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Hindi News ›   India News ›   Gaganyaan mission Delay: Astronaut Angad Pratap Says Delays Should Be Taken With a ‘Pinch of Salt’

इसरो: क्या गगनयान मिशन में देरी होना असामान्य, तैयारी और लक्ष्य पर क्या बोले अंतरिक्ष यात्री अंगद प्रताप?

Wed, 09 Sep 2026 09:55 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 09 Sep 2026 09:55 PM IST
सार

गगनयान मिशन में देरी की चर्चा के बीच अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप ने कहा है कि मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम में देरी होना असामान्य नहीं है। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने और मिशन की सफलता को प्राथमिकता देने की अपील की। इसरो के अनुसार गगनयान 2027 के लिए नियोजित है और उससे पहले तीन मानवरहित मिशन होने हैं। लेकिन आखिर लॉन्च में देरी से ज्यादा मिशन की सफलता क्यों अहम है? आइए, विस्तार से सबकुछ जानते हैं...

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Gaganyaan mission Delay: Astronaut Angad Pratap Says Delays Should Be Taken With a ‘Pinch of Salt’
अंतरिक्ष यात्री अंगद प्रताप ने गगनयान मिशन की देरी पर क्या बताया? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान को लेकर लॉन्च में देरी की चर्चा के बीच अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप ने लोगों से धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे बड़े कार्यक्रम में देरी होना सामान्य बात है और इसे चुटकी भर नमक के साथ यानी बहुत गंभीर चिंता के तौर पर नहीं लेना चाहिए। उनका कहना है कि मिशन कुछ महीने या एक-दो साल देर से भी हो सकता है, लेकिन जब उड़ान हो तो उसकी सफलता सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है।

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क्या गगनयान मिशन में देरी होना असामान्य है?

अंगद प्रताप ने कहा कि अंतरिक्ष यात्री बनने के बाद यह समझना पड़ता है कि खासकर प्रोटोटाइप कार्यक्रमों में देरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वे अंतरिक्ष यात्री इस सोच के साथ नहीं चुने गए थे कि वाहन और रॉकेट पहले से तैयार हैं और उन्हें पहले से तय तारीख पर सीधे अंतरिक्ष में भेज दिया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन मुख्यालय की ओर से तय समयसीमा के अनुसार सभी अंतरिक्ष यात्री लगातार प्रशिक्षण और तैयारी कर रहे हैं। प्रताप ने कहा कि भारत का कार्यक्रम केवल अंतरिक्ष में उड़ान भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी बड़ी मात्रा में काम पूरा किया जाना है।

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क्या मिशन की तारीख से ज्यादा उसकी सफलता जरूरी है?

  • प्रताप ने कहा कि गगनयान कुछ महीने या एक-दो साल तक देर हो सकता है, लेकिन जब मिशन होगा तो उसका सफल होना बेहद जरूरी है।
  • उन्होंने कहा कि देरी को ‘चुटकी भर नमक के साथ’ लेने की जरूरत इसलिए है क्योंकि यह भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत है और शुरुआत में ही असफलता नहीं होनी चाहिए।
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  • उन्होंने कहा कि अगर शुरुआत में ही मिशन विफल हो गया तो पूरा कार्यक्रम रुक भी सकता है। इसलिए उन्होंने देश के लोगों से वैज्ञानिकों और इंजीनियरों पर भरोसा रखने और धैर्य बनाए रखने की अपील की।
  • उन्होंने कहा कि देश के कुछ सबसे प्रतिभाशाली लोग इस मिशन पर काम कर रहे हैं और कार्यक्रम को अपनी गति से आगे बढ़ने देना चाहिए।

 

अमेरिकी और रूसी अंतरिक्ष यात्रियों से भारत का कार्यक्रम कैसे अलग है?

भारतीय वायुसेना के लड़ाकू पायलट रहे प्रताप ने कहा कि अमेरिकी या रूसी अंतरिक्ष यात्री जब किसी अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो आम तौर पर उन्हें एक निश्चित समय के भीतर उड़ान मिलने की उम्मीद होती है। लेकिन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के मामले में स्थिति अलग है। वे ऐसे प्रोटोटाइप कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, जिसमें उनका काम केवल अंतरिक्ष में जाकर लौटना नहीं, बल्कि उस पूरे मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को विकसित करने में योगदान देना भी है। प्रताप ने कहा कि अंतरिक्ष यात्री लगातार इस निर्माण प्रक्रिया में अपना योगदान दे रहे हैं। यानी उनके लिए प्रशिक्षण के साथ-साथ कार्यक्रम को तैयार करने का काम भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

गगनयान में अंगद प्रताप की क्या भूमिका है?

  • प्रताप ने बताया कि वह गगनयान के लिए मानव और मशीन के बीच संपर्क वाली प्रणाली के शुरुआती डिजाइन यानी फ्रंट-एंड आर्किटेक्चर पर काम कर रहे हैं। इसके लिए वह अपने विमानन अनुभव और मिशन के दौरान होने वाली गतिविधियों की जानकारी का इस्तेमाल करते हैं। 
  • वह डिजाइनरों के साथ बैठकर बताते हैं कि क्या डिजाइन किया जाना चाहिए और किस तरह किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस काम में परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है और वास्तविक हार्डवेयर की सीमाओं को समझते हुए उसके प्रतिरूप तैयार किए जाते हैं। उन्होंने इसे बेहद विशिष्ट काम बताते हुए कहा कि कोई एक व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि उसने अकेले पूरी प्रणाली तैयार की है।

 

आगे कितने और टेस्ट पायलट और विशेषज्ञ जुड़ेंगे?

गगनयान कार्यक्रम के तहत छह और टेस्ट पायलटों तथा विमानन क्षेत्र से बाहर के चार लोगों को चुनने की योजना है। प्रताप ने बताया कि वह खुद प्रयोगात्मक टेस्ट पायलट रहे हैं और चयन के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग तथा चिकित्सा से जुड़ी कई चीजें सीखीं। 
इसी तरह अगर कोई डॉक्टर अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना जाता है तो उसे विमानन और इंजीनियरिंग सीखनी होगी। इंजीनियर को भी चिकित्सा और विमानन की जानकारी हासिल करनी होगी। इसका मकसद यह है कि अंतरिक्ष यात्री मिशन से जुड़ी अलग-अलग तकनीकी और मानवीय जरूरतों को समझ सकें।

गगनयान की मौजूदा तैयारी और लक्ष्य क्या है?

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने ईओएस-05 के सफल प्रक्षेपण के बाद कहा था कि मौजूदा कैलेंडर वर्ष में मानवरहित मिशन के प्रक्षेपण के लिए गतिविधियां तेजी और व्यवस्थित तरीके से चल रही हैं। गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है और अभी इसका विकास किया जा रहा है। योजना के मुताबिक तीन सदस्यीय दल को तीन दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और उन्हें सुरक्षित वापस धरती पर लाया जाएगा। इसरो के मुताबिक गगनयान कार्यक्रम 2027 के लिए नियोजित है। इससे पहले तीन मानवरहित मिशन किए जाने हैं और पहला मानवरहित मिशन मौजूदा कैलेंडर वर्ष में पूरा करने की दिशा में काम चल रहा है। ऐसे में अंगद प्रताप का संदेश साफ है कि तारीख से ज्यादा जरूरी यह है कि भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान पूरी तरह सुरक्षित और सफल हो।

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