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राजस्थान: न पार्षद का चुनाव लड़ा, न चेयरमैन का मुकाबला...फिर भी मिल गई कुर्सी, धौलपुर में कैसे हुआ ये खेल?

Sat, 19 Sep 2026 02:50 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Sat, 19 Sep 2026 02:50 PM IST
सार

धौलपुर नगर परिषद में ऐसा सियासी समीकरण बना कि 60 वार्डों में 27 सीट जीतने वाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद चेयरमैन की कुर्सी से बाहर हो गई। भाजपा के गिरिश गर्ग निर्विरोध चेयरमैन चुने गए, जबकि उन्होंने पार्षद का चुनाव भी नहीं लड़ा था।

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Dholpur Civic Polls: BJP’s ‘Hybrid Chairperson’ Wins Unopposed Without Contesting Ward Election
गिरिश गर्ग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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धौलपुर नगर परिषद में बोर्ड गठन के साथ ही एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने निकाय चुनाव के बाद बनने वाले सत्ता समीकरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा के गिरिश गर्ग शुक्रवार को नगर परिषद के चेयरमैन पद की शपथ ले चुके हैं। खास बात यह है कि उन्होंने न तो पार्षद का चुनाव लड़ा और न ही चेयरमैन पद के लिए किसी प्रतिद्वंद्वी का सामना किया।

चेयरमैन पद के लिए सात नामांकन दाखिल हुए थे। इनमें से छह प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए। इसके बाद गिरिश गर्ग निर्विरोध निर्वाचित हो गए।

यह भी पढें- जयपुर: मेयर पद के लिए सुनील कोठारी के नाम पर भाजपा की मुहर, आज दाखिल करेंगे नामांकन

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27 सीट जीतकर भी कांग्रेस के हाथ खाली

धौलपुर नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। चुनाव में कांग्रेस ने 27 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 11, निर्दलीयों को 19 और बसपा को तीन सीटें मिलीं। चेयरमैन बनाने के लिए 31 पार्षदों का समर्थन जरूरी था। यानी कांग्रेस बहुमत से महज चार सीट दूर थी और सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई थी। इसके बावजूद चेयरमैन की कुर्सी भाजपा के खाते में चली गई।

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इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की रणनीति भी सवालों के घेरे में है। पार्टी ने चेयरमैन चुनाव के लिए किसी प्रत्याशी को आधिकारिक पार्टी सिंबल नहीं दिया।

कांग्रेस के पार्षद ने लगाया बड़ा आरोप

कांग्रेस पार्षद सत्यदेव कसाना ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वार्ड 59 से निर्वाचित कसाना ने कहा कि पार्टी ने किसी भी प्रत्याशी को चेयरमैन चुनाव लड़ने के लिए सिंबल नहीं दिया। उन्होंने खुद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था।

कसाना का आरोप है कि कांग्रेस ने अपने जीते हुए पार्षदों को ही राजनीतिक रूप से कमजोर कर दिया। उन्होंने पार्टी पर अपने विजयी पार्षदों को ‘बेचने’ तक का आरोप लगाया है। यह आरोप उनका है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस विधायक संजय जाटव और जिला कांग्रेस अध्यक्ष से इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

भाजपा का चेयरमैन, लेकिन पार्षद नहीं

भाजपा के धौलपुर जिला अध्यक्ष राजवीर राजावत ने गिरिश गर्ग को भाजपा का ‘हाइब्रिड चेयरमैन’ बताया। उनके मुताबिक गर्ग ने पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन अब सरकार उन्हें छह महीने के भीतर पार्षद मनोनीत कर सकती है। गिरिश गर्ग कारोबारी हैं और 12वीं तक पढ़े हैं। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी के तौर पर भी बताया जाता है।

जिस नियम ने बदला चेयरमैन का रास्ता

धौलपुर का मामला इसलिए भी खास है क्योंकि राजस्थान में ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत कोई व्यक्ति पार्षद का चुनाव लड़े बिना भी निकाय प्रमुख बन सकता है और बाद में निर्धारित अवधि में पार्षद के रूप में मनोनीत किया जा सकता है। यह प्रावधान 2019 में तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के दौरान लागू हुआ था।

 

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