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Hapur News: गुटबाजी के कारण नहीं बदले भाजपा के मंडल अध्यक्ष
हापुड़। लंबे इंतजार के बाद भी मंगलवार और बुधवार को भाजपा के मंडल अध्यक्षों की घोषणा नहीं हो सकी। पार्टी में फैली गुटबाजी का सीधा असर जिले में दिखाई दे रहा है। मंडल अध्यक्षों की सूची अटकने से जिलाध्यक्ष के नामांकन को लेकर भी भ्रांति फैल रहीं हैं। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हापुड़ जिला भाजपा की राजनीति का नया केंद्र बनकर सामने आया है।
जिले में तीन सांसद और तीन विधायक हैं। यह सभी भाजपा से ही हैं, लेकिन संगठन के चुनाव में सभी का समर्थन और दावेदारी लगभग अलग-अलग नजर आई है। कोई किसी के समर्थन में खड़ा है तो कोई अपने को अध्यक्ष बनाना चाहता है। 11 व 12 दिसंबर को मंडल अध्यक्षों के 12 पदों के लिए जिले में आवेदन हुए हैं। इसी के बाद से ही जिले का राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। 30 दिसंबर को भाजपा ने पश्चिम के 19 में से मेरठ जिला, गौतमबुद्धनगर, अमरोहा, नोएडा महानगर, रामपुर, सहारनपुर महानगर के मंडल अध्यक्षों की सूची जारी किया था। इसके बाद मंगलवार को शेष जनपदों व महानगरों की सूची आने की बात कही गई, लेकिन मंगलवार की रात भी जारी सूची में हापुड़ का नाम शामिल नहीं था। जिसके बाद समर्थकों और उम्मीदवारों ने फोन कर जानकारियां की। पार्टी सूत्रों के अनुसार, एक बड़े नेता ने जिले की सूची को ही रुकवा दिया है। इसके पीछे की वजह गुटबाजी और एक-दूसरे पर लगाए गए गंभीर आरोप बताए गए। बुधवार को भी सुबह से ही कार्यकर्ता पार्टी के प्रीत विहार स्थित जिला कार्यालय पर पहुंच गए। जहां सभी जानकारी करते नजर आए, लेकिन स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हो सकी। चर्चा यह भी रही कि 12 में से छह मंडल अध्यक्ष घोषित हो सकते हैं, लेकिन ऐसा भी शाम तक नहीं हुआ। यदि जिले की सूची नहीं आती है तो फिर नए प्रदेश अध्यक्ष के बाद ही जिले में बदलाव होने की उम्मीद है।
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सूची तक बदलने के आरोप --
मंडल अध्यक्ष के लिए दावेदारी कर रहे कुछ संभावितों ने आरोप लगाए हैं। जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की सलाह के बाद भी उनके नाम को टॉप तीन से हटा दिया गया। इसकी सूचना कुछ जनप्रतिनिधियों तक भी दी गई। जिस पर एक जनप्रतिनिधि ने तो पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी को फोन कर शिकायत भी की। इसी प्रकार की शिकायतों की चर्चा बुधवार को आम रही। हालांकि, किसी ने भी लिखित में कोई शिकायत नहीं दी है।
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यह कहते हैं पदाधिकारी --
पार्टी की नीतियों के अनुसार ही जिले में प्रक्रिया हुई है। कोई किसी का नाम सूची से नहीं हटा सकता है। वरिष्ठ पदाधिकारियों की नजरों में सभी सूचनाएं हैं। जिलाध्यक्ष के नामांकन होंगे या नहीं, इसको लेकर अभी कुछ नहीं कह सकते हैं। पार्टी की गाइडलाइन आने का इंतजार किया जा रहा है।
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