जींद। जलेबी चौक पर अस्थायी रूप से संचालित की जा रही नंदीशाला को हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को बुधवार को गोभक्तों के विरोध का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान जेसीबी से नंदीशाला का आधे से ज्यादा हिस्सा तोड़ दिया गया। इसके बाद दंडीस्वामी और गोभक्त जेसीबी के आगे शेड के नीचे बैठ गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। करीब दो घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद गोभक्तों के नहीं मानने पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस ने कार्रवाई रोक दी। बाद में गोभक्तों ने डीसी के नाम पत्र देकर नंदीशाला को हटाने के लिए दो माह का समय मांगा। जलेबी चौक पर सड़कों पर घूम रहे सैंकड़ों गोवंश को कुछ समय पहले अस्थायी तौर पर यहां बनाई गई नंदीशाला में शिफ्ट किया गया था। गोभक्तों का कहना है कि वह बिना प्रशासनिक सहायता के गोवंश की देखभाल कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से इस नंदीशाला को हटाने के निर्देश पहले भी दिए जा चुके हैं। बताया गया कि दो फरवरी को भी प्रशासन ने इसे अवैध रूप से संचालित बताते हुए हटाने के निर्देश दिए थे।
जेसीबी के आगे बैठ गए गोभक्त, दंडीस्वामी रो पड़े बुधवार को प्रशासनिक टीम पुलिस बल के साथ नंदीशाला हटाने पहुंची। कार्रवाई के लिए जेसीबी चलनी शुरू हुई और नंदीशाला का आधे से अधिक हिस्सा तोड़ दिया गया। कार्रवाई के दौरान दंडीस्वामी और अन्य गोभक्त शेड के नीचे बैठ गए और जेसीबी को आगे बढ़ने से रोक दिया। दंडीस्वामी इस कार्रवाई को देखकर भावुक हो गए और रोने लगे। गोभक्तों ने कहा कि उन्होंने सड़कों पर बेसहारा घूम रहे गोवंश को यहां लाकर उनकी सेवा शुरू की थी।
स्थिति को देखते हुए मौके पर मौजूद पुलिस ने गोभक्तों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कार्रवाई रोकने की मांग पर अड़े रहे। मौके पर करीब दर्जनभर पुलिसकर्मी मौजूद रहे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर पीडी एनएचआई और लोक निर्माण विभाग के एसडीओ विनोद भी कार्रवाई के दौरान मौजूद रहे।
आठ माह पहले भी हुआ था विवाद, अब दो माह का मांगा समय गोभक्तों के अनुसार, करीब आठ माह पहले भी प्रशासन ने नंदीशाला हटाने का प्रयास किया था। उस समय भी विरोध के चलते विवाद की स्थिति बन गई थी और प्रशासन को कार्रवाई रोकनी पड़ी थी। मंगलवार को एक बार फिर कार्रवाई शुरू होने के बाद दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बनी।
बाद में गोभक्तों की ओर से डीसी के नाम पत्र दिया गया। इसमें नंदीशाला को हटाने के लिए दो माह का समय मांगा गया। गोभक्तों ने कहा कि इस अवधि में गोवंश को दूसरी जगह शिफ्ट करने की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद प्रशासन ने फिलहाल कार्रवाई रोक दी। करीब दो घंटे चली कार्रवाई के दौरान नंदीशाला का आधे से अधिक हिस्सा टूट चुका था। अब आगामी दो माह में नंदीशाला को हटाने को लेकर प्रशासन और गोभक्तों के बीच सहमति के आधार पर आगे की कार्रवाई होने की संभावना है।
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