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सुरेंद्र कोली का अंतिम संस्कार: अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर, हरिद्वार में उसकी गतिविधियों की जांच शुरू
Sun, 20 Sep 2026 01:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हरिद्वार
अमर उजाला नेटवर्क, हरिद्वार
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 20 Sep 2026 01:39 AM IST
सार
परिजनों ने हरिद्वार में ही खड़खड़ी श्मशान घाट पर कोली का अंतिम संस्कार किया। अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है।
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प्रतीक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बहुचर्चित निठारी कांड में सुप्रीम कोर्ट से बरी सुरेंद्र कोली का शव खोखे के अंदर संदिग्ध हालात में फंदे पर लटका मिलने के बाद शनिवार को चिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शव सुरेंद्र के बेटे, तीन भाई और परिचित पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत को सौंप दिया। परिजनों ने हरिद्वार में ही खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया। अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है।
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शुक्रवार को सुरेंद्र कोली का शव सप्तसरोवर मार्ग स्थित वैष्णो देवी मंदिर के समीप चाय के खोखे के अंदर मिला था। गले में रस्सी कसी हुई थी और आधा हिस्सा रस्सी का पंखे से लटका था। पुलिस ने प्रथमदृष्टया इसे आत्महत्या मानते हुए शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। बैग से मिले आधार कार्ड से सुरेंद्र कोली की पहचान होने के बाद मामला चर्चाओं में आ गया था।
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शनिवार की सुबह सुरेंद्र के 20 वर्षीय पुत्र शिवम, भाई चंदन, हरीश, आनंद और पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत शव लेने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। उन्होंने शव मिलने के बाद शाम को खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया।
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पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया है। इसके बाद परिजनों को शव सौंप दिया गया। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अभी जांच चल रही है। - -शिशुपाल सिंह नेगी, सीओ सिटी, हरिद्वार
गतिविधियों की जांच शुरू
नेगी ने बताया कि हरिद्वार आने के बाद से सुरेंद्र की गतिविधियों की जांच भी शुरू कर दी गई है। पुलिस को पता चला था कि सुरेंद्र पिछले चार-पांच महीनों से हरिद्वार में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। इस दौरान उसने दो-तीन जगहों पर सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम किया, लेकिन पहचान के दस्तावेज मांगे जाने पर अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से नौकरियां बदलता रहा।
नेगी ने कहा कि जिन लोगों ने सुरेंद्र को काम पर रखा और चाय की दुकान किराए पर लेने में उसकी मदद की, उनसे भी पूछताछ की जा रही है। आरोप है कि सुरेंद्र ने अपनी मौत से सिर्फ चार दिन पहले अनिल शर्मा नाम के व्यक्ति से 'सदाराम' के फर्जी नाम से चाय की दुकान किराए पर ली थी। उसकी मौत के बाद पुलिस की तलाशी में उसका आधार कार्ड और वोटर आईडी मिला, जिससे उसकी असली पहचान का पता चला। पुलिस ने दुकान को लेकर शर्मा और सुरेंद्र के बीच किसी भी तरह के विवाद की खबरों का भी खंडन किया है।