अलवर के सिलीसेढ़ क्षेत्र में बोरिंग किए जाने को लेकर विरोध शुरू हो गया है। चालीस गांवों के हजारों किसान इस योजना को निरस्त करने की मांग को लेकर आंदोलन पर उतर आए हैं। इसी के तहत गुरुवार को 'हल्ला बोल' अभियान के तहत किसान अलवर पहुंचे।
सिलीसेढ़ परियोजना को लेकर किसानों में गहरा रोष देखने को मिला। 40 गांवों के सैकड़ों किसानों ने करीब 500 ट्रैक्टरों के काफिले के साथ अलवर शहर की ओर कूच किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें अहिंसा सर्किल पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। सुरक्षा के मद्देनजर प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं, बाला किला–प्रताप चौकी मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। प्रदर्शन के लिए किसानों ने 4,000 लोगों के भोजन की व्यवस्था की, जिससे यह संदेश गया कि आंदोलन लंबे समय तक चल सकता है। किसानों का कहना है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो पूरा गांव जेल जाने को तैयार है।
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प्रदर्शनकारी किसानों का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश महासचिव भूपत सिंह बालियान ने बताया कि प्रशासन से वार्ता हुई, जिसमें अतिरिक्त जिला कलेक्टर योगेश डागुर से मुलाकात की गई, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकल सका है। भूपत सिंह ने कहा कि यह परियोजना पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) से जुड़ी है। "जब अभी तक पांचाल तक ERCP का पानी नहीं पहुंचा है, तो फिर सिलीसेढ़ झील का पानी क्यों निकाला जा रहा है?" उन्होंने आरोप लगाया कि इस बोरिंग से सिलीसेढ़ क्षेत्र का जलस्तर खत्म हो जाएगा और स्थानीय लोगों को पीने तक का पानी नहीं मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री की ओर से स्पष्ट और लिखित आदेश नहीं मिलता कि यह बोरिंग योजना निरस्त कर दी गई है, तब तक किसान आंदोलन स्थल पर डटे रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल एक बजट घोषणा है, जिसे सरकार वापस भी ले सकती है। जिला प्रशासन ने किसानों को आश्वस्त किया है कि उनकी मांगें मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी जाएंगी। लेकिन, किसानों ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री के पत्र के आने के बाद भी धरना सिलीसेढ़ झील के पास जारी रहेगा। जब तक बोरिंग योजना को रद्द नहीं किया जाता, किसान मैदान नहीं छोड़ेंगे।