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Karnal: During the Shrimad Bhagwat Katha, Aniruddhacharya Maharaj engaged in a Q&A session with devotees; he advised them not to offer obeisance directly in front of the deity's idol and urged them to renounce ego and anger.
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करनाल: श्रीमद्भावत कथा में अनिरुद्धाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं से किए सवाल-जवाब, बोले- भगवान स्वरूप के ठीक सामने से नहीं करना चाहिए प्रणाम, अहंकार और क्रोध को त्यागे
करनाल। अनिरुद्धाचार्य महाराज का कहना है कि जिन्हें मांस खाना है, वे भारत में रहकर भी खा रहे हैं, जिन्हें नहीं खाना वे विदेश में रहकर भी सात्विक हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनके बच्चे भी भगवान का आचरण करते हैं और गीता के श्लोक तक याद हैं। सनातन में बकरे की बलि संस्कृति में नहीं है। यह जवाब उन्होंने एक श्रद्धालु के सवाल के दौरान दिया। तरावड़ी में श्रीमद्भागवत कथा चल रही है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने उनसे सवाल जवाब भी किया गया।
एक युवक का सवाल था कि मेरे दोस्त भगवान की भक्ति से मना करते हैं, वे नास्तिक हैं पर मैने भक्ति नहीं छोड़ी। इस पर उन्होंने कहा कि एक बिगड़ा व्यक्ति सभी को बिगाड़ सकता है और एक सुधरा सभी को सुधार भी सकता है। अन्य सवाल जन्मदिन पर दोस्त शराब की पार्टी मांगते हैं, के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा गलत है, गरीबों को भोजन कराना चाहिए। जो मदिरा मांगे उसका साथ छोड़ देना चाहिए।
अन्य सवाल घर में लड्डू गोपाल रखे हैं, बाहर जाते हैं तो साथ ले जाना चाहिए.. इस पर उन्होंने कहा कि सेवा करने में कोई दिक्कत नहीं है। पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए। ब्यूरो
भगवान स्वरूप के ठीक सामने से नहीं करना चाहिए प्रणाम
युवक के सवाल क्या भगवान के सामने खड़े होकर दर्शन करने चाहिए.. पर जवाब देते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि स्वरूप से हल्का सा किनारे होकर दंडवत प्रणाम करना चाहिए। क्योंकि भगवान के सामने हमेशा हनुमान जी होते हैं। ऐसे में जब हम झुककर प्रणाम करते हैं तो हमारे पांव हनुमान जी की तरफ ही होते हैं।
सोचो हर कार्य भगवान कर रहे हैं.. अहंकार और क्रोध नहीं होगा
एक सवाल था कि सफलता या काम होने पर अहंकार होता है.. तो उन्होंने कहा कि ये मानो कि सबकुछ भगवान करते हैं तो अहंकार नियंत्रण रहेगा। काम न होने पर क्रोध इसलिए आता है क्योंकि हम मान बैठते हैं कि हम कर रहे हैं। जब अहंकार शून्य होगा तो क्रोध भी शांत हो जाएगा। हमारे कर्म ही हमारा भविष्य अच्छा या बुरा बनाते हैं। कथा श्रवण से मन शांत रहता है।
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