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Video: सीतापुर में नवरात्रि को लेकर बढ़ी मूर्तियों की मांग, मां दुर्गा की प्रतिमाएं बना रहे संजीत
शारदीय नवरात्रि में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में मां दुर्गा की प्रतिमाओं को तैयार करने का काम तेज हो गया है। महमूदाबाद विकासखंड के बघाइन गांव निवासी मूर्तिकार संजीत प्रजापति अपने परिवार के साथ मिट्टी की प्रतिमाएं बनाने में जुटे हैं। इस बार मूर्तियों की मांग बढ़ी है। पिछले वर्ष जहां करीब 35 प्रतिमाओं की बिक्री हुई थी, वहीं इस बार 50 प्रतिमाओं के ऑर्डर मिल चुके हैं।
संजीत ने बताया कि वह वर्ष 2007 से मूर्ति निर्माण का काम कर रहे हैं। इस कार्य में उनके पिता सहजराम, मां मीना देवी और परिवार के अन्य सदस्य सहयोग करते हैं। परिवार के लोग ही प्रतिमाओं को आकार देने से लेकर रंगाई और सजावट तक का काम करते हैं।
छोटी प्रतिमाएं पांच हजार से 15 हजार रुपये तक में बिकती हैं। बड़ी प्रतिमा पर करीब दो से तीन हजार रुपये और छोटी प्रतिमा पर लगभग एक हजार रुपये की बचत होती है।इस बार परिवार ने मां दुर्गा, गणेश, कार्तिकेय, लक्ष्मी, सरस्वती, महिषासुर मर्दिनी, काली माता, शंकर जी, भैरवनाथ और हनुमान जी की प्रतिमाएं तैयार की हैं। बेहटा, ठाकुरपुरवा, सेमरी, बड्डूपुर, पलंगा, रामपुर मथुरा समेत कई स्थानों से ऑर्डर मिले हैं।
महंगी मिट्टी से बढ़ी परेशानी
मूर्तिकार ओमनाथ प्रजापति के मुताबिक, बरसात के कारण मिट्टी जुटाने में परेशानी होती है। चिकनी काली मिट्टी आसानी से नहीं मिलती। एक ट्रॉली मिट्टी दो से ढाई हजार रुपये में मिलती है। बांस 25 रुपये प्रति फुट और पैरा करीब एक हजार रुपये प्रति बीघा मिल रहा है। इससे लागत बढ़ गई है। परिवार ने सरकार से प्रजापति समाज के पारंपरिक रोजगार को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाने की मांग की है।
पर्यावरण संरक्षण का भी रखते हैं ध्यान
संजीत बताते हैं कि प्रतिमाएं बनाने में तालाब की मिट्टी, बांस, पुआल, सुतली, खड़िया और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। पीओपी और केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते, ताकि विसर्जन के दौरान जल प्रदूषण कम हो और जलीय जीवों को नुकसान न पहुंचे। महमूदाबाद क्षेत्र के बघाइन, बाबाकुटी, गौड़ेचा, पर्वतपुर और हेलेपारा समेत कई स्थानों पर मूर्ति निर्माण का काम होता है।
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