शाहजहांपुर में महात्मा रामचंद्र बाबूजी की जन्मस्थली बृहस्पतिवार को विभिन्न देशों से आए साधकों की श्रद्धा और साधना की गवाह बनी। दक्षिण कोरिया, बेलारूस, मलेशिया और फ्रांस समेत कई देशों के अभ्यासी बाबूजी की जन्मस्थली और कर्मस्थली पर पहुंचे। उन्होंने यहां ध्यान साधना कर श्रद्धा अर्पित की।
बुधवार देर रात मिश्रीपुर स्थित रामचंद्र मिशन आश्रम में दक्षिण कोरिया से करीब 30 अभ्यासियों का दल डॉ. मून के नेतृत्व में पहुंचा। बृहस्पतिवार सुबह सभी अभ्यासी बाबूजी के निवास स्थान पहुंचे और वहां ध्यान साधना की। जन्मस्थली पर ध्यान के दौरान कई कोरियाई अभ्यासी भावुक हो गए। कुछ की आंखों से आंसू छलक पड़े। साधकों ने इसे गुरु के प्रति कृतज्ञता और आत्मिक शांति का अनुभव बताया।
इसके बाद सभी अभ्यासी अजीजगंज स्थित सहज मार्ग जंक्शन पहुंचे। यहां महात्मा रामचंद्र की प्रतिमा के समक्ष नमन कर कुछ समय ध्यान और मौन साधना की। अलग-अलग देशों और भाषाओं से आए साधक इस दौरान एक ही भाव में दिखाई दिए।
बाबूजी की जन्मभूमि पर पहुंचे विदेशी साधकों ने कहा कि यहां आकर उन्हें आध्यात्मिक यात्रा के महत्वपूर्ण केंद्र से जुड़ने का अनुभव हुआ। शाहजहांपुर में जन्मे महात्मा रामचंद्र की साधना और संदेश आज विभिन्न देशों के साधकों को जोड़ रहे हैं। इस दौरान प्रशिक्षक राजगोपाल अग्रवाल, आश्रम प्रबंधक प्रमोद कुमार सिंह, ममता सिंह, सुयश सिन्हा, कृष्णा भारद्वाज, सुरेंद्र सिन्हा, अनूप कुमार और अशोक लोधी आदि मौजूद रहे।