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बिलासपुर में 3 से 8 साल के बच्चों की होगी आंखों की स्क्रीनिंग, दो बच्चों में मिला दृष्टि दोष
बच्चों में आंखों की समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार के लिए बिलासपुर जिला प्रशासन ने ‘मिशन दृष्टि बिलासपुर’ अभियान शुरू किया है। सोमवार को राजकीय प्राथमिक पाठशाला रौड़ा से अभियान का विधिवत शुभारंभ हुआ। पहले दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र के 50 बच्चों की आंखों की जांच की। जांच में प्राथमिक पाठशाला के दो बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या सामने आई।
अभियान के तहत 1 सितंबर 2026 से जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। शुरुआती जांच में स्नेलन चार्ट के माध्यम से बच्चों की दृष्टि की जांच होगी। जिन बच्चों में दृष्टि दोष की आशंका मिलेगी, उनकी ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन से आगे जांच की जाएगी।
जरूरत पड़ने पर बच्चों को नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास रेफर किया जाएगा। वहीं, जिन बच्चों को चश्मे की आवश्यकता होगी, उन्हें चश्मा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था भी की जाएगी।
अभियान के पहले दिन रौड़ा प्राथमिक पाठशाला और संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र के 50 बच्चों की जांच की गई। इनमें आंगनबाड़ी केंद्र के 12 बच्चों में कोई दृष्टि दोष नहीं मिला, जबकि प्राथमिक पाठशाला के 38 बच्चों में से दो बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या सामने आई।
अतिरिक्त उपायुक्त रुपिंदर कौर ने कहा कि कम उम्र में दृष्टि संबंधी समस्या का पता नहीं चलने पर बच्चों की पढ़ाई, सीखने की क्षमता और समग्र विकास प्रभावित हो सकता है। छोटे बच्चे अक्सर अपनी परेशानी बता नहीं पाते, इसलिए नियमित स्क्रीनिंग जरूरी है। समय पर उपचार और चश्मे की मदद से उनकी दृष्टि को बेहतर किया जा सकता है।
हर ब्लॉक को मिलेगी ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा ने बताया कि अभियान में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेबीएस) की टीमों को शामिल किया गया है। ये टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की आंखों की जांच करेंगी।
वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के पास एक ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन उपलब्ध है। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त मशीनें खरीदने की प्रक्रिया जारी है। मशीनें उपलब्ध होने के बाद प्रत्येक ब्लॉक को एक-एक मशीन देने की योजना है।
अतिरिक्त मशीनें आने तक मौजूदा मशीन को 15-15 दिन की शिफ्ट में अलग-अलग ब्लॉकों में भेजकर स्क्रीनिंग की जाएगी। मशीन के संचालन के लिए संबंधित स्वास्थ्य टीमों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सदर ब्लॉक की आरकेबीएस टीम को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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