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हल्लाबोल: महंगाई पर राजद का भाजपा सरकार पर हमला, तेजस्वी बोले- लोग भूख से मर रहे हैं और सरकार बेफिक्र

महंगाई और तेल की बढ़ी कीमतों के खिलाफ आज विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोधी दलों के नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। बिहार की राजधानी पटना में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने देश में महंगाई और तेल की बढ़ी कीमतों को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। तेजस्वी यादव न कहा कि "महंगाई ने जनता की रीढ़ तोड़ दी, लोग भूख से मर रहे हैं और सरकार बेफिक्र है। उनकी पार्टी बिहार के सभी ब्लॉकों में महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। इस दौरान तेजस्वी ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए जनविरोधी बताया। तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर सरकार पर तंज कसा। 





बंगाल में टीएमसी ने खोला मोर्चा
पश्चिम बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का विरोध किया। राज्य टीएमसी महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि केंद्र सरकार को जनविरोधी नीतियों में बदलाव करना चाहिए। बंगाल के अंदर और बाहर विरोध जारी रहेगा।
 

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने केंद्र की भाजपा सरकार को "जनविरोधी" बताया और कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ जल्द ही सड़कों पर उतरेगी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जयपुर में महंगाई के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। उन्होंने केंद्र सरकार से महंगाई पर लगाम लगाने और ईंधन दरों में बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की। बता दें कि देश में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के पार हो गई है। वहीं डीजल के दाम में भी भारी उछाल हुआ है। वहीं गैस की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। महंगाई की वजह से आम लोग परेशान हैं। 
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बिहार: मुख्यमंत्री ने अपने पूर्व संसदीय क्षेत्र बाढ़ के लोगों को दी सौगात, पुराने दिनों की याद कर भावुक हुए नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पूर्व संसदीय क्षेत्र बाढ़ में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत डाकबंगला परिसर में नवनिर्मित सामुदायिक भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि सभी को पता है कि बाढ़ से हमारा विशेष लगाव है। यहां के लोगों से मिलने और समस्याएं दूर करने के लिए एक दिन में 12 किलोमीटर पैदल चलते थे। सामुदायिक भवन का वर्चुअल उद्धाटान करते हुए नीतीश कुमार भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि हम बाढ़ से 5 बार सांसद रहे हैं, लेकिन परिसीमन के कारण बाढ़ संसदीय क्षेत्र कट जाने से काफी दुखी हूं। यहां की जनता का हमारे ऊपर विशेष प्यार और स्नेह है।

सामुदायिक भवन के निर्माण से लोगों को मिलेगी सुविधा
नीतीश कुमार ने कहा कि हमने डाकबंगला परिसर का निरीक्षण किया था और उसी समय निर्णय किया था कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत यहां सामुदायिक भवन का निर्माण होगा। आज इस नवनिर्मित सामुदायिक भवन का उद्घाटन हो गया। सामुदायिक भवन के निर्माण होने से यहां के लोगों को काफी सुविधा होगी।  यहां सांस्कृतिक, वैवाहिक कार्यक्रमों के आयोजन में सहूलियत होगी। साथ ही लोग रात्रि विश्राम भी कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसी परिसर में बहुद्देशीय सभागार भवन का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसे जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा। 

आने वाले समय में क्षेत्र में होंगे और विकास कार्य- नीतीश कुमार
 नीतीश कुमार ने कहा कि यहां से पहली बार सांसद रहते हुए हम केंद्र में राज्य मंत्री बने। बाद में अटल जी की सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। केंद्र में मंत्री रहते हुए हम इस क्षेत्र में घूमते थे। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में पुल-पुलियों और सड़कों का निर्माण कराया गया है। बाढ़ में भी कई सड़कों और पुलों का निर्माण किया गया है। अब लोगों को पैदल चलना नहीं पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरनौत से विधायक रहते हुए हमने टाल क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की शुरुआत कराई थी। बाद में हमलोगों ने टाल क्षेत्र के विकास को लेकर कई योजनाएं बनाई, जिस पर काम चल रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ में विकास के कई कार्य किए गए हैं। कोरोना खत्म होने पर हम फिर से क्षेत्र में आएंगे और जो भी विकास कार्य हुए हैं उनका निरीक्षण करेंगे। नीतीश कुमार ने कहा कि हमलोगों ने बाढ़ में शुरू से कई कार्य किए हैं। पहले स्थिति और अब की स्थिति में काफी बदलाव है। 
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बिहार: आईएएस अधिकारी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, थाने में चार घंटे करना पड़ा इंतजार

बिहार के प्रशासनिक महकमे में शनिवार को उस समय खलबली मच गई जब एक असंतुष्ट आईएएस अधिकारी ने शनिवार को एक थाने में शिकायत देकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं कई शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

वर्ष 1987 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी सुधीर कुमार दोपहर में गर्दनीबाग थाने में पहुंचे। लेकिन उन्हें अपनी लिखित शिकायत की पावती लेने के लिए चार घंटे का इंतजार करना पड़ा।

वर्तमान में राज्य राजस्व बोर्ड के सदस्य नौकरशाह ने संवाददाताओं से कहा, ‘मामला फर्जीवाड़े से जुड़ा हुआ है। शिकायत में जिन लोगों के नाम हैं उनमें शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक के लोग शामिल हैं। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा।’ बहरहाल, जब उनसे बार-बार पूछा गया कि क्या प्राथमिकी में मुख्यमंत्री का नाम है तो उन्होंने कहा-‘हां’।

उन्होंने एक और अधिकारी का नाम शिकायत में जिक्र करने की बात स्वीकार की और वह हैं पटना के पूर्व एसएसपी अधिकारी मनु महाराज। भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी महाराज डीआईजी रैंक में पदोन्नत हो गए हैं और वर्तमान में कहीं और पदस्थापित हैं।

आईएएस अधिकारी अगले वर्ष की शुरुआत में सेवानिवृत्त होने वाले हैं और नौकरी भर्ती घोटाला में नाम आने के बाद उन्हें तीन वर्ष जेल की सजा काटनी पड़ी थी। पिछले वर्ष अक्तूबर में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें जमानत दी थी।

उन्होंने अपनी शिकायत का ब्यौरा देने से इनकार कर दिया और कहा, ‘यह दस्तावेजों के फर्जीवाड़े से जुड़ा हुआ है’ और जब पूछा गया कि उन्होंने लगभग कितने लोगों का नाम शिकायत में लिया है तो उन्होंने कहा, ‘मैं गिनती नहीं करता।’

साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘बिहार में सुशासन देखिए कि एक आईएएस अधिकारी को चार घंटे तक इंतजार कराया गया। प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। मुझे महज मेरे शिकायत की पावती दी गई। मार्च में जब मैं शास्त्री नगर थाने में इन्हीं दस्तावेजों के साथ गया था तो यही बात हुई थी।’

उन्होंने कहा, ‘पुरानी शिकायत की प्रगति के बारे में सूचना जुटाने का प्रयास भी विफल हुआ जिसमें आरटीआई भी शामिल है।’ गर्दनीबाग के एसएचओ अरूण कुमार ने कहा, ‘शिकायत मिली है और सर (आईएएस अधिकारी) को पावती दी गई है। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।’

उन्होंने यह पुष्टि करने से इनकार कर दिया कि शिकायत में मुख्यमंत्री का नाम शामिल है। उन्होंने कहा, ‘यह जांच का विषय है। हम ब्यौरा नहीं दे सकते।’ विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने आईएएस अधिकारी के आरोपों की गहन जांच की मांग की और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दिए जाने की भी मांग की।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता ने संवाददाताओं से कहा, ‘मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्हें मामले की गहन जांच से नहीं बचना चाहिए जब तक कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।’

यादव ने कहा, ‘नीतीश कुमार मुझे डांटते थे कि मैं स्पष्टीकरण नहीं दे रहा हूं। अब उनकी बारी है।’ वह चार वर्ष पहले की घटना का जिक्र कर रहे थे जब उपमुख्यमंत्री रहते उनका नाम धनशोधन के एक मामले में आया था। इस घटना के कारण नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़ लिया था और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राजग में फिर से शामिल हो गए थे।
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बिहार: यूपी विधानसभा चुनाव 2022 पर पूर्व सीएम लालू की नजर, शरद पवार ने की मुलाकात

आगामी वर्ष में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों के लिए बुधवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने मुलाकात की। यह मुलाकात मीसा भारती के सरकारी आवास पर हुई। इस मुलाकात में समाजवादी नेता रामगोपाल यादव एवं कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह भी मौजूद रहे। 
 
जमानत पर जेल से बाहर निकलने के बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने राजनीतिक गतिविधियां और तेज कर दी हैं। चारों वरिष्ठ नेताओं के बीच में हुई मुलाकात की जानकारी बाहर नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि एक दिन पहले राकांपा की ओर से यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही गई थी। इस मुलाकात को चुनाव से ही जोड़कर देखा जा रहा है।

इस मुलाकात की तस्वीर मीसा भारती ने खुद ट्वीट की है। तस्वीर में मीसा भी दिख रही हैं। मुलाकात के बारे में उन्होंने बताया है कि शरद पवार राजद प्रमुख के स्वास्थ्य की जानकारी लेने आए थे।
 
2022 में होने हैं उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल 2022 को विधानसभा चुनाव होना है। अभी प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है। शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों पार्टियों ने हाथ मिला लिया है। राकांपा का कहना है कि यूपी का हाल काफी बुरा है।

उन्होंने योगी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार राज्य की बेहतरी के लिए काम नहीं कर रही है। जनता सरकार से परेशान है। पार्टी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में एनसीपी को युवाओं, किसानों और महिलाओं की आवाज उठानी होगी।

वहीं राकांपा का कहना है कि यूपी में भाजपा सरकार लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर रही है। अभी राजद सुप्रीमो अपनी बेटी व राज्यसभा सदस्य मीसा भारतीय के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में रह रहे हैं। इसके साथ ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद चुनावी रणनीतियों के लिए और भी अधिक सक्रिय हो गए हैं। 
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पूर्व सीएम लालू यादव ने शरद पवार, रामगोपाल और अखिलेश से दिल्ली में की मुलाकात पूर्व सीएम लालू यादव ने शरद पवार, रामगोपाल और अखिलेश से दिल्ली में की मुलाकात

आदेश: बिहार सरकार ने आईएएस और आईपीएस से मांगा जवाब, कितने अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे

बिहार: सोमवार से शुरू होगा विधानसभा का मानसून सत्र, हंगामेदार रहने की संभावना

बिहार विधानसभा का मानसून सत्र कल यानी सोमवार से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र के हंगामेदार होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि विपक्षी दलों ने ईंधन, रसोई गैस, उर्वरक और खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है। वहीं विधानसभा द्वारा पिछले बजट सत्र में पारित बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक, 2021 को लेकर भी इस सत्र में एक बार फिर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी हो सकती है।

बता दें कि इस साल 23 मार्च को उस समय विधानसभा में अराजकता फैल गई जब विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा को उनकी कुर्सी लेने से रोकने की कोशिश करने वाले अनियंत्रित विपक्षी सदस्यों को बाहर निकालने में मार्शलों की सहायता के लिए पुलिस को विधानसभा के अंदर बुलाया गया। इस विवाद की जड़ विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021 था, जिसे नीतीश सरकार ने राज्य की तेजी से जटिल सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए अपनी पुलिस को और अधिक मजबूती देने के लिए पेश किया था।

बिना टीका लगवाए विधानसभा के मानसून सत्र में हिस्सा नहीं ले सकेंगे विधायक
वहीं बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने साफ कर दिया है कि कोविड का टीका नहीं लगवाने वाले विधायकों को मानसून सत्र में सदन की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। राज्य में विधानसभा का सत्र 26 जुलाई से शुरू हो रहा है और 30 जुलाई तक चलेगा। विधानसभा अध्यक्ष ने मीडिया को बताया, ऐसे विधायकों को मानसून सत्र में सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिन्होंने कोविड-19 का टीका नहीं लगवाया है। सदन में आने वाले सभी विधायकों के लिए टीकाकरण आवश्यक है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि मेडिकल आधार पर कुछ सदस्यों को छूट दी जा सकती है। ऐसे विधायक जो कोरोना वायरस से संक्रमित होने के साथ स्वस्थ हो चुके हैं और जिन्हे उनके डॉक्टरों ने कुछ समय बाद टीका लगवाने की सलाह दी है, उन्हें प्रवेश की अनुमति होगी। अध्यक्ष ने कहा, उनके अलावा मेडिकल कारणों से टीका नहीं लगवाने वालों को भी सत्र में शामिल होने दिया जाएगा।
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बिहार: प्रेम प्रसंग में लड़के की हत्या, परिजनों ने किया आरोपी के घर के सामने ही अंतिम संस्कार

बिहार के मुजफ्फरपुर में शनिवार को एक शर्मनाक घटना घटी। यहां प्रेम प्रसंग के सिलसिले में ग्रामीणों ने युवक को पेड़ से बांधकर उसके बेहोश होने तक पिटाई की, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने सौरभ कुमार (19) नाम के युवक के साथ इतनी बर्बरता की थी कि उसका गुप्तांग भी काट दिया।

इसके बाद युवक की हत्या से आक्रोशित उसके परिजनों व अन्य लोगों ने शनिवार को आरोपी के घर पर हमला कर दिया और उसके घर के ही सामने युवक का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस का कहना है कि हत्या के मामले में मुख्य आरोपी और तीन अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया है।
 
पुलिस ने कहा कि घटना शुक्रवार रात करीब 11 बजे हुई जब उसी गांव का रहने वाला सौरभ अपनी प्रेमिका के घर में मिला। युवक की इस हरकत से नाराज लड़की के परिजनों ने उसे पेड़ से बांध दिया और लोहे की रॉड से बेरहमी से पिटाई की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद उसे और यातनाएं दी गईं जिससे उसकी मौत हो गई।
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बिहार: जातीय जनगणना पर एनडीए में खटपट, सीएम नीतीश कुमार पक्ष में, मांझी ने भी मिलाया सुर

सांकेतिक तस्वीर....
बिहार सरकार में भाजपा और जदयू भले ही साथ हों लेकिन, कई मामलों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुर में सुर नहीं मिलाते हैं। यही वजह है कि कई मुद्दों पर दोनों के सुर और ताल अलग-अलग हो जाते हैं।

नीतीश कुमार कई मामलों में केंद्र सरकार के निर्णयों का मुखर विरोध करने लगे हैं। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत के मामलों को केंद्र सरकार झुठला रही है जबकि नीतीश कुमार ने कहा है कि तीसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी ना हो इसके लिए इंतजाम किए जा रहे हैं।

जाति आधारित जनगणना का मामला हो या फोन टैपिंग या फिर एनआरसी और सीएए नीतीश ने केंद्र सरकार का समर्थन नहीं किया है। केंद्र सरकार द्वारा जाति आधारित जनगणना नहीं कराये जाने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जाति आधारित जनगणना कराने को लेकर फरवरी 2019 और 2020 में विधानसभा से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया था।

वर्ष 1990 से ही हमलोग इसको लेकर विचार व्यक्त करते रहे हैं। जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए इसको लेकर पहले भी कई बार अपनी बातों को रख चुके हैं। केंद्र सरकार से हम आग्रह करेंगे कि एक बार जाति आधारित जनगणना जरूर करनी चाहिए। नीतीश कुमार ने ये भी कहा कि 2010 में हुई जनगणना की 2013 में रिपोर्ट आई लेकिन उसे प्रकाशित नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि किस इलाके में किस जाति की कितनी संख्या है इसको लेकर एक बार जाति आधारित जनगणना जरूर होनी चाहिए। एससी-एसटी के अलावे गरीब गुरबा को भी इससे लाभ मिल सके और पता चल सके कि उनकी सही मायने में संख्या कितनी है। जब संख्या का पता चलेगा तो उनके कल्याण के लिए ठीक ढंग से काम हो सकेगा। संसद में बताया गया है कि अब जाति आधारित जनगणना नहीं होगी। हम आग्रह करेंगे कि इस पर गौर करें, पहले भी हमने इस पर न सिर्फ बात की है बल्कि इसको लेकर प्रस्ताव भी भेजा है। हमलोगों की इच्छा है कि जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए, यह सबके हित में है।

नई तकनीक का दुरुपयोग
फोन टैपिंग से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जो नई तकनीक आई है उसके एक तरफ लाभ हैं तो दूसरी तरफ उसका दुरुपयोग भी होता है। इस पर निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। केंद्र सरकार ने भी कहा है कि जो गलत चीज है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऑक्सीजन की कमी से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में अचानक ऑक्सीजन की काफी मात्रा में जरूरत पड़ी, उसका हर तरह से समाधान किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी तैयारी की जा रही है कि कोरोना समेत सभी बीमारियों के लिए कभी भी ऑक्सीजन की कमी न हो। सभी अस्पतालों में इसकी पूरी व्यवस्था की जा रही है।

जीतन राम मांझी भी जातीय जनगणना के समर्थन में
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को गया के एक निजी विद्यालय में अपनी पार्टी का छठा स्थापना दिवस मनाया। इस दौरान पार्टी से जुड़े कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। वहीं, जातीय जनगणना पर नीतीश कुमार के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि वर्ष 2017 में जातीय जनगणना की मांग की गई थी। उन्होंने कहा है कि जातीय जनगणना सभी की होनी चाहिए। चाहे वह किसी वर्ग का हो। 

मांझी ने ट्वीट कर कहा कि 'जब देश में सांप, बाघ, बकरी की जनगणना हो सकती है तो फिर जातियों की क्यों नहीं? देश के विकास के लिए जातिगत जनगणना जरूरी है। पता तो लगे कि किसकी कितनी आबादी है और उसे सत्ता में कितनी भागीगारी मिली।'

मांझी ने कहा कि जातीय जनगणना होनी चाहिए लेकिन सभी जातियों की न कि सिर्फ एससी व एसटी की। सवर्ण जाति के गरीबों को भी आरक्षण मिला, लेकिन भेदभाव किया गया है। पहले साढ़े 49 प्रतिशत आरक्षण था, अब संसोधन कर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। अगर जातीय जनगणना नहीं होगी तो घटक दल सड़कों पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण के नाम पर एससी-एसटी को अवरुद्ध किया गया है।
 
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कोरोना से जंग: बिहार हर्ड इम्युनिटी के करीब, 73 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी विकसित

बिहार देश का ऐसा पहला राज्य है जो हर्ड इम्युनिटी के करीब पहुंच गया है। अधिकारियों के मुताबिक, बिहार कोविड-19 के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी की सीमा के करीब पहुंच गया है, क्योंकि यहां 73 फीसदी आबादी के बीच वायरस के खिलाफ या तो पिछले संक्रमण से या टीकाकरण के माध्यम से एंटीबॉडीज विकसित होने की की व्यापक सूचना मिली है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी समाज या समूह में अगर 70 फीसदी तक लोगों ने वैक्सीन ले ली है, तो उसमें संबंधित बीमारी के प्रति हर्ड इम्युनिटी आ जाती है। ऐसे में अब कोरोना की तीसरी लहर अगर बिहार में आती है, तो वह कम घातक होगी और मौतें भी काफी कम होंगी। हालांकि, लोगों को अब भी सावधानी बरतने की जरूरत है। मास्क और दो गज की दूरी का पालन करना होगा।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ पब्लिक हेल्थ के उपाध्यक्ष और पटना एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सीएम सिंह ने कहा कि '73 फीसदी की सेरोपॉजिटिविटी बिहार के लिए एक अच्छा संकेत है। इसका मतलब यह है कि केवल 27 फीसदी लोग अब वायरस के संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील हैं, जिनमें से कुछ महामारी की प्रत्याशित तीसरी लहर के दौरान गंभीर हो सकते हैं।'

डॉ सिंह ने कहा कि '70 -80 फीसदी से अधिक की सेरोपॉजिटिविटी हर्ड इम्युनिटी विकसित करने में मदद करती है। हालांकि, चूंकि वायरस में बहुत तेजी से म्यूटेशन हो रहा है, इसलिए लोगों के फिर से संक्रमित होने की संभावना है और कोविड-19 के उचित व्यवहार का पालन करना जरूरी होगा। पुन: संक्रमण के मामले में, ऐसे 73 फीसदी आबादी में हल्के लक्षण होंगे, जो लोग पहले ही वायरस से संक्रमित हो चुके हैं या टीकाकरण के माध्यम से एंटीबॉडीज विकसित कर ली है।

बिहार के छह जिलों में बक्सर ने 83.8 फीसदी की उच्चतम सेरोपॉजिटिविटी की सूचना दी, इसके बाद मधुबनी में 77.1 फीसदी, अरवल में 73.7 फीसदी, बेगूसराय में 72.7 फीसदी, मुजफ्फरपुर में 65.3 फीसदी और पूर्णिया  में 65 फीसदी है। भारत के 21 राज्यों में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा 14 जून से 6 जुलाई के बीच चौथे सेरोलॉजिकल सर्वे के दौरान 70 फीसदी लोगों का सैंपल लिया गया था। बिहार में राष्ट्रीय औसत 67.6 फीसदी की तुलना में सबसे ज्यादा सेरोपॉजिटिविटी की रिपोर्ट दर्ज की गई है।

बक्सर जिले की सामान्य आबादी के बीच 10 समूहों में लिए गए 400 लोगों के सैंपल में से 335 किसी न किसी स्तर पर कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। इन लोगों में एंडीबॉडीज विकसित हो चुकी है।

हर्ड इम्युनिटी का मतलब
हर्ड इम्युनिटी का मतलब है कि अधिकांश लोगों ने किसी बीमारी के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त कर ली है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग संचरण को रोक सकें। माना जाता है कि पर्याप्त वैक्सीनेशन के बाद उस समाज या समूह में संक्रामक रोग के फैलने की चेन को तोड़ा जा सकता है।

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बिहार: जाति आधारित जनगणना पर सीएम नीतीश ने तोड़ी चुप्पी, बोले- इससे ज्यादा मिलेगा योजनाओं का लाभ

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जाति आधारित जनगणना कराने को एक बार फिर समर्थन किया है। नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने पहले ही सदन में इस पर अपना विचार रख चुके हैं।  फरवरी 2019 और 2020 में जाति आधारित जनगणना के बारे में विधानसभा में सरकार अपनी सोच रख चुकी है। 
 

जाति आधारित जनगणना एक बार जरूर होनी चाहिए- नीतीश कुमार
पटना में सीएनजी बसों को रवाना करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश ने ट्वीट "हम लोगों का मानना है कि जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए। बिहार विधान मंडल ने 18 फरवरी 2019 एवं पुनः 27 फरवरी 2020 को सर्वसम्मति से इस आशय का प्रस्ताव पारित किया था और इस प्रस्ताव को केन्द्र सरकार को भेजा गया था। केन्द्र सरकार को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए।

पिछड़ों की गिनती क्यों नहीं हो सकती- गौस
वहीं प्रदेश जदयू उपाध्यक्ष व बिहार विधान परिषद के सदस्य प्रो. गुलाम गौस ने भी केंद्र सरकार से जातीय जनगणना की उपेक्षा नहीं करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे जनता में गलत संदेश जाएगा। पिछड़ी जातियों में भ्रम की स्थिति पैदा होगी। गौस ने कहा कि अगर देश में किन्नरों की जनगणना हो सकती है तो पिछड़ों की गिनती क्यों नहीं हो सकती है। 

तेजस्वी यादव ने केंद्र पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी राज्य में जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया। तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साघते हुए कहा कि भाजपा को पिछड़े और अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफरत क्यों है। उन्होंने कहा कि जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या पता नहीं चलेगी तब तक उनके फायदे की योजनाएं कैसे बनेगी। 
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बिहार: पटना हाईकोर्ट ने कहा- केंद्रीय सड़क परियोजना के प्रति बिहार सरकार अपना रही है उदासीन रवैया

पटना उच्च न्यायालय ने शनिवार को बिहार सरकार को केंद्र द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित एक सड़क परियोजना के संबंध में उदासीन रवैया प्रदर्शित करने के लिए फटकार लगाई, जिसके लिए राज्य से केवल भूमि अधिग्रहण में अपना समर्थन देने की उम्मीद की गई थी। मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने निराशा के साथ कहा कि 167 मीटर लंबी प्रस्तावित सड़क के लिए एक ईंट नहीं रखी गई है, हालांकि परियोजना, जो बौद्ध पर्यटक सर्किट का एक हिस्सा था, की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा बहुत पहले वर्ष 2015 में की गई थी। 

अदालत ने कहा कि जाहिर है अधिकारी इस मामले पर सो रहे हैं लेकिन सरकार क्या कर रही है। अदालत ने कहा कि उसे इस साल मार्च में मामले का स्वत: संज्ञान लेना पड़ा था जिसमें एनएचएआई के साथ-साथ राज्य सड़क निर्माण विभाग से नवीनतम स्थिति के बारे में हलफनामा मांगा गया था। 

 वहीं जब राज्य सरकार ने जब हलफनामा दायर किया तो इसपर अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों को कवर करने वाली सड़क परियोजना के संबंध में सरकार का उदासीन दृष्टिकोण स्पष्ट था।

मामले की स्थिति से नाखुश अदालत ने राज्य के विकास आयुक्त को भूमि के जल्द अधिग्रहण और प्रभावित पक्षों को मुआवजे के पुरस्कार के लिए सभी हितधारकों की तुरंत बैठक बुलाने का निर्देश दिया ताकि बाद में एनएचएआई निविदाओं  के तहत निर्माण हो सके।
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बिहार: कृषि निर्यात में वृद्धि कर बिहार में किसानों की आमदनी बढ़ाएंगे नीतीश कुमार

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को एग्रीकल्चरल मार्केटिंग के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों व भविष्य की योजनाओं पर कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक में नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में फसलों का उत्पादन एवं उत्पादकता के साथ किसानों की आमदनी भी बढ़ाने का लक्ष्य है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कृषि निर्यात को तेजी से प्रोत्साहित करें।

कृषि निर्यात में वृद्धि होने से किसानों की आमदनी और बढ़ेगी। इसके लिए यहां कृषि बाजार को बेहतर ढंग से व्यवस्थित और विकसित करना होगा। उन्होंने कहा, राज्य में कषि शिक्षा को बढ़ाने के लिए नए विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की स्थापना की गई है। जिससे राज्य के छात्रों में कृषि शिक्षा के प्रति आकर्षण बढ़ा है।
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कार्रवाई: बिहार से लश्कर-ए-मुस्तफा के दो आतंकी गिरफ्तार, जम्मू-कश्मीर में हमले की रच रहे थे साजिश

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में हमले की साजिश रच रहे लश्कर ए मुस्तफा के दो आतंकियों को बिहार से गिरफ्तार किया है। एनआईए ने बताया कि लश्कर-ए-मुस्तफा जैश-ए-मोहम्मद की एक शाखा है। प्रमुख जांच एजेंसी के अधिकारी ने कहा कि आतंकी मोहम्मद अरमान अली(20) और मोहम्मद एहसानुल्लाह(23) दोनों बिहार के सारण के निवासी हैं। ये दोनों मोहाली और अंबाला में अवैध हथियारों और गोला-बारूद की दो अलग-अलग खेपों के परिवहन में शामिल थे। .

अधिकारियों ने कहा कि अरमान अली और एहसानुल्ला को बिहार में गिरफ्तार किया गया था और उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सारण के सामने पेश किया गया था और इसके बाद दोनों को एनआईए विशेष अदालत, जम्मू के समक्ष पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया था। अधिकारी ने बताया कि दोनों आतंकी हथियारों को जम्मू-कश्मीर में LEM के स्व-घोषित कमांडर-इन-चीफ हिदायत उल्लाह मलिक को सप्लाई करते थे।
   
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