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बगलामुखी जयंती पर परिवार की सुरक्षा के लिए, कराएं कामख्या सुरक्षा अनुष्ठान
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बगलामुखी जयंती पर परिवार की सुरक्षा के लिए, कराएं कामख्या सुरक्षा अनुष्ठान

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Digital Edition

साढ़े पांच माह बाद आज से रोहतांग में दौड़ेंगी बसें

सीमा सड़क संगठन ने दावा किया कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मनाली-लेह मार्ग 15 दिन बाद जून माह के प्रथम सप्ताह तक बहाल हो सकता है। बीआरओ बर्फ हटाते हुए 16,600 फीट की ऊंचाई पर बारालाचा दर्रे के करीब पहुंच गया है। हिमाचल की सीमा सरचू तक 25 किलोमीटर मार्ग से बर्फ हटाना शेष है। उधर, रोहतांग दर्रा बहाल होते ही जिला प्रशासन साढ़े पांच माह बाद मंगलवार से मनाली से केलांग को नियमित एचआरटीसी बस सेवा शुरू करने जा रहा है। सोमवार को बस के सफल ट्रायल के बाद यह फैसला लिया गया। 

सीमा सड़क संगठन ने रोहतांग के बाद मनाली-लेह मार्ग की बहाली का कार्य और तेज कर दिया है। मौसम बाधा न बना तो 15 दिन बाद लेह मार्ग बहाल हो सकता है। लेह की तरफ बीआरओ हिमांक ने सड़क मार्ग को यातायात के लिए पहले ही बहाल कर दिया है। बारालाचा के पास जवानों को मार्ग बहाली में खूब पसीना बहाना पड़ रहा है। यहां जरा सा मौसम बिगड़ जाए तो बर्फ पड़ना शुरू हो जाती है।

संगठन के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से मौसम बाधा डाल रहा है। इसके बावजूद बारालाचा पास को बहाल करने में जुटे हैं। देश-विदेश के पर्यटकों व सेना को अब लेह-लदाख के दीदार को जून के पहले सप्ताह तक इंतजार करना पड़ेगा। सितंबर माह में बर्फबारी के बाद से यह मार्ग यातायात को बंद हो गया था। इस मार्ग से चीन सीमा पर पहरा दे भारतीय सैनिकों को रसद व गोला बारूद समय पर पहुंचाने में आसानी होगी। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान मार्ग अपनी सामरिक महत्ता दर्ज करवा चुका है। 

सरचू तक सड़क बहाल करने का कार्य 25 किलोमीटर शेष है। मार्ग बहाली के प्रयास जारी है। मनाली-लेह मार्ग जून के पहले सप्ताह में ही बहाल हो सकता है। -उमाशंकर, कमांडर 38 बीआरटीएफ 

जून में पर्यटक करते हैं एडवांस बुकिंग 
लेह लद्दाख जाने वाले सैलानी मार्ग खुलने से पहले ही की एडवांस में बुकिंग कर देते हैं। जैसे ही मार्ग खुलता है पर्यटक आने की तारीख कन्फर्म कर देते हैं। रोहतांग दर्रा खुलने से केलांग और स्पीति में भी पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा।
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उदयपुर का ये सास-बहू का मंदिर 1100 साल पुराना है, जानिए इसका इतिहास

बीजेपी नेता गुलाब चंद कटारिया का मुसलमानों पर बड़ा बयान

उदयपुर: पुलिस के पहरे में निकली कांस्टेबल की बारात, जानें किसके डर से दूल्हे ने मांगी थी सुरक्षा

आजादी के 74 साल भी बाद भी गांवों में जातिवाद और ऊंच-नीच वाली भावना लोगों पर हावी है। राजस्थान के उदयपुर के गांव से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां दलित दूल्हे को डर था कि गांव के दबंग लोग उसे घोड़ी से उतार देंगे। खुद कांस्टेबल होने के बावजूद उसने पुलिस से सुरक्षा मांगी। बाद पुलिस सुरक्षा में बारात निकाली गई और शादी की शादी की रस्मों को अदा किया। 

राजस्थान में उदयपुर के राव मादड़ा में मंगलवार को एक कांस्टेबल कमलेश मेघवाल की पुलिस बल की मौजूदगी में शादी हुई। कांस्टेबल कमलेश मेघवाल को घोड़ी पर जाने पर विवाद होने की आशंका थी। शादी से पहले ही दूल्हे कमलेश ने पुलिस से शादी में सुरक्षा की गुहार की थी। इस पर शादी के दौरान डिप्टी एसपी, नायब तहसीलदार सहित दो थानों की फोर्स को तैनात किया गया। पुलिस सुरक्षा में बारात निकाली गई और शादी की सारी रस्में की गईं।

भाई ने कहा- घोड़ी से उतारने का डर था इसलिए मांगी सुरक्षा
दूल्हे के भाई दुर्गेश ने बताया कि गांव में दलित समाज के लोगों को घोड़ी पर बैठ बिंदोली नहीं निकालने दी जाती है। इससे पहले भी गांव में कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जब दलित दूल्हे को बिंदौली के वक्त घोड़ी से उतार दिया गया। इसकी वजह से शादी से पहले ही पुलिस और प्रशासन से मदद मांगी गई थी। प्रशासन की देखरेख में शादी की रस्मों को पूरा कर लिया गया है। वहीं राव मादड़ा के उप सरपंच योगेंद्र सिंह राव ने कहा कि गांव में इससे पहले ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उसने सिर्फ पुलिसिया रौब झाड़ने के लिए ऐसा किया।
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कॉन्स्टेबल कमलेश मेघवाल कॉन्स्टेबल कमलेश मेघवाल

बेकाबू कोरोना: राजस्थान में ऑक्सीजन की मांग पांच गुना तक बढ़ी, हर रोज 31,425 सिलेंडर की खपत

राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमितों की बढ़ती संख्या के बीच मेडिकल ऑक्सीजन की मांग बीते तीन महीने में लगभग पांच गुना बढ़कर 31,425 सिलेंडर प्रतिदिन हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने इस बारे में जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को पूरा करने की भरसक कोशिश कर रही है। इसके तहत अलवर में 1,000 ऑक्सीजन सिलेंडर की क्षमता का नया संयंत्र लगाया गया है, जबकि राजसमंद में 1,200 सिलेंडर प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र अगले सप्ताह शुरू होने की संभावना है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शर्मा ने बताया कि राज्य में तीन महीने पहले ऑक्सीजन की खपत लगभग 6,500 सिलेंडर प्रतिदिन थी, जो फिलहाल बढ़कर 31,425 सिलेंडर प्रतिदिन हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में हो रही निरन्तर वृद्धि के कारण आपातकालीन चिकित्सकीय ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग लगातार बढ़ रही है। बढ़ती मांग को पूरा करने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। चिकित्सा सचिव सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि ऑक्सीजन के प्रबन्ध के लिए राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर प्रयास किए हैं। आपात स्थिति को देखते हुए जामनगर (गुजरात) से ऑक्सीजन टैंकरों की वायु मार्ग से आपूर्ति की गई है। साथ ही अलवर जिले में 1,000 सिलेंडर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता का नया संयंत्र लगाया गया है।

1,200 सिलेंडर प्रतिदिन क्षमता का प्लांट शुरू
महाजन ने बताया कि अगले सप्ताह तक 1,200 सिलेंडर प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र दरीबा (राजसमंद) में हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड द्वारा प्रारम्भ किया जा रहा है। इसके अलावा 500 सिलेंडर का उत्पादन शीघ्र ही शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऑक्सीजन टैंकर में जीपीएस सिस्टम लगाये गये हैं और वाहनों की निगरानी राज्य नियंत्रण कक्ष से की जा रही है।
महाजन ने बताया कि ऑक्सीजन की औद्योगिक प्रयोजन से आपूर्ति पूर्णतः बंद करते हुए समस्त आपूर्ति को चिकित्सा उद्देश्य से सुनिश्चित किया गया है।
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इंसानियत: प्लाज्मा डोनेट करने के लिए मुस्लिम युवक ने तोड़ा रोजा, बोला- किसी की सेवा सबसे बड़ी इबादत

देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच कई हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने अंदर तक झकझोर कर रख दिया। कई ऐसी घटनाएं घटित हुईं जिन्होंने मानवता को शर्मसार कर दिया लेकिन राजस्थान के उदयपुर में एक शख्स ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने इंसानियत को फिर जगा दिया है। 

बुधवार को उदयपुर के रहने वाले एक शख्स ने अपना रोजा तोड़ दिया ताकि कोरोना से संक्रमित दो महिलाओं को प्लाज्मा डोनेट कर सके। इस शख्स का नाम अकील मंसूरी हैै, जो एक सिविल कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर काम करता है। अकील ने बिना किसी हिचकिचाहट के एक नेक काम के लिए अपना रोजा तोड़ दिया। 

शख्स के इस कारनामे की हर जगह वाहवाही हो रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शख्स को सोशल मीडिया नेटवर्किंग और ब्लड डोनर ग्रुप के जरिए इस बात की जानकारी मिली कि दो कोविड संक्रमित महिलाओँ को प्लाज्मा की जरूरत है। इन दो महिलाओं को A+ ब्लड ग्रुप के प्लाज्मा की जरूरत थी। 

एक महिला का नाम निर्मला था, उनकी उम्र 36 साल थी, वहीं दूसरी महिला की उम्र 30 साल थी और उनका नाम अल्का था। मंसूरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट को देखते ही वो अस्पताल की ओर भागे और प्लाज्मा डोनेट का फैसला किया। 

अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर अकील मंसूरी को एंटीबॉडी टेस्ट के लिए ले गए, जहां डॉक्टरों ने पाया कि वो प्लाज्मा डोनेट करने के लिए एक दम फिट हैं। बकौल मंसूरी डॉक्टर ने उनसे कहा कि क्योंकि वो सुबह से रोजा रखे हुए हैं, इसलिए प्लाज्मा डोनेट करने से पहले वो कुछ खा लें। इसलिए मैंने अपना रोजा तोड़ा और खून डोनेट किया। 

मंसूरी ने कहा कि एक इंसान के तौर पर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी की। मंसूरी ने कहा कि प्लाज्मा डोनेट करने के बाद उन्होंने दोनों महिलाओं के जल्द ठीक होने की भी प्रार्थना की। सितंबर 2020 में कोरोना से ठीक होने के बाद मंसूरी ने कम से कम 17 बार अपना खून डोनेट किया है। मंसूरी ने बताया कि उन्होंने पहले भी प्लाज्मा डोनेट किया है और ठीक हुए सभी लोगों से अपील की है कि वो जरूरतमंद लोगों को प्लाज्मा जरूर डोनेट करें।
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राजस्थान: ऑनलाइन कार्यक्रम में बोले राज्यपाल- आदिवासी व गैर आदिवासी की खाई को पाटने की है जरूरत

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र शुक्रवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में शामिल हुए। दरअसल, उन्होंने उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘वागड़ अंचल का लोक साहित्य एवं संस्कृति’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं विश्वविद्यालय परिसर के छह भवनों के ऑनलाइन शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस मौके पर मिश्र ने कहा कि आदिवासी और गैर आदिवासी के बीच पनपी भेद की खाई को मिलकर पाटने की जरूरत है। इसके लिए आदिवासी समाज को उनकी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और विशिष्टताओं को बचाए रखते हुए विकास की मुख्य धारा में जोड़ना होगा। 

उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान रखता है, जिसे सहेजा जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि आदिवासी क्षेत्र के युवाओं के माध्यम से इस समुदाय के रीति-रिवाज, उत्सव, परंपराओं, लोक-कथाओं और लोकगीतों सहित उपलब्ध ज्ञान को एकत्रित कर इसका डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए ताकि भावी पीढ़ी भी इससे रूबरू हो सके। 

इस ऑनलाइन कार्यक्रम में राज्य विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि जनजातीय क्षेत्रों का प्राकृतिक ज्ञान उनकी अनूठी विरासत है और प्रकृति से इस निकटता के कारण ही इन क्षेत्रों के निवासियों पर कोरोना महामारी का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम देखने को मिला।

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राजस्थान : केंद्र सरकार को मिला 56 किलो सोना, 1965 में लाल बहादुर शास्त्री को तौलने के लिए किया गया था एकत्रित

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के जिला व सत्र न्यायालय ने 56 साल पहले लाल बहादुर शास्त्री को तौलने के लिए एकत्र किए गए किए गए 56 किलो सोने को सरकार को सौंपने का आदेश दिया है। यह सोना 1965 में लाल बहादुर शास्त्री के तुलादान के लिए जुटाया गया था,लेकिन इसके पहले ही रूस के ताशकंद में उनकी मृत्यु हो गई थी। इस सोने का आज का मूल्य 28 करोड़ रुपये से ज्यादा है। 

1965 से चल रहा सोने को लेकर केस
चित्तौड़गढ़ की कोर्ट ने इस सोने को इसे केंद्र सरकार के अधीन आने वाले सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स को सौंपने का आदेश दिया है। यह सोना अभी उदयपुर के जिला कलेक्टर कार्यालय के कोषालय में रखा है। इस केस में अब तक पांच बार कोर्ट का फैसला आ चुका है। पांचों बार सरकार को सोना सौंपने का फैसला आया है। दिसंबर 1965 में छोटी सादड़ी के गुणवंत ने गणपत सहित तीन लोगों पर केस किया था। उसने दावे में कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को तोलने के लिए इकट्ठा किए गए सोने को लौटाया नहीं जा रहा है।  

गणपत ने एकत्रित किया था सोना
गणपत ने 1965 में लाल बहादुर शास्त्री को तोलने के लिए सोना इकट्ठा किया था, लेकिन इससे पहले भारत-पाकिस्तान के बीच चर्चित ताशकंद समझौते के बाद उनकी वहीं मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 11 जनवरी 1975 को कोर्ट ने गणपत को दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई थी और यह सोना स्वर्ण नियंत्रक को सौंपने का आदेश दिया था। हालांकि 14 सितंबर 2007 को राजस्थान हाई कोर्ट ने गणपत को दोषमुक्त कर दिया था, लेकिन सोना उसे लौटाने की अपील खारिज कर दी। 

2012 में गणपत के बेटे गोवर्धन ने यह सोना मांगते हुए कोर्ट में याचिका लगाई। उसने कहा कि सोना उसके पिता का था। पुलिस ने पिता के पास से ही बरामद किया है, इसलिए उसे लौटाया जाए, लेकिन कोर्ट ने गत बुधवार को गोवर्धन की अर्जी खारिज करते हुए सोना सीजीएसटी को सौंपने का आदेश दे दिया। 
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राम मंदिर के लिए राजस्थान से सबसे बड़ा दान, विहिप नेता अशोक सिंघल के भाई ने दिए 11 करोड़ रुपये

अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद के अंततराष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. अशोक सिंघल के छोटे भाई अरविंद सिंघल ने 11 करोड़ रुपये का दान दिया है। यह राजस्थान में अब तक का सबसे बड़ा दान है। अरविंद ने इस मौके पर कहा कि बड़े भाई का मंदिर निर्माण का सपना पूरा हो रहा है, इसकी खुशी हो रही है। बता दें, विहिप द्वारा चलाए गए राम मंदिर आंदोलन में अशोक सिंघल ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया था।

अरविंद सिंघल ने राम मंदिर निर्माण के लिए उदयपुर में चंदा जुटा रहे पारस सिंघवी को दो बार में चेक से 11 करोड़ रुपये की राशि दी। पहली बार में पांच करोड़ और दूसरी बार में छह करोड़ दिए। सिंघवी ने बताया कि राजस्थान में सिंघल परिवार द्वारा दी गई राशि अब तक की सबसे बड़ी है। 

भूमि पूजन में पीएम संग शामिल हुए थे सलिल सिंघल
सिंघल परिवार राजस्थान के उदयपुर शहर का निवासी है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के वक्त सिंघल परिवार के सदस्य सलिल सिंघल भी मौजूद थे। अशोक सिंघल के मंदिर आंदोलन से गहरे जुड़ाव को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट ने इस परिवार को खास तौर से न्योता भेजा था। उस वक्त अरविंद सिंघल बीमार थे, इसलिए उन्होंने सलिल को भेजा था। 

खनन व बिजली उपकरण का कारोबार
दरअसल, अरविंद सिंघल राजस्थान के बड़े कारोबारी हैं। वे वॉलकैन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं। यह कंपनी खनन क्षेत्र के अलावा बिजली के उपकरण भी बनाती है। 
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राजस्थान: कुत्ते के काटने से गाय को हुआ रैबीज, दूध पीने के बाद परिवार को लगवाना पड़ा टीका

आपने आजतक कुत्ते के काटने बाद लोगों को रैबीज का टीका लगाते हुए देखा और सुना तो जरूर होगा। लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि किसी गाय को कुत्ते ने काटा हो और फिर उसका दूध पीने वाले लोगों ने रैबीज का टीका लगवाया हो। आप कहेंगे नहीं। मगर असंभव सा लगने वाला यह मामला राजस्थान के उदयपुर में सामने आया है।

उदयपुर के हिरणमगरी के सेटेलाइट अस्पताल में एक ही परिवार के 13 सदस्य शुक्रवार को एक साथ रेबीज का टीका लगवाने के लिए पहुंचे। परिवार ने बताया कि उनकी पालतू गाय को एक कुत्ते ने काट लिया, जिससे उसे रेबीज हो गया और उसका दूध पीने से उन्हें भी रेबीज होने का खतरा है। इसके बाद सभी को एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई गई।

दरअसल, परिवार की गाय को कुछ दिनों पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। सभी सदस्य उसका दूध पी रहे थे। गुरुवार को उनकी गाय बीमार हो गई और पागल जैसी हरकतें करने लगी। उपचार के लिए उसी दिन शाम को पशु चिकित्सक को बुलाया गया। पशु चिकित्सक ने उसके रेबीज से ग्रस्त होने की आशंका जताई।

चिकित्सक ने बताया कि रोगी गाय का दूध पीने से परिवार के सदस्यों को रेबीज होने का खतरा है। इसके बाद सभी सदस्यों को सेटेलाइट अस्पताल में एंटी रेबीज और टिटनेस का टीका लगवाया गया। अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ. किशनलाल धानक ने बताया कि पहली बार ऐसा कोई मामला सामने आया है।

डॉ. किशनलाल ने बताया कि गाय को रेबीज होने पर उसका दूध पीने से रेबीज होने का खतरा बना रहता है। हालांकि दूध को उबालकर पीने से इसकी संभावना कम हो जाती है। फिर भी किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इस घटना की जानकारी मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी के अलावा आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को भी दी गई है। 
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नन्हे भाई-बहन का कमाल: टीवी पर रामायण देखकर पढ़ी रामचरितमानस, फिर 2100 पन्नों में लिखी

राजस्थान के जालौर में रहने वाले मासूम भाई-बहन ने ऐसा कारनामा कर दिया, जिससे हर कोई हैरान रह गया है। दरअसल, इन दोनों बच्चों ने लॉकडाउन के दौरान रामायण देखी थी, जो उन्हें काफी पसंद आई। इसके बाद उन्होंने तीन बार रामचरितमानस पढ़ी और उसे 2100 पन्नों में उतार दिया। 

लॉकडाउन में किया कमाल
गौरतलब है कि कोरोना की वजह से देश में 25 मार्च 2020 को लॉकडाउन लग गया था। उस दौरान अधिकतर लोगों को काफी परेशानी हुई, लेकिन कुछ लोगों ने उस दौरान अनोखे कारनामे कर दिखाए। दरअसल, राजस्थान के जालौर जिले में रहने वाले दो छोटे बच्चों ने 2100 पन्नों में पूरी रामायण लिख दी। ये दोनों बच्चे भाई-बहन हैं। 

20 कॉपियों में लिखी रामायण
जानकारी के मुताबिक, तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले माधव जोशी और चौथी कक्षा में पढ़ने वाली अर्चना ने यह कारनामा किया। उन्होंने रामायण के अलग-अलग खंडों को कुल 20 कॉपियों के करीब 2100 पन्नों में उतार दिया। 

इस वजह से लिखी रामायण
बताया जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण दिखाई गई थी। उसे काफी पसंद भी किया गया। उसी दौरान माधव और अर्चना ने भी रामायण देखी। इसके बाद उन्होंने को लोग खूब देख रहे थे और पसंद की जा रही थी, उसी दौरान इन बच्चों के मन में पूरी रामायण पेन से लिखने की बात आई और उसके बाद उन्होंने तीन बार रामचरितमानस भी पढ़ी। पापा ने उन्हें रामायण लिखने के लिए प्रोत्साहित किया तो दोनों भाई-बहन अनोखा कारनामा करने में जुट गए।

सात हिस्सों में लिखा पूरा किस्सा
जालौर के आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय में पढ़ने वाले माधव और अर्चना ने पूरी रामायण को सात हिस्सों में लिखा। उन्होंने श्री रामचरितमानस  बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर रामायण का संपूर्ण जिक्र किया। इनमें माधव ने 14 कॉपियों में बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड और उत्तर कांड लिखा, जबकि अर्चना ने छह कॉपियों में किष्किंधा कांड, सुंदर कांड और लंका कांड लिखा। बच्चों का कहना है कि उन्हें रामायण की पूरी जानकारी हो गई। साथ ही, रामचरितमानस में दोहे, छंद और चौपाइयों की संख्या भी याद हो गई।
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