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जयपुर: मेयर के नाम पर भाजपा में क्यों नहीं बन रही सहमति? सुनील कोठारी के पर्चे से बढ़ी हलचल

Sat, 19 Sep 2026 11:08 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Sat, 19 Sep 2026 11:08 AM IST
सार

जयपुर नगर निगम के मेयर पद को लेकर भाजपा में अब तक अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। भाजपा के पास 78 पार्षदों का बहुमत है, लेकिन क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते पार्टी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं कर पाई है। नामांकन की आज अंतिम तारीख है।

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Jaipur Mayor Race Uncertain, BJP Faces Cross-Voting Concerns Despite 78 Councillors
जयपुर ,नगर निगम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जयपुर नगर निगम के मेयर पद को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रहा मंथन अब तक खत्म नहीं हुआ है। नगर निगम में भाजपा के 78 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के 57 पार्षद हैं। भाजपा के पास बहुमत होने के बावजूद मेयर पद के लिए नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। पार्टी के सामने पार्षदों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग की आशंका से निपटने की चुनौती भी है। मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल करने की आज अंतिम तारीख है और उम्मीदवार दोपहर 3 बजे तक पर्चा दाखिल कर सकेंगे।

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सुनील कोठारी के नाम से पर्चा लिए जाने की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, जयपुर में अब तक तीन नामांकन पत्र लिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि निर्वाचन अधिकारी नामांकन पत्र लेने वाले लोगों के नाम को लेकर गोपनीयता बरत रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि भाजपा की ओर से सुनील कोठारी के नाम से नामांकन पत्र लिया गया है। इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या पार्टी के भीतर सुनील कोठारी के नाम पर सहमति बन रही है। सुनील कोठारी भाजपा के पार्षद हैं और उनके नाम से नामांकन पत्र लिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद उनकी दावेदारी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

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मेयर की दौड़ में अब पांच नाम

भाजपा के मेयर पद की दौड़ में पहले करीब 12 नाम चर्चा में बताए जा रहे थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर पांच रह गई है। इनमें सुनील कोठारी, पुनीत करनावत, विमल अग्रवाल, शैलेंद्र भार्गव और विजय अग्रवाल के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

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नामांकन पत्र सुनील कोठारी के नाम से लिए जाने की चर्चा के बाद बाकी दावेदारों के बीच भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर किसी नाम की घोषणा नहीं की गई है।

विधायकों से लेकर संगठन तक की राय अहम

भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के सभी प्रमुख राजनीतिक और संगठनात्मक पक्षों को एक राय पर लाने की है। जयपुर के झोटवाड़ा, विद्याधर नगर, मालवीय नगर, सिविल लाइंस और हवामहल विधानसभा क्षेत्रों के विधायक भाजपा से हैं। ऐसे में मेयर के चयन में इन विधायकों की राय को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा जयपुर से मुख्यमंत्री होने के कारण मुख्यमंत्री की राय भी अहम मानी जा रही है। जयपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रदेश स्तर का कार्यालय होने के कारण मेयर के चयन को लेकर संघ की राय की भी चर्चा है।

78 पार्षदों को एक नाम पर सहमत कराने की चुनौती

ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने अलग-अलग स्तरों पर रायशुमारी करने के साथ ही अपने 78 पार्षदों को एक नाम पर सहमत कराने की चुनौती है। बहुमत के बावजूद पार्टी को यह सुनिश्चित करना होगा कि मेयर चुनाव के दौरान उसके पार्षद एकजुट रहें।
नामांकन प्रक्रिया के बाद नामांकन पत्रों की जांच 21 सितंबर को होगी। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 22 सितंबर है, जबकि मेयर पद के लिए मतदान 25 सितंबर को प्रस्तावित है।

कांग्रेस भी दाखिल करेगी नामांकन, समर्थन का खुला ऑफर

दूसरी ओर कांग्रेस के पास 57 पार्षद हैं। बहुमत नहीं होने के बावजूद कांग्रेस मेयर पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करने जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि वह अपने दम पर मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है, लेकिन जिसे समर्थन की आवश्यकता होगी, वह कांग्रेस से संपर्क कर सकता है। कांग्रेस ने बिना शर्त समर्थन देने की बात कही है। ऐसे में मेयर चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों के बीच पार्षदों को अपने पक्ष में रखने की कवायद तेज हो गई है।

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