विकास की बात: 228 करोड़ रुपये से बदलेगा मुरादाबाद का सीवेज सिस्टम, सीधे रामगंगा में नहीं जाएगा गंदा पानी
मुरादाबाद में सीवेज निस्तारण के लिए 228 करोड़ रुपये की नमामि गंगे परियोजना जमीन पर उतर रही है। जोन-3 और जोन-4 के नालों को जोड़कर डायवर्जन से बुद्धि विहार सेक्टर-9 स्थित 15 एमएलडी एसटीपी तक सीवेज पहुंचाया जाएगा। इससे नालों का गंदा पानी सीधे रामगंगा में जाने से रोकने में मदद मिलेगी।
विस्तार
मुरादाबाद में सीवेज निस्तारण की पुरानी समस्या को दूर करने के लिए 228 करोड़ की बड़ी परियोजना अब जमीन पर उतर रही है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत जोन-3 और जोन-4 के नालों को जोड़कर और डायवर्जन के साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और उससे जुड़े दूसरे काम किए जाएंगे। परियोजना का असर केवल एक एसटीपी बनने तक सीमित नहीं रहेगा।
इसका मुख्य उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाले नालों के पानी को नदी में सीधे गिरने से पहले रोकना है। इसके लिए जोन-3 और जोन-4 के नालों को चिह्नित कर उन्हें जोड़ा जाएगा। नालों के पानी को डायवर्ट कर उपचार की व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इससे बरसात और सामान्य दिनों में नालों के जरिये रामगंगा तक पहुंचने वाले गंदे पानी को नियंत्रित करने का रास्ता बनेगा।
परियोजना का अहम हिस्सा बुद्धि विहार सेक्टर-9 में 15 एमएलडी क्षमता का एसटीपी है। यानी प्लांट प्रतिदिन 1.5 करोड़ लीटर तक सीवेज के उपचार की क्षमता वाला होगा। इसके साथ संबंधित इंटरसेप्शन-डायवर्जन व्यवस्था और सहायक काम भी परियोजना में शामिल हैं।
शहर के लिए इसका महत्व इसलिए भी है कि मौजूदा समय में अलग-अलग नालों का पानी कई स्थानों से होकर नदी की ओर पहुंचता है। नालों को प्लांट से जोड़ने के बाद सीवेज को उपचारित करने की व्यवस्था एक निर्धारित प्रणाली के तहत होगी। इससे नदी में प्रदूषित पानी की सीधी निकासी रोकने में मदद मिलेगी।
15 साल तक संचालन-रखरखाव की शर्त
परियोजना केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। इसमें प्लांट के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी रखी गई है। 15 वर्ष तक संचालन और रखरखाव का प्रावधान होने से प्लांट बनने के बाद उसके संचालन की जिम्मेदारी भी परियोजना का हिस्सा रहेगी। परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी आधारित पीपीपी मॉडल पर तैयार किया गया है।
परियोजना पूरी होने पर इसका सीधा असर सीवेज प्रबंधन, नदी प्रदूषण नियंत्रण और शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है। नालों के पानी को अलग-अलग जगहों पर रोककर उपचारित करने की व्यवस्था से रामगंगा में प्रदूषित पानी की सीधी आमद कम होगी।
नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने बताया कि इस परियोजना का अगला महत्वपूर्ण चरण कार्यादेश जारी होने के बाद शुरू होगा। इसके बाद नालों की पहचान, इंटरसेप्शन-डायवर्जन नेटवर्क, एसटीपी निर्माण और संबंधित सहायक ढांचे का काम आगे बढ़ेगा।