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special confluence of events occurred in Panipat on the final Thursday and Friday of the month of Sawan, drawing crowds of devotees to Shiva temples; Rudrabhishek and Udyapan rituals were performed
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पानीपत में सावन के अंतिम वीरवार और शुक्रवार पर बना विशेष संयोग, शिव मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़; रुद्राभिषेक व उद्यापन संपन्न
सावन मास के अंतिम वीरवार को भगवान शिव की पूजा-अर्चना का दुर्लभ व विशेष संयोग बना। चौदस तिथि के समावेश के साथ पूर्णिमा का व्रत मनाया गया। श्री हरि विष्णु के प्रिय वार बृहस्पतिवार को भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत फलदायक रही। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने शिवालयों में जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने के साथ सावन माह के व्रतों का विधि-विधान से उद्यापन भी किया।
तड़के पांच बजे से ही शहर के प्रमुख मंदिरों में भक्त पहुंचना शुरू हो गए। प्राचीन देवी मंदिर, श्री राधा कृष्ण मंदिर दत्ता कॉलोनी, सनातन धर्म शिव मंदिर सेक्टर-11 और सनातन धर्म मंदिर मॉडल टाउन में सुबह से ही हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंजते रहे। इसके अलावा एसडी पीजी कॉलेज परिसर में प्रात: 10 बजे विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों व विद्यार्थियों ने आहुतियां दीं।
श्री राधा कृष्ण मंदिर दत्ता कॉलोनी के मुख्य पुजारी पंडित भगवत शर्मा ने बताया कि सावन माह में वीरवार और शुक्रवार की पूजा का आध्यात्मिक व पौराणिक दृष्टि से विशेष महत्व है:
सावन में वीरवार की पूजा का महत्व
वीरवार देवगुरु बृहस्पति और श्री हरि विष्णु का दिन माना जाता है। सावन में इस दिन शिव-हरि (हरिहर) का एक साथ पूजन करने से ज्ञान, वैवाहिक सुख और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जिन जातकों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है, उनके लिए सावन के बृहस्पतिवार को जल में हल्दी मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करना विशेष फलदायी रहता है।
सावन के अंतिम दिन शुक्रवार का महत्व
सावन का अंतिम दिन शुक्रवार महालक्ष्मी और शक्ति की साधना का प्रतीक है। सावन के शुक्रवार को शिवलिंग पर दूध, पंचामृत और इत्र अर्पित करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है। इस दिन शिव जी के साथ माता पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। सावन की समाप्ति पर शुक्रवार के दिन किया गया दान-पुण्य जीवन के सभी कष्टों को दूर कर आरोग्य प्रदान करता है।
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