संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे का निर्माण चल रहा है। इसके निर्माण के लिए गंगा में ही अवैध खनन कर डाला। अब मामला उठा तो राजस्व, खनन और वन विभाग की टीम ने मंगलवार को गंगा पर पहुंचकर जांच की। उधर, बिजनौर और मुजफ्फरनगर के अफसर एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। जांच के बाद इस मामले में कई अफसरों पर गाज गिर सकती है।
मेरठ से नजीबाबाद तक मेरठ पौड़ी नेशनल हाईवे को फोरलेन किया जाना था। पहले चरण में मेरठ से बहसूमा और बिजनौर से नजीबाबाद तक हाईवे को फोरलेन किया गया। बीच में गंगा नदी होने की वजह से बहसूमा से बिजनौर तक हाईवे निर्माण को दूसरे चरण में शामिल किया गया। इस सड़क का निर्माण सिर्फ हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य की वजह से एनओसी के इंतजार में रखा गया। काफी जद्दोजहद के बाद गंगा पर पुल और बहसूमा से बिजनौर तक हाईवे निर्माण की एनओसी मिल सकी।
जिस वजह से एनओसी में देर हो रही थी, अब वही बात सामने आ गई। दरअसल, प्रवासी पक्षियों, जलीय जीवों के लिए खतरा पैदा कर दिया गया। गंगा में अवैध खनन से जलीय जीवों खासकर कछुआ प्रजाति के लिए यह खनन नासूर बन गया। वन विभाग का मानना है कि गंगा में जिस जगह से रेत उठाकर डाला गया है, वहां कछुए अंडे भी देते हैं।
अवैध खनन का आलम ये रहा कि गंगा में नहर जैसी आकृति बना दी गई हैं। काफी गहराई तक रेत उठाया गया। इतना रेत निकाला की नीचे से पानी निकल आया। इसकी अनुमति किसने दी, यह बताने के लिए कोई तैयार नहीं है। गंगा के प्राकृतिक बहाव और स्थिति से खिलवाड़ का शोर मचते ही वहां से रेत निकाल रही मशीनों को गायब कर दिया गया। बिजनौर प्रशासन का तर्क है कि जहां से रेत उठाई गई, वह जगह मुजफ्फरनगर के नियंत्रण में आती है। इसी का पता लगाने के लिए मंगलवार को बिजनौर प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और मुआयना किया।
महंगापुर के श्री गुरु तेग बहादुर स्कूल में कबड्डी में प्रतिभाग करते स्कूली बच्चे। संवाद