जयपुर के दुर्गापुरा स्थित आंच हॉस्पिटल में शनिवार सुबह अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई। यहां दो मृतकों के शव आपस में बदल गए। एक परिवार को अस्पताल ने दूसरे मृतक का शव सौंप दिया और परिजन उसे लेकर नावां (डीडवाना-कुचामन) के लिए रवाना हो गए। बाद में अस्पताल स्टाफ को शव बदलने का पता चला, जिसके बाद परिवार को फोन कर वापस बुलाया गया। घटना से नाराज मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर करीब दो घंटे तक हंगामा किया और धरने पर बैठ गए।
53 वर्षीय गिरधारी लाल और घेसालाल की हुई थी मौत
एसीपी शिवदयाल बाजिया के अनुसार, नावां निवासी 53 वर्षीय गिरधारी लाल और बानसूर (कोटपूतली-बहरोड़) निवासी घेसालाल 17 सितंबर को आंच हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। शुक्रवार रात दोनों की मौत हो गई।
शनिवार सुबह अस्पताल की ओर से गिरधारी लाल का शव घेसालाल के परिवार को सौंप दिया गया। परिवार शव लेकर नावां के लिए रवाना हो गया। इसी दौरान अस्पताल प्रशासन को गलती का पता चला और परिवार को फोन कर वापस बुलाया गया। इसके बाद गिरधारी लाल के परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए सुबह करीब 8:30 बजे अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार किया। बाद में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के हस्तक्षेप के बाद सुबह करीब 10 बजे एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से समझाइश भी की।
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अस्पताल ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की गलती बताई
वहीं, अस्पताल की ओर से नर्सिंग सोसायटी के प्रवक्ता राजवीर सिंह के अनुसार, शवों को शिफ्ट करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। जिस एंबुलेंस को अस्पताल के गेट पर लगाया गया था, उसमें नावां-कुचामन क्षेत्र के मरीज का शव ले जाना था। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की गलती के कारण थानागाजी जाने वाला शव गलत एंबुलेंस में चला गया और परिजनों के साथ नावां-कुचामन रवाना हो गया। अस्पताल ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही है।