में जब वे दून अस्पताल में नौकरी कर रहे थे तो पहाड़ से भालू के खाए हुए और जले हुए कई मरीज पहुंचते थे। वे बहुत ही सीधे और सरल होते थे। कई लोगों के पास पैसे तक नहीं होते थे। उन्हें लगा कि इस तरह के लोगों की मदद होनी चाहिए।
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कश्मीरी पंडित बोले- हिंदू-मुस्लिम एक थाली में खाते थे खाना, दहशतगर्दों ने तबाह की सूफी परंपरा

एक दौर हुआ करता था जब कश्मीर में सूफी परंपरा थी। हिंदू और मुस्लिम भाई-भाई की तरह रहा करते थे। हिंदुओं के घर में कोई आयोजन मुस्लिम दोस्तों की मौजूदगी के बिना शुरू नहीं होता था। ऐसे ही मुस्लिम समुदाय के आयोजन में हिंदुओं की आवभगत होती थी। लेकिन, चंद दहशतगर्दों को यह भाईचारा रास नहीं आया। उन्होंने एक पल में इस ऐतिहासिक परंपरा को तबाह कर दिया।

कश्मीरी पंडितों ने कहा कि उन्हें आज भी याद है कि जब वो कश्मीर में पढ़ते थे, तब उनके अधिकांश दोस्त मुस्लिम हुआ करते थे। उस समय का दौर भी बहुत खास था। वो अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ एक ही थाली में खाना खाया करते थे। सबका आपस में दिल का जुड़ाव था। लेकिन, चंद दहशतगर्दों ने साजिश रचकर कश्मीर की सूफी पंरपरा को खत्म कर दिया। आज यह हाल है कि वही भाई कश्मीरी पंडितों के दुश्मन बने हुए हैं।  
 
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