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She couldn't afford a rifle; recovering from dengue, Neeru took aim at the Asian Games the daughter of Sangatpura won gold in trap shooting.
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राइफल के पैसे नहीं थे, डेंगू से उबरकर नीरू ने एशियन गेम्स में साधा निशाना, संगतपुरा की बेटी ने ट्रैप शूटिंग में जीता स्वर्ण
जींद। संगतपुरा गांव की बेटी नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। लेकिन इस स्वर्ण तक पहुंचने का सफर किसी सुविधा संपन्न खिलाड़ी की कहानी नहीं है। किसान परिवार से आने वाली नीरू के पास कभी अपनी राइफल खरीदने तक के पैसे नहीं थे। शहर के समाजसेवी सोमबीर पहलवान ने राइफल दिलाकर उसकी प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका दिया।
इसके बाद नीरू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बीमारी और आर्थिक परेशानियों के बीच अभ्यास जारी रखा और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए गोल्ड जीत लिया। नीरू की मां सुदेश के अनुसार उन्हें बेटी की सफलता का भरोसा था। नीरू जब प्रतियोगिता के लिए घर से रवाना हुई तो उन्होंने माता रानी का भोग लगाने की मन्नत मांगी थी। मां ने कहा कि बेटी के स्वर्ण पदक जीतकर लौटने पर माता रानी का भोग लगाया जाएगा और घर पहुंचने पर उसका चूरमा बनाकर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया जाएगा।
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कबड्डी से शुरू हुआ खेल का सफर, निशानेबाजी में मिली मंजिल
नीरू का खेल सफर सीधे शूटिंग से शुरू नहीं हुआ। शुरुआत में उसने करीब चार वर्ष तक कबड्डी खेली, लेकिन इस खेल में मन नहीं लगा। इसके बाद उसने निशानेबाजी को अपनाया। सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार अभ्यास करते हुए नीरू ने अपनी प्रतिभा को निखारा। वर्ष 2019 में 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने खेल को ही अपने करियर का लक्ष्य बना लिया।
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परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण शूटिंग जैसे महंगे खेल में आगे बढ़ना आसान नहीं था। राइफल खरीदने के लिए भी परिवार के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे समय में समाजसेवी सोमबीर पहलवान ने उसकी मदद की और राइफल उपलब्ध करवाई। परिवार और मददगारों के सहयोग के साथ नीरू ने मेहनत जारी रखी।
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डेंगू से उबरकर मैदान में उतरी, पिता को भी नहीं थी उस पल की खबर
एशियन गेम्स से पहले नीरू डेंगू की चपेट में आ गई थी। बीमारी से उबरने के बाद भी उसने अभ्यास और प्रतियोगिता की तैयारी जारी रखी। शारीरिक कमजोरी के बावजूद उसने हौसला नहीं छोड़ा और प्रतियोगिता में उतरकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
नीरू के स्वर्ण जीतने के समय उसके पिता सुरेश घर पर नहीं थे। वह सरकारी दुकान से राशन लेने गए हुए थे। जैसे ही गांव और
परिवार को बेटी के गोल्ड जीतने की खबर मिली, खुशी का माहौल बन गया। परिवार के पास बधाई देने वालों के फोन आने लगे।
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नीरू का भाई दीपक भी कबड्डी खिलाड़ी है। परिवार के दोनों बच्चों का खेलों से जुड़ाव है। नीरू की मां ने कहा कि बेटी ने केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे संगतपुरा के साथ देश का नाम रोशन किया है। ग्रामीण भी अब उसके घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
सीएम ने भी दी बधाई
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी नीरू ढांडा को स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि जींद की बेटी ने ट्रैप शूटिंग में शानदार प्रदर्शन कर देश का मान बढ़ाया है। नीरू की वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण को उन्होंने उसकी सफलता का आधार बताया।
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