फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Voting for DU Students Union election concluded understand full equation regarding potential victory

डूसू चुनाव में वोटों का खेल: अध्यक्ष से उपाध्यक्ष तक कड़ा मुकाबला, जानें किन फैक्टरों से बदल सकता है परिणाम

Fri, 18 Sep 2026 11:09 PM IST
Rahul Kumar Tiwari अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Fri, 18 Sep 2026 11:09 PM IST
सार

डूसू चुनाव में मतदान खत्म होते ही एबीवीपी और एनएसयूआई ने जीत के दावे शुरू कर दिए हैं। लेकिन असली तस्वीर मतगणना से सामने आएगी। पैनल वोटिंग, बागी उम्मीदवार, नोटा और आइसा के वोट कई सीटों का समीकरण बदल सकते हैं।

विज्ञापन
Voting for DU Students Union election concluded understand full equation regarding potential victory
डूसू चुनाव में जीत-हार का गणित - फोटो : अमर उजाला GFX

विस्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में मतदान खत्म होने के साथ ही छात्र संगठनों ने जीत-हार का गणित लगाना शुरू कर दिया है। एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों ही कई सीटों पर अपने प्रत्याशियों की जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि, अंदरूनी स्तर पर मुकाबला बेहद करीबी बताया जा रहा है। एबीवीपी चारों प्रमुख सीटों पर क्लीन स्वीप का दावा कर रही है, जबकि एनएसयूआई अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर खुद को मजबूत स्थिति में मान रही है।
विज्ञापन


अंतिम नतीजों से पहले सभी की निगाहें पैनल वोटिंग, नोटा, बागी उम्मीदवारों और आइसा को मिले वोटों पर टिकी हैं। छात्र संगठनों से जुड़े लोगों का मानना है कि करीबी मुकाबले में इनका असर परिणाम पर पड़ सकता है। कम मतदान को एबीवीपी अपने पक्ष में मान रही है। संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है कि कम मतदान की स्थिति में उसका पारंपरिक कैडर वोट अधिक प्रभावी रह सकता है। प्रचार अभियान की शुरुआत से ही एबीवीपी चारों सीटों पर जीत का दावा करती रही है।
विज्ञापन

अध्यक्ष पद पर यश डबास और विजय शंकर मीणा में मुकाबला
अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के यश डबास और एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा के बीच मुकाबला है। मतदान से पहले एबीवीपी खेमे में इस सीट को लेकर कुछ अनिश्चितता थी, लेकिन मतदान के बाद संगठन के नेताओं का अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर भरोसा बढ़ा है। यश डबास के जाट समुदाय से होने के कारण उनके पक्ष में समुदाय आधारित समर्थन की चर्चा है। वहीं, एनएसयूआई की ओर से विजय शंकर मीणा के पक्ष में छात्रों और युवाओं के समर्थन का दावा किया जा रहा है। खासकर साउथ कैंपस में उनके प्रति छात्रों के बीच उत्साह दिखाई देने की बात कही जा रही है। अब परिणाम से स्पष्ट होगा कि दोनों प्रत्याशियों के पक्ष में बने सामाजिक और छात्र समीकरण वोटों में कितने तब्दील हुए।
विज्ञापन

संयुक्त सचिव पद पर कांटे की टक्कर
संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के लक्ष्यराज सिंह और एनएसयूआई के गोपाल चौधरी आमने-सामने हैं। दोनों संगठन अपने-अपने प्रत्याशी की स्थिति मजबूत बता रहे हैं। एनएसयूआई इस सीट पर जीत को लेकर अपेक्षाकृत आश्वस्त नजर आ रही है। संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार राजस्थान से आने वाले छात्रों का समर्थन गोपाल चौधरी को मिल सकता है। दूसरी ओर, एबीवीपी के कुछ नेता भी इस सीट पर चुनौती की संभावना स्वीकार कर रहे हैं।
विज्ञापन

उपाध्यक्ष पद पर बागी उम्मीदवार से बदला समीकरण
उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के ईशू मौर्या, एनएसयूआई के वीर चतरथ और एनएसयूआई के बागी उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के निर्दलीय मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। एबीवीपी का तर्क है कि दीपांशु को मिलने वाले वोट एनएसयूआई के आधिकारिक प्रत्याशी के वोटों को प्रभावित कर सकते हैं। एनएसयूआई भी मान रही है कि बागी उम्मीदवार की मौजूदगी से उसके कुछ वोट विभाजित हो सकते हैं। ऐसे में इस सीट पर बागी उम्मीदवार को मिलने वाले मत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

सचिव पद पर नम्रता और रिया आमने-सामने
सचिव पद पर एनएसयूआई की नम्रता चौधरी और एबीवीपी की रिया छाबड़ी के बीच सीधा मुकाबला है। दोनों संगठनों के बीच इस सीट को लेकर अलग-अलग दावे हैं। एनएसयूआई इसे कांटे का मुकाबला बता रही है, जबकि एबीवीपी अपनी प्रत्याशी की स्थिति मजबूत बताते हुए जीत का दावा कर रही है।
 

सह सचिव पद पर पैनल वोटिंग अहम
सह सचिव पद पर भी पैनल वोटिंग को लेकर दोनों संगठनों की नजर है। एबीवीपी का मानना है कि यदि छात्रों ने एक ही संगठन के पूरे पैनल को वोट दिया है तो इसका लाभ उसके प्रत्याशी को मिल सकता है। ऐसे में इस सीट का परिणाम मतदान के पैटर्न से प्रभावित होने की संभावना है।
नोटा और आइसा के वोटों पर भी नजर

नोटा, निर्दलीय और आइसा के प्रत्याशियों को मिले वोट भी कई सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं। छात्र संगठनों से जुड़े लोगों का मानना है कि कुछ सीटों पर आइसा को मिलने वाले वोट एनएसयूआई के वोटों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी तरह नोटा और निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलने वाले मत भी करीबी मुकाबलों में निर्णायक अंतर पैदा कर सकते हैं। अब सभी की नजर मतगणना पर है, जहां इन तमाम दावों और गणित की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed