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हरियाणाः रेवाड़ी में दो बच्चों को लेकर नहर में कूदी पुलिसकर्मी की पत्नी, महिला-बेटे का शव मिला

हरियाणा से बड़ी खबर आ रही है। रेवाड़ी में एक पुलिसवाले की पत्नी अपने दो बच्चों को लेकर नहर में कूद गई।

21 अगस्त 2019

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जींद

बुधवार, 21 अगस्त 2019

30 साल से बंद कॉटन मिल में क्लोरीन गैस का रिसाव

शनिवार देर शाम पटियाला चौक पर हांसी रोड आरओबी के पास 30 साल से बंद पड़ी कॉटन मिल में क्लोरीन गैस के रिसाव से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में आसपास के कुछ घरों को खाली करवाया गया। समाचार लिखे जाने तक एचपी गैस प्लांट व मिल्क प्लांट के एक्सपर्ट स्थित को सामान्य करने में लगे थे।
हुआ यूं कि पटियाला चौक स्थित संत नगर में 30 साल पहले एक कॉटन मिल चलती थी। इसमें क्लोरीन गैस का सिलिंडर पड़ा था। इस खाली सिलिंडर का वजन 900 किलोग्राम का है। सिलिंडर में कितनी गैस है इसका फिलहाल अंदाजा नहीं है। कॉटन मिल के मालिक ओमप्रकाश के बेटे दिनेश ने बताया कि यह सिलिंडर उनके होश संभालने से भी पहले का पड़ा है। ऐसे में शनिवार दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे इसे कबाड़ी को बेचने के लिए निकाला जा रहा था। ऐसे में सिलिंडर की नोजल टूट गई। तेज दबाव से गैस बाहर निकली। इससे सभी लोग घबरा गए, लेकिन कुछ देर में गैस का रिसाव बंद हो गया। इसके बाद सभी काम करते, लेकिन रात आठ बजे बारिश होने से गैस फिर से सक्रिय हो गई। इसकी सूचना प्रशासन को दी गई। इस पर फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस व पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। साथ ही एचपी गैस बॉटलिंग प्लांट व मिल्क प्लांट से एक्सपर्ट को बुलाया गया। इन लोगों ने मौके पर पहुंच कर एहतियात के तौर पर आसपास के घरों को खाली करवाया। एक्सपर्ट महेंद्र पाल सिंह व अरुण कुमार के अनुसार कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन गैस काफी खतरनाक है। इसके सीधे संपर्क में आने से व्यक्ति की जान तक जा सकती है। ऐसे में प्रशासन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता और तमाम उपाय किए जा रहे हैं। मौके पर शहर थाना प्रभारी दिनेश कुमार सहित काफी पुलिस बल तैनात रहा।
लीकेज बंद, सिलिंडर उठाने की योजना
एक्सपर्ट ने मौके पर पहुंच कर सिलिंडर से लीकेज को बंद किया और इसके बाद तय किया कि क्रेन सिलिंडर को उठाकर कहीं दूर ले जाया जाए। घनी आबादी होने के कारण प्रशासन हर कदम फूंक फूंक कर रहा है। जिस जगह घटना हुई है, इसके पास पेट्रोल पंप भी है। ... और पढ़ें

30 साल से बंद कॉटन मिल में क्लोरीन गैस का रिसाव

शनिवार देर शाम पटियाला चौक पर हांसी रोड आरओबी के पास 30 साल से बंद पड़ी कॉटन मिल में क्लोरीन गैस के रिसाव से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में आसपास के कुछ घरों को खाली करवाया गया। समाचार लिखे जाने तक एचपी गैस प्लांट व मिल्क प्लांट के एक्सपर्ट स्थित को सामान्य करने में लगे थे।
हुआ यूं कि पटियाला चौक स्थित संत नगर में 30 साल पहले एक कॉटन मिल चलती थी। इसमें क्लोरीन गैस का सिलिंडर पड़ा था। इस खाली सिलिंडर का वजन 900 किलोग्राम का है। सिलिंडर में कितनी गैस है इसका फिलहाल अंदाजा नहीं है। कॉटन मिल के मालिक ओमप्रकाश के बेटे दिनेश ने बताया कि यह सिलिंडर उनके होश संभालने से भी पहले का पड़ा है। ऐसे में शनिवार दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे इसे कबाड़ी को बेचने के लिए निकाला जा रहा था। ऐसे में सिलिंडर की नोजल टूट गई। तेज दबाव से गैस बाहर निकली। इससे सभी लोग घबरा गए, लेकिन कुछ देर में गैस का रिसाव बंद हो गया। इसके बाद सभी काम करते, लेकिन रात आठ बजे बारिश होने से गैस फिर से सक्रिय हो गई। इसकी सूचना प्रशासन को दी गई। इस पर फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस व पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। साथ ही एचपी गैस बॉटलिंग प्लांट व मिल्क प्लांट से एक्सपर्ट को बुलाया गया। इन लोगों ने मौके पर पहुंच कर एहतियात के तौर पर आसपास के घरों को खाली करवाया। एक्सपर्ट महेंद्र पाल सिंह व अरुण कुमार के अनुसार कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन गैस काफी खतरनाक है। इसके सीधे संपर्क में आने से व्यक्ति की जान तक जा सकती है। ऐसे में प्रशासन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता और तमाम उपाय किए जा रहे हैं। मौके पर शहर थाना प्रभारी दिनेश कुमार सहित काफी पुलिस बल तैनात रहा।
लीकेज बंद, सिलिंडर उठाने की योजना
एक्सपर्ट ने मौके पर पहुंच कर सिलिंडर से लीकेज को बंद किया और इसके बाद तय किया कि क्रेन सिलिंडर को उठाकर कहीं दूर ले जाया जाए। घनी आबादी होने के कारण प्रशासन हर कदम फूंक फूंक कर रहा है। जिस जगह घटना हुई है, इसके पास पेट्रोल पंप भी है। ... और पढ़ें

डीआरएम ने किया भंभेवा में बन रहे सायलो प्रोजेक्ट का निरीक्षण

शनिवार को रेलवे के डीआरएम आरसी जैन ने भंभेवा रेलवे स्टेशन के पास बनाए जा रहे सायलो ड्रम प्रोजेक्ट के बारे मेें कंपनी के अधिकारियों से जानकारी ली। डीआरएम इस स्टेशन पर लगभग आठ मिनट तक रुके। सायलो प्रोजेक्ट के सहायक मैनेजर गौरव ने बताया कि डीआरएम ने गेहूं के भंडारण के लिए बनाए जा रहे प्रोजेक्ट के पूरा होने के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट नवंबर तक तैयार हो जाएगा। इसमें एफसीआई के गेहूं का भंडारण किया जाएगा।
गोदाम का निर्माण पूरा होने पर किसानों के गेहूं का यहां पर भंडारण किया जाएगा। गेहूं के भंडारण के लिए चार सायलो ड्रम तैयार हो रहे हैं। इसमें एक ड्रम में 12500 टन गेहूं का खुला भंडारण होगा। इसमें सारा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड होगा। इसमें तापमान को जांचने के लिए सेंसर लगे होंगे। इसमें लगभग चार साल तक गेहूं सुरक्षित भंडारित रह सकता है। यहां से गेहूं मालगाड़ी में जिस भी प्रदेश को जरूरत होगी वहां भेजा जाएगा। यह सायलो प्रोजेक्ट जींद एग्रो सर्विस प्राइवेट लिमिटेड का है। यह प्रोजेक्ट गेहूं के सीजन में चालू होगा। वहीं भंभेवा रेलवे स्टेशन मास्टर जगदीश ने बताया कि यहां पर रेलगाड़ी 30 किलोमीटर घंटे की कम स्पीड से चल रही है। इसको लेकर भी डीएमआर ने ट्रैक को जांचा है।
शनिवार को डीआरएम आरसी जैन का जींद जंक्शन पर भी दौरा था। वे जींद जंक्शन पर नहीं आए। उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन शाखा मांगों को लेकर डीआरएम से मिलना चाहती थी। समय की कमी के कारण डीआरएम जींद जंक्शन पर नहीं आ सके। वे सिटी स्टेशन से होकर भंभेवा में बन रहे गोदाम का निरीक्षण करने पहुंचे। यूनियन के शाखा प्रधान एसके गोयल ने कहा कि यूआरएमयू कर्मचारी डीआरएम को मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन समय की कमी के कारण वे जींद जंक्शन पर नहीं आ सके। कर्मचारी ज्ञापन के माध्यम से मांग करते हैं कि कर्मचारी नितिन साहू मार्च 2019 में ड्यूट के दौरान घायल हो गया था, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। यूनियन चाहती है कि मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को मुआवजा दिलवाया जाए।
रेलवे कर्मचारियों की सुविधा के लिए हिसार स्थित आधार अस्पताल व जिंदल अस्पताल को पैनल में रखा जाए। रेलवे कर्मचारियों की कॉलोनियों में सुधार किया जाए व कर्मचारियों के मकानों की मरम्मत की जाए। जींद पावर केबिन में ठंडे पानी की व्यवस्था की जाए। सभी ट्रैकमैन की सुविधा के लिए विश्राम गृह बनाए जाएं। जीपीएस को अपग्रेड किया जाए। ऑपरेटिंग गेटमैन को अलाउंस दिया जाए। रनिंग स्टाफ की सुविधा के लिए एक पुल का निर्माण किया जाना चाहिए। ... और पढ़ें

पेट्रोल पंप संचालक से परेशान होकर पीया जहर, हालत गंभीर

स्थानीय विश्वकर्मा कॉलोनी निवासी 55 वर्षीय राजेंद्र ने मंगलवार को देवीलाल चौक स्थित एक पेट्रोल पंप संचालक और उसके बेटे पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए जहरीला पदार्थ निगल लिया। व्यक्ति के बेटे ने भी पुलिस को दी शिकायत में पेट्रोल पंप संचालक पर जबरन जहर पिलाने के आरोप लगाए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार व्यक्ति ने सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या करने का प्रयास किया है।
सुसाइड नोट में राजेंद्र ने लिखा है कि वह पेट्रोल पंप संचालक व उसके बेटों की प्रताड़ना से चार साल से परेशान है। राजेंद्र के अनुसार वह 25 वर्ष से आरोपी के साथ काम कर रहा था। इस दौरान उसने उसके स्कूल और पेट्रोल पेट्रोल पंप पर काम किया। इसके बावजूद चार साल पहले उसे नौकरी से हटा दिया गया। उसका व उसके बच्चों का वेतन नहीं दिया। उन्होंने अपनी नर्सरी शुरू की तो उक्त लोगों ने अपने प्रभाव से उसको भी खाली करवा दिया। राजेंद्र ने आरोप लगाया कि उन्हेें कहीं पर भी काम नहीं करने दिया गया। बच्चों को उठवाने की धमकी दी गई। इसे लेकर उसने मामले की शिकायत पुलिस व सीएम विंडो पर भी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पेट्रोल पंप संचालक और उसका परिवार उसे परेशान करता रहा।
इतना ही नहीं सुसाइड नोट में लिखा है कि इसके चलते ही यह कदम उठा रहा हूं। दूसरी ओर राजेंद्र के बेटे संजय ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि पेट्रोल पंप मालिक ने तीन वर्ष पहले उनका प्लाट बिकवाया था। प्लाट के पैसे भी उसी के पास हैं। उसके पिता राजेंद्र आरोपी के पास किए गए काम के पैसे और प्लाट के 25 लाख रुपये मांग रहे हैं। पेट्रोल पंप मालिक पैसे नहीं दे रहा है और धमकियां दे रहा है। समाचार लिखे जाने तक राजेंद्र की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
नागरिक अस्पताल में छोड़कर फरार
राजेंद्र के बेटे संजय का आरोप है कि उसके पिता को पेट्रोल पंप पर काम करने वाले कर्मचारियों ने नागरिक अस्पताल में उन्हें सूचना दिए बिना ही दाखिल करवाया और फरार हो गए। करीब दो घंटे के बाद परिजनों को नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों ने फोन कर सूचना दी। राजेंद्र की गंभीरावस्था को देखते हुए शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया है।
मामला संज्ञान में आया है। बयान दर्ज करने के लिए टीम भेज दी है। पीड़ित के परिजन बार-बार बयान बदल रहे हैं। बयान दर्ज होने के बाद ही पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। फिलहाल इस मामले में एफआईआर नहीं की गई है।
दिनेश कुमार, शहर थाना प्रभारी। ... और पढ़ें

एटीएम कार्ड बदलकर भाग रहे युवक को लोगों ने दबोचा

रेलवे रोड पर स्थित ओबीसी की एटीएम में जब एक व्यक्ति पैसे निकाल रहा था तो एक युवक उसका एटीएम कार्ड बदलकर भाग गया। व्यक्ति को पता चला तो उसने कुछ ही दूरी पर युवक को पकड़ लिया और उसकी पिटाई की। मौके पर जमा हुए लोगों को भी जब पता चला कि युवक एटीएम कार्ड बदलकर भाग रहा था तो उन्होंने भी पिटाई की। युवक की तलाशी ली तो उसके पास से तीन अन्य एटीएम कार्ड भी बरामद हुए। आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया।
गांव पाजूकलां निवासी अमित और उसका भाई अनिरूद्ध एटीएम से पैसे निकलवा रहे थे तभी गांव खांडा खेड़ी निवासी भी अनिल भी पहुंच गया और उसने उन्हें एटीएम से पैसे निकालने में मदद की बात कही। इसी बीच अनिल ने मौका देखकर अमित का एटीएम कार्ड बदल कर निकल गया। अमित ने जब अपना एटीएम कार्ड देखा तो वह कुछ पुराना सा लगा। उसने तुरंत बाहर निकलकर बाइक पर अनिल का पीछा गया और उसे कुछ ही दूर पर पकड़ लिया। मौके पर जमा भीड़ को जब पता चला कि युवक एटीएम कार्ड बदलकर भाग रहा है तो लोगों ने उसकी पिटाई की। इसके बाद लोगों ने पुलिस को सौंप दिया। सफीदों थाना प्रभारी धर्मबीर ने कहा कि इस मामले में किसी से कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। ... और पढ़ें

बरसाती पानी निकासी परियोजना के लिए एक साल बाद मिली सभी विभागों से एनओसी

ठीक एक साल पहले अमृत योजना के तहत शुरू हुए बरसाती पानी निकासी के प्रोजेक्ट में अब एनओसी के अवरोध से निजात मिल गई है। हालांकि इस परियोजना का 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और एनओसी होने के बाद अब अगले तीन महीने में यह परियोजना पूरी होने की उम्मीद जगी है। इस परियोजना के लिए रेलवे द्वारा एनओसी मिलनी बाकी थी, जो मंगलवार को मिल गई है। गौरतलब है कि शहर का बरसाती पानी निकासी के लिए पिछले साल 16 अगस्त को ही परियोजना का शुभारंभ किया गया था। हालांकि इस परियोजना के लिए डेढ़ साल का समय है, लेकिन उस समय अधिकारियों ने एक साल में काम पूरा करने का दावा किया था। अलग-अलग विभागों की एनओसी नहीं मिलने के चलते इस परियोजना में देरी होती रही और एक साल बाद बरसाती पानी निकासी परियोजना का 70 प्रतिशत काम ही हो सका है। इसमें सबसे बड़ा अवरोध रेलवे की एनओसी थी, जो अब मिल गई है। इसकी सूचना नगर परिषद अधिकारियों को आधिकारिक रूप से मिल गई है। ऐसे में अब इस परियोजना पर तेज गति से काम होने की संभावना है।
26 किलोमीटर डाली जानी है लाइन
बरसाती पानी की निकासी के लिए अमृत योजना के तहत करीब 26 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डाली जानी है। इस पर 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस परियोजना के तहत बरसाती पानी को कालवा-किनाना ड्रेन तक पहुंचाया जाएगा।
रेलवे को दिए एक करोड़ 70 लाख रुपये परियोजना के लिए नगर परिषद को रेलवे, वन विभाग, पीडब्ल्यूडी बीएंडआर, एनएचएआई व मार्केटिंग बोर्ड की एनओसी लेनी थी। इसके लिए फीस के रूप में रेलवे को एक करोड़ 70 लाख रुपये, वन विभाग को पांच लाख 37 हजार रुपये, एनएचएआई हिसार को एक करोड़ 39 लाख रुपये, एनएचएआई रोहतक को 87 लाख रुपये, पीडब्ल्यूडी बीएंडआर को चार करोड़ 86 लाख रुपये चुकाए गए हैं। वहीं मार्केटिंग बोर्ड द्वारा पाइप लाइन के लिए जमीन मुफ्त में दी गई है। इसके ऐवज में नगरपरिषद मार्केटिंग बोर्ड के अधीन आने वाली मंडियों का बरसाती पानी निकालेगा।
एनओसी में फंसी रही परियोजना
यह परियोजना सबसे ज्यादा एनओसी के फेर में फंसी रही। दरअसल पिछले साल परियोजना का काम शुरू करने से पहले एनओसी नहीं ली। इसको लेकर नगर परिषद की काफी आलोचना भी हुई, लेकिन अब यह रोड़ा भी निकल गया।
अमृत योजना के तहत बरसाती पानी के लिए डाली जा रही पाइप लाइन के लिए रेलवे की एनओसी बाकी थी। यह मिल गई है। अब पानीपत रेलवे लाइन के नीचे से पानी की लाइन को निकाला जाएगा। अगले तीन महीने में परियोजना पूरी होने की उम्मीद है।
अरुण कुमार, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, जींद। ... और पढ़ें

100-100 गज के प्लॉटों पर कब्जा दिलाने की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

बडनपुर गांव में गरीबों को 100-100 वर्ग गज के प्लॉट दिलवाने को लेकर बीडीपीओ महेंद्र नेहरा को ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा। प्लॉटधारकों ने प्लॉटों का कब्जा प्रशासन द्वारा नहीं दिलाने पर प्रदर्शन किया। बीडीपीओ ने आश्वासन दिया कि 15 दिन के अंदर इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
कामरेड पाल सिंह की अगुवाई में ग्रामीण उपमंडल कार्यालय पहुंचे। पाल सिंह ने बताया कि बडनपुर गांव में 2011-12 में महात्मा गांधी बस्ती योजना के तहत 210 प्लॉट काटे गए थे। गांव में 8 से 9 एकड़ भूमि खाली है। अब तक प्लॉट मालिकों को कब्जा नहीं दिलाया गया है। इसको लेकर उपमंडल कार्यालय नरवाना व जींद के अधिकारियों के साथ-साथ सीएम के नाम ज्ञापन दे चुके हैं। प्लॉट मालिकों को कब्जा दिलाने के निर्देश भी होने के बाद कब्जा नहीं दिलाया जा रहा है। ... और पढ़ें

कुप्रंबध का शिकार हो रहा रोडवेज का फास्ट टैग सिस्टम

प्रदेश व अन्य राज्यों में टोल टैक्स अदा करने वाले समय तथा राजस्व की बचत के लिए रोडवेज प्रशासन द्वारा लागू किया गया फास्ट टैग सिस्टम भी कुप्रबंध का शिकार हो रहा है। आलम यह है कि जींद डिपो की सभी बसें टोल टैक्स पर मैनुअल टैक्स अदा कर रही हैं। इससे न केवल सफर का समय बढ़ रहा है, बल्कि रोडवेज को अधिक टैक्स भी अदा करना पड़ रहा है। पिछले दस दिन से जींद डिपो की बसों का फास्ट टैग का खाता खाली पड़ा है।
जींद डिपो के पास कुल 102 बसों का बेड़ा हैं। इसमें से 35 बसें हरियाणा व अन्य प्रदेशों में बने टोल टैक्स प्लाजा से गुजरती हैं। ये बसें टोल टैक्स प्लाजा पर एक महीने में करीब साढ़े सात लाख रुपये टैक्स के रूप में भुगतान करती है। इस प्रकार पिछले दस दिनों में दो लाख 50 हजार रुपये का टोल टैक्स मैनुअल अदा चुकी है। इससे समय भी ज्यादा लग रहा है। मैनुअल टोल टैक्स अदा करने पर ज्यादा टैक्स देने पड़ता है। फास्ट टैग सिस्टम से रोडवेेज को टोल टैक्स में छूट भी मिलती थी। इन बसों को दिन मेें कई बार टोल टैक्स प्लाजा से गुजरना पड़ता है, लेकिन फास्ट टैग खाता खाली होने की वजह से मैनुअल टोल टैक्स अदा करने में ज्यादा समय लग रहा है।
यात्रियों का समय बचाने को लिया गया था निर्णय
फास्ट टैग की व्यवस्था केंद्र सरकार द्वारा सभी वाहनों पर अनिवार्य रूप से लागू करने की वजह से की गई थी, लेकिन इसके पीछे का मकसद यात्रियों का समय बचाने भी था। फास्ट टैग से पहले परिचालकों का भी टोल टैक्स पर पर्ची कटवाने में अधिक समय लगता था। फास्ट टैग के आने पर यात्रा में कम समय लगता है व डिपो को टोल टैक्स भी कम देना पड़ता है। पिछले दस दिन से फास्ट टैग के खाते में रुपये नहीं होने की वजह से परिचालकों को कैश रुपये देकर पर्ची कटवानी पड़ रही है। इससे लाइन में लगने से काफी समय बर्बाद हो जाता है।
क्या होता है फास्ट टैग
टोल प्लाजा पर पर्ची कटवाने के झंझट से बचने के लिए एक बार कोड अंकित स्लिप जारी की जाती है। जैसे ही वाहन टोल प्लाजा पर जाता है, टोल का सिस्टम उसे खुद ही स्कैन कर वाहन को निकाल देता है। इससे समय कम लगता है और फास्ट टैग पर छूट भी मिलती है।
तकनीकी कारणों से आई समस्या
तकनीकी कारणों के चलते इस महीने फास्ट टैग में राशि नहीं डाली गई है। इससे यह समस्या आ रही है। जल्द ही फास्ट टैग के खातों में राशि डाल दी जाएगी। इसके बाद इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। फास्ट टैग से बसों के गंतव्य में भी समय बचता है व रोडवेज को कम टैक्स भी अदा करना पड़ता है।
आरएस पूनिया, रोडवेज जीएम जींद। ... और पढ़ें

दूध दुहते समय किसान रखें साफ-सफाई और विशेष बातों का ध्यान, विशेषज्ञों दे रहे हैं टिप्स जानिए

दूध यदि गंदगी, दुर्गंध तथा हानिकारक जीवाणु रहित है तो ऐसे दूध को हम स्वच्छ दूध कहते हैं। दूध जब पशुओं के थन से निकलता है तो स्वच्छ रहता है, पर थन से निकलने के बाद यदि साफ-सफाई का ध्यान सही से नहीं रखा जाए तो बाहरी तत्वों के संपर्क में आकर दूषित हो जाता है। दूषित दूध का सेवन करने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए स्वच्छ दूध का उत्पादन अति आवश्यक है।

इसलिए स्वच्छ दूध के उत्पादन के लिए यह ध्यान में रखा जाए कि जिस पशु से दूध निकाला जा रहा है वह स्वस्थ होना चाहिए। पशु में टीबी तथा ब्रूसेलोसिस की जांच साल मे एक बार करवा लेना चाहिए। पशुओं के शरीर पर किसी प्रकार की गंदगी नहीं होनी चाहिए। पशुओं को साफ सुथरी जगह पर रखना चाहिए। दूध दुहने के लिए साफ बर्तन का उपयोग करना चाहिए।

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ईओ गए वर्कशॉप में, नहीं खुला लावारिस पशुओं को पकड़ने का टेंडर

शहर के लोगों के लिए आफत बन चुके लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए नगर परिषद द्वारा मांगा गया टेंडर सोमवार भी नहीं खुल सका। दरअसल नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी कार्यालय में नहीं होने के कारण टेंडर नहीं खोला जा सका। अब मंगलवार को टेंडर खुलने की संभावना है।
गौरतलब है कि शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं का जमावड़ा रहता है। इसके चलते आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर और सरकारी औपचारिकताओं में उलझा हुआ है। नगर परिषद के स्वच्छता निरीक्षक अशोक सैनी के अनुसार सोमवार को टेंडर खोला जाना था, लेकिन कार्यकारी अधिकारी सरकारी वर्कशॉप में होने के कारण टेंडर नहीं खोला जा सका। अब मंगलवार को टेंडर खोला जाएगा। शहर की सड़कों पर करीब करीब दो हजार व आसपास के क्षेत्रों में मिलाकर तीन हजार से अधिक लावारिस पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। इससे जहां लोगों की जान जोखिम में है, वहीं जगह-जगह गंदगी का आलम भी रहता है। ... और पढ़ें

आरटीए के सहायक सचिव को पकड़ने पहुंची विजिलेंस टीम खाली हाथ लौटी

आरटीए के सहायक सचिव द्वारा जब्त की गई सहकारी समिति की बस को छोड़ने की एवज में 50 हजार रुपये रिश्वत लेने के मामले में सहायक सचिव की छह दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। गिरफ्तारी को लेकर पानीपत विजिलेंस की टीम सोमवार को जींद आई, लेकिन उसको सफलता नहीं मिली। वहीं इस मामले की विजिलेंस को शिकायत करने वाले सहकारी बस संचालक आनंद कुमार के अनुसार आरटीए कार्यालय के कर्मचारियों ने उसके साथ अभद्रता की और जान से मारने की धमकी भी दी है। इसकी शिकायत पुलिस को दी गई है।
गौरतलब है कि पानीपत विजिलेंस की टीम ने 14 अगस्त को छापेमारी कर जब्त की गई बस छोड़ने की एवज में 50 हजार रुपये रिश्वत लेते यशपाल नामक दलाल को काबू किया था। इस दौरान आरटीए के सहायक सचिव जिले सिंह यादव का नाम भी मामले में आया और उनके खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है, लेकिन अभी तक सहायक सचिव की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता आनंद कुमार का कहना है कि सोमवार को वह बस की आरसी लेने आरटीए कार्यालय गया था। यहां एक कर्मचारी ने उसके साथ अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। आनंद कुमार के अनुसार एक कर्मचारी ने कहा कि उन्होंने जिन लोगों से पंगा लिया है, वह बहुत पहुंच वाले हैं। आनंद कुमार के अनुसार उसे समझौता करने के लिए धमकाया गया और ऐसा नहीं होने पर जान से मारने की धमकी दी। आनंद कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में आरटीए कार्यालय से बस की आरसी भी दिलवाने की मांग की है।
मैंने नहीं भरा चालान
आनंद कुमार ने कहा कि उसकी बस आठ अगस्त को जब्त हुई और 14 अगस्त को चालान की रसीद उसके पास पहुंचाई गई, जबकि उसने चालान भरा ही नहीं है। उन्होंने सवाल उठाए कि यह चालान किसने भरा, इसकी भी जांच होनी चाहिए। आनंद कुमार के अनुसार बस रिलीज करते वक्त बस मालिक या स्टाफ के हस्ताक्षर तक नहीं हुए, ऐसे में इस मामले में भ्रष्टाचार साफ है।
जल्द होगी गिरफ्तारी
टीम गिरफ्तारी के लिए काम कर रही हैं, लेकिन अभी सफलता नहीं मिली है। जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी होगी।
पूर्ण सिंह, निरीक्षक, विजिलेंस, पानीपत। ... और पढ़ें

रात डेढ बजे एटीएम तोड़ने का प्रयास, अलार्म बजा तो पहुंची पुलिस

रविवार रात करीब डेढ़ बजे जाट धर्मशाला के सामने लगी बैंक ऑफ बड़ौद की एटीएम को तोड़ने का प्रयास किया गया। चोर एटीएम तो नहीं तोड़ सके, लेकिन इसका अलार्म मुंबई स्थित बैंक मुख्यालय में बजा और जिसका संदेश सिविल लाइन पुलिस को मिला। संदेश मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची तो चोर यहां से गायब मिले। इसके बाद पुलिस ने एटीएम के केबिन के शटर को लॉक कर दिया।
पुलिस के अनुसार एटीएम तोड़ने के लिए चोरों ने केबिन के शटर का ताला तोड़कर चोरी करने का प्रयास किया। चोरों ने एटीएम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे के तार काटकर शटर का ताला तोड़ा। इसके बाद अंदर घुसकर एटीएम में लगे अलार्म के तार भी काट दिए ताकि अलार्म से आवाज न आ सके। चोर एटीएम की स्क्रीन को ही तोड़ पाए। पुलिस के अनुसार स्क्रीन टूटने से मुंबई स्थित बैंक मुख्यालय में अलार्म बजा और इसकी सूचना तुरंत बैंक के रीजनल कार्यालय व संबंधित पुलिस स्टेशन को गई। एटीएम में रखी लाखों रुपये की नकदी चोरी होती इससे पहले ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई। जब तक पुलिस मौके पर पहुंची तो चोर घटना स्थल से फरार हो चुके थे। सोमवार सुबह पुलिस को दी शिकायत में बैंक प्रबंधक ओमप्रकाश ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाते हुए बताया कि चोरी के प्रयास के दौरान एटीएम की स्क्रीन तोड़ी गई। इससे बैंक को लगभग दो लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इसके अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे के तार व अलार्म के तार काटे गए हैं। पुलिस ने बैंक मैनेजर की शिकायत पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
पहले भी चार एटीएम बन चुके हैं निशाना
एटीएम चोर गिरोह ने पहले भी जिले में चार एटीएम्स को काटने की कोशिश की है। इसमें दो जुलाना में एक एसबीआई व एक एक्सिस बैंक तो वहीं जींद में रानी तालाब पर कामर्स बैंक ऑफ इंडिया, गोहाना रोड पर एसबीआई के एटीएम को तोड़ने की कोशिश की गई है। अब एटीएम चोरों ने बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम को निशाना बनाया।
रात को नहीं किसी भी बैंक के एटीएम पर गार्ड
चोरी की घटनाओं को अंजाम देने में चोरों के हौसले इसलिए भी बुलंद हैं क्योंकि शहर के 130 एटीएम में से किसी भी सरकारी बैंक में रात को गार्ड की तैनाती नहीं है। कुछ निजी बैंकों के एटीएम में ही गार्ड रहते हैं। इसके चलते रात के समय एटीएम केबिन को लॉक कर दिया जाता है। रात नौ बजे के बाद एटीएम की सुरक्षा भगवान भरोसे होती है।
इंजीनियर के आने के बाद होगा नुकसान का आंकलन
एटीएम में कितने रुपये हैं, चोरी हुई है या नहीं यह साफ नहीं हो पाया है। एटीएम के साथ हुई छेड़खानी व चोरी के प्रयास के बाद मशीन को खोलना आसान नहीं होता। इसके लिए अब इंजीनियर बुलाया गया है। इंजीनियर के आने के बाद ही वास्तविक नुकसान का आंकलन किया जा सकेगा। कैश की स्थिति कैश डालने वाली एजेंसी से मांगी गई है।
ओमप्रकाश, मैनेजर बैंक ऑफ बड़ौदा ... और पढ़ें

परिवार को जान से मारने की धमकी देने से आहत व्यक्ति ने फंदा लगाकर दी जान

परिवार को जान से मारने की धमकी से आहत होकर कंडेला गांव निवासी 55 वर्षीय आजाद ने फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। आजाद के बेटे के बयान पर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
आजाद के बेटे संदीप ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि उसकी शादी पानीपत के अलुपर गांव निवासी सुमन के साथ हुई थी। सुमन का परिवार फिलहाल जीरकपुर में रहता है। संदीप के अनुसार 12 अगस्त को सुमन के चचेरे भाई महेंद्र की बेटी घर से बिना बताए कहीं चली गई। इसका आरोप संदीप के भाई अभिषेक पर लगाया गया। इसको लेकर ही 11 अगस्त को भी उसके परिवार के लोगों के साथ मारपीट की गई। इसके बाद संदीप के भाई अभिषेक व परिवार के खिलाफ पुलिस को शिकायत भी दी गई। आरोप है कि इस मामले में जांच के लिए 17 अगस्त को उसके परिवार के लोगों को पुलिस ने बुलाया था। वहां पर जीरकपुर निवासी महेंद्र, दिलबाग, राजेश, रायचंदवाला निवासी एक व्यक्ति तथा उनकी गाड़ी चालक एक व्यक्ति ने उनके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। उसके पिता आजाद इसी से आहत थे। संदीप के अनुसार जीरकपुर से आकर पूरा परिवार रात को सो गया और उसके पिता ने धमकी से आहत होकर फांसी लगा ली। इस पर पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ... और पढ़ें

भूपेंद्र हुड्डा हुड्डा, अमित शाह के पिंजरे में फंसे तोते के समान: नवीन जयहिंद

भूपेंद्र सिंह हुड्डा भाजपा के हाथों कि कठपुतली हैं। वह अमित शाह के इशारों पर चल रहे हैं। उनमें न तो नई पार्टी के गठन की हिम्मत है और न ही भाजपा के खिलाफ लड़ने की। वह अमित शाह के पिंजरे में फंसे तोते के समान हो चुके हैं। यह बात आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने कही।

मौका था पुलवामा में शहीद हुए जवानों के परिवारों को सम्मानित करने के लिए जाट धर्मशाला में कालीरमन संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम का। कार्यक्रम में आप के दिल्ली से राज्यसभा सांसद व हरियाणा सह प्रभारी डॉ. सुशील गुप्ता और नवीन जयहिंद मुख्यातिथि के रूप में शामिल हुए थे।

सुशील गुप्ता ने कहा कि शहीदों की शहादत को कभी नहीं भुलाया जा सकता। उनके बलिदान की वजह से आज हम चैन कि नींद सो पा रहे हैं। एक शहीद के साथ उसका परिवार भी अपना बहुत कुछ खो देता है। जवान के शहीद होने के बाद समाज व सरकार कि जिम्मेदारी बनती है कि उसके परिवार के हर दुख में साथ रहे।

गुप्ता ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि जींद के रहने वाले व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह सांसद हैं, मगर विकास के नाम पर यहां पर एक भी ईंट नहीं लगी है। दिल्ली में कोई भी प्राकृतिक संसाधन नहीं है फिर भी मुख्यमंत्री केजरीवाल ने जितना विकास किया है देश में कोई भी सरकार नहीं कर पाई। ... और पढ़ें
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