Hindi News
›
Video
›
Uttar Pradesh
›
Raebareli News
›
रायबरेली:पानी के बहाव में बह गए किसानों के अरमान शिवगढ़ ड्रेन उफनाने से फसलें डूबी, गांंव जाने वाले मार्गों पर भी जलभराव
{"_id":"6a89922b47c86499f506ce42","slug":"video-rayabralpana-ka-bhava-ma-bha-gae-kasana-ka-aramana-shavagaugdhha-darana-ufanana-sa-fasal-dab-gava-jana-val-maraga-para-bha-jalbharava-2026-08-22","type":"video","status":"publish","title_hn":"रायबरेली:पानी के बहाव में बह गए किसानों के अरमान शिवगढ़ ड्रेन उफनाने से फसलें डूबी, गांंव जाने वाले मार्गों पर भी जलभराव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रायबरेली:पानी के बहाव में बह गए किसानों के अरमान शिवगढ़ ड्रेन उफनाने से फसलें डूबी, गांंव जाने वाले मार्गों पर भी जलभराव
रायबरेली: घड़ी की सुई में करीब सुबह के 7.30 बजे थे। कोडरी गांव को जाने वाले मार्ग पर पानी भरा था। करीब डेढ़ किलोमीटर पानी से होकर कोडरी गांव में मौजूदगी हुई। जिधर नजर जाती, उधर पानी ही दिख रहा था। पानी घुटनों तक भरा होने से ग्रामीणों आने-जाने में मशक्कत कर रहे थे।
महिला सुमित्रा से गांव के हालात के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब गुस्से से भरा था। बताती हैं कि पानी के बहाव में उनके अरमान भी बह गए हैं। सोचा था कि फसलें अच्छी होंगी, लेकिन वह डूबकर सड़ रही हैं। यदि कोई बीमार हो जाता है तो उन्हें चारपाई पर लादकर अस्पताल पहुंचाते हैं। गांव एंबुलेंस तक नहीं आ पा रही है। गांव के सेवा यादव भी गुस्से से भरे थे। बताते हैं कि प्रशासन के लोग शुक्रवार को आए थे। ऐमापुर से लौटकर चले गए। गांव तक आना मुनासिब नहीं समझा। गांव की खुशबू बताती हैं कि आने-जाने में परेशानी हो रही है। उनके गांव में कोई किराना की दुकान नहीं है। काफी दूर ऐमापुर जाकर खान-पान का सामान खरीदना पड़ रहा है। हम लोगों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। मदद के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है।
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शनिवार को कोडरी, ऐमापुर, हुलासखेड़ा, बाबा का पुरवा, परीवां, नर्रदही, गनहरी, वाजिदपुर, बहुदा, बेड़ारू, निबड़वलि, गढ़ी, चितवनिया, रायपुर, बैंती, जयचंदपुर, शिवली, मनऊखेड़ा, पिपरी समेत 25 गांवों की पड़ताल की तो स्थिति कुछ ऐसी ही निकली। शिवगढ़ ड्रेन उफनाने के बाद पानी गांवों के चारों तरफ इस कदर भरा है कि मानो जैसे तालाब है। बच्चे गांव के आने वाले मार्गों पर भरे पानी में नहा रहे हैं। बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। लोग रोजगार के सिलसिले में बाहर नहीं जा रहे हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि यदि वह रोजगार के लिए चले गए तो कहीं पानी उनके घर तक न घुस जाए।
बच्चे किसी हादसे का शिकार न हो जाएं। हजारों बीघा धान समेत अन्य फसलें डूब गई हैं। पता नहीं चल पा रहा है कि खेत कहां हैं। लोग पशुओं के खाने के लिए चारे की व्यवस्था नहीं कर रहे हैं। किसान अरविंद, सुखदेव बताते हैं कि किसी तरह जलभराव से राहत भी मिल गई, लेकिन उनकी फसल तो नष्ट हो गई है। इससे हम किसानों की कमर टूट गई है। धान की फसल की रोपाई इस उम्मीद से की थी कि सालभर खाने के लिए उन्हें चावल नहीं लेना पड़ेगा। कुछ धान बेचकर कमाई भी कर लेंगे, लेकिन यहां तो उनका सपना ही चकनाचूर हो गया है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।