फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   tata sons dispute mehli mistry tedt legal costs

टाटा संस विवाद में नया पेच: 5,000 करोड़ वाले ट्रस्ट ने कानूनी खर्च से किया किनारा, विवाद क्यों?

Sun, 20 Sep 2026 02:24 AM IST
राकेश कुमार बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 20 Sep 2026 02:24 AM IST
सार

टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने टाटा संस विवाद से जुड़े किसी भी कानूनी खर्च का भुगतान करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि टीईडीटी टाटा संस का शेयरधारक नहीं है और इसलिए वह इस विवाद से अलग है। यह आपत्ति चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस बोर्ड के बीच बढ़े मतभेद के बीच सामने आई है। इसी दौरान टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर भी ट्रस्ट्स और कंपनी के बीच अलग मतभेद सामने आए हैं।
 

विज्ञापन
tata sons dispute mehli mistry tedt legal costs
मेहली मेस्त्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (टीईडीटी) के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने साफ कर दिया है कि ट्रस्ट टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद से जुड़े किसी भी कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा। टीईडीटी के कोष का अनुमान करीब 5,000 करोड़ रुपये बताया गया है। मेहली ने टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा को ईमेल भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसकी प्रति टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा और टीईडीटी के दूसरे ट्रस्टी जेएन मिस्त्री को भी भेजी गई है।
विज्ञापन


मेहली ने कहा कि ट्रस्टी, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चल रहा मुकदमा पिछले 150 वर्षों में अभूतपूर्व है। उन्होंने विवाद में शामिल लोगों के अनुभव या रवैये पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए टीईडीटी के रुख को स्पष्ट किया। उनका कहना है कि टीईडीटी टाटा संस का शेयरधारक नहीं है और इसलिए इन विवादों से अलग है।
विज्ञापन


क्या अभी टीईडीटी का पैसा इस विवाद में खर्च हो रहा है?
मेहली मिस्त्री के ईमेल में यह नहीं कहा गया है कि टीईडीटी का पैसा फिलहाल इस विवाद से जुड़े कानूनी खर्च में इस्तेमाल किया जा रहा है। ईमेल में ऐसा भी नहीं कहा गया है कि इस तरह के खर्च का कोई प्रस्ताव सामने आया है। उनकी आपत्ति इस आशंका पर आधारित है कि टीईडीटी से भविष्य में ऐसे कानूनी खर्च उठाने को कहा जा सकता है। मेहली ने मांग की है कि उनका ईमेल 20 नवंबर 2026 को होने वाली टीईडीटी बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की अगली बैठक में रखा जाए और रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को टाटा संस बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। इसके बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने उनके फैसले का सम्मान करते हुए नए चेयरमैन के चयन के लिए चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। लेकिन 17 सितंबर को टाटा संस बोर्ड ने 4:1 के मतदान से चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी। नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया।

टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी इस विवाद में क्यों अहम?
विवाद में टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी भी अहम है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी इक्विटी शेयर पूंजी है। दो प्रमुख ट्रस्टों में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास 27.98 फीसदी और सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास 23.56 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 51.54 फीसदी है। बाकी हिस्सेदारी अन्य संबद्ध टाटा ट्रस्ट्स के पास है। टीईडीटी, सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़ा एक संबद्ध ट्रस्ट है, लेकिन मेहली ने स्पष्ट किया है कि टीईडीटी खुद टाटा संस का शेयरधारक नहीं है।


यह भी पढ़ें: महंगाई पर अमेरिकी फेड का बड़ा फैसला: भारत पर क्या असर पड़ेगा? अब अक्तूबर में आरबीआई की होगी अग्निपरीक्षा

क्या टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर भी अलग विवाद है?
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के मुद्दे के साथ टाटा संस के भविष्य के स्वामित्व को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। टाटा ट्रस्ट्स ने 17 सितंबर को कहा था कि उसने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं दी है। ट्रस्ट्स ने कहा कि लिस्टिंग के अलावा दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए और फैसला लेने से पहले सभी उपलब्ध विकल्पों की जांच और समीक्षा होनी चाहिए। ट्रस्ट्स ने टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध कंपनी बनाए रखने की अपनी स्थिति दोहराई और उसकी धर्मार्थ बहुमत हिस्सेदारी की भूमिका का भी उल्लेख किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed