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माता-पिता की संपत्ति हड़पना चाहता था बेटा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मां के पैर छूकर माफी मांगो और आशीर्वाद लो

Thu, 10 Sep 2026 03:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 10 Sep 2026 03:23 AM IST
सार

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ बेटे की याचिका खारिज करते हुए मौखिक रूप से बेटे से कहा, मां के पैर छूकर अपने पापों के लिए माफी मांगो और उनका आशीर्वाद लो।

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Son wanted to usurp parents' property: Supreme Court says—touch your mother's feet, seek forgiveness
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक संपत्ति विवाद की सुनवाई करते हुए बेटे से अपने माता-पिता के पैर छूकर माफी मांगने के लिए कहा। मामला दिल्ली की एक संपत्ति का है, जिसका स्वामित्व माता-पिता के नाम है जबकि बेटा उसे हड़पना चाहता था। 

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जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ बेटे की याचिका खारिज करते हुए मौखिक रूप से बेटे से कहा, मां के पैर छूकर अपने पापों के लिए माफी मांगो और उनका आशीर्वाद लो। मां का स्थान हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है। जस्टिस शर्मा ने बेटे के वकील से कहा, उसने जो किया क्या ऐसा करना गलत नहीं है। 
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मामले में, माता-पिता ने अपने बेटा-बहू को घर की पहली मंजिल पर बिना किराए के बतौर लाइसेंसी रहने की अनुमति दी थी। बाद में बेटा-बहू ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया और संपत्ति अपने नाम करने के लिए दबाव बनाने लगे। बेटे ने संपत्ति के फर्जी दस्तावेज बनवाकर स्वामित्व अपने नाम करवाने की कोशिश की। दुखी माता-पिता ने अखबार में नोटिस छपवाकर बेटे से संबंध तोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने बेटे के खिलाफ केस दर्ज कराया व संपत्ति का कब्जा वापस लेने के लिए मुकदमा दायर किया। 
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ट्रायल कोर्ट ने कहा, बेटा मालिक नहीं सिर्फ लाइसेंसी
पिता की याचिका पर ट्रायल कोर्ट ने माना कि प्रॉपर्टी के मालिक माता-पिता थे और बेटा और उसकी पत्नी सिर्फ लाइसेंसी थे, जिनका लाइसेंस माता-पिता ने सही तरीके से रद्द कर दिया गया है। इसलिए, उन्हें प्रॉपर्टी की पहली मंजिल का कब्जा छोड़ना होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल, 2026 को ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही बताया। 


हाईकोर्ट के फैसले को बेटे ने दी थी चुनौती 
बेटे ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि यहां भी उसे राहत नहीं मिली और कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर उसे अपने पापों के प्रायश्चित के लिए माता-पिता की शरण में जाने की ही सलाह दी। 

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