संस्था पुष्पेंद्र वर्णवाल स्मृति न्यास द्वारा यादव धर्मशाला कंजरी सराय में काव्यांजलि एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। अध्यक्षता डॉ. महेश दिवाकर ने और संचालन रवि चतुर्वेदी ने किया। मुख्य अतिथि कथावाचक धीरशांत दास और विशिष्ट अतिथि कवि रघुराज सिंह निश्चल व धवल दीक्षित रहे।
कार्यक्रम में कवि फक्कड़ मुरादाबादी एवं विवेक निर्मल को प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र, श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी कवियों ने अपनी-अपनी रचना प्रस्तुत की। शुभम कश्यप ने पढ़ा कि घरों को करते हैं बर्बाद तो शुभम दोनों, गलत न मिस्त्री अच्छा न स्त्री अच्छी। योगेंद्र वर्मा व्योम ने पढ़ा कि बेशक तन से दूर हों, पर हों मन से पास। जगा रहे हर पल यही, रिश्तों में एहसास। नकुल त्यागी ने पढ़ा कि उफनती नदी है बाढ़ बढ़ चली है, सबको अपनी ही अपनी पड़ी है। मोनिका सदफ ने पढ़ा कि दिल के टुकड़ों को तूने न मिलाया होगा। युवा शायर करीम मुरादाबादी, विवेक निर्मल, फक्कड़ मुरादाबादी, रघुराज सिंह निश्चल आदि रचनाएं पढ़ीं। विपनेश गुप्ता, ममतेश गुप्ता, विवेक विश्नोई, संदीप मुद्गल, शिवकुमार दीक्षित आदि मौजूद रहे।
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