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अलवर: तीन स्वास्थ्यकर्मियों ने खाली पेट लगवाया कोरोना का टीका, तबीयत बिगड़ी

देशभर में आज यानी 16 तारीख से कोरोना वैक्सीन लगाए जाने की शुरुआत की जा चुकी है। सबसे पहले फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को टीके लगाए जा रहे हैं। राजस्थान के अलवर जिले में टीकाकरण की शुरुआत शनिवार सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर हुई। यहां सबसे पहले राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय के पीएमओ डॉ. सुनील चौहान को वैक्सीन लगाई गई। इसके बाद दूसरे स्वास्थ कर्मियों का वैक्सीनेशन हुआ।

तीन हेल्थ वर्कर्स की बिगड़ी तबीयत 
जिले में तीन हेल्थ वर्कर्स की टीका लगवाने के बाद तबीयत बिगड़ गई। इनमें से एक की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी और उसे चक्कर आने लगे। डॉक्टर का कहना है कि उसने खाली पेट वैक्सीन लगवा ली, इसलिए उसे चक्कर आए। डॉक्टर ने कहा कि कई लोगों को चक्कर आ जाते हैं, इसमें कोई डरने की बात नहीं है और अब तीनों शख्स पूरी तरह से ठीक हैं।

167 केंद्रों पर किया गया वैक्सीनेशन
जानकारी के मुताबिक, राजस्थान में 167 केंद्रों पर वैक्सीनेशन किया जा रहा है। राजधानी में 21 वैक्सीनेशन सेंटर्स पर टीके लगाए गए। यहां पहला टीका एसएमएस अस्पताल के मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी को दोपहर 12:45 बजे लगा। 

पूरी तरह से सुरक्षित हैं दोनों वैक्सीन
जयपुर में चार चिकित्सकों को सबसे पहले टीका लगाया गया। इनमें एसएमएस के डॉ. सुधीर भंडारी, जयपुरिया हॉस्पिटल के डॉ. इज मुंजाल, डॉ. तरुण पाटनी और जयपुर हॉस्पिटल में डॉ. जी एल शर्मा शामिल हैं। वैक्सीन लगने के बाद डॉ. सुधीर भंडारी ने कहा कि आज देश के लिए बहुत खुशी की दिन है। 10 महीने बाद आज हम वैक्सीनेशन करने जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को वैक्सीन को लेकर कंफ्यूज होने की जरूरत नहीं है। दोनों ही वैक्सीन का साइंटिफिकेशन एक जैसा है। ये दोनों ही टीके पूरी तरह से कारगर और सुरक्षित हैं। 

10 दिनों तक चलेगा पहला चरण
बता दें, सरकार ने टीकाकरण के लिए वोटर लिस्ट की मदद ली थी। जिन लोगों को वैक्सीनेशन के लिए चुना गया था, उन्हें माेबाइल पर मैसेज के जरिये जानकारी दे दी गई थी। पहले चरण का टीकाकरण 10 दिनों तक चलेगा। इसमें 16, 18, 19, 22, 23, 25, 27, 29, 30 और 31 जनवरी को ही वैक्सीनेशन होगा। पहला चरण पूरा होने के बाद केंद्र सरकार से निर्देश मिलने पर प्रदेश में वैक्सीनेशन सेंटर्स की संख्या को भी बढ़ाया जाएगा।


 
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राजस्थान में कोरोना के टीके से बिगड़ी स्वास्थ्यकर्मी की तबीयत राजस्थान में कोरोना के टीके से बिगड़ी स्वास्थ्यकर्मी की तबीयत

देश में 28 बार फैला बर्ड फ्लू, लेकिन राजस्थान में पहली बार दस्तक, अब तक 522 पक्षियों की मौत

कोरोना महामारी के साथ-साथ अब देश में बर्ड फ्लू का खौफ पसरने लगा है। अब तक राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केरल में पक्षियों की मौत के मामले सामने आए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि देश में पिछले नौ साल के दौरान अब तक 28 बार बर्ड फ्लू फैल चुका है, लेकिन राजस्थान में इस खौफनाक वायरस ने पहली बार दस्तक दी है। इसके चलते राज्य में अब तक 522 पक्षियों की मौत भी हो चुकी है, जिनमें 250 कौओं के अलावा कबूतर, कोयल, बत्तख, किंगफिशर और मेगपाई आदि पक्षी शामिल हैं। 


राजस्थान में बर्ड फ्लू पहली बार
बता दें कि देश में बर्ड फ्लू का पहला मामला साल 2006 के दौरान सामने आया था। तब से अब तक देश में कुल 28 बार बर्ड फ्लू फैल चुका है, जिससे अलग-अलग राज्यों में कुल 74 लाख 30 हजार पक्षियों की मौत हो चुकी है। हालांकि, राजस्थान में पहली बार बर्ड फ्लू ने दस्तक दी है। ऐसे में प्रशासन मुस्तैद हो गया है। साथ ही, चिड़ियाघर में भी एहतियात बरती जा रही है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने चिड़ियाघर में पक्षियों के पिंजरों में दवा का छिड़काव कराया। साथ ही, विजिटर्स ट्रैक पर भी दवा का छिड़काव कराने की बात कही जा रही है।




मेगपाई पक्षी ने भी गंवाई जान
गौरतलब है कि बर्ड फ्लू का असर कौओं और बत्तख के अलावा दूसरे पक्षियों पर भी दिखने लगा है। दरअसल, इस खौफनाक वायरस के चलते सकतपुरा में मेगपाई पक्षी ने भी दम तोड़ दिया। एक वन्य जीव प्रेमी ने बताया कि यह पक्षी अचानक गिर गया था और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।

वन विभाग ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
बता दें कि बर्ड फ्लू के संक्रमण को देखते हुए वन मंडल कोटा के कर्मचारियों को भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें वन क्षेत्रों के जलाशयों पर नियमित रूप से गश्त करने और किसी पक्षी के बीमार दिखने या उसकी मौत होने पर तुरंत सूचना देने के लिए कहा गया है। साथ ही, मंडल स्तर पर एक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिसका हेल्पलाइन नंबर 9829267941 है। इस नंबर पर पक्षियों से संबंधित सूचनाएं दी जा सकती हैं।
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